✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। इनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को "अजा एकादशी" कहा जाता है — यह वर्ष की 24 एकादशियों में विशेष स्थान रखती है। "अजा" शब्द का अर्थ ही "अजन्मा" या "अविनाशी" है, जो स्वयं भगवान विष्णु का वाचक है। इस एकादशी पर किया गया व्रत पाप-क्षय, ब्रह्महत्या-दोष निवारण और मोक्ष-प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन माना गया है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम 2026 की तिथि-मुहूर्त, पौराणिक कथा, "अजा" नाम का गूढ़ अर्थ, संपूर्ण पूजा विधि, मंत्र, पारण-विधि, फायदे और सावधानियों पर चर्चा करेंगे।
विषय सूची (Table of Contents)
- अजा एकादशी क्या है — परिचय
- 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
- "अजा" नाम का अर्थ और गूढ़ रहस्य
- धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
- अजा एकादशी की पौराणिक कथा — राजा मान्धाता और हर्षण
- पूजा सामग्री की संपूर्ण सूची
- संपूर्ण पूजा विधि — चरणबद्ध मार्गदर्शन
- शुभ मंत्र और जाप विधि
- पारण कब और कैसे करें
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अजा एकादशी क्या है — परिचय
अजा एकादशी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष (गायत्री पक्ष) की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली एक अत्यंत पावन एकादशी है। पुराणों के अनुसार वर्ष में कुल 24 एकादशियां आती हैं — दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) में 12-12। इन सभी में अजा एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि इसका उल्लेख स्वयं भविष्योत्तर पुराण के अजा एकादशी व्रत माहात्म्य में विस्तार से मिलता है।
यह व्रत भगवान विष्णु के "अजा" यानी अविनाशी स्वरूप को समर्पित है। शास्त्र कहते हैं कि जो व्यक्ति पूर्ण विधि-विधान और श्रद्धा के साथ इस व्रत को करता है, उसके समस्त पापों का क्षय हो जाता है। यहाँ तक कि ब्रह्महत्या, गोहत्या जैसे महापातकों का भी नाश हो जाता है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भाद्रपद का पूरा मास ही विष्णु-भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है — इसी माह जन्माष्टमी (भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव) आती है, गणेश चतुर्थी आती है, और इसी माह अजा एकादशी आती है। अतः यह समय सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का चरम होता है।
व्रत का मुख्य उद्देश्य इंद्रियों पर संयम, मन की शुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा की प्राप्ति है। एकादशी का शाब्दिक अर्थ ही है — "एकादश" अर्थात् ग्यारहवीं (तिथि)। प्रत्येक मास की ग्यारहवीं तिथि को भगवान विष्णु की पूजा का विशेष दिन माना गया है।
2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
अजा एकादशी 2026: रविवार, 23 अगस्त 2026
| अवधि | समय |
|---|---|
| एकादशी तिथि आरंभ | 22 अगस्त 2026, रात्रि 09:14 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्ति | 23 अगस्त 2026, रात्रि 11:07 बजे |
| व्रत और पूजा दिन | 23 अगस्त 2026, रविवार |
| पारण दिन | 25 अगस्त 2026, मंगलवार (सूर्योदय के बाद) |
| प्रदोष काल पूजा | 23 अगस्त शाम 6:50 से 8:20 तक |
| हरिवासर (रविवार) का संयोग | अत्यंत शुभ |
| ब्रह्म मुहूर्त (जाप के लिए) | 24 अगस्त प्रातः 4:32 से 5:18 तक |
