⚡ संक्षेप में — सावन सोमवार व्रत
लेखिका: निधि श्रीमाली | वैदिक ज्योतिषी, 18+ वर्षों का अनुभव
अद्यतन: अगस्त 2026 | पढ़ने का समय: 12 मिनट
रेटिंग: ★★★★★ 4.9/5 (1,425+ परामर्श समीक्षाओं से)
सावन सोमवार व्रत में सोमवार को उपवास रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है और शिव-पार्वती का पूजन होता है। संकल्प तीन प्रकार का होता है — सावन के सोमवार, सोलह सोमवार, अथवा सोम प्रदोष। अविवाहित कन्याएँ शीघ्र विवाह हेतु और विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु हेतु यह व्रत रखती हैं।
विषय सूची
- सोमवार ही क्यों
- व्रत के तीन प्रकार
- कौन रख सकता है
- पूजा विधि — चरण दर चरण
- पूजा सामग्री
- व्रत के नियम — क्या खाएँ
- सोलह सोमवार व्रत विधि
- सोलह सोमवार व्रत कथा
- मंत्र और स्तोत्र
- उद्यापन विधि
- व्रत छूट जाए तो
- ज्योतिषीय दृष्टि से किसे लाभ
सोमवार ही क्यों
सोमवार का संबंध शिव से दो कारणों से है, और दोनों जानने योग्य हैं।
प्रथम — 'सोम' का अर्थ चंद्रमा है। सोमवार चंद्रमा का दिन है। भगवान शिव अपने मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं, इसीलिए वे सोमनाथ कहलाते हैं — चंद्रमा के स्वामी। जो दिन चंद्रमा का है, वह उसके स्वामी का भी है।
द्वितीय — ज्योतिषीय। चंद्रमा मन का कारक है। शिव उपासना का मूल उद्देश्य चित्त की शांति है। जिस दिन चंद्रमा का प्रभाव प्रबल हो, उस दिन मन से संबंधित साधना अधिक फलदायी होती है। यह केवल परंपरा नहीं है — मेरे पास जिन जजमानों का चंद्रमा पीड़ित है, उन्हें सोमवार का व्रत और शिव उपासना देने पर परिणाम स्पष्ट दिखता है।
सावन मास में यह प्रभाव और बढ़ जाता है, क्योंकि सावन स्वयं शिव को समर्पित मास है। सावन का सोमवार अर्थात् शिव का मास और शिव का दिन — दोनों का संयोग। यही कारण है कि वर्ष के सभी सोमवारों में सावन के सोमवार सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं।
व्रत के तीन प्रकार
जजमान प्रायः भ्रमित होते हैं कि कौन सा व्रत रखें। तीन स्पष्ट विकल्प हैं।
| प्रकार | अवधि | किसके लिए |
|---|---|---|
| सावन सोमवार व्रत | सावन मास के 4 या 5 सोमवार | सामान्य शिव कृपा; प्रथम बार व्रत करने वालों के लिए सर्वोत्तम आरंभ |
| सोलह सोमवार व्रत | लगातार 16 सोमवार (लगभग 4 माह) | विशिष्ट मनोकामना — विवाह, संतान, रोग निवारण |
| सोम प्रदोष व्रत | सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष | अत्यंत फलदायी; मास में एक-दो बार |
मेरा सुझाव: यदि आप पहली बार व्रत कर रहे हैं, तो सावन के सोमवार से आरंभ करें। सोलह सोमवार का संकल्प चार माह का है और बीच में छोड़ देने से मन में अपराध-भाव उत्पन्न होता है। पहले छोटा संकल्प पूरा करें, फिर बड़ा लें। पूरा किया गया छोटा व्रत, अपूर्ण बड़े व्रत से श्रेष्ठ है।
सोलह सोमवार व्रत आरंभ करने का सर्वोत्तम समय सावन का प्रथम सोमवार है, अथवा चैत्र, कार्तिक या मार्गशीर्ष मास का प्रथम सोमवार।
कौन रख सकता है
इस व्रत में कोई प्रतिबंध नहीं है — स्त्री, पुरुष, बालक, वृद्ध, किसी भी जाति और किसी भी राशि का व्यक्ति रख सकता है। परंपरा में इसे विशेष रूप से इनके लिए बताया गया है:
- अविवाहित कन्याएँ — शीघ्र और योग्य विवाह हेतु। परंपरा के अनुसार देवी पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए यही व्रत किया था।
- विवाहित स्त्रियाँ — पति की दीर्घायु और दांपत्य सुख हेतु।
- निःसंतान दंपत्ति — संतान प्राप्ति हेतु।
- रोगी अथवा दीर्घकालिक कष्ट से पीड़ित — आरोग्य हेतु, महामृत्युंजय जाप के साथ।
- जिनका चंद्रमा पीड़ित है — मानसिक अशांति, अनिद्रा, चिंता।
- शनि दोष से पीड़ित — शनि शिव के भक्त हैं; शिव उपासना से शनि का ताप कम होता है।
किन्हें सावधानी रखनी चाहिए: गर्भवती स्त्रियाँ, मधुमेह के रोगी, बालक और वृद्ध जन। इनके लिए निर्जला अथवा कठोर उपवास वर्जित है। फलाहार अथवा एक समय सात्विक भोजन के साथ व्रत पूर्णतः मान्य है। शास्त्रों में सामर्थ्य के अनुसार आचरण का ही विधान है — शरीर को हानि पहुँचाकर किया गया व्रत पुण्य नहीं देता।
पूजा विधि — चरण दर चरण
- प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठें और स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें — श्वेत अथवा हल्के रंग के।
- संकल्प लें। हाथ में जल और अक्षत लेकर अपना नाम, गोत्र और उद्देश्य कहते हुए संकल्प करें — कितने सोमवार का व्रत रखेंगे, यह स्पष्ट कहें।
- शिवलिंग की स्थापना — घर में हो तो पूजा स्थान में, अथवा मंदिर जाएँ। नर्मदेश्वर शिवलिंग गृह पूजा हेतु सर्वोत्तम माना जाता है।
- जलाभिषेक — ताँबे के लोटे से शुद्ध जल की धार अर्पित करें, ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए। यह व्रत का मूल कर्म है।
- पंचामृत अभिषेक — कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से क्रमशः अभिषेक, प्रत्येक के बाद जल से।
- पुनः जलाभिषेक और वस्त्र से पोंछना।
- अर्पण — बिल्व पत्र (तीन पत्तों वाला, चिकनी सतह नीचे), चंदन, अक्षत, सफेद पुष्प, धतूरा, भाँग, भस्म।
- गौरी-गणेश पूजन — शिव के साथ पार्वती और गणेश का पूजन आवश्यक है। यह व्रत केवल शिव का नहीं, शिव परिवार का है।
- दीप और धूप — घी का दीपक जलाएँ।
- नैवेद्य — फल, मिष्ठान्न, पंचामृत।
- मंत्र जाप — ॐ नमः शिवाय 108 बार, तत्पश्चात महामृत्युंजय मंत्र 11 या 108 बार।
- व्रत कथा का पाठ — सोलह सोमवार व्रत कथा अथवा शिव कथा।
- आरती और प्रसाद वितरण।
- सायंकाल पुनः दीप जलाएँ, आरती करें, तत्पश्चात व्रत खोलें।
पूजा सामग्री
| अभिषेक हेतु | शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शर्करा (पंचामृत) |
|---|---|
| पत्र-पुष्प | बिल्व पत्र, धतूरा, भाँग, आक (मदार) के पुष्प, सफेद पुष्प |
| अन्य | चंदन, अक्षत, भस्म, कलावा, जनेऊ, सुपारी, पान |
| दीप-धूप | घी का दीपक, कपूर, धूप, अगरबत्ती |
| नैवेद्य | फल, मिष्ठान्न, नारियल (गोला), बताशे |
| पात्र | ताँबे का लोटा और थाली |
शिव को अर्पित न करें: हल्दी (देवी को अर्पित होती है), तुलसी (विष्णु को), केतकी का पुष्प (कथानुसार शापित), शंख से जल, नारियल का पानी और टूटे चावल।
व्रत के नियम — क्या खाएँ
उपवास की तीन श्रेणियाँ हैं, और अपने सामर्थ्य के अनुसार चुनना शास्त्र-सम्मत है।
| प्रकार | विधि | किसके लिए |
|---|---|---|
| निर्जला | जल भी नहीं | केवल पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति; अनिवार्य नहीं |
| फलाहार | फल, दूध, जल | सर्वाधिक प्रचलित और संतुलित |
