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जानिए रुद्राक्ष का महत्त्व , रुद्राक्ष के प्रकार, लाभ एवं

# जानिए रुद्राक्ष का महत्त्व , रुद्राक्ष के प्रकार, लाभ एवं नियम - Rudraksh - Pandit NM Shrimali - Best Astrologer in India **जानिए रुद्राक्ष का महत्त्व , रुद्राक्ष के प्रकार, लाभ एवं नियम** — यह विष

7 July 2026 14 min read|By Nidhi Shrimali

⚡ संक्षेप में — रुद्राक्ष

लेखिका: निधि श्रीमाली | वैदिक ज्योतिषी, 18+ वर्षों का अनुभव
अद्यतन: अगस्त 2026 | पढ़ने का समय: 15 मिनट
रेटिंग: ★★★★★ 4.9/5 (1,425+ परामर्श समीक्षाओं से)

रुद्राक्ष Elaeocarpus ganitrus वृक्ष का बीज है, जिस पर बनी प्राकृतिक रेखाएँ 'मुखी' कहलाती हैं। 1 से 14 मुखी तक प्रत्येक रुद्राक्ष का भिन्न देवता और ग्रह होता है। सर्वाधिक प्रचलित 5 मुखी है, जिसे कोई भी बिना परामर्श धारण कर सकता है। शेष के लिए कुंडली देखना आवश्यक है।


विषय सूची

  1. रुद्राक्ष क्या है
  2. उत्पत्ति की कथा
  3. 1 से 14 मुखी — पूर्ण सूची
  4. आपके लिए कौन सा रुद्राक्ष
  5. विशेष रुद्राक्ष — गौरी शंकर, गणेश, त्रिजुटी
  6. नेपाली और इंडोनेशियाई में अंतर
  7. असली रुद्राक्ष की पहचान
  8. नकली कैसे बनाया जाता है
  9. धारण विधि
  10. धारण के नियम
  11. देखभाल
  12. प्रचलित भ्रांतियाँ

रुद्राक्ष क्या है

रुद्राक्ष Elaeocarpus ganitrus नामक वृक्ष का बीज है। यह वृक्ष मुख्यतः नेपाल, इंडोनेशिया (जावा), भारत के हरिद्वार-देहरादून क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है।

इस बीज पर ऊपर से नीचे तक प्राकृतिक रूप से बनी रेखाओं को मुख या मुखी कहा जाता है। जितनी रेखाएँ, उतने मुख। एक मुखी से चौदह मुखी तक रुद्राक्ष पाए जाते हैं, और प्रत्येक का अपना देवता, ग्रह, बीज मंत्र और उपयोग है।

'रुद्राक्ष' शब्द दो शब्दों से बना है — रुद्र (शिव) और अक्ष (नेत्र)। अर्थात् 'शिव का नेत्र'। शिव पुराण, पद्म पुराण और श्रीमद्देवीभागवत में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।

एक व्यावहारिक बात प्रारंभ में ही स्पष्ट कर देना उचित है। मेरे पास प्रतिदिन ऐसे जजमान आते हैं जिन्होंने किसी लेख या दुकानदार के कहने पर कोई रुद्राक्ष धारण कर लिया और उन्हें कोई लाभ नहीं हुआ। कारण सामान्यतः तीन में से एक होता है — रुद्राक्ष नकली था, प्राण-प्रतिष्ठा नहीं हुई थी, अथवा वह उनकी कुंडली के लिए उपयुक्त नहीं था। तीनों से बचा जा सकता है, और यह लेख उसी के लिए है।

उत्पत्ति की कथा

शिव पुराण के अनुसार, त्रिपुरासुर के अत्याचारों से त्रस्त देवताओं की पुकार सुनकर भगवान शिव ने 'अघोर' नामक दिव्य अस्त्र का ध्यान करने के लिए सहस्रों वर्षों तक समाधि की। जब उन्होंने नेत्र खोले, तो उनके नेत्रों से अश्रु की कुछ बूँदें पृथ्वी पर गिरीं, और उन्हीं से रुद्राक्ष वृक्ष की उत्पत्ति हुई।

कथा का सार यह है कि रुद्राक्ष शिव की करुणा से उत्पन्न हुआ — संहार से नहीं, दया से। यही कारण है कि इसे शांति, रक्षा और उपचार का माध्यम माना गया है।