विशेष बात: 2026 में अजा एकादशी रविवार (हरिवासर) को पड़ रही है, जिससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही भाद्रपद मास और शुक्ल पक्ष का संयोग इसे अत्यंत फलदायी बनाता है।
कुछ पंचांगों के अनुसार एकादशी तिथि 22 अगस्त रात्रि से ही प्रारंभ हो रही है, ऐसे में बहुत से विद्वान 22 अगस्त की रात्रि से ही सात्विक भोजन आरंभ करने का परामर्श देते हैं। परंतु मुख्य व्रत दिवस 23 अगस्त ही माना जाएगा।
"अजा" नाम का अर्थ और गूढ़ रहस्य
"अजा" संस्कृत का एक गूढ़ और अत्यंत महत्वपूर्ण शब्द है। इसके तीन प्रमुख अर्थ हैं:
1. अजन्मा (Unborn): भगवान विष्णु अजन्मा हैं — वे सनातन, शाश्वत और नित्य हैं। जन्म-मृत्यु के चक्र से परे हैं। इस एकादशी पर व्रत करने वाला व्यक्ति भगवान के इसी अजन्मा स्वरूप की आराधना करता है।
2. अविनाशी (Indestructible): "अ" उपसर्ग का अर्थ है "नहीं" और "जा" का अर्थ है "जन्म" — अर्थात् वह जिसका जन्म नहीं होता, अर्थात् विनाशरहित। भगवान विष्णु समस्त संहार-शक्तियों से परे हैं।
3. अजा = बकरी (Goat): कुछ विद्वानों के अनुसार "अजा" का एक अर्थ बकरी भी है। इस संदर्भ में अजा एकादशी के दिन बकरी का दान करने का विशेष विधान है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन बकरी दान करते थे।
श्रीमद्भागवत पुराण और भविष्योत्तर पुराण में स्पष्ट लिखा है कि "अजा" शब्द भगवान विष्णु के परमपुरुष स्वरूप का वाचक है। जो व्यक्ति इस एकादशी पर भगवान विष्णु का स्मरण करता है, वह भगवान के अजन्मा, अविनाशी स्वरूप का आशीर्वाद प्राप्त करता है।
वामन पुराण के अनुसार "अजा" का एक और गूढ़ अर्थ है — "वह जो जागता नहीं" (अ + जा)। यह भगवान विष्णु के योग-निद्रा स्वरूप का सूचक है, जिसमें सम्पूर्ण सृष्टि विलीन रहती है। इस एकादशी पर किया गया व्रत इसी परम-योग-निद्रा का स्मरण कराता है।
धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
धार्मिक दृष्टि से
- पाप-क्षय का सर्वोत्तम साधन — भविष्योत्तर पुराण के अनुसार इस एकादशी का व्रत सभी पापों को नष्ट कर देता है
- ब्रह्महत्या दोष का निवारण — शास्त्रों में कहा गया है कि यह व्रत ब्रह्महत्या जैसे महापातक का भी प्रायश्चित है
- गोहत्या दोष का निवारण — गो-सेवा और गो-रक्षा का पुण्य प्राप्त होता है
- मोक्ष-प्राप्ति — अंततः भगवान विष्णु के धाम की प्राप्ति
- पितृ-तर्पण — इस दिन पितरों का स्मरण और तर्पण भी विशेष फलदायी माना गया है
आध्यात्मिक दृष्टि से
- मन की शुद्धि — उपवास और सात्विक आचरण से मन के विकारों का शमन
- इंद्रिय-संयम — जीभ, काम, क्रोध पर नियंत्रण का अभ्यास
- चेतना का विस्तार — भगवान विष्णु के ध्यान से आत्मिक चेतना का विकास
- कर्म-बंधन से मुक्ति — कर्मों के फल को भगवान को समर्पित करने की भावना
- भक्ति-मार्ग पर अग्रसर — विष्णु-भक्ति की ओर आस्था का दृढ़ होना
ज्योतिषीय दृष्टि से
- भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी को सूर्य सिंह राशि में होता है — यह सिंहासन और राज-योग का कारक
- एकादशी तिथि बुध ग्रह से संबंधित है — बुध की कृपा से विद्या, बुद्धि और वाणी में सुधार
- रविवार (हरिवासर) का संयोग होने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है — आत्मबल, साहस और राज्य-लाभ
- भाद्रपद मास मंगल ग्रह से संबद्ध है — भूमि-धन और स्थिरता का कारक
- कुंडली में बुध, सूर्य या मंगल कमजोर होने पर यह व्रत विशेष लाभदायी
अजा एकादशी की पौराणिक कथा — राजा मान्धाता और हर्षण
