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जानिए गणेश चतुर्थी का महत्व ,पूजन विधि एवं उपाय

# जानिए गणेश चतुर्थी का महत्व ,पूजन विधि एवं उपाय - Ganesh Chaturthi. - Pandit NM Shrimali - Best Astrologer in India **जानिए गणेश चतुर्थी का महत्व ,पूजन विधि एवं उपाय** — यह विषय मेरे पास रोजाना सैक

7 July 2026 13 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। इनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे भारत में भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला गणेश चतुर्थी का पर्व सनातन संस्कृति का सबसे लोकप्रिय और उल्लासपूर्ण त्यौहार है। महाराष्ट्र के विशाल पंडालों से लेकर तमिलनाडु के घर-घर में स्थापित होने वाली पिल्लैयार की मूर्तियों तक, यह पर्व विघ्नहर्ता की कृपा का आह्वान है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम 2026 की तिथि, 10 दिन के महत्व, मूर्ति स्थापना विधि, 16 शृंगार, 108 नाम, मोदक भोग, विसर्जन विधि और गणेश चतुर्थी से जुड़े हर आवश्यक विषय पर गहराई से चर्चा करेंगे।

विषय सूची (Table of Contents)

  1. गणेश चतुर्थी 2026 — तिथि और शुभ मुहूर्त
  2. गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व
  3. गणेश जन्म की पौराणिक कथा
  4. 10 दिन का महत्व — प्रतिपदा से विसर्जन तक
  5. मूर्ति स्थापना की संपूर्ण विधि
  6. 16 शृंगार और 108 नाम — विधिपूर्वक पूजा
  7. गणेश मंत्र और जाप विधि
  8. भोग, विसर्जन और अनंत चतुर्दशी
  9. गणेश चतुर्थी के फायदे और सावधानियां
  10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश चतुर्थी 2026 — तिथि और शुभ मुहूर्त

मुख्य तिथि: भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी — 27 अगस्त 2026, गुरुवार

अवधि समय
चतुर्थी तिथि आरंभ 26 अगस्त 2026, रात्रि 8:45 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्ति 27 अगस्त 2026, रात्रि 9:25 बजे
मुख्य पूजा मुहूर्त (मध्याह्न) 27 अगस्त, दोपहर 11:05 से 1:38 बजे तक
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:09 से 12:57 बजे तक
सिंह लग्न मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ) प्रातः 7:18 से 9:10 बजे तक
चंद्रोदय (चंद्र दर्शन) 27 अगस्त, शाम 6:42 बजे
विसर्जन तिथि (अनंत चतुर्दशी) 6 सितम्बर 2026, रविवार

ज्योतिषीय विशेषता: इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा कुंभ राशि में होगा, जो भावनात्मक गहराई और आध्यात्मिक संवेदनशीलता का संकेत देता है। सिंह लग्न में पूजा करने से स्थायी फल की प्राप्ति होती है।

2025 का संक्षिप्त समीक्षा: 27 अगस्त 2025 को मनाई गई गणेश चतुर्थी पर देशभर में 11 दिन का उत्सव संपन्न हुआ था। मुंबई के लालबागचा राजा, पुणे के दगडूशेठ हलवाई और कानपुर का नवीन मार्केट पंडाल सबसे प्रसिद्ध आकर्षण रहे। इस वर्ष मूर्ति स्थापना में रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है।

गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व

गणेश चतुर्थी का पर्व सनातन धर्म में तीन प्रमुख दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है:

धार्मिक दृष्टि से:

  • भगवान गणेश का जन्मदिन — सर्वप्रथम पूज्य देवता के रूप में स्थापित होने का संकल्प
  • विघ्नहर्ता के रूप में जीवन के सभी बाधाओं के निवारण का अवसर
  • शुभ कार्यों की शुरुआत गणेश पूजा से करने की परंपरा का पालन
  • कुंडली के अनुसार लग्नेश, भाग्येश और बुद्धि कारक ग्रह की पूजा
  • मोक्ष और भक्ति प्राप्ति का साधन

आध्यात्मिक दृष्टि से:

  • 10 दिन का सात्विक जीवनशैली का अभ्यास
  • गणेश बीज मंत्र के निरंतर जाप से मन की एकाग्रता का विकास
  • मूर्ति में ईश्वर के विराजमान होने का आध्यात्मिक अनुभव
  • संयम, त्याग और सेवा भाव का विकास
  • सांसारिक मोह से विरक्ति और ईश्वर की ओर अग्रसर होने का संकल्प

ज्योतिषीय दृष्टि से:

  • चतुर्थी तिथि मंगल कारक है — साहस और पराक्रम बढ़ाती है
  • भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष में शुक्र और बुध की विशेष स्थिति
  • गणेश जी की पूजा से बुध, चंद्रमा और केतु के दोषों में लाभ
  • कुंडली में बुध पीड़ित होने पर विशेष लाभकारी
  • नए व्यापार, गृह प्रवेश, विवाह जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत

गणेश जन्म की पौराणिक कथा

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, माता पार्वती ने एक बार स्नान करते समय अपने शरीर के मैल से एक पुतले का निर्माण किया। उन्होंने उसे चंदन का लेप किया, अपनी दिव्य शक्तियों से उसमें प्राण फूंके और उसे द्वारपाल के रूप में नियुक्त किया। उन्होंने उसे आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के अंदर न आने पाए।

भगवान शिव अपने निवास से बाहर आए और द्वार पर खड़े इस अजनबी द्वारपाल को रोकने का प्रयास किया। गणेश ने अपनी माता के आदेश का पालन करते हुए शिव को रोका। इस कारण दोनों के मध्य भयंकर युद्ध हुआ जिसमें गणेश ने शिव के गणों को पराजित किया। क्रोधित शिव ने अपने त्रिशूल से गणेश का सिर काट दिया।

जब माता पार्वती को यह ज्ञात हुआ, तो वे अत्यंत क्रोधित हुईं और उन्होंने संपूर्ण सृष्टि के विनाश की धमकी दी। उनकी व्याकुलता देखकर सभी देवता विष्णु के पास गए। विष्णु ने शिव को समझाया कि यह पार्वती का पुत्र ही है।

शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि जो भी प्राणी सोया हुआ मिले, उसका सिर लाकर गणेश के धड़ पर लगा दिया। गणों ने एक हाथी का सिर काटकर गणेश के धड़ पर जोड़ दिया। शिव ने गणेश को अपना पुत्र स्वीकार किया और उन्हें "गणपति" (गणों के स्वामी) की उपाधि दी। तभी से गणेश चतुर्थी को उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है।

कथा का संदेश: माता-पिता के प्रति सम्मान, कर्तव्यनिष्ठा और धैर्य — ये तीन गुण सफल जीवन की कुंजी हैं। गणेश जी का हाथी का सिर इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर सदैव शुद्ध भाव और सच्ची भक्ति को स्वीकार करते हैं।

10 दिन का महत्व — प्रतिपदा से विसर्जन तक

गणेश चतुर्थी 10 दिनों तक मनाई जाती है। प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व है:

1. प्रतिपदा (चतुर्थी के दिन): मूर्ति स्थापना, कलश पूजन, संकल्प और प्रथम पूजा

2. द्वितीया: मंगल चिंतन दिवस — गणेश जी की स्तुति और विनायक चालीसा का पाठ

3. तृतीया: मोदक भोग दिवस — गणेश जी को 21 मोदक का भोग

4. चतुर्थी: दूर्वा अर्चन — 21 गुच्छे दूर्वा और रोली से पूजा

5. पंचमी: लड्डू भोग — बेसन के लड्डू का विशेष भोग

6. षष्ठी: संकट हरन — विघ्न निवारण के लिए विशेष पूजा

7. सप्तमी: अष्टविनायक नाम स्मरण

8. अष्टमी: गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ

9. नवमी: 108 नाम का जाप और महा आरती

10. दशमी/अनंत चतुर्दशी: विसर्जन उत्सव, शोभायात्रा और जल विसर्जन

ज्योतिषीय मान्यता: प्रत्येक दिन एक विशेष ग्रह के नाम से जाना जाता है — प्रतिपदा सूर्य, द्वितीया चंद्र, तृतीया मंगल, चतुर्थी बुध, पंचमी बृहस्पति, षष्ठी शुक्र, सप्तमी शनि, अष्टमी राहु, नवमी केतु और दशमी शनि के अंतर्गत आती है।

