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बहु-दिवसीय अनुष्ठान • LIVE प्रसारण

गुरु माँ निधि श्रीमाली के सान्निध्य में

माँ महालक्ष्मी की कृपा हेतुमहालक्ष्मी अनुष्ठान एवं हवन

॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥

संस्थान, जोधपुर (राजस्थान) में आयोजित बहु-दिवसीय महालक्ष्मी अनुष्ठान — प्रतिदिन महालक्ष्मी पूजन, मंत्र जप एवं महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ, प्रत्येक सम्मिलित परिवार के नाम से संकल्प, और समापन पर विशेष हवन एवं पूर्णाहुति। सम्पूर्ण अनुष्ठान का LIVE प्रसारण भी होता है।

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LIVE प्रसारणपरिवार के नाम से संकल्पहवन एवं पूर्णाहुतिसंस्थान, जोधपुर
महालक्ष्मी अनुष्ठान एवं हवन — गुरु माँ निधि श्रीमाली के सान्निध्य में, संस्थान जोधपुर

LIVE प्रसारण उपलब्ध

घर बैठे अनुष्ठान से जुड़ें

अनुष्ठान का महत्व

यह अनुष्ठान क्यों आवश्यक है?

माँ महालक्ष्मी धन, धान्य, सुख, समृद्धि, सौभाग्य, वैभव एवं ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी कृपा का अर्थ केवल धन का आना नहीं है — उनकी कृपा से जीवन में बरकत, संतोष, सद्बुद्धि, पारिवारिक सुख एवं मानसिक शांति का संचार होता है।

धन-धान्य की अधिष्ठात्री

माँ महालक्ष्मी धन, धान्य, सौभाग्य, वैभव एवं ऐश्वर्य की देवी हैं। उनके पूजन से जीवन के अभावों का निवारण होता है और समृद्धि के द्वार खुलते हैं।

धन का टिकना भी उतना ही आवश्यक

धन का आना ही पर्याप्त नहीं है। माँ की कृपा से धन घर में टिकता है, बरकत बनी रहती है और व्यय सही दिशा में जाता है।

केवल धन नहीं — सम्पूर्ण सुख

माँ महालक्ष्मी की कृपा से संतोष, सद्बुद्धि, पारिवारिक सुख एवं मानसिक शांति प्राप्त होती है। यही वास्तविक समृद्धि है।

किस उद्देश्य से किया जाता है

अनुष्ठान के लाभ एवं उद्देश्य

यह अनुष्ठान इन आठ प्रमुख संकल्पों को लेकर सम्पन्न किया जाता है।

धन-धान्य एवं समृद्धि की कामना

माँ महालक्ष्मी धन एवं धान्य दोनों की अधिष्ठात्री हैं। अनुष्ठान का प्रथम संकल्प घर में धन-धान्य की वृद्धि एवं स्थायी समृद्धि के लिए किया जाता है।

आर्थिक संकट एवं कर्ज से राहत

बढ़ते कर्ज, अनियंत्रित व्यय एवं लगातार बनी रहने वाली आर्थिक तंगी से मुक्ति हेतु माँ महालक्ष्मी से प्रार्थना की जाती है।

दरिद्रता एवं नकारात्मकता का निवारण

घर एवं जीवन से दरिद्रता, अभाव तथा नकारात्मक ऊर्जा का निवारण कर सकारात्मकता की स्थापना इस अनुष्ठान का प्रमुख उद्देश्य है।

व्यापार एवं करियर में उन्नति

व्यापार में वृद्धि, नौकरी में प्रगति एवं परिश्रम का उचित फल प्राप्त होने की कामना से यह अनुष्ठान सम्पन्न किया जाता है।

रुके हुए धन एवं कार्यों में गति

फँसा हुआ धन, अटके हुए भुगतान एवं वर्षों से रुके कार्यों में गति आने हेतु माँ महालक्ष्मी की कृपा की प्रार्थना की जाती है।

स्थिर लक्ष्मी एवं घर में बरकत

धन का आना ही पर्याप्त नहीं — धन का घर में टिकना भी आवश्यक है। स्थिर लक्ष्मी एवं बरकत हेतु विशेष संकल्प लिया जाता है।

पारिवारिक सुख एवं मानसिक शांति

परिवार में प्रेम, आपसी सामंजस्य, सद्बुद्धि एवं मन में संतोष तथा शांति — माँ की कृपा का यही वास्तविक स्वरूप है।

सौभाग्य एवं शुभ अवसर

जीवन में सौभाग्य की वृद्धि तथा नए एवं शुभ अवसरों के द्वार खुलने की कामना से यह अनुष्ठान किया जाता है।

यह अनुष्ठान किनके लिए है

किन्हें सम्मिलित होना चाहिए?