एक दूसरी परंपरा के अनुसार शिव के अश्रु विभिन्न स्थानों पर गिरे और उसी से भिन्न-भिन्न मुखी वाले रुद्राक्ष उत्पन्न हुए। शिव पुराण में यह भी कहा गया है कि रुद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति शिव के समान पूजनीय होता है — इसी कारण परंपरा में इसे केवल आभूषण नहीं, अपितु देवस्वरूप माना जाता है।

1 से 14 मुखी — पूर्ण सूची

मुखीदेवताग्रहबीज मंत्रमुख्य उपयोग
1 मुखीशिवसूर्यॐ ह्रीं नमःआत्म-साक्षात्कार, नेतृत्व। अत्यंत दुर्लभ और अत्यधिक नकली।
2 मुखीअर्धनारीश्वरचंद्रॐ नमःदांपत्य सुख, मानसिक संतुलन, माता से संबंध
3 मुखीअग्निमंगलॐ क्लीं नमःपूर्व कर्मों से मुक्ति, आत्मविश्वास, हीन भावना
4 मुखीब्रह्माबुधॐ ह्रीं नमःविद्या, वाणी, स्मरण शक्ति, संवाद
5 मुखीकालाग्नि रुद्रगुरुॐ ह्रीं नमःसर्वाधिक प्रचलित। सामान्य स्वास्थ्य, शांति, सभी के लिए
6 मुखीकार्तिकेयशुक्रॐ ह्रीं हुं नमःइच्छाशक्ति, विद्यार्थियों हेतु, वाक् दोष
7 मुखीमहालक्ष्मी, सप्तमातृकाशुक्र (कुछ में शनि)ॐ हुं नमःधन की रुकावट, बार-बार हानि, व्यापार
8 मुखीगणेशराहुॐ हुं नमःबाधा निवारण, राहु दोष, नए कार्य का आरंभ
9 मुखीदुर्गाकेतुॐ ह्रीं हुं नमःसाहस, ऊर्जा, केतु दोष, भय निवारण
10 मुखीविष्णुकोई विशेष नहींॐ ह्रीं नमःसर्व ग्रह शांति, रक्षा, नकारात्मक ऊर्जा
11 मुखीहनुमान, एकादश रुद्रकोई विशेष नहींॐ ह्रीं हुं नमःसाहस, नेतृत्व, आकस्मिक दुर्घटना से रक्षा
12 मुखीसूर्य, द्वादश आदित्यसूर्यॐ क्रौं क्षौं रौं नमःआत्मविश्वास, प्रशासनिक पद, सरकारी कार्य
13 मुखीकामदेव, इंद्रशुक्रॐ ह्रीं नमःआकर्षण, इच्छापूर्ति, वाणी में प्रभाव
14 मुखीहनुमान, देवमणिशनिॐ नमःसर्वोच्च माना गया; अंतर्ज्ञान, शनि दोष। अत्यंत दुर्लभ।

ध्यान दें — 1 मुखी और 14 मुखी सर्वाधिक दुर्लभ हैं, अतः इन्हीं की नकल सर्वाधिक होती है। 5 मुखी सर्वाधिक उपलब्ध है, अतः इसकी नकल करने में कोई लाभ नहीं, और यही कारण है कि 5 मुखी खरीदने में जोखिम न्यूनतम है।

आपके लिए कौन सा रुद्राक्ष

यह इस लेख का सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग है, क्योंकि गलत रुद्राक्ष धारण करने से लाभ नहीं होता और कुछ स्थितियों में हानि भी संभव है।

बिना परामर्श धारण किया जा सकता है: केवल 5 मुखी रुद्राक्ष। यह गुरु ग्रह से संबंधित है, सौम्य है, और शास्त्रों में इसे सभी के लिए उपयुक्त कहा गया है — स्त्री, पुरुष, बालक, वृद्ध, किसी भी जाति या राशि के व्यक्ति के लिए।

कुंडली देखकर ही धारण करें: शेष सभी। कारण स्पष्ट है — प्रत्येक रुद्राक्ष किसी ग्रह को बल देता है, शांत नहीं करता। यदि वह ग्रह आपकी कुंडली में पहले से बलवान या उग्र है, तो उसे और बल देना उचित नहीं।

