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जानिये किन पुष्पों से करें भोलेनाथ को प्रसन्न एवं भगवान्

# जानिये किन पुष्पों से करें भोलेनाथ को प्रसन्न एवं भगवान् शिव को कौनसे फूल नहीं चढ़ाये जाते है - Sawan 2023 - Pandit NM Shrimali - Best Astrologer in India **जानिये किन पुष्पों से करें भोलेनाथ को प्र

7 July 2026 10 min read|By Nidhi Shrimali

⚡ संक्षेप में — शिव को कौन से पुष्प प्रिय हैं

लेखिका: निधि श्रीमाली | वैदिक ज्योतिषी, 18+ वर्षों का अनुभव
अद्यतन: अगस्त 2026 | पढ़ने का समय: 12 मिनट
रेटिंग: ★★★★★ 4.9/5 (1,425+ परामर्श समीक्षाओं से)

शिव को सर्वाधिक प्रिय बिल्व पत्र है — पुष्प नहीं, पत्र। शास्त्रों में एक बिल्व पत्र को सहस्र पुष्पों के समान कहा गया है। पुष्पों में सफेद पुष्प, धतूरा, आक और शमी प्रिय हैं। केतकी, केवड़ा, तुलसी और हल्दी वर्जित हैं — और प्रत्येक के पीछे स्पष्ट कारण है।


विषय सूची

  1. बिल्व पत्र — सर्वोपरि
  2. प्रिय पुष्प और उनका फल
  3. वर्जित पुष्प और कारण
  4. केतकी की कथा
  5. पत्र और अन्य अर्पण
  6. अर्पण के नियम
  7. मनोकामना के अनुसार पुष्प
  8. ग्रह दोष के अनुसार अर्पण
  9. ऋतु के अनुसार
  10. यदि कुछ भी उपलब्ध न हो

बिल्व पत्र — सर्वोपरि

शिव पूजन में सबसे पहले यह जान लेना आवश्यक है कि शिव को सर्वाधिक प्रिय कोई पुष्प नहीं, अपितु एक पत्र है — बिल्व पत्र, जिसे बेल पत्र भी कहते हैं।

शिव पुराण में कहा गया है कि एक बिल्व पत्र अर्पित करने का फल सहस्र पुष्पों के अर्पण के समान है। किसी अन्य देवता की पूजा में किसी एक वस्तु को यह स्थान प्राप्त नहीं है।

इसका कारण भी कथा में है। समुद्र मंथन में विषपान के पश्चात शिव के शरीर में जो ताप उत्पन्न हुआ, उसे शांत करने के लिए देवताओं ने जल के साथ बिल्व पत्र अर्पित किए — क्योंकि बिल्व शीतल प्रकृति का है। आयुर्वेद में भी बेल को शीतल और पित्तशामक माना गया है। परंपरा और औषधि — दोनों एक ही दिशा में संकेत करते हैं।

बिल्व पत्र अर्पण के नियम:

  • तीन पत्तों वाला हो — ये त्रिदेव, तीन गुण और शिव के तीन नेत्रों के प्रतीक हैं। पाँच या सात पत्तों वाला और भी उत्तम, परंतु दुर्लभ।
  • चिकनी सतह नीचे की ओर करके अर्पित करें, अर्थात् शिवलिंग की ओर।
  • कटा-फटा अथवा छिद्रयुक्त न हो।
  • बासी नहीं होता। बिल्व पत्र को जल से धोकर पुनः अर्पित किया जा सकता है — यह विशेष छूट केवल इसी को प्राप्त है।
  • चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और सोमवार को बिल्व पत्र तोड़ना वर्जित है। एक दिन पूर्व तोड़कर रख लें।
  • वृक्ष को प्रणाम करके ही पत्र तोड़ें, और डाल न तोड़ें।

प्रिय पुष्प और उनका फल

पुष्पविशेषतापरंपरागत फल
धतूराविषैला; नीलकंठ कथा से संबंधितविष और नकारात्मकता का समर्पण; मानसिक शांति
आक / मदारविषैला; बंजर भूमि में उगता हैवैराग्य; उपेक्षित का स्वीकार
सफेद कनेरश्वेत वर्णशांति और सात्विकता
हरसिंगार (पारिजात)रात्रि में खिलता हैसमुद्र मंथन से उत्पन्न; अत्यंत प्रिय
चमेलीसुगंधित श्वेतमन की निर्मलता
कमलश्वेत कमल विशेषसर्व सिद्धि
शमी पत्रपत्र; शनि से संबंधितशनि दोष शमन
दूर्वाघासआयु और आरोग्य
नागकेसरदुर्लभविशेष अनुष्ठानों में