मूर्ति स्थापना की संपूर्ण विधि

घर पर मूर्ति स्थापना विधि:

  1. शुद्धि: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें

  2. मंडल: लाल कपड़े पर हल्दी से स्वस्तिक बनाएं और मंडल तैयार करें

  3. कलश स्थापना: मिट्टी के कलश में जल, सुपारी, सिक्का, आम का पत्ता और सात मुट्ठी अश्वत्थ की मिट्टी रखें

  4. वेदी: कलश के ऊपर चावल की ढेरी पर मूर्ति स्थापित करें

  5. पंचामृत अभिषेक: दूध, दही, घी, शहद, शर्करा से अभिषेक

  6. वस्त्र और आभूषण: मूर्ति को लाल या पीला वस्त्र और आभूषण धारण कराएं

  7. श्रृंगार: सिंदूर, कुंकुम, रोली, मौली, चंदन से तिलक

  8. अर्पण: फूल, बेलपत्र, दूर्वा, मोदक, लड्डू, फल

  9. आवाहन: "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र से आवाहन

  10. प्राण प्रतिष्ठा: "ॐ प्राणाय स्वाहा, ॐ अपानाय स्वाहा" मंत्र

पंडाल में स्थापना:

  • पंडाल में स्थापना प्रातः 9 बजे से 11 बजे के बीच करना शुभ
  • सामूहिक मंत्रोच्चार के साथ विधिपूर्वक स्थापना
  • स्थापना के समय पुरोहित द्वारा कुशा और सुपारी से मंत्र पाठ

16 शृंगार और 108 नाम — विधिपूर्वक पूजा

16 शृंगार की परंपरा: 10 दिनों तक प्रतिदिन मूर्ति का शृंगार किया जाता है — यह भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

दैनिक शृंगार सामग्री:

  • सिंदूर, कुंकुम, रोली
  • चंदन का तिलक
  • इत्र और अगरबत्ती
  • फूलों की माला (लाल, पीले, केसरिया)
  • लाल या पीला वस्त्र
  • मौली और रक्षा सूत्र
  • सोने-चांदी के आभूषण
  • मुकुट

108 नाम का जाप:

प्रतिदिन सुबह-शाम गणेश जी के 108 नामों का पाठ करें। प्रमुख नाम हैं:

  1. विघ्नेश्वर — विघ्नों के स्वामी
  2. गणपति — गणों के अधिपति
  3. विनायक — प्रमुख नेता
  4. मोदकप्रिय — मोदक प्रेमी
  5. एकदंत — एक दांत वाले
  6. गजवदन — हाथी मुख
  7. लम्बोदर — लंबे पेट वाले
  8. भालचंद्र — माथे पर चंद्रधारी
  9. वक्रतुंड — टेढ़े मुख वाले
  10. चिंतामणि — चिंताओं को मिटाने वाले

अन्य 98 नामों का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। जाप का उचित समय प्रातः 6-8 बजे तक है।

गणेश मंत्र और जाप विधि

मुख्य मंत्र:

  • ॐ गं गणपतये नमः (सर्वाधिक प्रचलित)
  • ॐ श्री गणेशाय नमः
  • ॐ वक्रतुन्द महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

मंत्र जाप विधि:

  • 108 माला जाप: प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में 108 बार जाप
  • 21 माला जाप: शाम के समय संध्या में 21 बार जाप
  • एक माला (108 बार): न्यूनतम प्रतिदिन

बीज मंत्र:

  • ॐ गं ग्लौं गणपतये वरवरद सर्वजनं मे वशमनय स्वाहा (यह मंत्र 108 बार जपने से गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है)

अष्टविनायक मंत्र:

अष्टविनायक — महाराष्ट्र के 8 प्रसिद्ध गणेश मंदिर — इनमें प्रत्येक का अपना विशेष मंत्र है। मोरगांव, सिद्धटेक, महाड, परळी, रांजणगांव, ओझर, लेन्याद्री और थेऊर के अष्टविनायक मंदिरों की एक साथ यात्रा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