यदि इनमें से कोई भी स्थिति आपके जीवन से मेल खाती है, तो यह अनुष्ठान आपके एवं आपके परिवार के लिए है।

  • जिनके जीवन में धन आता तो है, परन्तु टिकता नहीं है
  • जिनकी आय अच्छी है, फिर भी बचत नहीं हो पाती
  • जिन पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है
  • जिनका धन कहीं फँसा हुआ है और वापस नहीं आ रहा
  • जिनके व्यापार अथवा कार्य में बार-बार रुकावट आ रही है
  • जिन्हें परिश्रम के बाद भी पदोन्नति नहीं मिल रही
  • जिनके जीवन में आर्थिक समस्याएँ बार-बार लौटकर आती हैं
  • जिनके परिवार में आर्थिक स्थिरता नहीं बन पा रही है

अनुष्ठान में सम्मिलित होने के लिए किसी विशेष योग्यता या पूर्व अनुभव की आवश्यकता नहीं है। प्रत्येक श्रद्धालु एवं उनका परिवार सम्मिलित हो सकता है।

यंत्र स्थापना

अनुष्ठान में स्थापित यंत्र

अनुष्ठान के दौरान माँ महालक्ष्मी से सम्बन्धित प्रमुख यंत्रों की विधिवत स्थापना एवं पूजन किया जाता है। प्रत्येक यंत्र का अपना विशिष्ट उद्देश्य एवं उपासना पद्धति है।

श्री यंत्र

यंत्रराज

समस्त यंत्रों में सर्वोपरि, इसीलिए इसे यंत्रराज कहा जाता है। श्रीविद्या उपासना से जुड़ा यह यंत्र परस्पर गुँथे त्रिकोणों एवं कमल-दलों की संरचना से बनता है।

महालक्ष्मी यंत्र

माँ महालक्ष्मी की कृपा, धन-धान्य की वृद्धि एवं घर में स्थिर लक्ष्मी की स्थापना हेतु विधिवत पूजित यंत्र।

अष्टलक्ष्मी यंत्र

आठ स्वरूप

माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूपों — आदि, धन, धान्य, गज, संतान, वीर, विजय एवं विद्या लक्ष्मी — की समवेत उपासना हेतु स्थापित किया जाता है।

कुबेर यंत्र

धन के अधिपति भगवान कुबेर से सम्बन्धित यंत्र — संचित धन, कोष की वृद्धि एवं आर्थिक स्थिरता हेतु पूजित।

कनकधारा यंत्र

कनकधारा स्तोत्र की परम्परा से जुड़ा यंत्र — अभाव के निवारण एवं निरन्तर धन-प्रवाह की कामना से स्थापित किया जाता है।

व्यापार वृद्धि यंत्र

व्यापार में उन्नति, रुके हुए कार्यों में गति एवं व्यावसायिक बाधाओं के निवारण हेतु विशेष रूप से पूजित यंत्र।

गणेश यंत्र

प्रथम पूज्य

प्रत्येक शुभ कार्य का आरम्भ प्रथम पूज्य श्री गणेश से होता है। विघ्न-बाधाओं की शांति हेतु यह यंत्र सर्वप्रथम स्थापित किया जाता है।

यंत्रों के माध्यम

परम्परा के अनुसार यंत्र भिन्न-भिन्न माध्यमों पर तैयार किए जाते हैं। प्रत्येक माध्यम की अपनी विशेषता है।

भोजपत्र

परम्परागत माध्यम, जिस पर मंत्र एवं यंत्र-रचना अंकित की जाती है।

धातु

तांबा, पीतल एवं चांदी — दीर्घकालिक स्थापना एवं नित्य पूजन हेतु प्रयुक्त।

स्फटिक श्री यंत्र

त्रिआयामी (3D) स्फटिक श्री यंत्र — श्रीविद्या उपासना में विशेष रूप से पूजित।

अनुष्ठान की प्रक्रिया

अनुष्ठान में क्या-क्या होता है?

