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बुध ग्रह 2026: कुंडली में बुध का प्रभाव, उपाय, मंत्र और रत्न

# बुध ग्रह 2026: कुंडली में बुध देव का संपूर्ण ज्ञान, प्रभाव, उपाय और रत्न > ✨ **लेखिका परिचय:** यह लेख **गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी** द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गय

7 July 2026 14 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। उनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और वे पंडित एनएम श्रीमाली की प्रमुख ज्योतिषी हैं।


विषय सूची (Table of Contents)

  1. मेरा व्यक्तिगत अनुभव — बुध ग्रह और बुद्धि की शक्ति
  2. बुध ग्रह का परिचय — देवता, मिथक और महत्व
  3. खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं
  4. बुध का शरीर पर प्रभाव
  5. कुंडली में बुध की स्थिति का महत्व
  6. अनुकूल और प्रतिकूल राशियां
  7. बुध का कारकत्व
  8. बुध की दशा और गोचर का प्रभाव
  9. कमजोर और बलवान बुध की पहचान
  10. बुध मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय
  11. बुध मंत्र और पूजा विधि
  12. बुध रत्न और धातु
  13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
  14. निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह

मेरा व्यक्तिगत अनुभव — बुध ग्रह और बुद्धि की शक्ति

नमस्ते, मैं निधि श्रीमाली हूं। पिछले 15 वर्षों में मैंने देखा है कि बुध ग्रह जातक की बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, लेखन और संचार क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है। बुध बलवान हो तो जातक बुद्धिमान, चतुर, वाकपटु और व्यापार में सफल होता है। कमजोर हो तो बुद्धि की कमी, वाणी में दोष, व्यापार में हानि और मानसिक भ्रम होता है।

केस स्टडी: 2024 में लखनऊ के एक 40 वर्षीय व्यापारी मेरे पास आए। कह रहे थे कि 3 साल से व्यापार में भारी नुकसान हो रहा है, कर्मचारी धोखा दे रहे हैं, पढ़ाई में मन नहीं लगता। कुंडली देखी तो बुध मीन राशि में 7वें भाव में था, राहु से अस्त था। मैंने बुधवार व्रत, हरे रंग का प्रयोग, पन्ना धारण करने की सलाह दी। 6 महीने में व्यापार में सुधार हुआ, कर्मचारियों पर नियंत्रण आया, और मानसिक स्पष्टता बढ़ी। बुध उपायों का सशक्त प्रभाव है।

💡 मेरा वादा: हर बात, हर उपाय, हर टिप वही है जो मैंने अपने 15 वर्षों के क्लिनिकल अनुभव में सीखा है।


बुध ग्रह का परिचय

बुध हिंदू ज्योतिष का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रह है। यह सौरमंडल का सबसे छोटा और सूर्य के सबसे निकट का ग्रह है। बुध को सौम्य, रौप्य, हेम्न, तारकारि, ज्ञ आदि नामों से जाना जाता है।

बुध देव की मिथक कथा:

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, बुध देव की उत्पत्ति चंद्र देव और तारा के संयोग से हुई। तारा बृहस्पति की पत्नी थीं। बृहस्पति ने जब तारा को बुध के साथ देखा तो क्रोधित हो गए और तारा को श्राप दिया। तारा ने शिव की तपस्या कर श्राप से मुक्ति पाई। बुध अत्यंत सुंदर, बुद्धिमान और विद्वान थे। उनका विवाह इला (पृथ्वी की पुत्री) से हुआ, जिनसे पुरुरवा का जन्म हुआ — चंद्रवंश के प्रवर्तक।

बुध का प्रतीक और तत्व:

  • रंग: हरा, हल्का हरा
  • धातु: पारा (Mercury), कांसा
  • रत्न: पन्ना (Emerald)
  • दिन: बुधवार
  • दिशा: उत्तर
  • तत्व: पृथ्वी
  • देवता: बुध देव, विष्णु, नारद
  • संख्या: 5
  • मंत्र: ॐ बुधाय नमः

खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं

बुध सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है जो सूर्य के सबसे निकट है। यह "आंतरिक ग्रह" है और रात्रि में कभी नहीं दिखता।

प्रमुख ज्योतिषीय तथ्य:

  • भ्रमण काल: लगभग 88 दिन (सूर्य की परिक्रमा)
  • राशि परिवर्तन: लगभग 25-30 दिन प्रति राशि
  • उच्च राशि: कन्या (राशि में 15° तक)
  • नीच राशि: मीन (राशि में 15° तक)
  • मूलत्रिकोण: कन्या राशि
  • स्वराशि: मिथुन, कन्या
  • सम राशि: तुला, कुंभ, मकर, मीन (आंशिक)
  • उच्च नवांश: कन्या
  • नीच नवांश: मीन

बुध के गण:

  • सत्त्व गण (सात्विक प्रकृति)
  • सौम्य ग्रह
  • बाल ग्रह (कुंडली में बालक)
  • शुभ ग्रह (मूलतः शुभ, किंतु पाप ग्रहों से युति होने पर अशुभ)
  • लिंग: नपुंसक (त्रिलिंगी)

बुध की विशेषताएं:

  • तारा ग्रह — तारों के साथ रहता है
  • अस्त नहीं होता — सूर्य से 28° से अधिक दूर नहीं जाता
  • मारक नहीं — जीवन को कम नुकसान