भोग, विसर्जन और अनंत चतुर्दशी

भोग सामग्री (गणेश जी के प्रिय):

  • मोदक: 11 या 21 मोदक — गणेश जी का सर्वप्रिय भोग
  • लड्डू: बेसन, रवा या बूंदी के लड्डू
  • पानक: इलायची, जायफल और खजूर से बनी मीठी पानक
  • फल: केला, सेब, अनार, पपीता
  • नैवेद्य: खीर, हलवा, पूड़ी

विसर्जन विधि:

विसर्जन अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्दशी) को किया जाता है। विसर्जन से पहले अंतिम पूजा "उत्सव पूजा" की जाती है।

विसर्जन की विधि:

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  2. मूर्ति का अंतिम श्रृंगार करें
  3. 21 मोदक, दूर्वा और पान अर्पित करें
  4. गणेश जी से विदाई की प्रार्थना करें
  5. "ॐ गं गणपतये नमः" का जाप करते हुए विसर्जन स्थल तक ले जाएं
  6. जल में विसर्जन करते समय मन में संकल्प लें कि "अगले वर्ष पुनः आएंगे"
  7. घर लौटकर एक मिट्टी की गणेश मूर्ति घर में रखें (शीघ्र आगमन के लिए)

अनंत चतुर्दशी का महत्व:

अनंत चतुर्दशी का अर्थ है "अनंत (असीम) की चतुर्दशी"। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है। अनंत सूत्र धारण करने की भी परंपरा है।

गणेश चतुर्थी के फायदे और सावधानियां

गणेश चतुर्थी के प्रमुख फायदे:

  1. विघ्न निवारण: जीवन के सभी कष्टों और बाधाओं का अंत
  2. बुद्धि वृद्धि: शैक्षणिक और व्यावसायिक सफलता में वृद्धि
  3. धन लाभ: व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि और आर्थिक समृद्धि
  4. संतान सुख: संतान संबंधी समस्याओं का समाधान
  5. विवाह में बाधा निवारण: अविवाहितों के लिए मनोवांछित वर की प्राप्ति
  6. रोग मुक्ति: गंभीर रोगों से मुक्ति
  7. कुंडली दोष निवारण: बुध, केतु और चंद्रमा दोष का शमन
  8. मानसिक शांति: चिंता, तनाव और अवसाद से मुक्ति
  9. आध्यात्मिक उन्नति: सात्विकता और एकाग्रता का विकास
  10. पारिवारिक सुख: घर में सुख-शांति और समृद्धि

गणेश चतुर्थी की मुख्य सावधानियां:

  1. मूर्ति का चयन: केवल शुद्ध और पवित्र मूर्ति का ही प्रयोग करें
  2. प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की मूर्ति: पर्यावरण को हानि पहुंचाती है, ईको-फ्रेंडली मिट्टी की मूर्ति का प्रयोग करें
  3. विसर्जन में सावधानी: नदी या तालाब में प्लास्टर की मूर्ति न डालें
  4. अपमान न करें: मूर्ति को कभी पैर से न छुएं, ऊंचे स्थान पर रखें
  5. शाकाहार: पूजा अवधि में शाकाहार भोजन ही ग्रहण करें
  6. शुद्धता: मद्यपान और मांसाहार का त्याग करें
  7. दिशा सूचक: मूर्ति पूर्व या उत्तर दिशा में रखना शुभ
  8. दर्शन: प्रतिदिन सुबह-शाम मूर्ति के दर्शन अवश्य करें
  9. मोदक: बिना मोदक के भोग अधूरा माना जाता है
  10. अवधि: 1.5, 3, 5, 7 या 10 दिन — 11 दिन की मूर्ति का विसर्जन अनिवार्य है

ज्योतिषीय सावधानी:

  • कुंडली में बुध पीड़ित हो तो विशेष लाभ
  • केतु दोष में अनंत सूत्र धारण करें
  • मंगलवार को विशेष पूजा अत्यंत फलदायी
  • गणेश जी का व्रत मंगल या बुधवार को शुभ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

27 अगस्त 2026, गुरुवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी के दिन। मुख्य पूजा मुहूर्त 11:05 से 1:38 बजे तक।

मूर्ति घर में कितने दिन रख सकते हैं?

