# अनंत चतुर्दशी का महत्व , मुहूर्त , पूजन विधि एवं उपाय - Anant Chaturdashi - Pandit NM Shrimali - Best Astrologer in India
> ✨ **लेखिका परिचय:** यह लेख **गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी** द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। इनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि हिन्दू परंपरा में दोहरे महत्व की तिथि है — एक ओर जहाँ गणेश जी का विसर्जन होता है, वहीं दूसरी ओर भगवान अनंत विष्णु की पूजा और अनंत सूत्र धारण का विधान है। अनंत चतुर्दशी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान है जो जीवन में स्थायित्व, सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना रखते हैं। इस लेख में हम अनंत चतुर्दशी की तिथि, मुहूर्त, कथा, पूजा विधि, अनंत सूत्र के 14 नाम और गांठों का रहस्य, फायदे, सावधानियां और FAQ विस्तार से समझेंगे।
## विषय सूची (Table of Contents)
1. [अनंत चतुर्दशी क्या है — परिचय](#अनंत-चतुर्दशी-क्या-है)
2. [2025 और 2026 की तिथि व शुभ मुहूर्त](#तिथि-और-मुहूर्त)
3. [अनंत चतुर्दशी का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व](#धार्मिक-महत्व)
4. [14 गणेश — गणेश विसर्जन के 14 दिन और 14 रूप](#14-गणेश)
5. [अनंत चतुर्दशी की पौराणिक कथा — माण्डव्य और 14 गांठों का रहस्य](#कथा)
6. [अनंत सूत्र धारण विधि — 14 नाम, 14 गांठें, 14 देवता](#अनंत-सूत्र)
7. [गणेश विसर्जन की विधि और शुभ मुहूर्त](#गणेश-विसर्जन)
8. [पूजा विधि — संकल्प से लेकर 108 जाप तक](#पूजा-विधि)
9. [अनंत चतुर्दशी के शुभ मंत्र](#मंत्र)
10. [अनंत चतुर्दशी व्रत के 7 प्रमुख फायदे](#फायदे)
11. [सावधानियां और क्या नहीं करना चाहिए](#सावधानियां)
12. [अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न](#faq)
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## अनंत चतुर्दशी क्या है — परिचय
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चौदहवीं तिथि को मनाई जाने वाला एक अत्यंत पावन व्रत और पर्व है। इस दिन का दोहरा महत्व है — पहला, गणेश चतुर्थी से प्रारंभ हुए 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन और भगवान गणेश का विसर्जन। दूसरा, भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा और "अनंत सूत्र" का धारण, जो 14 वर्षों तक जीवन में स्थायित्व, सुख और समृद्धि का वरदान देता है।
"अनंत" का अर्थ है — जिसका अंत न हो। भगवान विष्णु के इस रूप की उपासना कर जीवन की अनंत समस्याओं का अंत किया जाता है। प्राचीन ग्रंथ "भविष्योत्तर पुराण" और "पद्म पुराण" में अनंत व्रत का विस्तार से वर्णन मिलता है। शास्त्रानुसार यह व्रत कुंडली में अनंत दोष, शनि-राहु की पीड़ा, संतान सुख में बाधा और दीर्घायु की चिंता को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावी माना गया है।
यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जिनकी कुंडली में **शनि की ढैय्या, पितृ दोष, कालसर्प दोष** हो, या जिन्हें बार-बार आर्थिक नुकसान, अचानक दुर्घटनाएं और जीवन में अस्थिरता का सामना करना पड़ता हो।
## 2025 और 2026 की तिथि व शुभ मुहूर्त
| वर्ष | तिथि | दिन | चतुर्दशी आरंभ | चतुर्दशी समाप्ति | गणेश विसर्जन मुहूर्त |
|---|---|---|---|---|---|
| 2025 | 6 सितम्बर 2025 | शनिवार | 5 सितम्बर, रात 9:34 | 6 सितम्बर, रात 8:04 | सुबह 7:00 से 9:00 तक |
