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Hartalika Teej 2024 - हरतालिका तीज का महत्व और पूजा विधि

# Hartalika Teej 2024 - हरतालिका तीज का महत्व और पूजा विधि - Pandit NM Shrimali - Best Astrologer in India **Hartalika Teej 2024** — यह विषय मेरे पास रोजाना सैकड़ों लोग पूछते हैं। जब किसी की कुंडली म

7 July 2026 12 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। वे पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।

हरितालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन व्रत है, जो विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अनिवार्य माना जाता है। इस व्रत को "हरितालिका" इसलिए कहा जाता है क्योंकि कथा के अनुसार माँ पार्वती की सखी (आलिका) उन्हें पिता के घर से हर (हरत) कर वन में ले गई, जहाँ पार्वती ने बालू के शिवलिंग की पूजा कर भगवान शिव को पति रूप में पाया। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम हरितालिका तीज 2024 की तिथि, मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि, कथा, मंत्र, क्षेत्रीय भिन्नताओं और इसके धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

विषय सूची (Table of Contents)

  1. हरितालिका तीज 2024 — तिथि और शुभ मुहूर्त
  2. हरितालिका तीज का धार्मिक महत्व
  3. हरितालिका तीज की पौराणिक कथा
  4. हरियाली, कजरी और हरितालिका तीज — तुलना
  5. संपूर्ण पूजा विधि — चरणबद्ध मार्गदर्शन
  6. हरितालिका तीज के शुभ मंत्र
  7. 16 श्रृंगार — सुहाग का प्रतीक
  8. व्रत के नियम और सावधानियां
  9. क्षेत्रीय भिन्नताएं — उत्तर, दक्षिण और पश्चिम भारत
  10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  11. निष्कर्ष — हरितालिका तीज के संदेश

हरितालिका तीज 2024 — तिथि और शुभ मुहूर्त

तिथि: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया — 6 सितम्बर 2024 (शुक्रवार)

अवधि समय
तृतीया तिथि आरंभ 5 सितम्बर 2024, प्रातः 9:01 बजे
तृतीया तिथि समाप्ति 6 सितम्बर 2024, प्रातः 7:08 बजे
पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल) 6 सितम्बर शाम 6:45 से 8:15 बजे तक
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:08 से 12:55 बजे तक
निशीथ काल रात्रि 11:53 से 12:40 बजे तक

महत्वपूर्ण: कुछ पंचांगों के अनुसार इस वर्ष तृतीया तिथि के दो भाग पड़ रहे हैं — ऐसे में 6 सितम्बर को प्रदोष काल में पूजा सर्वोत्तम मानी जाती है। शाम को सूर्यास्त के बाद ही पूजा-विधि आरंभ करें।

हरितालिका तीज का धार्मिक महत्व

हरितालिका तीज का व्रत वैदिक परंपरा में सुहाग का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। इस व्रत के पीछे कई धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं हैं:

धार्मिक दृष्टि से:

  • पति की लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन की प्राप्ति
  • सुहाग में आने वाली कठिनाइयों और विघ्नों का निवारण
  • अटूट वैवाहिक प्रेम और सद्भावना की कामना
  • कुंडली के अनुसार सप्तम भाव के दोषों का शमन

आध्यात्मिक दृष्टि से:

  • माँ पार्वती के प्रति समर्पण और त्याग की भावना का विकास
  • सात्विकता और संयम का अभ्यास
  • मन की एकाग्रता और इच्छा शक्ति का विकास
  • शक्ति और शिव के अटूट संबंध का स्मरण

ज्योतिषीय दृष्टि से:

  • तृतीया तिथि संतान, साहस और पराक्रम का कारक है
  • शुक्र ग्रह की स्थिति अनुसार प्रेम संबंधों में मधुरता आती है

विवाह में देरी या दांपत्य में तनाव का कारण हर कुंडली में अलग होता है — कभी सप्तम भाव, कभी शुक्र या गुरु, कभी दशा। व्रत श्रद्धा का अंग है; कारण समझने के लिए कुंडली विश्लेषण करवाएँ, और विवाह तय हो रहा हो तो दोनों कुंडलियों का कुंडली मिलान करवाएँ।

हरितालिका तीज की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, अत्यंत सुंदर कन्या पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अनेक जन्मों तक तपस्या की। एक बार उनके पिता ने उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया।

जब पार्वती को यह ज्ञात हुआ, तो वे अपनी सखी के साथ घर से निकल गईं और एक निर्जन वन में जाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या में लीन हो गईं। उन्होंने हरे पत्तों और लकड़ी से शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा की। वे दिन में केवल एक बार वायु-मात्रा भोजन करतीं और निरंतर शिव का ध्यान करतीं।

उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने प्रकट होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। तभी से यह तिथि "हरितालिका" (हरत + आलिका, यानी सखी द्वारा हर कर ले जाई गई) के नाम से प्रसिद्ध हुई।

कथा का संदेश: सच्चे समर्पण, धैर्य और एकाग्रता से कोई भी असंभव कार्य संभव हो जाता है। हरितालिका तीज हमें सिखाती है कि सच्चे प्रेम में त्याग, तपस्या और विश्वास तीनों आवश्यक हैं।

हरियाली, कजरी और हरितालिका तीज — तुलना

सावन से भाद्रपद तक तीन तीज आती हैं, और तीनों के नियम अक्सर आपस में मिल जाते हैं। तीनों में शिव-पार्वती की पूजा और सुहाग की कामना है, पर तिथि और विधि अलग है:

पहलू हरियाली तीज कजरी तीज हरितालिका तीज
तिथि श्रावण शुक्ल तृतीया भाद्रपद कृष्ण तृतीया भाद्रपद शुक्ल तृतीया
व्रत का स्वरूप उत्सव अधिक; व्रत परिवार की परंपरा अनुसार व्रत, रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण प्रायः निर्जला, रात्रि जागरण, अगले दिन पारण
मुख्य पूजा शिव-पार्वती, झूला, हरे वस्त्र और चूड़ियाँ नीमड़ी माता की पूजा, कजरी गीत बालू या मिट्टी के शिवलिंग और पार्वती की पूजा
कहाँ अधिक प्रचलित राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र
कौन रखता है विवाहित महिलाएँ, नवविवाहिताएँ विशेष रूप से विवाहित महिलाएँ विवाहित महिलाएँ, और अच्छे वर की कामना से अविवाहित कन्याएँ

तिथियाँ और मुहूर्त हर वर्ष बदलते हैं; किसी भी वर्ष के लिए अपने स्थानीय पंचांग से मिलाएँ। हरतालिका तीज के नियम और उपाय विस्तार से हमारे हरतालिका तीज पूजन विधि वाले लेख में हैं।

संपूर्ण पूजा विधि — चरणबद्ध मार्गदर्शन

हरितालिका तीज की पूजा सवेरे से लेकर अगले दिन प्रातः तक चलती है। यहां चरणबद्ध विधि दी जा रही है:

सवेरे (प्रातःकाल — स्नान और संकल्प):

  1. ब्रह्म मुहूर्त (4-5 बजे) में उठें और स्नान करें
  2. शुद्ध वस्त्र धारण करें — रस्सी या ऊनी धागे से बंधी चूड़ियां पहनें
  3. सिंदूर, कुंकुम, मेहंदी, मांग टीका, बिंदी, पायल, चूड़ी, नथ, कंगन आदि सुहाग के प्रतीक धारण करें
  4. संकल्प लें: "मैं भगवान शिव-माँ पार्वती की पूजा अपने सुहाग की रक्षा हेतु कर रही हूँ"
  5. शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें

दोपहर (शिवलिंग निर्माण और पूजा):

  1. गंगाजल मिलाकर बालू या शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग बनाएं (बनाने की विधि पार्थिव शिवलिंग वाले लेख में है)
  2. पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) से शिवलिंग का अभिषेक करें
  3. शिवलिंग पर बेलपत्र, आम के पत्ते और फूल चढ़ाएं
  4. रोली, मौली, चंदन, कुमकुम, अशोक, चमेली के फूल अर्पित करें
  5. धूप-दीपक जलाएं और आरती करें
  6. भोग लगाएं — खीर, हलवा, मेवे, फल

शाम (प्रदोष काल — मुख्य पूजा):

  1. पुनः स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें
  2. शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें
  3. माँ पार्वती की पूजा 16 श्रृंगार के साथ करें
  4. हरितालिका की कथा सुनें या स्वयं पढ़ें
  5. शिव-पार्वती की आरती करें
  6. 108 बार शिव-पार्वती मंत्र का जाप करें

रात्रि (जागरण):

  1. संपूर्ण रात्रि जागरण करें
  2. शिव-पार्वती के भजन और कीर्तन करें
  3. महिलाएं मिलकर कथा सुनें और आपस में सुहाग की कामना करें
  4. प्रातःकाल तक व्रत रखें
  5. अगले दिन प्रातः विधिपूर्वक व्रत का पारण करें

हरितालिका तीज के शुभ मंत्र

शिव मंत्र:

  • ॐ नमः शिवाय (सर्वाधिक प्रचलित)
  • ॐ ह्रौं जूं सः शिवाय नमः
  • ॐ शं शिवाय नमः

पार्वती मंत्र:

  • ॐ ह्रीं श्रीं गौरि नमः
  • ॐ पार्वती नमः सहितायै नमः
  • ॐ ह्रीं पार्वत्यै नमः

संयुक्त मंत्र (विशेष फलदायी):

  • ॐ शिवायै नमः, ॐ शक्तये नमः
  • ॐ शिव-शक्ति नमः

जाप विधि:

  • 108 माला पर 11 बार या 21 बार जाप
  • सवेरे ब्रह्म मुहूर्त में जाप सर्वोत्तम
  • प्रदोष काल में 108 बार जाप अवश्य करें

16 श्रृंगार — सुहाग का प्रतीक

हरितालिका तीज पर 16 श्रृंगार का विशेष महत्व है। यह सुहागिन स्त्री की पहचान और उसके पति के प्रति समर्पण का प्रतीक है:

  1. स्नान — शुद्धता
  2. वस्त्र — लाल या पीला रंग
  3. सिंदूर — मांग में
  4. कुंकुम — माथे पर
  5. मेहंदी — हाथ-पैर पर
  6. बिंदी/कुंडल — माथे पर
  7. आँखों में काजल — सौंदर्य
  8. होंठों पर लाली — प्यार
  9. नथ/नाक की अँगूठी — आभूषण
  10. कर्णफूल/बाली — कान में
  11. चूड़ियां — हाथों में (लाल या हरी)
  12. कंगन — कलाई पर
  13. पायल — पैरों में
  14. बाजूबंद — भुजाओं पर
  15. हार/मंगलसूत्र — गले में
  16. इत्र/अत्तर — सुगंध

व्रत के नियम और सावधानियां

व्रत के नियम:

  • निर्जला व्रत (बिना जल) रखना सर्वोत्तम
  • यदि स्वास्थ्य कारण से असम्भव हो तो एक समय फलाहार करें
  • दिनभर मन में शिव-पार्वती का स्मरण रखें
  • क्रोध, असत्य, निंदा का त्याग करें
  • सात्विक भोजन ही ग्रहण करें (पारण में)

विशेष सावधानियां:

  • रजस्वला स्त्रियां इस व्रत को नहीं रखतीं — वे अगली तीज को व्रत कर सकती हैं
  • गर्भवती महिलाएं, मधुमेह, रक्तचाप या किडनी के रोग वाली महिलाएं निर्जला व्रत न रखें; चिकित्सक से परामर्श लेकर ही व्रत करें, और चक्कर या कमजोरी लगे तो तुरंत जल लें
  • व्रत में किसी भी जीव को कष्ट न दें
  • मांस, मदिरा, तामसिक भोजन का सेवन वर्जित
  • व्रत के दिन सिलाई-कढ़ाई आदि कार्य वर्जित

ज्योतिषीय सावधानी:

  • व्रत से पूर्व कुंडली में सप्तम भाव और शुक्र की स्थिति देखें
  • यदि कुंडली में शुक्र पीड़ित है तो अतिरिक्त उपाय करें
  • मंगल दोष हो तो पति के साथ संयुक्त रूप से पूजा करें

क्षेत्रीय भिन्नताएं — उत्तर, दक्षिण और पश्चिम भारत

हरितालिका तीज के रूप और विधि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कुछ भिन्नताएं रखती हैं:

उत्तर भारत (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार):

  • "तीज" के रूप में अत्यधिक प्रचलित
  • महिलाएं समूह में कथा सुनती हैं
  • पुरुष भी इस दिन पत्नी के लिए उपहार खरीदते हैं
  • विशेष हलवा और पूड़ी बनाई जाती है

राजस्थान:

  • सबसे धूमधाम से मनाया जाता है
  • महिलाएं झूला डालती हैं (सावन की तरह)
  • लाल चूड़ियों और चुनरी का विशेष महत्व

पश्चिम भारत (गुजरात, महाराष्ट्र):

  • "हरितालिका व्रत" के नाम से जाना जाता है
  • वट-सावित्री व्रत की तरह पूजा का स्वरूप
  • दक्षिण भारत की तुलना में कम प्रचलित

दक्षिण भारत (तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल):

  • "लक्ष्मी व्रतम" या "वरलक्ष्मी व्रतम" के रूप में
  • यहाँ सुहाग का प्रतीक कम, धन-समृद्धि का अधिक
  • विवाहित स्त्रियों के साथ अविवाहित कन्याएं भी रखती हैं
  • महिलाएं मंदिर जाकर भगवती की पूजा करती हैं

पूर्वी भारत (बंगाल, ओडिशा):

  • "श्रवण शुक्ल तृतीया" के नाम से
  • माँ काली और माँ पार्वती दोनों की पूजा
  • कलश स्थापना पर विशेष बल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरितालिका तीज 2024 कब है?