| एक भुक्त | दिन में एक बार सात्विक भोजन | रोगी, वृद्ध, बालक, गर्भवती, श्रमिक |
व्रत में क्या लें: फल, दूध, दही, सिंघाड़े और कुट्टू का आटा, साबूदाना, आलू, सेंधा नमक, मूँगफली, मखाना, नारियल, सूखे मेवे।
क्या न लें: अनाज (गेहूँ, चावल, दाल), साधारण नमक, प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, तंबाकू।
व्रत खोलने का समय — सायंकाल शिव आरती के पश्चात। कुछ परंपराओं में तीसरे प्रहर के बाद, कुछ में सूर्यास्त के बाद। अपने कुल की परंपरा का पालन करें।
एक बात जो मैं बार-बार कहती हूँ — व्रत का मूल संयम है, भूख नहीं। जो व्यक्ति निर्जला व्रत रखकर दिनभर क्रोध करे और घर में कलह करे, उसका व्रत निष्फल है। जो फलाहार करके शांत, सत्यनिष्ठ और विनम्र रहे, उसका व्रत पूर्ण है।
सोलह सोमवार व्रत विधि
सोलह सोमवार व्रत की विधि सामान्य सोमवार व्रत जैसी ही है, परंतु कुछ विशेष नियम हैं।
- संकल्प स्पष्ट हो — प्रथम सोमवार को सोलह सोमवार का संकल्प लें, और अपनी मनोकामना स्पष्ट रूप से कहें।
- लगातार सोलह सोमवार — बीच में न छोड़ें। यदि अपरिहार्य कारण से छूट जाए तो अगले सोमवार से गिनती जारी रखें और अंत में एक अतिरिक्त सोमवार जोड़ें।
- प्रत्येक सोमवार व्रत कथा का पाठ अनिवार्य है।
- प्रसाद का विधान — गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बना चूरमा अथवा बाटी। इसे तीन भागों में बाँटा जाता है: एक शिव को अर्पित, एक ब्राह्मण अथवा उपस्थित जनों को, एक स्वयं ग्रहण करें।
- सत्रहवें सोमवार को उद्यापन — नीचे विधि दी गई है।
सोलह सोमवार व्रत कथा
कथा का पाठ प्रत्येक सोमवार आवश्यक माना गया है। संक्षेप में:
एक समय भगवान शिव और देवी पार्वती अमरावती नगरी में विचरण करते हुए एक शिव मंदिर में पहुँचे। पार्वती जी ने शिव से चौसर खेलने का प्रस्ताव रखा। शिव ने स्वीकार किया।
उसी समय मंदिर का पुजारी वहाँ आया। पार्वती जी ने उससे पूछा कि खेल में कौन जीतेगा। पुजारी ने कह दिया — शिव जीतेंगे। परंतु खेल में पार्वती जी विजयी हुईं। पार्वती जी ने पुजारी को असत्य वचन के लिए कोढ़ी होने का शाप दे दिया।
कुछ काल पश्चात देवलोक की अप्सराएँ उस मंदिर में आईं। पुजारी की दशा देखकर उन्होंने कारण पूछा और उसे सोलह सोमवार व्रत की विधि बताई। पुजारी ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया और रोग से मुक्त होकर पूर्व स्वरूप प्राप्त किया।
तत्पश्चात उसी पुजारी से यह व्रत विधि राजा चित्रवर्मा तक पहुँची, जिसने संतान प्राप्ति हेतु यह व्रत किया और उसे कन्या रत्न प्राप्त हुआ। उसकी पुत्री ने भी यह व्रत किया और योग्य वर प्राप्त किया। इस प्रकार यह व्रत लोक में प्रचलित हुआ।
कथा का सार दो बातें हैं — असत्य वचन का परिणाम, और श्रद्धापूर्वक किए गए व्रत से असंभव प्रतीत होने वाले कष्ट का भी निवारण।
मंत्र और स्तोत्र
मूल मंत्र — सर्वाधिक प्रयुक्त:
ॐ नमः शिवाय
महामृत्युंजय मंत्र — आरोग्य और आयु रक्षा हेतु:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
रुद्र मंत्र:
ॐ नमो भगवते रुद्राय
शीघ्र विवाह हेतु — कन्याओं द्वारा:
ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
पाठ हेतु: शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र, रुद्राष्टकम्, लिंगाष्टकम्, बिल्वाष्टकम्।