सामान्य नियम — शिव को श्वेत और सुगंधित पुष्प प्रिय हैं, तथा वे पुष्प जो अन्य देवताओं की पूजा में स्वीकार नहीं किए जाते। यह उनके स्वभाव के अनुरूप है; जिसे संसार त्याग देता है, वह शिव को स्वीकार है।

वर्जित पुष्प और कारण

यह भाग सर्वाधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि अनजाने में वर्जित वस्तु अर्पित कर देना सामान्य है।

वर्जितकारण
केतकी / केवड़ाशिव द्वारा शापित — कथा नीचे दी गई है
तुलसीयह विष्णु को अर्पित होती है; वृंदा की कथा से संबंधित
हल्दीयह देवी को अर्पित होती है; सौंदर्य प्रसाधन से संबंधित
कुमकुम / सिंदूरसौभाग्य का प्रतीक; शिव वैरागी स्वरूप हैं। (शिवलिंग पर नहीं; कुछ परंपराओं में पार्वती को)
चंपाशापित माना गया है — कथा में इसने असत्य का साथ दिया
लाल पुष्प (कुछ परंपराओं में)क्षेत्रीय भेद है; सफेद सर्वत्र स्वीकार्य
शंख से जलशंखचूड़ की कथा से संबंधित निषेध
नारियल का पानीनारियल विष्णु से संबंधित; जल अर्पण वर्जित
टूटे चावलअक्षत का अर्थ ही 'अखंडित' है

यदि अनजाने में कोई वर्जित वस्तु अर्पित हो जाए तो घबराएँ नहीं — क्षमा प्रार्थना करें और उसे हटाकर पूजा जारी रखें। शिव को 'भोलेनाथ' कहा गया है और शास्त्रों में उन्हें सबसे सरलता से प्रसन्न होने वाला देवता माना गया है।

केतकी की कथा

केतकी के निषेध की कथा जानने योग्य है, क्योंकि वह शिव के एक प्रमुख स्वरूप से जुड़ी है।

एक बार ब्रह्मा और विष्णु में विवाद हुआ कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। उसी समय उनके मध्य एक अनंत ज्योतिर्मय स्तंभ प्रकट हुआ — जिसका न आदि दिखता था न अंत। यह शिव का लिंगोद्भव स्वरूप था।

निर्णय हुआ कि जो इस स्तंभ का छोर पा लेगा, वही श्रेष्ठ है। विष्णु वराह रूप में नीचे गए और ब्रह्मा हंस रूप में ऊपर।

विष्णु लौट आए और सत्य कहा — उन्हें अंत नहीं मिला। परंतु ब्रह्मा को मार्ग में गिरता हुआ केतकी का पुष्प मिला। उन्होंने उससे असत्य साक्ष्य देने को कहा, और लौटकर घोषित किया कि उन्होंने शिखर देख लिया है। केतकी ने उनका समर्थन किया।

शिव प्रकट हुए और असत्य उजागर किया। उन्होंने ब्रह्मा को शाप दिया कि उनकी पूजा नहीं होगी, और केतकी को शाप दिया कि वह कभी शिव पूजन में अर्पित नहीं की जाएगी।

कथा का भाव स्पष्ट है — असत्य साक्ष्य देना उतना ही दोषपूर्ण है जितना असत्य कहना। यही कारण है कि यह कथा महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से सुनाई जाती है।

पत्र और अन्य अर्पण

पुष्पों के अतिरिक्त ये अर्पण शिव पूजन में प्रचलित हैं:

  • भस्म — शिव का प्रमुख अलंकार; वैराग्य और नश्वरता का प्रतीक
  • चंदन — श्वेत चंदन; शीतलता हेतु
  • अक्षत — अखंडित चावल
  • दूर्वा — आयु हेतु
  • शमी पत्र — शनि दोष हेतु विशेष
  • भाँग के पत्ते — नीलकंठ कथा से संबंधित
  • रुद्राक्ष — शिव के अश्रु से उत्पन्न; विस्तृत जानकारी
  • जल और पंचामृत — अभिषेक हेतु