| 2026 | 26 अगस्त 2026 | बुधवार | 26 अगस्त, प्रातः 4:21 | 27 अगस्त, प्रातः 1:12 | सुबह 6:30 से 8:30 तक |
**पूजा के शुभ मुहूर्त:**
- **अभिजित मुहूर्त:** दोपहर 12:08 से 12:55 तक (सर्वोत्तम)
- **विजय मुहूर्त:** दोपहर 2:30 से 3:15 तक
- **गोधूलि काल:** शाम 6:30 से 7:00 तक (अनंत सूत्र बांधने के लिए उत्तम)
- **रात्रि जागरण:** रात 9:00 बजे के बाद
> **विशेष सूचना:** कुछ पंचांगों के अनुसार 2026 में चतुर्दशी तिथि दो भागों में विभाजित हो रही है। ऐसी स्थिति में **अभिजित मुहूर्त** में ही अनंत सूत्र धारण करना चाहिए। अनंत पूजा दोपहर से पहले और गणेश विसर्जन प्रातःकाल में करना शास्त्रसम्मत है।
## अनंत चतुर्दशी का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
**धार्मिक दृष्टि से:**
- गणेश जी का विसर्जन और उनके अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रतीक्षा
- अनंत विष्णु की पूजा से कुल 14 पीढ़ियों का कल्याण
- मोक्ष प्राप्ति और पितृ तारण का विशेष अवसर
- भाद्रपद मास की समाप्ति और शरद ऋतु का आरंभ
**आध्यात्मिक दृष्टि से:**
- "अनंत" का ध्यान जीवन में सीमाओं और भय का अंत करता है
- 14 गांठों का रहस्य 14 चक्रों (7 ऊर्ध्व + 7 अध:) के जागरण का प्रतीक है
- गणेश विसर्जन से "विदेहता" की भावना जागती है — सब कुछ क्षणभंगुर है
- सूत्र धारण करने से शरीर में सूक्ष्म ऊर्जा का संचार होता है
**ज्योतिषीय दृष्टि से:**
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को चंद्रमा कुंभ या मीन राशि में होता है — भावुकता और आध्यात्मिकता बढ़ती है
- शनि और राहु की विशेष सक्रियता इस दिन होती है, इसलिए अनंत सूत्र इन दोनों ग्रहों की शांति करता है
- 14 का अंक विष्णु के 14 लोकों का प्रतीक है — यह व्रत मृत्यु तुल्य काल में भी शुभ फल देता है
- कुंडली में **षष्ठम्, अष्टम या द्वादश भाव** में शनि हो तो अनंत सूत्र अत्यंत लाभकारी है
## 14 गणेश — गणेश विसर्जन के 14 दिन और 14 रूप
गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक 10 दिनों का गणेशोत्सव मनाया जाता है, परंतु कुछ परंपराओं में इसे 14 दिनों तक विस्तारित किया जाता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में प्रचलित 14 गणेश रूपों की अवधारणा इस प्रकार है:
| दिन | गणेश का नाम | विशेषता |
|---|---|---|
| 1 | भालचंद्र | शक्ति का विनाश |
| 2 | विनायक | बाधाओं को हटाने वाले |
| 3 | गणपति | ज्ञान के दाता |
| 4 | विघ्नराज | विघ्नों के राजा |
| 5 | लम्बोदर | दीर्घ फलदाता |
| 6 | एकदंत | एकाग्रता के प्रतीक |
| 7 | महोदर | महान उदर वाले |
| 8 | विद्वांजलि | विद्या के भंडार |
| 9 | धूम्रकेतु | काल-शक्ति के स्वामी |
| 10 | गजानन | गज के समान मुख |
| 11 | सिद्धिविनायक | सिद्धियों के दाता |
| 12 | मंगलमूर्ति | मंगल के स्वरूप |
| 13 | दुर्गा | दुर्गति का नाश |
| 14 | अनंत गणेश | अनंत शक्ति के धारक |
**विसर्जन का रहस्य:** अनंत चतुर्दशी को विसर्जन इसलिए किया जाता है क्योंकि गणेश जी ने स्वयं अपनी माता पार्वती से कहा था कि "मैं 14 दिन रहकर लौट जाऊँगा।" इसलिए चौदहवें दिन सबसे शुभ माना जाता है।
## अनंत चतुर्दशी की पौराणिक कथा — माण्डव्य और 14 गांठों का रहस्य
प्राचीन काल में एक ब्राह्मण कुटुंब था। पिता का नाम **सुशेन** और पुत्र का नाम **माण्डव्य** था। माण्ड्य अत्यंत विद्वान और धार्मिक प्रवृत्ति का था, परंतु विधि की विडंबना से उसका विवाह बहुत देर से हुआ और विवाह के कुछ वर्षों बाद ही उसकी पत्नी का देहांत हो गया। दूसरा विवाह करने पर भी वही दुर्भाग्य दोहराया गया। तीसरी पत्नी ने भी छोटी आयु में ही संसार त्याग दिया।
