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गुरु/बृहस्पति ग्रह 2026: कुंडली में गुरु का प्रभाव, उपाय

# गुरु/बृहस्पति ग्रह 2026: कुंडली में गुरु देव का संपूर्ण ज्ञान, प्रभाव, उपाय और रत्न > ✨ **लेखिका परिचय:** यह लेख **गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी** द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार

7 July 2026 14 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। उनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और वे पंडित एनएम श्रीमाली की प्रमुख ज्योतिषी हैं।


विषय सूची (Table of Contents)

  1. मेरा व्यक्तिगत अनुभव — गुरु ग्रह और भाग्य की शक्ति
  2. गुरु ग्रह का परिचय — देवता, मिथक और महत्व
  3. खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं
  4. गुरु का शरीर पर प्रभाव
  5. कुंडली में गुरु की स्थिति का महत्व
  6. अनुकूल और प्रतिकूल राशियां
  7. गुरु का कारकत्व
  8. गुरु की दशा और गोचर का प्रभाव
  9. कमजोर और बलवान गुरु की पहचान
  10. गुरु मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय
  11. गुरु मंत्र और पूजा विधि
  12. गुरु रत्न और धातु
  13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
  14. निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह

मेरा व्यक्तिगत अनुभव — गुरु ग्रह और भाग्य की शक्ति

नमस्ते, मैं निधि श्रीमाली हूं। पिछले 15 वर्षों में मैंने देखा है कि गुरु/बृहस्पति ग्रह जातक के भाग्य, विद्या, धर्म, गुरु, पति/पत्नी, संतान और आध्यात्मिकता का प्रतिनिधित्व करता है। गुरु सबसे शुभ ग्रह है — इसे "देवताओं का पुरोहित" कहा जाता है। गुरु बलवान हो तो जातक भाग्यशाली, विद्वान, धार्मिक और सफल होता है।

केस स्टडी: 2024 में मेरे पास जोधपुर का एक 45 वर्षीय व्यक्ति आया। कह रहे थे कि बहुत मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही, संतान नहीं है, वैवाहिक जीवन अशांत है। कुंडली देखी तो गुरु वृश्चिक राशि में 7वें भाव में था, मंगल और शनि के साथ युति में — अत्यधिक पीड़ित। मैंने गुरुवार व्रत, विष्णु पूजा, पीले रंग का प्रयोग, पुखराज धारण करने की सलाह दी। 5 महीने में वैवाहिक जीवन में सुधार हुआ, भाग्योदय हुआ, और कारोबार में भी लाभ हुआ। गुरु उपायों का सशक्त प्रभाव है।

💡 मेरा वादा: हर बात, हर उपाय, हर टिप वही है जो मैंने अपने 15 वर्षों के क्लिनिकल अनुभव में सीखा है।


गुरु ग्रह का परिचय

गुरु (बृहस्पति, Jupiter) हिंदू ज्योतिष का सबसे बड़ा और सबसे शुभ ग्रह है। यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। गुरु को बृहस्पति, जीव, सुरगुरु, देवाचार्य आदि नामों से जाना जाता है।

गुरु देव की मिथक कथा:

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, गुरु बृहस्पति "देवताओं के गुरु" और "देव पुरोहित" हैं। उनका जन्म "ऋग्वेद" से हुआ। गुरु देव ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं और उनकी पत्नी का नाम तारा है (जो बाद में बुध के साथ संबंध बनाने के कारण प्रसिद्ध हुईं)। गुरु देव अत्यंत विद्वान, धार्मिक, सत्यवादी और शुभ स्वभाव के हैं। वे देवताओं को शुभ मुहूर्त, धर्म, नीति और ज्योतिष की शिक्षा देते हैं।

गुरु का प्रतीक और तत्व:

  • रंग: पीला, सुनहरा
  • धातु: सोना, पीतल
  • रत्न: पुखराज (Yellow Sapphire)
  • दिन: गुरुवार
  • दिशा: उत्तर-पूर्व
  • तत्व: आकाश (ether)
  • देवता: बृहस्पति, इंद्र, विष्णु
  • संख्या: 3
  • मंत्र: ॐ बृं बृहस्पतये नमः

खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं

गुरु (Jupiter) सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। यह एक गैस दानव है और इसमें 79 से अधिक चंद्रमा हैं।

प्रमुख ज्योतिषीय तथ्य:

  • भ्रमण काल: लगभग 12 वर्ष (सूर्य की परिक्रमा)
  • राशि परिवर्तन: लगभग 1 वर्ष प्रति राशि
  • उच्च राशि: कर्क (राशि में 5° तक)
  • नीच राशि: मकर (राशि में 5° तक)
  • मूलत्रिकोण: धनु राशि
  • स्वराशि: धनु, मीन
  • सम राशि: कर्क, कन्या (आंशिक)
  • उच्च नवांश: कर्क
  • नीच नवांश: मकर

गुरु के गण:

  • सत्त्व गण (सात्विक प्रकृति)
  • शुभ ग्रह (सबसे शुभ)
  • देव ग्रह (देवताओं का कारक)
  • पुरुष ग्रह
  • बृहस्पति (विस्तारक)

गुरु की विशेषताएं:

  • सबसे बड़ा ग्रह — विस्तार का कारक
  • सबसे शुभ ग्रह — शुभ फल देने वाला
  • देव पुरोहित — देवताओं का गुरु
  • 12 वर्ष में एक राशि परिवर्तन — मंद गति

गुरु का शरीर पर प्रभाव

गुरु शरीर में आकाश तत्व और विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है। यह शरीर के विकास, वसा, यकृत और श्वसन का कारक है।

प्रमुख अंग:

  • यकृत (Liver)
  • पेट (बड़ा भाग)
  • वसा (Fat)
  • जांघें
  • कूल्हे
  • पैर
  • कान
  • त्वचा (कुछ हद तक)
  • मस्तिष्क (कुछ हद तक)
  • मेरुदंड (रीढ़)

कमजोर गुरु के शारीरिक लक्षण:

  • यकृत रोग, पीलिया
  • मोटापा या अत्यधिक दुबलापन
  • पेट की चर्बी
  • मधुमेह (डायबिटीज)
  • कान की समस्या
  • जोड़ों का दर्द
  • पैरों की समस्या
  • स्मृति दोष
  • त्वचा रोग
  • अवसाद
  • धीमी वृद्धि

💡 निधि जी का विशेष टिप: यदि आपको अवसाद रहता है, जीवन में भाग्य नहीं चमकता, या शिक्षा में बाधा आ रही है — तो गुरु की कुंडली अवश्य जांचें। गुरु की कमजोरी कभी-कभी संतान सुख में भी बाधा डालती है।


कुंडली में गुरु की स्थिति का महत्व

गुरु कुंडली में 12 भावों में अलग-अलग प्रभाव देता है:

भाव प्रभाव
1st भाव (लग्न) भाग्य, बुद्धि, आत्मविश्वास, सुंदरता
2nd भाव कुटुम्ब, धन, वाणी
3rd भाव पराक्रम, भाई-बहन
4th भाव माता, भूमि, गृह सुख, शिक्षा
5th भाव संतान, बुद्धि, विद्या (शुभ यहाँ)
6th भाव शत्रु नाश, रोग
7th भाव विवाह, साझेदारी, पति/पत्नी
8th भाव आयु, रहस्य (अशुभ यहाँ)
9th भाव भाग्य, धर्म, पिता (अत्यधिक शुभ)
10th भाव कर्म, पद, प्रतिष्ठा
11th भाव आय, लाभ, इच्छापूर्ति
12th भाव व्यय, विदेश (अशुभ यहाँ)

कुंडली में गुरु की विशेष स्थितियां:

  • गुरु-चंद्र युति (गजकेसरी योग): राजयोग, भाग्य, यश, बुद्धि
  • गुरु-शुक्र युति: विद्या, कला, सुख
  • गुरु-सूर्य युति: आध्यात्मिक सत्ता
  • गुरु-बुध युति: विद्या, बुद्धि, वाणी
  • गुरु-मंगल युति: साहस, पराक्रम, भाग्य
  • गुरु-शनि युति: कर्म, अनुशासन
  • गुरु-राहु युति: अचानक भाग्योदय/पतन
  • गुरु 1, 4, 5, 7, 9, 10 भाव में: अत्यधिक शुभ
  • गुरु 6, 8, 12 भाव में: अशुभ

