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महालक्ष्मी अनुष्ठान में विशेष यंत्रों का महत्व

महालक्ष्मी अनुष्ठान, दीपावली एवं धनतेरस पूजन में स्थापित किए जाने वाले श्री यंत्र, महालक्ष्मी यंत्र, अष्टलक्ष्मी यंत्र, कुबेर, कनकधारा, व्यापार वृद्धि एवं गणेश यंत्र का महत्व — तथा भोजपत्र, धातु और स्फटिक यंत्रों में अंतर।

8 September 2026 10 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के ज्ञान एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। पंडित एन. एम. श्रीमाली संस्थान, जोधपुर।

महालक्ष्मी अनुष्ठान, दीपावली पूजन, धनतेरस पूजन अथवा लक्ष्मी महायज्ञ जैसे विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में धन, सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य, सौभाग्य और आर्थिक स्थिरता की कामना से विभिन्न दिव्य यंत्रों की स्थापना एवं पूजा की जाती है।

इन सभी यंत्रों में श्री यंत्र को विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक एवं तांत्रिक परंपराओं में इसे “यंत्रराज” अर्थात् यंत्रों का राजा कहा जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान, मंत्र-जप और पूर्ण श्रद्धा के साथ यंत्र की उपासना करने से साधक माँ महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करता है।

विषय सूची (Table of Contents)

  1. श्री यंत्र (Shree Yantra)
  2. सही श्री यंत्र की पहचान कैसे करें
  3. महालक्ष्मी यंत्र (Mahalaxmi Yantra)
  4. अष्टलक्ष्मी यंत्र (Ashta Lakshmi Yantra)
  5. महालक्ष्मी अनुष्ठान के सहयोगी यंत्र
  6. यंत्र किस माध्यम पर बने होते हैं?
  7. भोजपत्र, धातु और स्फटिक यंत्र की तुलना
  8. घर, दुकान या कार्यालय में यंत्र स्थापना की सरल विधि
  9. आपके लिए कौन सा यंत्र, और यंत्र की सीमाएँ
  10. महालक्ष्मी अनुष्ठान करवाएं एवं पूजन यंत्र प्राप्त करें

🪷 1. श्री यंत्र (Shree Yantra)

श्री यंत्र को देवी महालक्ष्मी एवं श्रीविद्या उपासना से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण यंत्र माना जाता है। इसकी विशेष ज्यामितीय संरचना में एक-दूसरे से जुड़े त्रिकोण, कमल दल एवं अन्य पवित्र आकृतियाँ होती हैं।

महालक्ष्मी के विशेष अनुष्ठानों में 2D अथवा 3D श्री यंत्र की स्थापना कर विधिपूर्वक पूजन किया जाता है। इसे सुख-समृद्धि, सौभाग्य एवं सकारात्मकता की कामना से पूजा जाता है।

🔍 सही श्री यंत्र की पहचान कैसे करें

श्री यंत्र की पूजा उसकी शुद्ध ज्यामिति पर टिकी है, इसलिए खरीदने या स्थापित करने से पहले उसकी संरचना देख लेना उपयोगी है। परंपरा के अनुसार एक पूर्ण श्री यंत्र में ये भाग होते हैं:

  • बिंदु: केंद्र में एक बिंदु, जो शिव-शक्ति के एकत्व का प्रतीक है।
  • नौ त्रिकोण: चार ऊपर की ओर नोक वाले त्रिकोण (शिव तत्व) और पाँच नीचे की ओर नोक वाले त्रिकोण (शक्ति तत्व)। ये नौ त्रिकोण आपस में गुँथकर बिंदु के चारों ओर 43 छोटे त्रिकोण बनाते हैं।
  • दो कमल: त्रिकोणों के बाहर पहले आठ पंखुड़ियों का कमल और उसके बाहर सोलह पंखुड़ियों का कमल।
  • भूपुर: सबसे बाहर चार द्वारों वाला चौकोर घेरा।