माण्ड्य विचार मग्न हो गया — "मेरे भाग्य में ऐसा क्या दोष है?" उसने पिता से इसका कारण पूछा। सुशेन ने बताया कि कुछ समय पूर्व उनके घर में एक ब्रह्मचारी आया था जिसे सेवा नहीं दी गई। क्रोधित होकर उसने श्राप दिया था — "इस कुल की सभी कन्याओं और स्त्रियों का अकाल मृत्यु हो।" यह श्राप 14 पीढ़ियों तक चलने वाला था।
माण्ड्य ने एक महान ऋषि से इसका उपाय पूछा। ऋषि ने बताया कि **भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी** को अनंत विष्णु का व्रत करो और 14 गांठों वाला सूत्र बनाओ। माण्ड्य ने विधि-विधान से व्रत किया, 14 गांठों वाला सूत्र बनाया और भगवान अनंत की पूजा की। सूत्र धारण करते ही कुल का दोष समाप्त हो गया और 14 पीढ़ियों तक उसके वंशज सुखी और समृद्ध रहे।
**कथा का संदेश:** कुंडली में कुल दोष, पितृ दोष, विधि का दोष — सबका निवारण अनंत व्रत से संभव है। 14 गांठें 14 देवताओं का प्रतीक हैं जो मिलकर जीवन की रक्षा करते हैं।
## अनंत सूत्र धारण विधि — 14 नाम, 14 गांठें, 14 देवता
**अनंत सूत्र क्या है?**
अनंत सूत्र एक विशेष धागा है जो सामान्यतः लाल या पीले रंग का होता है। इसमें 14 गांठें बांधी जाती हैं और हर गांठ पर भगवान विष्णु के एक नाम का ध्यान किया जाता है। शास्त्रानुसार यह सूत्र 14 वर्षों तक धारण किया जा सकता है, और इसका नवीनीकरण (बदलना) भी इसी तिथि को किया जाता है।
**14 नाम और उनके देवता:**
| गांठ | देवता | विष्णु नाम | मंत्र |
|---|---|---|---|
| 1 | केशव | ॐ केशवाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 2 | नारायण | ॐ नारायणाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 3 | माधव | ॐ माधवाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 4 | गोविंद | ॐ गोविंदाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 5 | विष्णु | ॐ विष्णवे नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 6 | मधुसूदन | ॐ मधुसूदनाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 7 | त्रिविक्रम | ॐ त्रिविक्रमाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 8 | वामन | ॐ वामनाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 9 | श्रीधर | ॐ श्रीधराय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 10 | हृषीकेश | ॐ हृषीकेशाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 11 | पद्मनाभ | ॐ पद्मनाभाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 12 | दामोदर | ॐ दामोदराय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 13 | संकर्षण | ॐ संकर्षणाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
| 14 | वासुदेव | ॐ वासुदेवाय नमः | ॐ अनंताय नमः |
**सूत्र बनाने की विधि:**
1. सूत्र को गाय के दूध में धोकर शुद्ध करें
2. चंदन, कुमकुम और हल्दी का तिलक लगाएं
3. ब्रह्म मुहूर्त में 14 गांठें बांधें
4. प्रत्येक गांठ पर ऊपर दिए मंत्र का 11 बार जाप करें
5. अंत में "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" 108 बार जपें