समस्यासामान्यतः उपयुक्त रुद्राक्ष
दांपत्य कलह, माता से दूरी, मानसिक अशांति2 मुखी (चंद्र)
आत्मविश्वास की कमी, हीन भावना, क्रोध3 मुखी (मंगल)
विद्या में बाधा, वाणी दोष, स्मरण शक्ति4 या 6 मुखी
धन की रुकावट, बार-बार हानि7 मुखी (शुक्र)
प्रत्येक कार्य में बाधा, राहु दोष8 मुखी (राहु)
भय, ऊर्जा की कमी, केतु दोष9 मुखी (केतु)
नकारात्मक ऊर्जा, नजर दोष10 मुखी
दुर्घटना का भय, साहस की कमी11 मुखी (हनुमान)
सरकारी कार्य, प्रशासनिक पद, पिता से संबंध12 मुखी (सूर्य)
शनि की साढ़े साती, दीर्घकालिक बाधा14 मुखी, अथवा 5 मुखी के साथ शनि उपाय

यह तालिका दिशा-निर्देश है, निदान नहीं। वास्तविक निर्धारण कुंडली विश्लेषण से होता है — यह जानने के लिए कि आपकी समस्या का कारक ग्रह वास्तव में कौन है।

विशेष रुद्राक्ष — गौरी शंकर, गणेश, त्रिजुटी

मुखी-आधारित वर्गीकरण के अतिरिक्त कुछ विशेष आकृति वाले रुद्राक्ष भी होते हैं। इनकी नकल बहुत होती है, अतः सावधानी आवश्यक है।

  • गौरी शंकर रुद्राक्ष — दो रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से जुड़े हुए। शिव-पार्वती का स्वरूप। दांपत्य सुख, विवाह में विलंब और पारिवारिक एकता के लिए सर्वोत्तम माना गया। ध्यान रखें: यह 2 मुखी से भिन्न है — 2 मुखी एक ही दाना है जिस पर दो रेखाएँ हैं।
  • गणेश रुद्राक्ष — जिस दाने पर प्राकृतिक रूप से सूँड जैसा उभार हो। बाधा निवारण और नए कार्य के आरंभ के लिए।
  • त्रिजुटी / गौरी पथ — तीन रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से जुड़े हुए। ब्रह्मा-विष्णु-महेश का स्वरूप। अत्यंत दुर्लभ और अत्यंत महँगा।
  • सव्य और अपसव्य — गोल और चपटी आकृति का भेद; कुछ परंपराओं में मान्य।
  • इंद्राक्ष — रुद्राक्ष जैसा दिखने वाला भिन्न बीज। यह रुद्राक्ष नहीं है।
  • भद्राक्ष — सस्ता, मिलता-जुलता बीज, जिसे सामान्यतः रुद्राक्ष बताकर मालाओं में बेचा जाता है। इसकी सतह अधिक कोणीय और उभरी होती है।

नेपाली और इंडोनेशियाई में अंतर

नेपालीइंडोनेशियाई (जावा)
आकारबड़ा — 16 से 30 मिमीछोटा — 8 से 15 मिमी
मुखी रेखाएँगहरी, स्पष्ट, गिनना सरलपतली, हल्की, गिनना कठिन
सतहअधिक काँटेदार और उभरीअपेक्षाकृत चिकनी
मूल्यअधिककम
प्रभावशास्त्रों में किसी को श्रेष्ठ नहीं कहा गया। दोनों असली रुद्राक्ष हैं।

मेरा व्यावहारिक सुझाव — बजट अनुमति दे तो नेपाली, अन्यथा इंडोनेशियाई; परंतु नकली किसी भी स्थिति में नहीं। नेपाली को प्राथमिकता देने का कारण अधिक प्रभाव नहीं, बल्कि पहचान की सरलता है। गहरी और स्पष्ट रेखाओं की नकल करना कठिन होता है, जबकि इंडोनेशियाई की पतली रेखाओं पर की गई खुदाई पकड़ में नहीं आती।

नित्य धारण के लिए अनेक लोग इंडोनेशियाई ही पसंद करते हैं — छोटा, हल्का, वस्त्रों के नीचे सुविधाजनक और टूटने की संभावना कम।