जाँचने के लिए यंत्र को ध्यान से देखें: त्रिकोणों की रेखाएँ ठीक बिंदुओं पर आकर मिलनी चाहिए, कहीं रेखा अधूरी या एक-दूसरे को काटकर आगे बढ़ती हुई न दिखे, और पूरी आकृति दाएँ-बाएँ से संतुलित हो। 3D श्री यंत्र को मेरु श्री यंत्र भी कहते हैं; उसमें यही स्तर ऊपर की ओर उठते हुए बनाए जाते हैं। स्फटिक यंत्र में काँच के नकली यंत्र आम हैं। काँच में प्रायः अंदर गोल हवा के बुलबुले दिखते हैं, जबकि प्राकृतिक स्फटिक में बुलबुलों की जगह हल्की प्राकृतिक रेखाएँ या धुंध हो सकती है। यह केवल एक संकेत है, पक्का प्रमाण नहीं; इसलिए विश्वसनीय स्रोत से ही लें।

🌺 2. महालक्ष्मी यंत्र (Mahalaxmi Yantra)

महालक्ष्मी यंत्र विशेष रूप से माता लक्ष्मी की आराधना के लिए स्थापित किया जाता है। इसमें माता लक्ष्मी से संबंधित बीज मंत्र, पवित्र चिह्न एवं विशेष ज्यामितीय संरचनाएँ अंकित हो सकती हैं।

इसकी पूजा धन की स्थिरता, आर्थिक उन्नति, सुख-समृद्धि एवं घर-परिवार में शुभता की कामना से की जाती है।

🪷 3. अष्टलक्ष्मी यंत्र (Ashta Lakshmi Yantra)

अष्टलक्ष्मी यंत्र माता लक्ष्मी के आठ स्वरूपों की संयुक्त आराधना से संबंधित माना जाता है।

आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी की कृपा की कामना से इसकी पूजा की जाती है।

इसलिए अष्टलक्ष्मी यंत्र केवल धन ही नहीं, बल्कि परिवार, ज्ञान, अन्न-धान्य, साहस, विजय और समग्र समृद्धि की प्रार्थना से भी जुड़ा है।

✨ महालक्ष्मी अनुष्ठान के सहयोगी यंत्र

  • 💰 कुबेर यंत्र — धन के देवता कुबेर देव की आराधना के लिए इसकी स्थापना की जाती है। इसकी पूजा धन-संचय, आर्थिक स्थिरता एवं समृद्धि की कामना से की जाती है।
  • 🌼 कनकधारा यंत्र — कनकधारा परंपरा से संबंधित इस यंत्र की पूजा आर्थिक उन्नति, धन-समृद्धि एवं ऋण संबंधी परेशानियों से राहत की प्रार्थना के लिए की जाती है।
  • 📈 व्यापार वृद्धि यंत्र — व्यापार, दुकान अथवा व्यवसाय में उन्नति, नए अवसर, बिक्री में वृद्धि एवं आर्थिक प्रगति की कामना से इसकी पूजा की जाती है।
  • 🕉️ गणेश यंत्र — भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य हैं। इसलिए महालक्ष्मी अनुष्ठान में गणेश यंत्र की स्थापना विघ्न-बाधाओं की शांति, शुभारंभ, बुद्धि एवं सिद्धि की प्रार्थना से की जाती है।

🔱 यंत्र किस माध्यम पर बने होते हैं?

  1. भोजपत्र: विशेष साधना एवं अनुष्ठानों में परंपरागत विधि से भोजपत्र पर यंत्र अंकित कर मंत्र-जप एवं पूजन किया जाता है।
  2. धातु यंत्र: तांबा, पीतल, चांदी अथवा अन्य उपयुक्त धातु से निर्मित यंत्र घर, मंदिर, दुकान या कार्यालय में स्थापित किए जा सकते हैं।
  3. स्फटिक श्री यंत्र: स्फटिक से निर्मित 3D श्री यंत्र महालक्ष्मी आराधना में विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसे सुख-समृद्धि, शुभता एवं माता महालक्ष्मी की कृपा की कामना से स्थापित किया जाता है।

📋 भोजपत्र, धातु और स्फटिक यंत्र की तुलना

तीनों माध्यम परंपरा में मान्य हैं। अंतर इस बात में है कि यंत्र कितने समय तक चलेगा, उसकी देखभाल कैसी होगी और वह कहाँ रखा जाएगा:

माध्यम टिकाऊपन देखभाल कहाँ अधिक उपयुक्त
भोजपत्र कम; नमी और समय से खराब हो सकता है पानी से न धोएँ; फ्रेम या शीशे में रखें, केवल धूप-दीप दिखाएँ किसी विशेष साधना या अनुष्ठान के लिए
धातु (ताँबा, पीतल, चाँदी) अधिक; वर्षों तक चलता है गंगाजल या शुद्ध जल से धोकर सूखे कपड़े से पोंछें; ताँबे पर समय के साथ कालापन आता है, जिसे साफ किया जा सकता है घर का पूजा स्थान, दुकान, कार्यालय
स्फटिक अधिक, पर गिरने पर टूट सकता है जल से धोया जा सकता है; सुरक्षित, स्थिर जगह पर रखें घर का पूजा स्थान, ध्यान का स्थान

धातु और स्फटिक के यंत्र देखने के लिए हमारा यंत्र संग्रह और स्फटिक संग्रह देखें।

🪔 घर, दुकान या कार्यालय में यंत्र स्थापना की सरल विधि

यंत्र स्थापना के लिए शुक्रवार, शुक्ल पक्ष का कोई शुभ दिन, धनतेरस, दीपावली या अक्षय तृतीया को परंपरा में उत्तम माना जाता है। पंचांग देखकर दिन चुनें और प्रातः स्नान के बाद स्थापना करें:

  1. स्थान चुनें: घर में पूजा स्थान का पूर्व या उत्तर-पूर्व भाग उपयुक्त माना जाता है। यंत्र को कभी ज़मीन पर सीधा न रखें; चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर रखें।
  2. शुद्धि: धातु और स्फटिक यंत्र को गंगाजल से धोएँ। भोजपत्र यंत्र पर जल न डालें, केवल धूप दिखाएँ।
  3. पूजन: पहले गणेश जी का स्मरण करें। फिर यंत्र पर कुमकुम, अक्षत और पुष्प अर्पित करें, घी का दीपक जलाएँ।
  4. मंत्र: ॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः ॥ का 108 बार जप करें, या श्री सूक्त का पाठ करें।
  5. नित्य पूजा: इसके बाद प्रतिदिन दीपक और पुष्प अर्पित करें। यंत्र पर धूल न जमने दें।

दुकान या कार्यालय में यंत्र प्रायः गल्ले या कैश काउंटर के पास, साफ और ऊँची जगह पर रखा जाता है। कुबेर यंत्र के लिए उत्तर दिशा को परंपरा में अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि उत्तर कुबेर की दिशा कही गई है। पूरे भवन की दिशाएँ और बनावट देखकर स्थान तय करना हो तो वास्तु परामर्श सहायक रहता है।

⚖️ आपके लिए कौन सा यंत्र, और यंत्र की सीमाएँ

सामान्य घर के लिए एक श्री यंत्र पर्याप्त माना जाता है। व्यापार के लिए श्री यंत्र के साथ व्यापार वृद्धि या कुबेर यंत्र रखा जाता है। एक ही स्थान पर बहुत सारे यंत्र जमा करने से अधिक अच्छा है कि एक-दो यंत्रों का नियमित पूजन हो।

यंत्र पूजा का एक साधन है, धन की गारंटी नहीं। कोई भी यंत्र कर्ज अपने आप नहीं उतारता और न ही व्यापार की खराब योजना को सुधार देता है। आर्थिक समस्या में व्यावहारिक कदम और योग्य वित्तीय सलाह पहले आते हैं; यंत्र-पूजा उनके साथ मन को स्थिर रखने का साधन है। यदि धन संबंधी रुकावटें लंबे समय से हैं, तो कुंडली विश्लेषण से धन भाव, लाभ भाव और चल रही दशा देखी जा सकती है, ताकि उपाय आपकी स्थिति के अनुसार चुना जाए।

ये सभी यंत्र संस्थान के महालक्ष्मी अनुष्ठान में विधिपूर्वक स्थापित और पूजित किए जाते हैं। अनुष्ठान के स्वरूप, संकल्प और हवन के बारे में महालक्ष्मी अनुष्ठान एवं हवन वाला लेख और स्थिर लक्ष्मी की परंपरा के लिए अखंड लक्ष्मी अनुष्ठान वाला लेख पढ़ें।

🌸 महालक्ष्मी अनुष्ठान करवाएं एवं पूजन यंत्र प्राप्त करें

यदि आप भी अपने घर, परिवार, व्यापार या कार्यक्षेत्र में सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति, सौभाग्य एवं माँ महालक्ष्मी की कृपा की कामना से विधि-विधानपूर्वक महालक्ष्मी अनुष्ठान करवाना चाहते हैं, तो हमारे संस्थान से संपर्क कर सकते हैं।