अजा एकादशी की कथा भविष्योत्तर पुराण के अजा एकादशी व्रत माहात्म्य में विस्तार से वर्णित है। यह कथा अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद है:
कथा का आरंभ
अत्यंत प्राचीन काल की बात है। राजा मान्धाता (इक्ष्वाकु वंश के एक महान राजा) के राज्य में एक ब्राह्मण था जिसका नाम था हर्षण। हर्षण बहुत ही कुशाग्र बुद्धि का, विद्वान और शास्त्रों का ज्ञाता था, किंतु उसने अपनी विद्या का उपयोग कभी धर्म-कार्य के लिए नहीं किया।
एक बार राजा मान्धाता ने अपनी प्रजा में अनेक ब्राह्मणों को आमंत्रित किया और उनसे धर्म-चर्चा की। उस समय हर्षण ने राजा से कहा कि "मैंने भविष्योत्तर पुराण में अजा एकादशी का व्रत पढ़ा है, जो सभी पापों का नाश करने वाला है।"
कथा का विकास
हर्षण ने राजा को अजा एकादशी की महिमा समझाई। उसने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को जो व्यक्ति पूर्ण विधि-विधान से व्रत करता है, उसके समस्त पाप — चाहे वे कितने भी गंभीर क्यों न हों — सब नष्ट हो जाते हैं। यहाँ तक कि जो मनुष्य अपने जीवनकाल में एक भी एकादशी व्रत नहीं कर पाया, उसे भी अजा एकादशी के प्रभाव से मोक्ष प्राप्त होता है।
हर्षण ने राजा को अजा एकादशी व्रत के नियम बताए — दशमी (10वीं तिथि) से ही एक बार भोजन, एकादशी को निर्जला व्रत, द्वादशी को पारण।
कथा का अंत और संदेश
राजा मान्धाता ने हर्षण के कथनानुसार अजा एकादशी का व्रत किया और उसके अपूर्व फल प्राप्त किए। इस कथा से हमें तीन महत्वपूर्ण शिक्षा मिलती है:
- विद्या का सदुपयोग — हर्षण ने अपनी विद्या का उपयोग राजा को धर्म-मार्ग दिखाने में किया
- पाप-क्षय का अटूट मार्ग — एकादशी व्रत पापों से मुक्ति का सर्वोत्तम उपाय है
- राजा-प्रजा का धर्म-संवाद — राजा और विद्वान के बीच धर्म-चर्चा समाज के उत्थान के लिए आवश्यक है
पूजा सामग्री की संपूर्ण सूची
अजा एकादशी की पूजा के लिए निम्न सामग्री एक दिन पहले (दशमी को) ही इकट्ठी कर लें:
| क्र. | सामग्री | उपयोग |
|---|---|---|
| 1 | भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र | मुख्य पूजा |
| 2 | तुलसी का पौधा या तुलसी-दल | अनिवार्य — एकादशी पर तुलसी अर्पित करें |
| 3 | पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) | अभिषेक के लिए |
| 4 | गंगाजल | शुद्धि और अभिषेक |
| 5 | रोली, मौली, चंदन, कुमकुम | तिलक और पूजा |
| 6 | अक्षत (चावल) | पूजा और तर्पण |
| 7 | पीले या सफेद फूल | भगवान विष्णु को अर्पित |
| 8 | धूप-दीपक | आरती |
| 9 | घी का दीपक (5 या 11) | अखंड ज्योति |
| 10 | कपूर | आरती |
| 11 | अगरबत्ती | सुगंध |
| 12 | पान के पत्ते, लौंग, सुपारी | भोग |
| 13 | सूखे मेवे और फल | भोग |
| 14 | पंखा, चादर, आसन | पूजा-स्थल की शोभा |
| 15 | कलश (मिट्टी या तांबे का) | कलश स्थापना |
| 16 | सिक्का या सोने-चाँदी का आभूषण | कलश में रखने के लिए |
| 17 | विष्णु सहस्रनाम की पुस्तिका | पाठ के लिए |
| 18 | नारियल | भोग और कलश पर रखने के लिए |
| 19 | पीला वस्त्र (पीतांबर) | भगवान को चढ़ाने के लिए |
| 20 | तिल और गुड़ | दान के लिए |
संपूर्ण पूजा विधि — चरणबद्ध मार्गदर्शन
दशमी तिथि (22 अगस्त 2026) — व्रत की पूर्व-तैयारी
- एक बार भोजन: दशमी तिथि को केवल एक समय भोजन करें — सात्विक और शुद्ध
- पूजा सामग्री संग्रह: ऊपर बताई गई सभी सामग्री इकट्ठी करें
- व्रत का संकल्प: शाम को भगवान विष्णु के सामने संकल्प लें
- बाल-नख कटवाएं: स्वच्छता का ध्यान रखें
- तुलसी में जल दें: प्रतिदिन की तरह तुलसी-सेवा करें