## गणेश विसर्जन की विधि और शुभ मुहूर्त
गणेश विसर्जन के लिए निम्न विधि अपनाएं:
1. **पूजा:** सुबह स्नान के बाद गणेश जी का अक्षत, फूल, अगरबत्ती से पूजन करें
2. **विसर्जन से पहले:** "गणपति बाप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आना" का मंत्रोच्चार करें
3. **विसर्जन स्थल:** घर में गणेश स्थापित हों तो उन्हें घर के किसी कोने में स्थापित कर फूल-माला अर्पित करें, अगले वर्ष उन्हीं को स्थापित करने की परंपरा भी है। सार्वजनिक गणेश हों तो शोभायात्रा के साथ नदी/तालाब में विसर्जन करें
4. **जल अर्पण:** जल अर्पित करते समय यह मंत्र बोलें — *"ॐ गं गणपतये नमः, अनंत चतुर्दशी विसर्जनाय स्वाहा"*
5. **वापसी:** विसर्जन के बाद घर आकर अनंत विष्णु की पूजा और अनंत सूत्र धारण करें
> **महत्वपूर्ण:** विसर्जन केवल दोपहर से पहले करना चाहिए। सूर्यास्त के बाद विसर्जन शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता।
## पूजा विधि — संकल्प से लेकर 108 जाप तक
**चरण 1 — संकल्प:**
प्रातः स्नान के बाद शुद्ध आसन पर बैठें। दीपक और अगरबत्ती जलाएं। संकल्प लें — *"मैं अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर भगवान अनंत विष्णु की पूजा करता/करती हूँ। मेरे जीवन में स्थायित्व, सुख, समृद्धि और दीर्घायु प्रदान हो।"*
**चरण 2 — अनंत पूजा:**
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
- पंचामृत से अभिषेक करें
- चंदन, कुमकुम, अक्षत, फूल, बेलपत्र, तुलसी अर्पित करें
- 5 प्रकार के फल और मिठाई का भोग लगाएं
**चरण 3 — कलश स्थापना:**
एक कलश में जल, सुपारी, सिक्का, आम के पत्ते और सात प्रकार के अनाज रखें। कलश पर नारियल रखकर लाल कलावा लपेटें।
**चरण 4 — अनंत सूत्र धारण:**
14 गांठों वाला सूत्र तैयार करें। संकल्प लें, मंत्र जाप करें और सूत्र को दाहिने हाथ में (दाएं कलाई पर) बांधें। बाएं हाथ में बांधना भी शुभ माना जाता है।
**चरण 5 — जाप और आरती:**
- "ॐ अनंताय नमः" मंत्र का 108 बार जाप
- "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का 108 बार जाप
- 14 नामों का 11-11 बार जाप
- भगवान अनंत की आरती करें
**चरण 6 — कथा श्रवण:**
अनंत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करें। इससे व्रत का फल सौगुना हो जाता है।
## अनंत चतुर्दशी के शुभ मंत्र
**मुख्य मंत्र:**
- **ॐ अनंताय नमः** (सर्वाधिक प्रचलित)
- **ॐ श्री अनंताय नमः**
- **ॐ ह्रीं अनंताय नमः** (विशेष फलदायी)
**14 नाम मंत्र (प्रत्येक गांठ पर 11 बार):**
- ॐ केशवाय नमः
- ॐ नारायणाय नमः
- ॐ माधवाय नमः
- ॐ गोविंदाय नमः
- ॐ विष्णवे नमः
- ॐ मधुसूदनाय नमः
- ॐ त्रिविक्रमाय नमः
- ॐ वामनाय नमः
- ॐ श्रीधराय नमः
- ॐ हृषीकेशाय नमः
- ॐ पद्मनाभाय नमः
- ॐ दामोदराय नमः
- ॐ संकर्षणाय नमः
- ॐ वासुदेवाय नमः
**जाप विधि:**
- ब्रह्म मुहूर्त (4-5 बजे) में जाप सर्वोत्तम
- रुद्राक्ष की माला पर 108 बार जाप करें
- प्रतिदिन कम से कम 1 माला (108 बार) जाप जरूरी
- वार्षिक पूजा के दिन 11 माला (1,188 बार) जाप करें
## अनंत चतुर्दशी व्रत के 7 प्रमुख फायदे
1. **14 पीढ़ी तक कल्याण:** कुल दोष, पितृ दोष और विधि के दोष का निवारण होता है। 14 पीढ़ियों तक वंशज सुखी रहते हैं।
2. **अनंत संतान सुख:** जिन दंपतियों को संतान सुख में बाधा हो, उनके लिए अनंत व्रत अत्यंत लाभकारी है। कुंडली में पंचम भाव की पीड़ा दूर होती है।