उद्यापन विधि
सोलह सोमवार पूर्ण होने पर सत्रहवें सोमवार को उद्यापन किया जाता है। इसके बिना व्रत अपूर्ण माना जाता है।
- सामान्य सोमवार व्रत की भाँति पूजन करें।
- रुद्राभिषेक कराएँ अथवा विशेष पूजन करें।
- चूरमा अथवा बाटी का प्रसाद बनाएँ — गेहूँ का आटा, गुड़ और घी से। परंपरागत मात्रा सवा किलो आटे की है।
- ब्राह्मण अथवा आवश्यकतामंद जनों को भोजन कराएँ। सामर्थ्य के अनुसार संख्या।
- दान करें — वस्त्र, अन्न, दक्षिणा। श्वेत वस्तुओं का दान विशेष फलदायी।
- कन्या भोज — विवाह संबंधी मनोकामना हेतु किया गया व्रत हो तो कन्याओं को भोजन कराना विशेष विधान है।
- अंत में शिव से प्रार्थना करके व्रत का समापन करें।
यदि सामर्थ्य कम हो तो उद्यापन छोटा किया जा सकता है — एक व्यक्ति को भोजन और यथाशक्ति दान भी मान्य है। शास्त्र आर्थिक सामर्थ्य के अनुसार छूट देते हैं।
व्रत छूट जाए तो
यह प्रश्न सर्वाधिक पूछा जाता है, और इसका उत्तर परंपरा में स्पष्ट है — शास्त्र इतने कठोर नहीं हैं जितना लोग मान लेते हैं।
- अस्वस्थता के कारण छूटा — कोई दोष नहीं। स्वस्थ होने पर अगले सोमवार से जारी रखें और अंत में एक अतिरिक्त सोमवार जोड़ें।
- यात्रा अथवा विवशता में — मानसिक व्रत मान्य है। जल अर्पित न कर सकें तो मंत्र जाप कर लें।
- रजस्वला काल — परंपरा भिन्न है। अनेक आचार्य इस अवधि में पूजन स्थगित करके व्रत जारी रखने की अनुमति देते हैं। अपने कुल की परंपरा का पालन करें।
- पूर्णतः भूल गए — संकल्प नवीनीकृत कर पुनः आरंभ करें। अपराध-भाव में रहना व्रत से अधिक हानिकारक है।
- घर में मृत्यु हुई — शोक काल में व्रत स्थगित करें; तत्पश्चात पुनः आरंभ करें।
मैं यह जजमानों से अवश्य कहती हूँ — व्रत का उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं है। जो व्यक्ति एक सोमवार छूट जाने पर महीनों अपराध-भाव में रहे, उसने व्रत का अर्थ ही नहीं समझा। श्रद्धा और निरंतरता का प्रयास पर्याप्त है।
ज्योतिषीय दृष्टि से किसे लाभ
सोमवार का व्रत सभी के लिए है, परंतु इन ग्रह स्थितियों में यह विशेष रूप से प्रभावी है:
| ग्रह स्थिति | क्यों लाभकारी |
|---|---|
| चंद्रमा निर्बल या पीड़ित | सोमवार चंद्र का दिन है; अनिद्रा, चिंता और मानसिक अस्थिरता में प्रत्यक्ष लाभ |
| चंद्र-राहु युति (ग्रहण योग) | भ्रम और भय के लिए; कच्चे दूध से अभिषेक विशेष |
| शनि साढ़े साती या अष्टम शनि | शनि शिव के भक्त हैं; शिव उपासना से शनि का ताप घटता है |
| सप्तम भाव पीड़ित / विवाह में विलंब | पार्वती-शिव पूजन विवाह कारक; कात्यायनी मंत्र के साथ |
| पंचम भाव पीड़ित / संतान बाधा | रुद्राभिषेक और संतान गोपाल मंत्र के साथ |
| अष्टम भाव या आयु स्थान पीड़ित | महामृत्युंजय मंत्र के साथ आरोग्य हेतु |
| मांगलिक दोष | मंगला गौरी व्रत के साथ संयुक्त रूप से |
आपकी कुंडली में कौन सी स्थिति वास्तव में सक्रिय है — यह कुंडली विश्लेषण से ज्ञात होता है। व्रत के साथ यदि सही मंत्र और सही अभिषेक द्रव्य चुना जाए तो लाभ कई गुना होता है।
शुभकामनाएँ सहित,
निधि श्रीमाली
प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली
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- नर्मदेश्वर शिवलिंग — गृह अभिषेक हेतु