असली रुद्राक्ष की पहचान

कोई एक परीक्षण निर्णायक नहीं है। कई मिलाकर देखें।

  1. रेखाएँ गिनें। प्रत्येक रेखा ऊपर के छिद्र से नीचे के छिद्र तक अखंड होनी चाहिए। बीच में समाप्त होने वाली रेखा खोदी गई है। यही सबसे उपयोगी जाँच है।
  2. आवर्धक लेंस से मुखी की गहराई देखें। प्राकृतिक रेखा की गहराई असमान और स्वाभाविक होती है; खोदी गई रेखा की चौड़ाई एक समान होती है और औजार के निशान दिखते हैं।
  3. प्राकृतिक छिद्र होना चाहिए। ठोस पदार्थ में ड्रिल किया गया छिद्र संदिग्ध है।
  4. सतह की बनावट अनियमित और काँटेदार होनी चाहिए, ढली हुई जैसी एक समान नहीं।
  5. जोड़ देखें। दो टुकड़े चिपकाकर बनाए रुद्राक्ष में सीवन दिखती है और थपथपाने पर खोखली ध्वनि आती है।
  6. ताँबे के सिक्कों का परीक्षण। दो ताँबे के सिक्कों के बीच रखने पर असली रुद्राक्ष हल्का घूमता है। यह केवल संकेत है, प्रमाण नहीं।
  7. एक्स-रे या सीटी स्कैन — यही एकमात्र निर्णायक प्रमाण है। इसमें भीतरी कक्षों की संख्या दिखती है, जो मुखी संख्या के बराबर होनी चाहिए।

जल परीक्षण पर भरोसा न करें। यह सर्वाधिक प्रचलित भ्रांति है। असली रुद्राक्ष अपने घनत्व, आयु और सूखेपन के अनुसार डूबता भी है और तैरता भी है, और उपचारित नकली को डुबोया जा सकता है।

उबालने का परीक्षण कदापि न करें। इससे असली रुद्राक्ष खराब हो जाता है। जो विक्रेता यह सुझाव दे, वह या असावधान है या चाहता है कि आपका रुद्राक्ष खराब हो जाए।

नकली कैसे बनाया जाता है

विधियाँ जानने से पहचान सरल हो जाती है।

  • खुदाई। सस्ते और सुलभ 5 या 6 मुखी दाने पर अतिरिक्त रेखाएँ खोदकर दुर्लभ मुखी बनाना, अथवा रेखाएँ भरकर संख्या घटाना। रेखा का पूरी लंबाई तक न जाना और भरी गई रेखा का रंग भिन्न होना — ये पहचान हैं।
  • चिपकाना। दो आधे दाने जोड़कर इच्छित आकृति बनाना। गौरी शंकर और त्रिजुटी में यह सर्वाधिक होता है।
  • साँचे में ढालना। लकड़ी का बुरादा या रेजिन दबाकर बनाया जाता है। ये अत्यंत एक समान दिखते हैं और हल्के होते हैं।
  • भद्राक्ष को रुद्राक्ष बताना। थोक मालाओं में सामान्य।
  • सुपारी की खुदाई। सुपारी को तराशकर रंगना। वजन और प्राकृतिक छिद्र के अभाव से पकड़ में आता है।

व्यापारिक तर्क सीधा है — जितना दुर्लभ मुखी, उतनी अधिक नकल। 1, 14, गौरी शंकर और त्रिजुटी में नकल सर्वाधिक; 5 मुखी में न्यूनतम।

प्रमाणपत्र के विषय में: वास्तविक एक्स-रे प्रमाणपत्र केवल यह सिद्ध करता है कि भीतरी कक्षों की संख्या मुखी संख्या से मेल खाती है। वह यह नहीं सिद्ध करता कि दाना नेपाली है, कि वह 'सिद्ध' है, अथवा 'सरकार द्वारा प्रमाणित' है — कोई सरकार रुद्राक्ष प्रमाणित नहीं करती। प्रयोगशाला का नाम-पता, रिपोर्ट संख्या और उसी दाने का चित्र अवश्य देखें।

धारण विधि

धारण से पूर्व प्राण-प्रतिष्ठा आवश्यक है। यदि विक्रेता ने कर दी है, तब भी अपना संकल्प करना चाहिए।