एकादशी तिथि (23 अगस्त 2026) — मुख्य व्रत दिवस
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:00-5:30):
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें
- स्नान करें और शुद्ध वस्त्र (पीला रंग श्रेष्ठ) धारण करें
- भगवान विष्णु के सामने दीपक प्रज्वलित करें
- संकल्प लें: "मैं भगवान विष्णु की कृपा और अजा एकादशी के प्रभाव से अपने पापों का क्षय करने हेतु यह व्रत रख रहा/रही हूँ"
- भगवान विष्णु का ध्यान करें
कलश स्थापना:
- एक मिट्टी या तांबे के कलश में जल भरें
- उसमें सिक्का, सुपारी, आम के पत्ते और पंचामृत डालें
- कलश पर नारियल रखें
- कलश के ऊपर तुलसी-दल रखें
- कलश की विधिवत स्थापना करें
मुख्य पूजा:
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें
- मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं
- गंगाजल से शुद्ध करें
- चंदन, रोली, कुमकुम का तिलक लगाएं
- पीले फूल, तुलसी-दल अर्पित करें
- पीला वस्त्र (पीतांबर) भगवान को चढ़ाएं
- आभूषण (मुकुट, कुंडल आदि) सजाएं
आरती और धूप-दीप:
- घी का दीपक जलाएं (5 या 11 दीपक)
- अगरबत्ती और धूप जलाएं
- भगवान विष्णु की आरती करें
- "ॐ जय जगदीश हरे" का गायन करें
- भोग लगाएं — खीर, पंचामृत, फल, मेवे
विष्णु सहस्रनाम पाठ:
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
- यदि पूरा पाठ संभव न हो तो "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें
- हर नाम के बाद "ॐ" और "नमः" जोड़ें
तर्पण और दान:
- पितरों का स्मरण करते हुए जल-तर्पण करें
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं
- तिल, गुड़, सफेद वस्त्र का दान करें
- गाय को हरा चारा खिलाएं
- जरूरतमंदों को अन्नदान करें
शाम/रात्रि:
- शाम को पुनः दीपक जलाएं
- भजन-कीर्तन करें
- "विष्णु सहस्रनाम" का पुनः पाठ करें
- रात्रि जागरण करें (या पूजा-स्थल पर शयन करें)
- ब्रह्मचर्य का पालन करें
शुभ मंत्र और जाप विधि
प्रमुख मंत्र
1. विष्णु मंत्र (सर्वोत्तम):
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
यह 12 अक्षरों का मंत्र है। विष्णु पुराण में कहा गया है कि इस मंत्र का जाप करने वाले के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। 108 माला पर प्रतिदिन जाप करें।
2. अष्टाक्षर मंत्र:
ॐ नमो नारायणाय
यह 8 अक्षरों का अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है। 108 या 1008 बार जाप करें।
3. द्वादशाक्षर मंत्र:
ॐ विष्णवे नमः (या) ॐ केशवाय नमः
विष्णु के विभिन्न नामों का 108 बार जाप करें।
4. गायत्री मंत्र:
ॐ भर्गो देवस्य धीमहि, दियो यो नः प्रचोदयात्
विष्णु-गायत्री का 108 बार जाप।
5. "ॐ जय जगदीश हरे" मंत्र: यह मंत्र आरती में गायन के लिए विशेष है। पूजा के समय इस मंत्र का गायन करें।
6. विष्णु ध्यान मंत्र:
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
जाप विधि
| समय | जाप संख्या | विशेषता |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त (सवेरे) | 108 माला | सर्वोत्तम |
| प्रदोष काल (शाम) | 11 माला | अनिवार्य |
| रात्रि जागरण | जितना संभव | श्रेष्ठ |
| एकादशी के दिन | कम से कम 23 माला | न्यूनतम |
जाप के नियम:
- माला तुलसी की या रुद्राक्ष की हो तो श्रेष्ठ
- जाप बैठकर करें — आसन कुश या ऊनी
- सामने भगवान विष्णु की मूर्ति रखें
- मन में भगवान का ध्यान करते हुए जापें
- उच्चारण शुद्ध होना चाहिए
पारण कब और कैसे करें
पारण दिन: 25 अगस्त 2026, मंगलवार (सूर्योदय के बाद)