अर्पण के नियम

  • स्नान के पश्चात ही पुष्प तोड़ें और अर्पित करें।
  • भूमि पर गिरे पुष्प अर्पित न करें।
  • बासी पुष्प वर्जित हैं — केवल बिल्व पत्र को छूट है।
  • पुष्प सूँघकर अर्पित न करें।
  • वृक्ष को प्रणाम करके पत्र-पुष्प लें; डाल न तोड़ें।
  • सोमवार, अमावस्या, चतुर्दशी को बिल्व पत्र तोड़ना वर्जित — एक दिन पूर्व तोड़ लें।
  • दाहिने हाथ से अर्पित करें, मंत्र सहित।
  • बाईं ओर से प्रदक्षिणा न करें — शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा वर्जित है; जलधारी तक जाकर लौटें।

मनोकामना के अनुसार पुष्प

मनोकामनाअर्पण
सामान्य कृपाबिल्व पत्र और जल
मानसिक शांतिश्वेत पुष्प, कच्चा दूध
आरोग्य और आयुदूर्वा, घी से अभिषेक, महामृत्युंजय जाप
शनि दोषशमी पत्र, सरसों का तेल, नीले पुष्प
विवाह में विलंबश्वेत पुष्प, शिव-पार्वती संयुक्त पूजन
संतान बाधादूर्वा, घी और शहद से अभिषेक
ऋण और आर्थिक बाधागन्ने का रस, बिल्व पत्र
भय और नकारात्मकताधतूरा, आक, भस्म

ग्रह दोष के अनुसार अर्पण

ग्रह स्थितिअर्पण
चंद्र दोष — अनिद्रा, चिंताकच्चा दूध, श्वेत पुष्प, चमेली
शनि — साढ़े साती, ढैयासरसों का तेल, शमी पत्र, नीले पुष्प
मंगल — क्रोध, विवादलाल चंदन, दूर्वा
राहु — भय, भ्रमधतूरा, आक, भस्म
केतु — निष्क्रियतादूर्वा, भस्म
गुरु — आर्थिक अवरोधपीले पुष्प (शिव पर नहीं, गणेश-पार्वती को), गन्ने का रस
अष्टम भाव पीड़ितघी से अभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र

आपकी कुंडली में कौन सा दोष सक्रिय है, यह कुंडली विश्लेषण से ज्ञात होता है — और सही अर्पण चुनने से पूजा का प्रभाव कई गुना होता है।

ऋतु के अनुसार

प्रत्येक ऋतु में जो पुष्प सहज उपलब्ध हों, वही अर्पित करना परंपरा में उचित माना गया है।

  • वसंत — चमेली, मोगरा, कनेर
  • ग्रीष्म — कमल, कनेर, चमेली; शीतल अभिषेक विशेष
  • वर्षा (श्रावण) — धतूरा, आक, बिल्व पत्र। यही सर्वाधिक फलदायी काल है; देखें सावन गाइड
  • शरद — हरसिंगार, श्वेत कमल
  • शिशिर-हेमंत — गेंदा (श्वेत/पीला), शमी

यदि कुछ भी उपलब्ध न हो

यह भाग मैं जानबूझकर सम्मिलित कर रही हूँ, क्योंकि अनेक जजमान यह सोचकर पूजा नहीं करते कि उनके पास उचित सामग्री नहीं है।

शिव पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि शिव को केवल जल से प्रसन्न किया जा सकता है। उन्हें भोलेनाथ इसीलिए कहा जाता है — वे सामग्री नहीं, भाव देखते हैं।

क्रम इस प्रकार समझें:

  1. केवल जल — पर्याप्त है। शास्त्र इसमें स्पष्ट हैं।
  2. जल और एक बिल्व पत्र — पूर्ण पूजा।
  3. जल, बिल्व पत्र और एक श्वेत पुष्प — उत्तम।
  4. शेष सब वैकल्पिक है।

अठारह वर्षों में मैंने ऐसे जजमान देखे हैं जो महँगी सामग्री जुटाकर विधिवत पूजा कराते हैं और कोई परिवर्तन नहीं पाते, और ऐसे भी जो प्रतिदिन एक लोटा जल और एक बिल्व पत्र अर्पित करते हैं और उनका जीवन बदलता है। अंतर सामग्री में नहीं, नियमितता और भाव में होता है।


शुभकामनाएँ सहित,
निधि श्रीमाली
प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली


आपकी कुंडली के अनुसार क्या अर्पित करें?