  1. शुभ दिन चुनें। सोमवार सर्वोत्तम। महाशिवरात्रि, श्रावण सोमवार, प्रदोष अथवा पूर्णिमा और उत्तम। रुद्राक्ष के मुखी के अनुसार उसके ग्रह का दिन भी चुना जा सकता है।
  2. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  3. पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
  4. रुद्राक्ष को शुद्ध जल से धोएँ, फिर कच्चे दूध से, फिर पुनः जल से। कुछ परंपराओं में पंचामृत से स्नान कराया जाता है।
  5. शिवलिंग या शिव के चित्र के समीप रखें। बिल्व पत्र, सफेद पुष्प, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
  6. घी का दीपक और धूप जलाएँ।
  7. अपने रुद्राक्ष का बीज मंत्र 108 बार जपें, तत्पश्चात ॐ नमः शिवाय 108 बार। महामृत्युंजय मंत्र भी उत्तम।
  8. संकल्प करें — अपने शब्दों में स्पष्ट रूप से उद्देश्य कहें। यह चरण न छोड़ें; इसी से रुद्राक्ष आपका होता है।
  9. आरती करें, रुद्राक्ष को मस्तक से स्पर्श कराकर धारण करें।
धागालाल, सफेद या पीला सूती ऊन। कृत्रिम धागा वर्जित।
धातुचाँदी सामान्यतः उपयुक्त; सोना भी। ग्रह के अनुसार भिन्न — जैसे 12 मुखी के लिए ताँबा। लोहा-स्टील वर्जित।
स्थानगले में, हृदय के समीप। कमर से नीचे न लटके।
दैनिक जापन्यूनतम 11 बार, प्रतिदिन

धारण के नियम

  • श्मशान में जाते समय उतार दें। यह सबसे कठोर नियम है।
  • मांस-मदिरा के सेवन से पूर्व उतारें, अथवा धारण काल में इनका त्याग करें।
  • अपना रुद्राक्ष दूसरे को धारण न कराएँ। प्राण-प्रतिष्ठा के पश्चात यह व्यक्तिगत हो जाता है।
  • प्रतिदिन मंत्र जाप करें। जिन जजमानों ने लाभ बताया, वे सभी कुछ न कुछ नित्य करते थे।
  • साबुन-शैम्पू से बचाएँ। स्नान के समय उतारें या बाद में स्वच्छ जल से धोएँ।
  • भूमि पर न रखें। उतारने पर पूजा स्थान अथवा स्वच्छ वस्त्र में रखें।
  • रजस्वला काल में — परंपरागत रूप से उतारा जाता है, परंतु अब अनेक आचार्य इसे वैकल्पिक मानते हैं। अपने कुल की परंपरा का पालन करें।
  • असत्य और अन्याय से बचें। शास्त्रों में स्पष्ट है कि रुद्राक्ष धारण करने वाले को आचरण की शुद्धता रखनी चाहिए।

देखभाल

  • प्रत्येक कुछ सप्ताह में तेल लगाएँ — सरसों या जैतून का तेल। यह सर्वाधिक उपेक्षित निर्देश है। रुद्राक्ष जैविक बीज है; तेल न लगाने से वर्षों में सूखकर दरक जाता है, और लोग तब उसे नकली मान लेते हैं।
  • समय-समय पर स्वच्छ जल से धोएँ और सुखाएँ।
  • धागा 6 से 12 माह में बदलें, घिसकर टूटने से पहले।
  • लंबे समय तक सीधी धूप में न रखें।
  • वर्ष में एक बार पुनः प्राण-प्रतिष्ठा करें — महाशिवरात्रि अथवा श्रावण सोमवार पर।
  • टूट जाने पर धारण न करें। बहते जल में अथवा पीपल की जड़ में श्रद्धापूर्वक विसर्जित करें और नया लें।

प्रचलित भ्रांतियाँ

  1. "स्त्रियाँ रुद्राक्ष नहीं पहन सकतीं।" असत्य। शिव पुराण में कोई ऐसा निषेध नहीं है। स्त्री, पुरुष और बालक — सभी धारण कर सकते हैं।
  2. "जल में डूबे तो असली।" असत्य, और सर्वाधिक प्रचलित भ्रांति। घनत्व और सूखेपन पर निर्भर करता है।
  3. "बड़ा रुद्राक्ष अधिक प्रभावी होता है।" असत्य। आकार से मूल्य बढ़ता है, प्रभाव नहीं।
  4. "जितने अधिक मुखी धारण करें, उतना अच्छा।" असत्य। संयोजन कुंडली के अनुसार निर्धारित होते हैं; कुछ परस्पर विरुद्ध हैं। एक उपयुक्त रुद्राक्ष आठ अनुपयुक्त से श्रेष्ठ है।
  5. "रुद्राक्ष धारण करने से रोग ठीक हो जाता है।" असत्य। रुद्राक्ष चिकित्सा का विकल्प नहीं है। यह सहायक है।
  6. "एक बार पहन लिया, बस।" असत्य। नित्य जाप और देखभाल के बिना यह आभूषण मात्र है।
  7. "महँगा है तो असली होगा।" असत्य। मूल्य किसी भी दिशा में प्रमाण नहीं है।

शुभकामनाएँ सहित,
निधि श्रीमाली
प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली


आपके लिए कौन सा रुद्राक्ष उपयुक्त है?