3. **शनि-राहु की शांति:** शनि की ढैय्या, पितृ दोष, कालसर्प दोष — इन सब पर अनंत सूत्र अचूक उपाय है। 14 वर्षों तक सूत्र धारण करने से शनि-राहु की पीड़ा कम होती है।
4. **आर्थिक स्थिरता:** व्यापार में अचानक हानि, नौकरी में अस्थिरता, आर्थिक संकट — अनंत व्रत से धन की स्थिरता आती है। "अनंत" शब्द ही अनंत संपत्ति का वाचक है।
5. **दीर्घायु और आरोग्य:** अकाल मृत्यु, अचानक दुर्घटनाओं और गंभीर रोगों से रक्षा। विशेष रूप से कुंडली में अल्पायु योग या मारक योग हो तो अनंत व्रत अनिवार्य है।
6. **विवाह में बाधा निवारण:** कुंडली मिलान में मंगल दोष, मांगलिक दोष या शनि का साढ़ेसाती का प्रभाव हो तो अनंत सूत्र विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करता है।
7. **नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा:** 14 गांठों वाला सूत्र शरीर की सूक्ष्म ऊर्जा को सुरक्षित रखता है। बुरी नजर, काला जादू, भूत-प्रेत बाधा से रक्षा होती है।
## सावधानियां और क्या नहीं करना चाहिए
1. **बिना स्नान के सूत्र न पहनें:** अनंत सूत्र धारण करने से पहले स्नान अनिवार्य है। बिना स्नान के सूत्र बांधना अशुभ फल देता है।
2. **रजस्वला स्त्रियां सूत्र न बांधें:** मासिक धर्म के दौरान अनंत पूजा और सूत्र धारण वर्जित है। शुद्ध होने के बाद ही करें।
3. **14 से कम गांठें न बांधें:** 14 गांठों का विधान है। 7 या 11 गांठों वाला सूत्र अनंत व्रत में शुभ नहीं माना जाता।
4. **टूटे हुए सूत्र का अपमान न करें:** यदि सूत्र अचानक टूट जाए तो उसे चुपचाप नदी में प्रवाहित कर दें। कूड़े में न फेंकें।
5. **एक साथ दो सूत्र न बांधें:** एक ही हाथ में दो अनंत सूत्र नहीं बांधने चाहिए। एक हाथ में एक सूत्र पर्याप्त है।
6. **विसर्जन के बाद तुरंत सूत्र न बांधें:** गणेश विसर्जन के तुरंत बाद सूत्र न बांधें। कम से कम 2-3 घंटे का अंतर रखें, उसके बाद स्नान कर सूत्र धारण करें।
7. **गलत रंग का सूत्र न पहनें:** सूत्र सदैव लाल, पीला या केसरिया रंग का होना चाहिए। काला, सफेद या नीला रंग शुभ नहीं माना जाता।
8. **मांसाहार वर्जित:** अनंत चतुर्दशी के दिन शाकाहारी भोजन ही करें। मांस, मदिरा, तामसिक भोजन का सेवन अशुभ फल देता है।
9. **क्रोध और असत्य से बचें:** व्रत के दिन क्रोध, निंदा, असत्य और हिंसा से बचना चाहिए। मन और वचन की शुद्धता आवश्यक है।
10. **सूत्र को सूंघकर या मुंह में न लें:** अनंत सूत्र पवित्र वस्तु है। इसे सूंघना, मुंह में लेना या पैरों के नीचे रखना अपमानजनक माना जाता है।
## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
### अनंत चतुर्दशी 2026 कब है?
26 अगस्त 2026, बुधवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:08 से 12:55 तक सर्वोत्तम है।
### क्या एक बार अनंत सूत्र बांध लें तो काम हो जाता है?
पूर्ण फल के लिए 14 वर्षों तक सूत्र धारण करना चाहिए। प्रतिवर्ष अनंत चतुर्दशी को सूत्र का नवीनीकरण (पुराना उतारकर नया बांधना) करें। 14 वर्ष पूरे होने पर विसर्जन करें और नया सूत्र बांधें।
### 14 गांठें कैसे बांधें?
एक लाल या पीले धागे को 14 बराबर भागों में विभाजित करें। हर भाग पर अलग-अलग विष्णु नाम का स्मरण करते हुए गांठ बांधें। प्रत्येक गांठ पर संबंधित मंत्र का 11 बार जाप करें। यह कार्य ब्रह्म मुहूर्त में करना सर्वोत्तम है।