कच्चा दूध चंद्र दोष के लिए, सरसों का तेल शनि के लिए, घी आयु के लिए — सही अर्पण कुंडली से तय होता है।

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Frequently Asked Questions

शिव को कौन सा पुष्प सबसे प्रिय है?+
वास्तव में शिव को सर्वाधिक प्रिय कोई पुष्प नहीं, अपितु बिल्व पत्र है। शिव पुराण में कहा गया है कि एक बिल्व पत्र अर्पित करने का फल सहस्र पुष्पों के समान है। पुष्पों में श्वेत और सुगंधित पुष्प प्रिय हैं — कनेर, चमेली, हरसिंगार और श्वेत कमल, तथा धतूरा और आक जो विषैले होने के कारण विशेष रूप से शिव को ही अर्पित होते हैं।
शिव को कौन से पुष्प नहीं चढ़ाने चाहिए?+
केतकी और केवड़ा, जो शिव द्वारा शापित हैं क्योंकि केतकी ने ब्रह्मा के लिए असत्य साक्ष्य दिया था। तुलसी वर्जित है क्योंकि वह विष्णु को अर्पित होती है, और हल्दी क्योंकि वह देवी को अर्पित होती है। चंपा भी शापित मानी गई है। इनके अतिरिक्त शंख से जल, नारियल का पानी और टूटे चावल भी वर्जित हैं।
बिल्व पत्र अर्पित करने के क्या नियम हैं?+
तीन पत्तों वाला हो, कटा-फटा न हो, और चिकनी सतह नीचे की ओर यानी शिवलिंग की ओर करके अर्पित करें। बिल्व पत्र बासी नहीं होता — इसे जल से धोकर पुनः अर्पित किया जा सकता है, यह छूट केवल इसी को प्राप्त है। सोमवार, अमावस्या, चतुर्दशी, चतुर्थी, अष्टमी और नवमी को बिल्व पत्र तोड़ना वर्जित है, अतः एक दिन पूर्व तोड़ लें।
केतकी का पुष्प शिव को क्यों नहीं चढ़ाया जाता?+
लिंगोद्भव कथा के अनुसार ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता का विवाद हुआ और शिव अनंत ज्योतिर्मय स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा ने शिखर पाने का असत्य दावा किया और केतकी के पुष्प से असत्य साक्ष्य दिलवाया। शिव ने ब्रह्मा को शाप दिया कि उनकी पूजा नहीं होगी, और केतकी को कि वह कभी शिव पूजन में अर्पित नहीं की जाएगी।
यदि पूजा की सामग्री उपलब्ध न हो तो क्या करें?+
शिव पुराण में स्पष्ट है कि शिव को केवल जल से प्रसन्न किया जा सकता है — उन्हें भोलेनाथ इसीलिए कहा जाता है। केवल जल पर्याप्त है, जल और एक बिल्व पत्र पूर्ण पूजा है, और जल, बिल्व पत्र तथा एक श्वेत पुष्प उत्तम। शेष सब वैकल्पिक है। अंतर सामग्री में नहीं, नियमितता और भाव में होता है।
ग्रह दोष के अनुसार शिव को क्या अर्पित करें?+
चंद्र दोष यानी अनिद्रा और चिंता में कच्चा दूध और श्वेत पुष्प; शनि की साढ़े साती में सरसों का तेल, शमी पत्र और नीले पुष्प; मंगल के क्रोध में लाल चंदन और दूर्वा; राहु के भय और भ्रम में धतूरा, आक और भस्म; अष्टम भाव पीड़ित हो तो घी से अभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र।
यदि अनजाने में वर्जित वस्तु अर्पित हो जाए तो?+
घबराने की आवश्यकता नहीं। क्षमा प्रार्थना करें, उस वस्तु को हटा दें और पूजा जारी रखें। शिव को भोलेनाथ कहा गया है और शास्त्रों में उन्हें सबसे सरलता से प्रसन्न होने वाला देवता माना गया है — वे सामग्री की त्रुटि से नहीं, भाव से प्रसन्न होते हैं।
🧿

Written by

Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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