6 सितम्बर 2024, शुक्रवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन।

क्या अविवाहित कन्याएं भी यह व्रत रख सकती हैं?

हाँ, अविवाहित कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं। लेकिन सुहागिन महिलाओं का व्रत सर्वोत्तम फलदायी माना जाता है।

हरितालिका तीज का व्रत कितने दिन रखें?

एक दिन का व्रत है — प्रातः से अगले दिन प्रातः तक। निर्जला व्रत रखना सर्वोत्तम है, परंतु स्वास्थ्य कारण से एक समय फलाहार भी ग्रहण कर सकती हैं।

क्या व्रत में जल पी सकते हैं?

शास्त्रानुसार निर्जला व्रत (बिना जल) सर्वोत्तम है। कुछ विद्वान एक समय पानी पीने की अनुमति देते हैं, विशेषकर गर्भवती और बीमार महिलाओं के लिए।

हरितालिका तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर है?

दोनों अलग-अलग त्यौहार हैं — हरितालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को और हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। दोनों सुहाग व्रत हैं, परंतु हरितालिका को अधिक पवित्र माना जाता है।

क्या पुरुष भी इस व्रत को रख सकते हैं?

शास्त्रों में मुख्य रूप से महिलाओं का व्रत बताया गया है, परंतु कुछ पुरुष पत्नी की सुख-शांति के लिए भी व्रत रखते हैं।

क्या हरितालिका तीज का व्रत अशुभ योग में रख सकते हैं?

यदि तिथि व्यतिपात या वैधृति योग में पड़ रही हो तो उस दिन व्रत नहीं रखना चाहिए। अगले दिन या पंचांग के अनुसार उचित दिन देखकर व्रत करें।

निष्कर्ष — हरितालिका तीज के संदेश

हरितालिका तीज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेशों का वाहक है। यह हमें सिखाता है कि:

  • सच्चे प्रेम में त्याग और समर्पण आवश्यक है — माँ पार्वती का उदाहरण हमें प्रेरित करता है
  • धैर्य और एकाग्रता से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है — अनेक जन्मों की तपस्या का संदेश
  • सात्विक जीवनशैली अपनाने से मानसिक और आध्यात्मिक शांति मिलती है — निर्जला व्रत का रहस्य
  • पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए समय-समय पर विशेष अनुष्ठान आवश्यक हैं — हरितालिका तीज एक ऐसा ही अवसर है

हरितालिका तीज केवल सुहागिन स्त्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है जो अपने प्रेम, अपने लक्ष्य और अपने आराध्य के प्रति समर्पित है। इस व्रत को विधिपूर्वक और पूर्ण श्रद्धा से रखना परिवार में प्रेम और सद्भाव की कामना का सुंदर माध्यम है। यदि व्रत की पूजा किसी पंडित से विधिपूर्वक करवानी हो, तो हमारी ई-पूजा सेवा देखें।

शुभकामनाएँ सहित, गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली 📞 संपर्क: www.panditnmshrimali.com


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Frequently Asked Questions

हरितालिका तीज 2024 कब है?+
6 सितम्बर 2024, शुक्रवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:45 से 8:15 बजे तक (प्रदोष काल)।
क्या अविवाहित कन्याएं भी यह व्रत रख सकती हैं?+
हाँ, अविवाहित कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं।
हरितालिका तीज का व्रत कितने दिन रखें?+
एक दिन का व्रत — प्रातः से अगले दिन प्रातः तक। निर्जला व्रत सर्वोत्तम है।
क्या व्रत में जल पी सकते हैं?+
शास्त्रानुसार निर्जला व्रत सर्वोत्तम है। गर्भवती और बीमार महिलाएं एक समय पानी पी सकती हैं।
हरितालिका तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर है?+
हरितालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को और हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। हरितालिका को अधिक पवित्र माना जाता है।
क्या अशुभ योग में हरितालिका तीज का व्रत रख सकते हैं?+
तिथि व्यतिपात या वैधृति योग में व्रत वर्जित है। पंचांग देखकर उचित दिन का चयन करें।
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Written by

Nidhi Shrimali

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