साथ ही महालक्ष्मी पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्री यंत्र, महालक्ष्मी यंत्र, अष्टलक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, व्यापार वृद्धि यंत्र, गणेश यंत्र तथा स्फटिक श्री यंत्र आदि प्राप्त करने के लिए भी हमसे संपर्क करें।

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के ज्ञान एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन से पूजा-अनुष्ठान एवं यंत्र संबंधी जानकारी प्राप्त करें।

📞 पूजा बुकिंग एवं यंत्र प्राप्त करने के लिए संपर्क करें:
9571122777 | 9929391753

🙏 ॥ ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥ 🙏

[ { "question": "महालक्ष्मी अनुष्ठान में कौन-कौन से यंत्र स्थापित किए जाते हैं?", "answer": "महालक्ष्मी अनुष्ठान में मुख्य रूप से श्री यंत्र, महालक्ष्मी यंत्र और अष्टलक्ष्मी यंत्र स्थापित किए जाते हैं। इनके साथ सहयोगी यंत्रों के रूप में कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, व्यापार वृद्धि यंत्र और गणेश यंत्र की स्थापना भी की जाती है।" }, { "question": "श्री यंत्र को यंत्रराज क्यों कहा जाता है?", "answer": "धार्मिक एवं तांत्रिक परंपराओं में श्री यंत्र को यंत्रों का राजा अर्थात् यंत्रराज कहा जाता है। यह देवी महालक्ष्मी एवं श्रीविद्या उपासना से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण यंत्र माना जाता है, जिसकी ज्यामितीय संरचना में एक-दूसरे से जुड़े त्रिकोण, कमल दल एवं अन्य पवित्र आकृतियाँ होती हैं।" }, { "question": "अष्टलक्ष्मी यंत्र में माता लक्ष्मी के कौन से आठ स्वरूप होते हैं?", "answer": "अष्टलक्ष्मी यंत्र आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी — इन आठ स्वरूपों की संयुक्त आराधना से संबंधित माना जाता है। इसलिए यह केवल धन ही नहीं, बल्कि परिवार, ज्ञान, अन्न-धान्य, साहस, विजय और समग्र समृद्धि की प्रार्थना से भी जुड़ा है।" }, { "question": "यंत्र किस माध्यम पर बनाए जाते हैं?", "answer": "यंत्र मुख्यतः तीन माध्यमों पर बनाए जाते हैं — भोजपत्र पर परंपरागत विधि से अंकित यंत्र, तांबा, पीतल या चांदी जैसी धातु से निर्मित यंत्र, और स्फटिक से निर्मित 3D श्री यंत्र। धातु एवं स्फटिक यंत्र घर, मंदिर, दुकान या कार्यालय में स्थापित किए जा सकते हैं।" }, { "question": "2D और 3D श्री यंत्र में क्या अंतर है?", "answer": "2D श्री यंत्र समतल सतह पर उकेरा गया यंत्र होता है, जबकि 3D श्री यंत्र में इसकी ज्यामितीय संरचना उभरे हुए त्रि-आयामी रूप में बनाई जाती है। महालक्ष्मी अनुष्ठानों में दोनों की स्थापना की जाती है; स्फटिक से निर्मित 3D श्री यंत्र विशेष रूप से लोकप्रिय है।" }, { "question": "महालक्ष्मी अनुष्ठान में गणेश यंत्र क्यों स्थापित किया जाता है?", "answer": "भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य हैं। इसीलिए महालक्ष्मी अनुष्ठान में गणेश यंत्र की स्थापना विघ्न-बाधाओं की शांति, कार्य के शुभारंभ, बुद्धि एवं सिद्धि की प्रार्थना के साथ की जाती है।" }, { "question": "क्या ये यंत्र घर या दुकान में स्थापित किए जा सकते हैं?", "answer": "जी हाँ। तांबा, पीतल, चांदी अथवा अन्य उपयुक्त धातु से निर्मित यंत्र तथा स्फटिक यंत्र घर, मंदिर, दुकान या कार्यालय में स्थापित किए जा सकते हैं। स्थापना एवं पूजन विधि-विधान के अनुसार करवाना उचित माना जाता है।" }, { "question": "पूजन यंत्र प्राप्त करने के लिए कैसे संपर्क करें?", "answer": "महालक्ष्मी पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्री यंत्र, महालक्ष्मी यंत्र, अष्टलक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, व्यापार वृद्धि यंत्र, गणेश यंत्र तथा स्फटिक श्री यंत्र प्राप्त करने हेतु संस्थान से 9571122777 अथवा 9929391753 पर संपर्क किया जा सकता है।" } ]