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[{"question":"सावन सोमवार व्रत की विधि क्या है?","answer":"सूर्योदय से पूर्व स्नान कर संकल्प लें, फिर शिवलिंग पर ताँबे के लोटे से जलाभिषेक करें, पंचामृत से अभिषेक करके पुनः जल चढ़ाएँ। बिल्व पत्र, चंदन, अक्षत, सफेद पुष्प, धतूरा और भस्म अर्पित करें। गौरी-गणेश का पूजन आवश्यक है। ॐ नमः शिवाय 108 बार जपें, व्रत कथा का पाठ करें, आरती करें और सायंकाल आरती के पश्चात व्रत खोलें।"}, {"question":"सोमवार का व्रत शिव को क्यों समर्पित है?","answer":"दो कारण हैं। 'सोम' का अर्थ चंद्रमा है और शिव मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं, इसीलिए वे सोमनाथ कहलाते हैं। दूसरा कारण ज्योतिषीय है — चंद्रमा मन का कारक है और शिव उपासना का मूल उद्देश्य चित्त की शांति है, अतः जिस दिन चंद्रमा प्रबल हो उस दिन यह साधना अधिक फलदायी होती है।"}, {"question":"सोलह सोमवार व्रत में क्या खा सकते हैं?","answer":"फलाहार सर्वाधिक प्रचलित है — फल, दूध, दही, जल, सिंघाड़े और कुट्टू का आटा, साबूदाना, आलू, सेंधा नमक, मूँगफली, मखाना और सूखे मेवे। अनाज, साधारण नमक, प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा वर्जित हैं। निर्जला व्रत अनिवार्य नहीं है, और रोगी, वृद्ध, बालक तथा गर्भवती स्त्रियों के लिए एक समय सात्विक भोजन के साथ व्रत पूर्णतः मान्य है।"}, {"question":"सोलह सोमवार व्रत बीच में छूट जाए तो क्या करें?","answer":"कोई दोष नहीं। अस्वस्थता या विवशता से छूटा हो तो अगले सोमवार से गिनती जारी रखें और अंत में एक अतिरिक्त सोमवार जोड़ दें। यात्रा में मानसिक व्रत मान्य है। पूर्णतः भूल जाने पर संकल्प नवीनीकृत करके पुनः आरंभ करें। शास्त्र इतने कठोर नहीं हैं — अपराध-भाव में रहना व्रत से अधिक हानिकारक है।"}, {"question":"सोलह सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें?","answer":"सत्रहवें सोमवार को सामान्य पूजन के साथ रुद्राभिषेक कराएँ। गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से चूरमा अथवा बाटी का प्रसाद बनाएँ — परंपरागत मात्रा सवा किलो आटे की है। ब्राह्मण या आवश्यकतामंद जनों को भोजन कराएँ, वस्त्र और अन्न का दान करें। विवाह संबंधी मनोकामना हो तो कन्या भोज विशेष विधान है। सामर्थ्य कम हो तो छोटा उद्यापन भी मान्य है।"}, {"question":"शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?","answer":"हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए क्योंकि वह देवी को अर्पित होती है, तुलसी नहीं क्योंकि वह विष्णु को अर्पित होती है, तथा केतकी का पुष्प कथानुसार शापित है। शंख से जल, नारियल का पानी और टूटे चावल भी वर्जित हैं। अर्पित करें — बिल्व पत्र, धतूरा, भाँग, आक के पुष्प, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत और भस्म।"}, {"question":"सोलह सोमवार व्रत कब आरंभ करना चाहिए?","answer":"सावन का प्रथम सोमवार सर्वोत्तम है। इसके अतिरिक्त चैत्र, कार्तिक अथवा मार्गशीर्ष मास का प्रथम सोमवार भी शुभ माना जाता है। यदि आप पहली बार व्रत कर रहे हैं तो सोलह सोमवार के स्थान पर पहले सावन के चार-पाँच सोमवार का संकल्प लें — पूरा किया गया छोटा व्रत, अपूर्ण बड़े व्रत से श्रेष्ठ है।"}]