✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। इनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।
सितम्बर का महीना हिन्दू धर्म में अत्यंत पावन और शुभ माना जाता है। भाद्रपद और आश्विन मास का संगम इस माह में होता है, जिसमें हरितालिका तीज से लेकर शारदीय नवरात्रि के आरंभ तक कई महत्वपूर्ण व्रत और त्यौहार आते हैं। पितृपक्ष का आरंभ भी इसी माह से होता है, जिसमें हम अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण और तर्पण करते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम सितम्बर 2026 के सभी प्रमुख व्रत, त्यौहार, तिथि, मुहूर्त और उनके धार्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
विषय सूची (Table of Contents)
- सितम्बर 2026 के प्रमुख व्रत त्यौहार — एक नज़र में
- हरितालिका तीज 2026 — विधि, मुहूर्त और महत्व
- गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी
- पितृपक्ष और सर्वपितृ अमावस्या
- इंदिरा एकादशी — पितृ तर्पण का पावन दिन
- शारदीय नवरात्रि का आरंभ
- महालक्ष्मी व्रत — धन और समृद्धि हेतु
- सितम्बर के व्रत-त्यौहारों की सामान्य पूजा सामग्री
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- निष्कर्ष
सितम्बर 2026 के प्रमुख व्रत त्यौहार — एक नज़र में
सितम्बर माह में आने वाले प्रमुख व्रत और त्यौहार इस प्रकार हैं:
| दिनांक (2026) | दिन | व्रत / त्यौहार | महत्व |
|---|---|---|---|
| 2 सितम्बर | बुधवार | हरितालिका तीज | माँ पार्वती की उपासना, सुहाग का व्रत |
| 6-7 सितम्बर | रविवार-सोमवार | गणेश चतुर्थी | भगवान गणेश का जन्मोत्सव |
| 8 सितम्बर | मंगलवार | ऋषि पंचमी | ऋषियों का सम्मान, पापों का नाश |
| 12 सितम्बर | शनिवार | अनंत चतुर्दशी | भगवान विष्णु की अनंत पूजा |
| 14 सितम्बर | सोमवार | भाद्रपद पूर्णिमा | पितरों को तर्पण, उमा-महेश्वर व्रत |
| 19 सितम्बर | शनिवार | सर्वपित्री अमावस्या | पितृ दोष निवारण, कुश-तर्पण |
| 24 सितम्बर | गुरुवार | इंदिरा एकादशी | पितृ तर्पण, इंद्र की पूजा |
| 26 सितम्बर | शनिवार | महालक्ष्मी व्रत आरंभ | धन-समृद्धि की प्राप्ति |
| 30 सितम्बर | बुधवार | शारदीय नवरात्रि आरंभ | नौ देवी की उपासना |
नोट: तिथियाँ चंद्र आधारित हैं और स्थानीय पंचांग के अनुसार 1-2 दिन आगे-पीछे हो सकती हैं। किसी भी व्रत/त्यौहार से पूर्व अपने क्षेत्र के पंडित या विश्वसनीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।
हरितालिका तीज 2026
हरितालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए निर्जला व्रत रखा था।
पूजा विधि:
- प्रातःकाल स्नान करके लाल या पीले वस्त्र धारण करें
- माँ पार्वती की मिट्टी या कलश में प्रतिमा स्थापित करें
- 16 श्रृंगार की सामग्री से देवी का श्रृंगार करें
- दिनभर निर्जला व्रत रखें, केवल शाम को पूजा के बाद ही जल ग्रहण करें
- हरितालिका की कथा सुनें या पढ़ें
- रात्रि जागरण करें और भजन-कीर्तन करें
मुहूर्त 2026: प्रदोष काल — शाम 6:45 से 8:15 बजे तक (स्थानीय समयानुसार)
गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन गणेश जी की विधिपूर्वक पूजा करने से बुद्धि, विवेक और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव की विधि:
- घर या सार्वजनिक पंडाल में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें
- प्रतिदिन सुबह-शाम दीपक जलाकर आरती करें
- मोदक, लड्डू और पंचामृत का भोग लगाएं
- गणेश जी को 21 दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें
- 10वें दिन (अनंत चतुर्दशी) जल विसर्जन करें
मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः (108 बार जाप)
पितृपक्ष और सर्वपित्री अमावस्या
पितृपक्ष भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक चलता है — कुल 16 दिन। इस काल में हम अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं।
सर्वपित्री अमावस्या सबसे पावन दिन माना जाता है — इस दिन जो तर्पण किया जाता है, वह उन सभी पूर्वजों तक पहुँचता है जिनका नाम हमें याद नहीं है।
श्राद्ध विधि संक्षेप में:
- प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
- पितरों को जल, तिल, जौ और मिश्री का तर्पण करें
- ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा दें
- गाय, कुत्ते और कौए को भी भोजन अर्पित करें
इंदिरा एकादशी