पारण की विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें
- भगवान विष्णु की पूजा करें
- "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें
- ब्राह्मण को भोजन कराएं
- पहले स्वयं भगवान का भोग लगाएं
- फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें
पारण में क्या खाएं
- शुद्ध सात्विक भोजन — बिना प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा
- दूध, दही, घी से बनी वस्तुएं
- खीर, हलवा, मीठे पकवान
- फल, मेवे, सूखे मेवे
- सात्विक सब्जियां — अदरक, हल्दी, जीरा आदि से बनी
- बासी न खाएं — ताजा भोजन ही करें
पारण की सावधानियां
- पारण बिना पूजा और दान के न करें
- ब्राह्मण-भोजन के बाद ही स्वयं भोजन करें
- सूर्यास्त के बाद पारण वर्जित — सूर्यास्त से पूर्व ही पारण कर लें
- हरिवासर (रविवार) को पारण करना सर्वोत्तम
- पारण में तिल मिला भोजन अत्यंत शुभ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अजा एकादशी 2026 कब है?
अजा एकादशी 2026 को 23 अगस्त 2026, रविवार को है। एकादशी तिथि 22 अगस्त रात्रि 09:14 बजे से प्रारंभ होकर 23 अगस्त रात्रि 11:07 बजे तक रहेगी। पारण 25 अगस्त 2026 को सूर्योदय के बाद करें।
क्या अजा और परिवर्तिनी एकादशी एक ही हैं?
नहीं। अजा एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को और परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है। दोनों अलग-अलग एकादशियां हैं, परंतु दोनों का ही भगवान विष्णु से सीधा संबंध है। अजा का व्रत किया जाता है और परिवर्तिनी का व्रत पारण के रूप में लिया जाता है।
क्या व्रत न कर सकें तो क्या करें?
यदि स्वास्थ्य या अन्य कारणों से पूर्ण निर्जला व्रत नहीं रख सकते, तो एक समय फलाहार कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त:
- केवल दूध या फलाहार ले सकते हैं
- भगवान विष्णु का नाम-स्मरण कर सकते हैं
- 108 बार "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप कर सकते हैं
- तुलसी-दल का दान कर सकते हैं
- किसी ब्राह्मण को भोजन करा सकते हैं
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ सुन सकते हैं
क्या दशमी से ही सात्विक भोजन शुरू करें?
हाँ, यह अत्यंत शुभ है। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार जो व्यक्ति दशमी तिथि से ही एक बार भोजन और सात्विक आहार आरंभ कर देता है, उसका व्रत दोगुना फलदायी होता है। दशमी को प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, तामसिक भोजन का त्याग कर दें।
क्या बालक (छोटे बच्चे) अजा एकादशी का व्रत कर सकते हैं?
नहीं। शास्त्रानुसार 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों को व्रत नहीं करवाना चाहिए। उन्हें भगवान विष्णु की कथा सुनाएं, तुलसी में जल दिलवाएं, दीपक जलवाएं — इससे बालक में धर्म-भावना जागती है। किशोर (12-16 वर्ष) अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में अर्ध-व्रत (फलाहार) कर सकते हैं।
क्या अजा एकादशी पर तिल का दान विशेष फलदायी है?
हाँ, अत्यंत शुभ। अजा एकादशी पर तिल, गुड़, सफेद वस्त्र, घी, सोने-चांदी का दान अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्र कहते हैं कि "तिलं ददाति यो ह्यजां, स याति हरि-मन्दिरम्" — अर्थात् जो अजा एकादशी पर तिल दान करता है, वह भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करता है। पितरों की शांति के लिए तिल-जल तर्पण अवश्य करें।
अजा एकादशी का विशेष फल क्या है?