5 मुखी सभी धारण कर सकते हैं। शेष सभी रुद्राक्ष किसी ग्रह को बल देते हैं — और यह जानना आवश्यक है कि आपकी कुंडली में वह ग्रह निर्बल है या पहले से बलवान।

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Frequently Asked Questions

रुद्राक्ष क्या है और कितने प्रकार का होता है?+
रुद्राक्ष Elaeocarpus ganitrus वृक्ष का बीज है, जिस पर बनी प्राकृतिक रेखाओं को मुखी कहा जाता है। सामान्यतः 1 से 14 मुखी तक रुद्राक्ष पाए जाते हैं और प्रत्येक का भिन्न देवता, ग्रह और बीज मंत्र होता है। इनके अतिरिक्त गौरी शंकर (दो जुड़े दाने), गणेश रुद्राक्ष और त्रिजुटी (तीन जुड़े दाने) जैसे विशेष आकृति वाले रुद्राक्ष भी होते हैं।
कौन सा रुद्राक्ष बिना परामर्श पहन सकते हैं?+
केवल 5 मुखी रुद्राक्ष। यह गुरु ग्रह से संबंधित है, सौम्य है, और शास्त्रों में इसे सभी के लिए उपयुक्त कहा गया है। शेष सभी रुद्राक्ष किसी विशेष ग्रह को बल देते हैं, न कि शांत करते हैं — अतः यदि वह ग्रह आपकी कुंडली में पहले से बलवान या उग्र है तो हानि संभव है। इसीलिए उनके लिए कुंडली विश्लेषण आवश्यक है।
असली रुद्राक्ष की पहचान कैसे करें?+
प्रत्येक मुखी रेखा ऊपर के छिद्र से नीचे तक अखंड होनी चाहिए — बीच में समाप्त होने वाली रेखा खोदी गई है। आवर्धक लेंस से देखें कि गहराई स्वाभाविक और असमान है। प्राकृतिक छिद्र और अनियमित काँटेदार सतह होनी चाहिए। निर्णायक प्रमाण केवल एक्स-रे या सीटी स्कैन है, जिसमें भीतरी कक्षों की संख्या मुखी संख्या के बराबर दिखती है।
क्या जल में डूबने से असली रुद्राक्ष की पहचान होती है?+
नहीं, यह सबसे प्रचलित भ्रांति है। असली रुद्राक्ष अपने घनत्व, आयु और सूखेपन के अनुसार डूबता भी है और तैरता भी है, और उपचारित नकली रुद्राक्ष को डुबोया जा सकता है। उबालने का परीक्षण भी कदापि न करें क्योंकि इससे असली रुद्राक्ष खराब हो जाता है।
क्या स्त्रियाँ रुद्राक्ष धारण कर सकती हैं?+
हाँ। शिव पुराण में स्त्रियों के लिए कोई निषेध नहीं है — स्त्री, पुरुष और बालक सभी धारण कर सकते हैं। रजस्वला काल में उतारने की परंपरा है, परंतु अब अनेक आचार्य इसे वैकल्पिक मानते हैं; अपने कुल की परंपरा का पालन करें।
रुद्राक्ष धारण करने की विधि क्या है?+
सोमवार, महाशिवरात्रि या श्रावण सोमवार को स्नान कर पूर्व दिशा की ओर बैठें। रुद्राक्ष को जल, कच्चे दूध और पुनः जल से धोएँ, शिवलिंग के समीप रखकर बिल्व पत्र, सफेद पुष्प और अक्षत अर्पित करें, घी का दीपक जलाएँ, अपने रुद्राक्ष का बीज मंत्र 108 बार और ॐ नमः शिवाय 108 बार जपें, संकल्प करके धारण करें।
क्या अधिक मुखी वाले रुद्राक्ष एक साथ पहनना अच्छा है?+
नहीं। संयोजन कुंडली के अनुसार निर्धारित होते हैं और कुछ परस्पर विरुद्ध हैं — जैसे सूर्य और शनि के रुद्राक्ष, क्योंकि दोनों ग्रह शत्रु हैं। अधिकतम दो-तीन मुखी, और वे भी तब जब प्रत्येक किसी भिन्न पहचानी गई समस्या का उपाय हो। एक उपयुक्त रुद्राक्ष आठ अनुपयुक्त से श्रेष्ठ है।
🧿

Written by

Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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