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Frequently Asked Questions

महालक्ष्मी अनुष्ठान में कौन-कौन से यंत्र स्थापित किए जाते हैं?+
महालक्ष्मी अनुष्ठान में मुख्य रूप से श्री यंत्र, महालक्ष्मी यंत्र और अष्टलक्ष्मी यंत्र स्थापित किए जाते हैं। इनके साथ सहयोगी यंत्रों के रूप में कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, व्यापार वृद्धि यंत्र और गणेश यंत्र की स्थापना भी की जाती है।
श्री यंत्र को यंत्रराज क्यों कहा जाता है?+
धार्मिक एवं तांत्रिक परंपराओं में श्री यंत्र को यंत्रों का राजा अर्थात् यंत्रराज कहा जाता है। यह देवी महालक्ष्मी एवं श्रीविद्या उपासना से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण यंत्र माना जाता है, जिसकी ज्यामितीय संरचना में एक-दूसरे से जुड़े त्रिकोण, कमल दल एवं अन्य पवित्र आकृतियाँ होती हैं।
अष्टलक्ष्मी यंत्र में माता लक्ष्मी के कौन से आठ स्वरूप होते हैं?+
अष्टलक्ष्मी यंत्र आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी — इन आठ स्वरूपों की संयुक्त आराधना से संबंधित माना जाता है। इसलिए यह केवल धन ही नहीं, बल्कि परिवार, ज्ञान, अन्न-धान्य, साहस, विजय और समग्र समृद्धि की प्रार्थना से भी जुड़ा है।
यंत्र किस माध्यम पर बनाए जाते हैं?+
यंत्र मुख्यतः तीन माध्यमों पर बनाए जाते हैं — भोजपत्र पर परंपरागत विधि से अंकित यंत्र, तांबा, पीतल या चांदी जैसी धातु से निर्मित यंत्र, और स्फटिक से निर्मित 3D श्री यंत्र। धातु एवं स्फटिक यंत्र घर, मंदिर, दुकान या कार्यालय में स्थापित किए जा सकते हैं।
2D और 3D श्री यंत्र में क्या अंतर है?+
2D श्री यंत्र समतल सतह पर उकेरा गया यंत्र होता है, जबकि 3D श्री यंत्र में इसकी ज्यामितीय संरचना उभरे हुए त्रि-आयामी रूप में बनाई जाती है। महालक्ष्मी अनुष्ठानों में दोनों की स्थापना की जाती है; स्फटिक से निर्मित 3D श्री यंत्र विशेष रूप से लोकप्रिय है।
महालक्ष्मी अनुष्ठान में गणेश यंत्र क्यों स्थापित किया जाता है?+
भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य हैं। इसीलिए महालक्ष्मी अनुष्ठान में गणेश यंत्र की स्थापना विघ्न-बाधाओं की शांति, कार्य के शुभारंभ, बुद्धि एवं सिद्धि की प्रार्थना के साथ की जाती है।
क्या ये यंत्र घर या दुकान में स्थापित किए जा सकते हैं?+
जी हाँ। तांबा, पीतल, चांदी अथवा अन्य उपयुक्त धातु से निर्मित यंत्र तथा स्फटिक यंत्र घर, मंदिर, दुकान या कार्यालय में स्थापित किए जा सकते हैं। स्थापना एवं पूजन विधि-विधान के अनुसार करवाना उचित माना जाता है।
पूजन यंत्र प्राप्त करने के लिए कैसे संपर्क करें?+
महालक्ष्मी पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्री यंत्र, महालक्ष्मी यंत्र, अष्टलक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, व्यापार वृद्धि यंत्र, गणेश यंत्र तथा स्फटिक श्री यंत्र प्राप्त करने हेतु संस्थान से 9571122777 अथवा 9929391753 पर संपर्क किया जा सकता है।
🧿

Written by

Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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