भविष्योत्तर पुराण के अनुसार अजा एकादशी का व्रत करने वाले को ये फल प्राप्त होते हैं:
- समस्त पापों का क्षय
- ब्रह्महत्या और गोहत्या जैसे महापातकों का निवारण
- मोक्ष की प्राप्ति
- संतान, धन, यश, आयु की वृद्धि
- कुंडली के दोषों का शमन
- पितरों का आशीर्वाद और उद्धार
- भगवान विष्णु के धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति
- अगले जन्म में सुख-समृद्धि
क्या अजा एकादशी पर श्राद्ध कर सकते हैं?
हाँ, बिल्कुल। अजा एकादशी पर पितरों का श्राद्ध और तर्पण अत्यंत शुभ माना गया है। पितरों की तृप्ति के लिए तिल-जल, अक्षत, फल का तर्पण करें। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार इस दिन किया गया तर्पण पितरों को सीधे मोक्ष प्रदान करता है।
अजा एकादशी पर कौन-से कार्य वर्जित हैं?
- चावल, मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन का सेवन वर्जित
- बाल-नख काटना वर्जित
- सिलाई-कढ़ाई कार्य वर्जित
- दाँतों से दाँत बजाना (दातून क्रिया) वर्जित
- मैथुन वर्जित
- असत्य, क्रोध, चुगली वर्जित
- तामसिक भोजन और व्यवहार वर्जित
- बिना स्नान के भोजन वर्जित
क्या अजा एकादशी पर मंदिर जाना चाहिए?
अवश्य। अजा एकादशी पर भगवान विष्णु के मंदिर में जाकर दर्शन-पूजन करना अत्यंत शुभ है। विशेष रूप से जगन्नाथ पुरी, बद्रीनाथ, तिरुपति, वृंदावन, अयोध्या, मथुरा जैसे विष्णु धामों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंदिर में तुलसी-दल, पीले फूल, माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
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[ { "question": "अजा एकादशी 2026 कब है?", "answer": "अजा एकादशी 2026 को 23 अगस्त, रविवार को है। एकादशी तिथि 22 अगस्त रात्रि 09:14 बजे से 23 अगस्त रात्रि 11:07 बजे तक है। पारण 25 अगस्त मंगलवार को सूर्योदय के बाद करें।" }, { "question": "क्या अजा और परिवर्तिनी एकादशी एक ही हैं?", "answer": "नहीं। अजा एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की और परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी है। दोनों अलग-अलग हैं, परंतु दोनों का संबंध भगवान विष्णु से है।" }, { "question": "व्रत न कर सकें तो क्या करें?", "answer": "स्वास्थ्य कारण से निर्जला व्रत असंभव हो तो एक समय फलाहार करें, 108 बार 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें, तुलसी-दल का दान करें, ब्राह्मण को भोजन कराएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ सुनें।" }, { "question": "क्या दशमी से ही सात्विक भोजन शुरू करना चाहिए?", "answer": "हाँ, भविष्योत्तर पुराण के अनुसार दशमी तिथि से एक बार भोजन और सात्विक आहार शुरू करने से व्रत का फल दोगुना हो जाता है। दशमी से प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा का त्याग कर दें।" }, { "question": "क्या बालक अजा एकादशी का व्रत कर सकते हैं?", "answer": "नहीं, 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को व्रत नहीं करवाना चाहिए। उन्हें तुलसी में जल दिलवाएं, कथा सुनाएं, दीपक जलवाएं — इससे बालक में धर्म-भावना जागती है। 12-16 वर्ष के किशोर माता-पिता के मार्गदर्शन में फलाहार कर सकते हैं।" }, { "question": "अजा एकादशी पर तिल का दान क्यों विशेष है?", "answer": "शास्त्र कहते हैं 'तिलं ददाति यो ह्यजां, स याति हरि-मन्दिरम्' — अजा एकादशी पर तिल दान करने वाला भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करता है। पितरों की शांति के लिए तिल-जल तर्पण अवश्य करें।" } ]
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Frequently Asked Questions
अजा एकादशी 2026 कब है?+
क्या अजा और परिवर्तिनी एकादशी एक ही हैं?+
व्रत न कर सकें तो क्या करें?+
क्या दशमी से ही सात्विक भोजन शुरू करना चाहिए?+
क्या बालक अजा एकादशी का व्रत कर सकते हैं?+
अजा एकादशी पर तिल का दान क्यों विशेष है?+
Written by
Nidhi Shrimali
Vedic Astrologer
Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.