सम्पूर्ण अनुष्ठान काल में यह क्रम प्रतिदिन विधिपूर्वक चलता है, और समापन विशेष हवन एवं पूर्णाहुति के साथ होता है।

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    प्रतिदिन महालक्ष्मी पूजन

    सम्पूर्ण अनुष्ठान काल में प्रतिदिन विधिवत महालक्ष्मी पूजन किया जाता है।

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    मंत्र जप

    महालक्ष्मी मंत्रों का नियमित जप — अनुष्ठान की आधारशिला।

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    महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ

    प्रतिदिन महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ, परम्परागत विधि के अनुसार।

  4. 4

    यजमान के नाम से संकल्प

    प्रत्येक सम्मिलित परिवार के नाम से संकल्प लिया जाता है, ताकि अनुष्ठान का फल उन्हें प्राप्त हो।

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    LIVE प्रसारण

    जो श्रद्धालु प्रत्यक्ष उपस्थित नहीं हो सकते, वे LIVE प्रसारण के माध्यम से घर बैठे अनुष्ठान से जुड़ सकते हैं।

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    समापन — हवन एवं पूर्णाहुति

    अनुष्ठान का समापन विशेष हवन एवं पूर्णाहुति (108 आहुतियाँ) के साथ होता है, जिसमें प्रत्येक यजमान एवं उनके परिवार के लिए प्रार्थना की जाती है।

गुरु माँ का संदेश

गुरु माँ निधि श्रीमाली

“वास्तविक समृद्धि वहीं है जहाँ धन के साथ धर्म हो, वैभव के साथ विनम्रता हो, सफलता के साथ सद्बुद्धि हो, परिवार में प्रेम हो, मन में संतोष हो और जीवन में शांति हो।”

“धन का आना ही पर्याप्त नहीं है, धन का घर में टिकना और सही दिशा में बढ़ना भी उतना ही आवश्यक है।”

सम्पूर्ण अनुष्ठान गुरु माँ निधि श्रीमाली के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न होता है।

4.8 ★ Google (1,425+ समीक्षाएँ)18+ वर्षों का अनुभव

प्रार्थना

अनुष्ठान का संकल्प

प्रत्येक यजमान एवं उनके परिवार की ओर से यह संकल्प लिया जाता है।

“हे माँ महालक्ष्मी! हमारे जीवन से अभाव, आर्थिक बाधाओं और नकारात्मकता का निवारण कर हमें धन-धान्य, सुख-समृद्धि, सद्बुद्धि, सौभाग्य, पारिवारिक सुख एवं मानसिक शांति का आशीर्वाद प्रदान करें।”

॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥

आपके प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महालक्ष्मी अनुष्ठान क्या है?
महालक्ष्मी अनुष्ठान, संस्थान (जोधपुर, राजस्थान) में गुरु माँ निधि श्रीमाली के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न होने वाला एक बहु-दिवसीय अनुष्ठान है। इसमें प्रतिदिन विधिवत महालक्ष्मी पूजन, महालक्ष्मी मंत्रों का जप एवं महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ किया जाता है, तथा प्रत्येक सम्मिलित परिवार के नाम से संकल्प लिया जाता है। अनुष्ठान का समापन विशेष हवन एवं पूर्णाहुति के साथ होता है।
इस अनुष्ठान में कौन सम्मिलित हो सकता है?
प्रत्येक श्रद्धालु एवं उनका परिवार इस अनुष्ठान में सम्मिलित हो सकता है — इसके लिए किसी विशेष योग्यता, दीक्षा अथवा पूर्व अनुभव की आवश्यकता नहीं है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उनके लिए उपयोगी है जिनके जीवन में धन आता तो है परन्तु टिकता नहीं, जिनकी आय के बाद भी बचत नहीं हो पाती, जिन पर कर्ज बढ़ रहा है, जिनका धन कहीं फँसा हुआ है, अथवा जिनके व्यापार एवं कार्य में बार-बार रुकावट आ रही है।
क्या मैं घर बैठे LIVE अनुष्ठान से जुड़ सकता हूँ?
जी हाँ। सम्पूर्ण अनुष्ठान का LIVE प्रसारण किया जाता है, ताकि जो श्रद्धालु जोधपुर आकर प्रत्यक्ष उपस्थित नहीं हो सकते वे भी अपने घर से अनुष्ठान से जुड़ सकें और पूजन, मंत्र जप एवं समापन हवन के साक्षी बन सकें। प्रसारण से जुड़ने की जानकारी पंजीकरण के पश्चात हमारी टीम द्वारा उपलब्ध करवा दी जाती है।
क्या संकल्प में मेरा एवं मेरे परिवार का नाम लिया जाएगा?
जी हाँ। यह इस अनुष्ठान की प्रमुख विशेषता है — प्रत्येक सम्मिलित परिवार के नाम से संकल्प लिया जाता है, ताकि अनुष्ठान का पुण्यफल उस परिवार को प्राप्त हो। समापन के हवन एवं पूर्णाहुति में भी प्रत्येक यजमान एवं उनके परिवार के लिए प्रार्थना की जाती है।
समापन का हवन एवं पूर्णाहुति क्या है?
अनुष्ठान का समापन एक विशेष हवन के साथ होता है, जिसमें पूर्णाहुति के रूप में 108 आहुतियाँ अर्पित की जाती हैं। पूर्णाहुति अनुष्ठान की अंतिम एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण आहुति मानी जाती है — इसी के साथ अनुष्ठान का सम्पूर्ण फल यजमानों को समर्पित किया जाता है और प्रत्येक परिवार के लिए माँ महालक्ष्मी से प्रार्थना की जाती है।
अनुष्ठान में कौन-कौन से यंत्र स्थापित किए जाते हैं?
अनुष्ठान के दौरान श्री यंत्र (जिसे यंत्रराज कहा जाता है और जो श्रीविद्या उपासना से जुड़ा है), महालक्ष्मी यंत्र, अष्टलक्ष्मी यंत्र (आदि, धन, धान्य, गज, संतान, वीर, विजय एवं विद्या लक्ष्मी के आठ स्वरूप), कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, व्यापार वृद्धि यंत्र एवं प्रथम पूज्य गणेश यंत्र की विधिवत स्थापना एवं पूजन किया जाता है। यंत्र परम्परा के अनुसार भोजपत्र, धातु (तांबा, पीतल अथवा चांदी) तथा स्फटिक (3D श्री यंत्र) जैसे माध्यमों पर तैयार किए जाते हैं।
क्या सम्मिलित होने पर मुझे यंत्र प्राप्त होगा?
यंत्र स्थापना अनुष्ठान का अभिन्न अंग है, तथा यंत्र भोजपत्र, धातु (तांबा, पीतल, चांदी) एवं स्फटिक जैसे माध्यमों पर तैयार किए जाते हैं। आपके लिए कौन-सा यंत्र उपयुक्त रहेगा और वह आपको किस प्रकार उपलब्ध होगा — इसकी जानकारी हमारी टीम पंजीकरण के समय आपको विस्तार से देगी। कृपया WhatsApp अथवा फोन पर सम्पर्क करें।
अनुष्ठान कहाँ होता है और पंजीकरण कैसे करें?
अनुष्ठान संस्थान, जोधपुर (राजस्थान) में गुरु माँ निधि श्रीमाली के सान्निध्य में सम्पन्न होता है। सम्मिलित होने हेतु आप इस पृष्ठ पर दिए गए पंजीकरण फॉर्म को भर सकते हैं, अथवा WhatsApp पर संदेश भेजकर या +91 89556 58362 पर कॉल करके हमारी टीम से सम्पर्क कर सकते हैं। पंजीकरण के पश्चात संकल्प, LIVE प्रसारण एवं समापन हवन से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी आपको उपलब्ध करवा दी जाएगी।

और कोई प्रश्न है? WhatsApp पर हमसे पूछें।

पंजीकरण

अनुष्ठान में सम्मिलित हों

अपने एवं अपने परिवार के नाम से संकल्प करवाने हेतु पंजीकरण करें। संकल्प, LIVE प्रसारण एवं समापन हवन से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी हमारी टीम आपको उपलब्ध करवाएगी।

पंजीकरण कैसे करें

नीचे दिए गए किसी भी माध्यम से हमसे सम्पर्क करें — हमारी टीम आपका पंजीकरण पूर्ण करवाएगी।

परिवार के नाम से संकल्पLIVE प्रसारणपूर्ण वैदिक विधि

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