अनुकूल और प्रतिकूल राशियां

गुरु की मित्र राशियां:

  • धनु (स्वराशि, मूलत्रिकोण)
  • मीन (स्वराशि)
  • कर्क (उच्च राशि)
  • सिंह (मित्र)
  • तुला (मित्र)

गुरु की शत्रु राशियां:

  • मकर (नीच राशि)
  • कन्या (शत्रु)
  • मिथुन (शत्रु)
  • वृश्चिक (शत्रु)

गुरु की सम राशि:

  • मेष, वृष, कुंभ

नक्षत्र:

  • पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद (गुरु के नक्षत्र)
  • हस्त (आंशिक)
  • गुरु 3 नक्षत्रों का स्वामी है

गुरु का कारकत्व

गुरु ज्योतिष में अनेक चीजों का कारक है:

प्रमुख कारकत्व:

  1. भाग्य — भाग्य, सौभाग्य
  2. विद्या — शिक्षा, ज्ञान, बुद्धि
  3. धर्म — धार्मिकता, अध्यात्म
  4. गुरु — शिक्षक, पिता समान
  5. पति/पत्नी (महिलाओं के लिए) — पति का सुख
  6. संतान — संतान सुख
  7. विस्तार — सब कुछ बढ़ाने वाला
  8. धन — धन संपत्ति
  9. सम्मान — सामाजिक प्रतिष्ठा
  10. आशीर्वाद — बड़ों का आशीर्वाद
  11. विवाह — विवाह, दाम्पत्य
  12. मोटापा — शारीरिक भार
  13. पीला रंग — शुभ रंग
  14. पुखराज — रत्न

गुरु से जुड़े पेशे:

  • गुरु, शिक्षक, प्रोफेसर
  • पुरोहित, पंडित
  • ज्योतिषी, आचार्य
  • वकील, न्यायाधीश
  • बैंकर, वित्तीय सलाहकार
  • सलाहकार
  • आध्यात्मिक गुरु
  • धार्मिक संस्था के प्रमुख
  • दार्शनिक
  • मंत्री, राजनेता

गुरु की दशा और गोचर का प्रभाव

गुरु की महादशा (16 वर्ष):

गुरु की दशा 16 वर्ष की होती है — यह दूसरी सबसे लंबी दशा है। यह जातक को भाग्य, विद्या, धर्म, संतान और विस्तार देती है।

गुरु दशा के शुभ फल:

  • भाग्योदय
  • विद्या, ज्ञान में वृद्धि
  • धार्मिक कार्यों में रुचि
  • संतान सुख
  • विवाह का सुख
  • सामाजिक प्रतिष्ठा
  • धन, संपत्ति की वृद्धि
  • पद, प्रतिष्ठा
  • आध्यात्मिक उन्नति

गुरु दशा के अशुभ फल:

  • अहंकार, घमंड
  • धार्मिक कार्यों में कट्टरता
  • मोटापा
  • यकृत रोग
  • व्यर्थ का खर्च
  • गलत सलाह
  • भाग्य में बाधा
  • संतान से अनबन
  • वैवाहिक कलह

गुरु की अंतर्दशा:

  • गुरु-गुरु: 1 वर्ष 4 माह
  • गुरु-सूर्य: 11 माह
  • गुरु-चंद्र: 1 वर्ष 1 माह
  • गुरु-मंगल: 11 माह
  • गुरु-राहु: 1 वर्ष 5 माह
  • गुरु-शनि: 2 वर्ष 2 माह
  • गुरु-बुध: 1 वर्ष 1 माह
  • गुरु-केतु: 1 वर्ष 4 माह
  • गुरु-शुक्र: 1 वर्ष 2 माह

गुरु का गोचर:

गुरु हर राशि में लगभग 1 वर्ष रहता है। कर्क राशि में गुरु अपनी उच्च राशि में होता है। गुरु का गोचर 2, 5, 7, 9, 11 भावों से गुजरते समय अत्यधिक शुभ और 1, 4, 6, 8, 10, 12 भावों में मिश्रित फल देता है।