शास्त्रानुसार 1.5, 3, 5, 7 या 10 दिन — कोई भी अवधि शुभ है। 10 दिन सर्वोत्तम है। 11वें दिन अनंत चतुर्दशी को अनिवार्य रूप से विसर्जन करना चाहिए।

क्या विसर्जन अनिवार्य है?

हाँ, 10 दिन के बाद विसर्जन अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश विसर्जन संभव न हो तो पंडित की सलाह से एक मिट्टी की छोटी मूर्ति घर में रख सकते हैं या विसर्जन की तिथि बदल सकते हैं।

क्या सार्वजनिक पंडाल में जा सकते हैं?

बिल्कुल, सार्वजनिक पंडाल में जाना शुभ माना जाता है। भीड़-भाड़, अव्यवस्था और रात के समय अकेले जाने से बचें।

क्या गणेश जी केवल लड्डू-मोदक ही खाते हैं?

गणेश जी के 21 भोग माने जाते हैं जिनमें मोदक, लड्डू, पानक, खीर, हलवा, पूड़ी, फल आदि शामिल हैं। मोदक सर्वप्रिय है लेकिन अन्य भोग भी समान फलदायी हैं।

क्या महाराष्ट्र में विशेष विधि है?

हाँ, महाराष्ट्र में "पिल्लैयार" या "मोरया" कहकर गणेश जी की पूजा की जाती है। मूर्ति विसर्जन "गणपती विसर्जन" शोभायात्रा के साथ होता है — "गणपती बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या" के नारे लगाए जाते हैं।

क्या ईको-फ्रेंडली मूर्ति का उपयोग कर सकते हैं?

हाँ, बल्कि यह अत्यंत श्रेयस्कर है। मिट्टी, गोबर या बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बनी मूर्ति का प्रयोग पर्यावरण और धर्म दोनों दृष्टि से उत्तम है।

क्या अनंत चतुर्दशी का व्रत भी रखें?

अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु के नाम पर रखा जाता है। गणेश विसर्जन के साथ ही अनंत सूत्र धारण करने की भी परंपरा है।


शुभकामनाएँ सहित, गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली 📞 संपर्क: www.panditnmshrimali.com


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Frequently Asked Questions

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?+
27 अगस्त 2026, गुरुवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी के दिन। मुख्य पूजा मुहूर्त 11:05 से 1:38 बजे तक। विसर्जन 6 सितम्बर 2026 को अनंत चतुर्दशी पर।
मूर्ति घर में कितने दिन रख सकते हैं?+
1.5, 3, 5, 7 या 10 दिन — कोई भी अवधि शुभ है। 10 दिन सर्वोत्तम है। 11वें दिन विसर्जन अनिवार्य है।
क्या विसर्जन अनिवार्य है?+
हाँ, 10 दिन के बाद विसर्जन अनिवार्य है। एक मिट्टी की छोटी मूर्ति घर में रख सकते हैं या पंडित की सलाह से विसर्जन तिथि बदल सकते हैं।
क्या सार्वजनिक पंडाल में जा सकते हैं?+
हाँ, सार्वजनिक पंडाल में जाना शुभ है। भीड़-भाड़ और रात के समय अकेले जाने से बचें।
क्या गणेश जी केवल लड्डू-मोदक ही खाते हैं?+
गणेश जी के 21 भोग माने जाते हैं — मोदक, लड्डू, पानक, खीर, हलवा, पूड़ी, फल आदि। मोदक सर्वप्रिय है।
क्या ईको-फ्रेंडली मूर्ति का उपयोग कर सकते हैं?+
हाँ, मिट्टी या बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बनी मूर्ति का प्रयोग पर्यावरण और धर्म दोनों दृष्टि से उत्तम है।
क्या महाराष्ट्र में विशेष विधि है?+
हाँ, महाराष्ट्र में 'गणपती बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या' के नारों के साथ शोभायात्रा से विसर्जन होता है।
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Written by

Nidhi Shrimali

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