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत पितरों की मुक्ति और स्वर्ग प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रखने से पितरों के सभी ऋणों से मुक्ति मिलती है।
व्रत विधि:
- एकादशी के पूर्व दिन (दशमी) से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें
- एकादशी को उपवास रखें या केवल एक समय फलाहार करें
- भगवान विष्णु की पूजा करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
- द्वादशी को पारण करें
शारदीय नवरात्रि का आरंभ
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होता है। यह नौ दिनों का पर्व माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का पर्व है। इस वर्ष नवरात्रि का आरंभ 30 सितम्बर से होगा।
नौ दिनों के नौ रूप:
- दिन 1 — शैलपुत्री — स्थिरता और धैर्य
- दिन 2 — ब्रह्मचारिणी — तप और संयम
- दिन 3 — चंद्रघंटा — शौर्य और वीरता
- दिन 4 — कूष्मांडा — स्वास्थ्य और ऊर्जा
- दिन 5 — स्कंदमाता — ममता और शुद्धि
- दिन 6 — कात्यायनी — विवाह और सुख
- दिन 7 — कालरात्रि — शत्रु नाश
- दिन 8 — महागौरी — शांति और सौंदर्य
- दिन 9 — सिद्धिदात्री — सिद्धि और मोक्ष
महालक्ष्मी व्रत — धन और समृद्धि हेतु
सितम्बर के अंतिम सप्ताह में महालक्ष्मी व्रत का आरंभ होता है, जो 16 दिनों तक चलता है। यह व्रत धन, समृद्धि और व्यापार में वृद्धि के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
व्रत विधि:
- प्रतिदिन शाम को माँ लक्ष्मी की पूजा करें
- एक दीपक कलश के साम� जलाएं
- श्री सूक्त का पाठ करें
- ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें
- अंतिम दिन कन्याओं को भोजन कराएं और दक्षिणा दें
सामान्य पूजा सामग्री
सितम्बर माह के व्रत-त्यौहारों के लिए यह सामग्री सामान्य रूप से आवश्यक होती है:
- कलश, जल, गंगाजल
- लाल और पीले फूल, माला
- अशोक या आम के पत्ते
- रोली, मौली, कुमकुम, चंदन
- धूप-दीपक, कपूर, घी
- मिठाई, मोदक, पंचामृत
- नारियल, सुपारी, लौंग, इलायची
- वस्त्र और दक्षिणा (ब्राह्मण के लिए)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सितम्बर 2026 में कौन से प्रमुख व्रत हैं?
हरितालिका तीज, गणेश चतुर्थी, अनंत चतुर्दशी, सर्वपित्री अमावस्या, इंदिरा एकादशी और शारदीय नवरात्रि का आरंभ इस माह के प्रमुख व्रत-त्यौहार हैं।
पितृपक्ष में कौन से कार्य नहीं करने चाहिए?
पितृपक्ष में नए काम की शुरुआत, मांगलिक कार्य (विवाह, गृह प्रवेश), और किसी भी प्रकार का शुभ कार्य वर्जित माना जाता है। केवल तर्पण, श्राद्ध और पितरों के कार्य ही करने चाहिए।
हरितालिका तीज का व्रत कैसे रखें?
निर्जला व्रत रखें, माँ पार्वती की पूजा करें, 16 श्रृंगार करें, हरितालिका की कथा सुनें और रात्रि जागरण करें। केवल शाम को पूजा के बाद जल ग्रहण करें।
नवरात्रि का व्रत कितने दिन रखें?
शारदीय नवरात्रि 9 दिनों की होती है, लेकिन कुछ लोग पहले और अंतिम दिन जोड़कर 11 दिन व्रत रखते हैं। जिन्हें पूरे 9 दिन व्रत कठिन लगे, वे केवल पहले और अंतिम दिन का व्रत अवश्य रखें।
क्या पितृपक्ष में पूजा कर सकते हैं?
हाँ, पितृपक्ष में विशेष रूप से पितरों की पूजा, तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान का विधान है। सामान्य देवी-देवताओं की पूजा भी की जा सकती है, पर शुभ मुहूर्त देखकर।
निष्कर्ष
सितम्बर का महीना हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है। हरितालिका तीज से लेकर शारदीय नवरात्रि तक, हर व्रत और त्यौहार का अपना विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इन व्रत-त्यौहारों को विधिपूर्वक और पूर्ण श्रद्धा से मनाने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मेरी सलाह:
- पंचांग देखकर सही तिथि और मुहूर्त की पुष्टि करें
- व्रत सात्विक भोजन और शुद्ध विचारों के साथ रखें
- पितृपक्ष में अवश्य तर्पण करें
- नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना करें
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Frequently Asked Questions
सितम्बर 2026 में कौन से प्रमुख व्रत हैं?+
पितृपक्ष में कौन से कार्य नहीं करने चाहिए?+
हरितालिका तीज का व्रत कैसे रखें?+
नवरात्रि का व्रत कितने दिन रखें?+
क्या पितृपक्ष में पूजा कर सकते हैं?+
Written by
Nidhi Shrimali
Vedic Astrologer
Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.