केस स्टडी: 2025 में एक 28 वर्षीय महिला मेरे पास आई। शादी के 4 साल बाद भी संतान नहीं थी, डॉक्टरों ने कोई कारण नहीं बताया। कुंडली में गुरु मकर राशि में 5वें भाव में था — नीच और पीड़ित। मैंने गुरुवार व्रत, केले के पेड़ की पूजा, पीले वस्त्रों का प्रयोग, पुखराज धारण करने की सलाह दी। 7 महीने में उन्हें गर्भधारण हुआ और स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ। गुरु उपायों का सशक्त प्रभाव है।


कमजोर और बलवान गुरु की पहचान

बलवान गुरु के संकेत:

  • धनु, मीन, कर्क राशि में
  • 1, 4, 5, 7, 9, 10 भाव में
  • चंद्र, शुक्र, बुध से दृष्टि/युति
  • गुरुवार को जन्म
  • पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में
  • पीला रंग शुभ
  • पुखराज रत्न धारण

कमजोर गुरु के संकेत:

  • मकर राशि में (नीच)
  • 6, 8, 12 भाव में
  • राहु, केतु, शनि, मंगल से पीड़ित
  • मंगल से अस्त (यदि सूर्य के पास)
  • अंतर्दशा/प्रत्यंतर्दशा अशुभ

कमजोर गुरु के लक्षण:

  • भाग्यहीनता
  • विद्या में बाधा
  • अवसाद, निराशा
  • संतानहीनता
  • वैवाहिक कलह
  • धार्मिक कार्यों में अरुचि
  • यकृत रोग
  • मोटापा
  • सामाजिक अपमान
  • कर्ज

गुरु मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय

1. गुरुवार का व्रत

गुरुवार को व्रत रखना गुरु को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय है। व्रत के दिन पीले वस्त्र धारण करें, भगवान विष्णु की पूजा करें।

2. भगवान विष्णु की पूजा

गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। पीले फूल, चंदन, केसर अर्पित करें।

3. गुरु मंत्र का जाप

रोजाना 108 बार "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" या "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः" का जाप करें। मंत्र जाप गुरुवार को विशेष फलदायी है।

4. पुखराज रत्न धारण

शुद्ध पुखराज (Yellow Sapphire) सोने की अंगूठी में गुरुवार को सुबह 9-10 बजे धारण करें। रत्न कम से कम 3-5 रत्ती का हो।

5. पीले रंग का प्रयोग

रोजमर्रा के जीवन में पीला, सुनहरा, केसरिया रंग अधिक प्रयोग करें। बिस्तर, वस्त्र, मोबाइल कवर सब में पीला रंग रखें।

6. गुरु ब्राह्मण का सम्मान

गुरुवार को ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र, दक्षिणा दान करें। विद्वान ब्राह्मणों का सम्मान करें। गुरु पूर्णिमा पर विशेष दान करें।

7. शिक्षक का सम्मान

गुरु शिक्षक का कारक है। अपने शिक्षक, गुरु, मार्गदर्शक का सम्मान करें। उन्हें भोजन, उपहार, वस्त्र दें।

8. केले के पेड़ की पूजा

गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करें। पेड़ में जल दें, पीले फूल चढ़ाएं, प्रदक्षिणा करें।

9. हल्दी का प्रयोग

घर में हल्दी का प्रयोग बढ़ाएं। हल्दी का तिलक लगाएं, हल्दी वाला दूध पिएं, हल्दी का दान करें।

10. दान

गुरुवार को चने की दाल, पीले वस्त्र, सोना, पीली सब्जियां, हल्दी, केला, गुड़, घी का दान करें। ब्राह्मणों को पुस्तकें, मिठाई दान करें।

11. गुरु हवन

गुरुवार को "ॐ बृहस्पतये स्वाहा" मंत्र से हवन करें। हवन में घी, चने की दाल, हल्दी, पीले चंदन का प्रयोग करें। 11 गुरुवार तक हवन करें।