### क्या स्त्रियां भी अनंत सूत्र धारण कर सकती हैं?
हाँ, स्त्रियां भी अनंत सूत्र धारण कर सकती हैं। माताएं, बहनें, पत्नियां — सभी के लिए यह व्रत लाभकारी है। केवल रजस्वला स्त्रियों को इस अवधि में सूत्र नहीं बांधना चाहिए। गर्भवती स्त्रियां भी चिकित्सक की सलाह से कर सकती हैं।
### क्या गणेश विसर्जन अनिवार्य है?
हाँ, गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक स्थापित गणेश जी का विसर्जन अनिवार्य है। घर में स्थापित गणेश जी को घर के किसी शुद्ध स्थान पर रखा जा सकता है। सार्वजनिक गणेश का विसर्जन नदी या तालाब में किया जाता है। बिना विसर्जन के अनंत सूत्र धारण करना अधूरा माना जाता है।
### क्या अनंत सूत्र बाजार में मिलता है?
हाँ, अनंत सूत्र किसी भी मंदिर की दुकान, धार्मिक सामान बेचने वाली दुकान या ऑनलाइन स्टोर पर आसानी से मिल जाता है। परंतु सर्वोत्तम यह है कि किसी विद्वान पंडित से बनवाएं या स्वयं शुद्ध विधि से बनाएं। बाजार के सूत्र में कभी-कभी 14 की जगह 11 या 13 गांठें होती हैं — सावधानीपूर्वक जांच लें।
### क्या पहले से काला धागा या अन्य सूत्र पहना हो तो क्या करें?
यदि पहले से कोई काला धागा (नजर से बचाव के लिए) या कोई अन्य धार्मिक सूत्र पहना हो, तो अनंत सूत्र को दूसरे हाथ में या अलग कलाई पर बांधें। एक साथ दो अनंत सूत्र न बांधें। अनंत सूत्र के साथ काला धागा पहनना शुभ है — यह शनि की नजर से रक्षा करता है।
### क्या इस व्रत को बार-बार करना पड़ता है?
हाँ, अनंत व्रत को प्रतिवर्ष अनंत चतुर्दशी के दिन करना चाहिए। सूत्र प्रतिवर्ष बदलना भी शुभ माना जाता है। 14 वर्षों तक लगातार करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है।
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अनंत चतुर्दशी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की स्थायित्व, सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक है। गणेश विसर्जन क्षणभंगुरता की याद दिलाता है और अनंत सूत्र अनंत ईश्वर की कृपा का स्मरण कराता है। यदि आपकी कुंडली में कोई विशेष दोष है, या जीवन में बार-बार समस्याएं आ रही हैं, तो इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से करें — अवश्य ही लाभ होगा।
**शुभकामनाएँ सहित,**
*गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली*
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"question": "अनंत चतुर्दशी 2026 कब है?",
"answer": "26 अगस्त 2026, बुधवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:08 से 12:55 तक सर्वोत्तम है।"
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"question": "क्या एक बार अनंत सूत्र बांध लें तो काम हो जाता है?",
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"question": "14 गांठें कैसे बांधें?",
"answer": "लाल या पीले धागे को 14 भागों में बांटकर प्रत्येक गांठ पर विष्णु के 14 नामों का स्मरण और संबंधित मंत्र का 11 बार जाप करें। ब्रह्म मुहूर्त में करना सर्वोत्तम।"
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"question": "क्या स्त्रियां भी अनंत सूत्र धारण कर सकती हैं?",
"answer": "हाँ, स्त्रियां भी अनंत सूत्र धारण कर सकती हैं। केवल रजस्वला स्त्रियों को इस अवधि में सूत्र नहीं बांधना चाहिए।"
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"question": "क्या गणेश विसर्जन अनिवार्य है?",
"answer": "हाँ, गणेश चतुर्थी से स्थापित गणेश जी का विसर्जन अनिवार्य है। बिना विसर्जन के अनंत सूत्र धारण करना अधूरा माना जाता है।"
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"question": "क्या पहले से काला धागा या अन्य सूत्र पहना हो तो क्या करें?",
"answer": "अनंत सूत्र को दूसरे हाथ में या अलग कलाई पर बांधें। एक साथ दो अनंत सूत्र न बांधें। काला धागा अनंत सूत्र के साथ पहनना शुभ माना जाता है।"
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