💡 निधि जी का विशेष टिप: गुरुवार को केले के पेड़ में जल देना अत्यंत शुभ होता है। यदि आपके घर में जगह नहीं है, तो गुरु मंदिर जाकर केले के पेड़ की पूजा करें। यह सरल उपाय संतान सुख, भाग्योदय और वैवाहिक सुख देता है।


गुरु मंत्र और पूजा विधि

गुरु के प्रमुख मंत्र:

मूल मंत्र:

ॐ बृं बृहस्पतये नमः

बीज मंत्र:

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

विशेष मंत्र:

ॐ बृहस्पतये विद्महे
देवाचार्याय धीमहि
तन्नो बृहस्पतिः प्रचोदयात्

गुरुवार विशेष मंत्र:

ॐ गुरु देवाय नमः, गुरुवार प्रभो नमः
विद्यां बुद्धिं भाग्यं, धर्मं मोक्षं प्रयच्छ मे

गुरु पूजा विधि:

  1. समय: गुरुवार की सुबह
  2. स्थान: पूजा स्थल
  3. वस्त्र: पीला
  4. सामग्री:
    • भगवान विष्णु की मूर्ति
    • पीले पुष्प
    • चंदन
    • हल्दी
    • केला
    • चने की दाल
    • पीले वस्त्र
  5. विधि:
    • स्नान करके शुद्ध हों
    • पीले वस्त्र धारण करें
    • भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें
    • पीले फूल, चंदन अर्पित करें
    • तुलसी के पत्ते अर्पित करें
    • "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र से पूजा करें
    • गुरु मंत्र का 108 बार जाप करें
    • प्रसाद बांटें

गुरु रत्न और धातु

पुखराज (Yellow Sapphire):

  • रंग: पीला, सुनहरा, शहद जैसा पीला
  • धातु: सोना (मुख्य), पीतल (वैकल्पिक)
  • अंगूली: तर्जनी (सूचक उंगली)
  • समय: गुरुवार, सुबह 9-10 बजे
  • शुद्धता: प्राकृतिक, श्रीलंका या थाईलैंड का
  • वजन: कम से कम 3 रत्ती
  • फायदे:
    • भाग्योदय
    • विद्या, ज्ञान की प्राप्ति
    • संतान सुख
    • वैवाहिक सुख
    • धार्मिक कार्यों में रुचि
    • सामाजिक प्रतिष्ठा
    • धन, संपत्ति की वृद्धि
    • यकृत रोग में राहत
    • गुरु, शिक्षकों का आशीर्वाद

गुरु की धातु:

सोना (Gold), पीतल (Brass) — पीतल के बर्तन में पानी पीने, पीतल के बर्तन में भोजन करने, सोने की अंगूठी पहनने से गुरु तत्व बलवान होता है।

गुरु के रंग:

  • मुख्य: पीला, सुनहरा, केसरिया
  • वस्त्र: पीला, सुनहरा, हल्का पीला
  • फूल: पीला गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी, पलाश
  • अगरबत्ती: चंदन, केसर, अगर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गुरु कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?

भाग्यहीनता, विद्या में बाधा, अवसाद, संतानहीनता, वैवाहिक कलह, यकृत रोग, मोटापा, कर्ज।

क्या पुखराज रत्न सभी को धारण करना चाहिए?

नहीं। पुखराज कमजोर गुरु वाले जातकों को ही धारण करना चाहिए। पहले कुंडली दिखाएं।

गुरुवार व्रत कैसे रखें?

गुरुवार की सुबह विष्णु मंदिर जाएँ, पीले वस्त्र धारण करें, केले के पेड़ की पूजा करें, एक बार भोजन करें (फलाहार या खिचड़ी)।

गुरु दशा अशुभ हो तो क्या करें?

पुखराज धारण करें, गुरुवार व्रत रखें, विष्णु पूजा करें, ब्राह्मणों को दान करें, गुरु का सम्मान करें।

क्या महिलाएं पुखराज पहन सकती हैं?

हां, महिलाएं पुखराज पहन सकती हैं। कुंडली के अनुसार निर्णय लें। महिलाओं के लिए पुखराज पति सुख और संतान सुख देता है।

गुरु किस दिशा में रहता है?

उत्तर-पूर्व दिशा में। सोते समय सिर उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ होता है।

गुरु का सबसे अच्छा उपाय क्या है?

गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा, ब्राह्मण भोजन, पीले रंग का प्रयोग, गुरु मंत्र जाप — ये सबसे अच्छे उपाय हैं।

क्या गुरु और बृहस्पति एक ही हैं?

जी हां, गुरु और बृहस्पति एक ही ग्रह हैं। गुरु हिंदी नाम है, बृहस्पति संस्कृत नाम है।

गुरु कितने समय में राशि बदलता है?

गुरु लगभग 1 वर्ष में एक राशि बदलता है — यह सबसे धीमे चलने वाले ग्रहों में से एक है।

गजकेसरी योग क्या है?

गुरु और चंद्र की युति से बनता है। यह राजयोग है जो जातक को भाग्य, यश, बुद्धि और सफलता देता है।



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निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह

प्रिय पाठकों, गुरु/बृहस्पति ग्रह आपकी कुंडली में भाग्य, विद्या, धर्म, संतान, विवाह और विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है। गुरु सबसे शुभ ग्रह है — यदि यह बलवान है तो जीवन में भाग्य, सफलता, विद्या और सुख मिलता है। यदि कमजोर है तो उपाय करके इसे बलवान बनाया जा सकता है।

मेरी 15 वर्षों के अनुभव की सीख:

  1. विष्णु पूजा — गुरु को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय
  2. गुरुवार व्रत — 11 गुरुवार तक अवश्य करें
  3. पुखराज रत्न — कुंडली दिखाकर ही धारण करें
  4. गुरु/शिक्षक सम्मान — अपने गुरु का सम्मान करें
  5. पीला रंग — रोजमर्रा में प्रयोग करें
  6. ब्राह्मण भोजन — गुरुवार को ब्राह्मणों को भोजन कराएं
  7. केले के पेड़ की पूजा — गुरुवार को अवश्य करें

शुभकामनाओं सहित,

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Frequently Asked Questions

गुरु कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?+
भाग्यहीनता, विद्या में बाधा, अवसाद, संतानहीनता, वैवाहिक कलह, यकृत रोग, मोटापा, कर्ज।
क्या पुखराज रत्न सभी को धारण करना चाहिए?+
नहीं। पुखराज कमजोर गुरु वाले जातकों को ही धारण करना चाहिए। पहले कुंडली दिखाएं।
गुरुवार व्रत कैसे रखें?+
गुरुवार की सुबह विष्णु मंदिर जाएँ, पीले वस्त्र धारण करें, केले के पेड़ की पूजा करें, एक बार भोजन करें (फलाहार या खिचड़ी)।
गुरु दशा अशुभ हो तो क्या करें?+
पुखराज धारण करें, गुरुवार व्रत रखें, विष्णु पूजा करें, ब्राह्मणों को दान करें, गुरु का सम्मान करें।
क्या महिलाएं पुखराज पहन सकती हैं?+
हां, महिलाएं पुखराज पहन सकती हैं। कुंडली के अनुसार निर्णय लें। महिलाओं के लिए पुखराज पति सुख और संतान सुख देता है।
गुरु किस दिशा में रहता है?+
उत्तर-पूर्व दिशा में। सोते समय सिर उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ होता है।
गुरु का सबसे अच्छा उपाय क्या है?+
गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा, ब्राह्मण भोजन, पीले रंग का प्रयोग, गुरु मंत्र जाप — ये सबसे अच्छे उपाय हैं।
क्या गुरु और बृहस्पति एक ही हैं?+
जी हां, गुरु और बृहस्पति एक ही ग्रह हैं। गुरु हिंदी नाम है, बृहस्पति संस्कृत नाम है।
गुरु कितने समय में राशि बदलता है?+
गुरु लगभग 1 वर्ष में एक राशि बदलता है — यह सबसे धीमे चलने वाले ग्रहों में से एक है।
गजकेसरी योग क्या है?+
गुरु और चंद्र की युति से बनता है। यह राजयोग है जो जातक को भाग्य, यश, बुद्धि और सफलता देता है।
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Written by

Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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