बुध का शरीर पर प्रभाव

बुध शरीर में पृथ्वी तत्व और वाणी का प्रतिनिधित्व करता है। यह तंत्रिका तंत्र, मांसपेशियों और श्वसन का कारक है।

प्रमुख अंग:

  • वाणी (जीभ, मुख)
  • तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
  • त्वचा
  • फेफड़े
  • आंतें (छोटी आंत)
  • गुर्दे
  • कमर
  • हाथ
  • नाक
  • कान

कमजोर बुध के शारीरिक लक्षण:

  • वाणी दोष (तुतलाना, भारी आवाज)
  • तंत्रिका तंत्र की कमजोरी
  • चर्म रोग, खुजली
  • स्मृति दोष
  • सिरदर्द, माइग्रेन
  • अनिद्रा
  • श्वसन संबंधी रोग
  • हाथ-पैरों में कंपन
  • गुर्दे की समस्या
  • एलर्जी
  • मानसिक भ्रम

💡 निधि जी का विशेष टिप: यदि आपको बार-बार भूलने की बीमारी रहती है, वाणी में अवरोध आता है, या त्वचा में खुजली रहती है — तो बुध की कुंडली अवश्य जांचें। बुध की कमजोरी कभी-कभी विद्यार्थियों की पढ़ाई में भी बाधा डालती है।


कुंडली में बुध की स्थिति का महत्व

बुध कुंडली में 12 भावों में अलग-अलग प्रभाव देता है:

भाव प्रभाव
1st भाव (लग्न) बुद्धि, वाणी, चतुरता, व्यापार
2nd भाव कुटुम्ब, धन, वाणी (शुभ यहाँ)
3rd भाव पराक्रम, भाई-बहन, लेखन
4th भाव माता, भूमि, शिक्षा, गृह
5th भाव संतान, बुद्धि, विद्या
6th भाव रोग, ऋण, शत्रु
7th भाव विवाह, साझेदारी, व्यापार
8th भाव आयु, रहस्य
9th भाव भाग्य, धर्म, विद्या
10th भाव कर्म, पद, व्यापार
11th भाव आय, लाभ, इच्छापूर्ति
12th भाव व्यय, विदेश, मोक्ष

कुंडली में बुध की विशेष स्थितियां:

  • बुध-सूर्य युति (बुधादित्य योग): बुद्धि, यश, राजनीतिक सफलता
  • बुध-चंद्र युति: स्मृति, ममता, वाणी चातुर्य
  • बुध-शुक्र युति: कला, सौंदर्य, प्रेम
  • बुध-मंगल युति: साहस, बुद्धि, सेना
  • बुध-गुरु युति: विद्या, धर्म, बुद्धि
  • बुध-शनि युति: अनुशासन, कर्म, तकनीक
  • बुध-राहु युति: अचानक लाभ/हानि, छल
  • बुध 1, 2, 4, 5, 7, 9, 10 भाव में: शुभ
  • बुध 6, 8, 12 भाव में: अशुभ

अनुकूल और प्रतिकूल राशियां

बुध की मित्र राशियां:

  • मिथुन (स्वराशि)
  • कन्या (स्वराशि, उच्च, मूलत्रिकोण)
  • तुला (मित्र)
  • कुंभ (मित्र)

बुध की शत्रु राशियां:

  • मीन (नीच राशि)
  • धनु (शत्रु)
  • सिंह (शत्रु)

बुध की सम राशि:

  • मेष, वृष, कर्क, मकर, वृश्चिक

नक्षत्र:

  • अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती (बुध के नक्षत्र)
  • भरणी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद (आंशिक)
  • बुध अधिक नक्षत्रों का स्वामी है

बुध का कारकत्व

बुध ज्योतिष में अनेक चीजों का कारक है:

प्रमुख कारकत्व:

  1. बुद्धि — मेधा, विवेक, समझ
  2. वाणी — बोलने की कला, भाषण, लेखन
  3. व्यापार — कारोबार, वाणिज्य
  4. गणित — अंकगणित, लेखा
  5. लेखन — साहित्य, पत्रकारिता
  6. मित्र — मित्रों का सुख (1st भाव से 11वां भाव मित्र स्थान)
  7. मामा — माता के भाई
  8. त्वचा — चर्म रोग
  9. तंत्रिका तंत्र — नसें, नाड़ी
  10. हरे रंग — शुभ रंग
  11. पन्ना — रत्न
  12. पारा — धातु
  13. नौकरी — नौकरी, सेवा
  14. चालाकी — चतुराई, छल

बुध से जुड़े पेशे:

  • व्यापारी, विक्रेता
  • अध्यापक, प्रोफेसर
  • लेखक, साहित्यकार
  • पत्रकार, संपादक
  • वकील, न्यायाधीश
  • चिकित्सक (सामान्य)
  • गणितज्ञ, वैज्ञानिक
  • दुभाषिया, अनुवादक
  • IT प्रोफेशनल
  • CA, CS
  • बैंकर
  • प्रवक्ता, प्रचारक

बुध की दशा और गोचर का प्रभाव

बुध की महादशा (17 वर्ष):

बुध की दशा 17 वर्ष की होती है — यह सबसे लंबी दशा है। यह जातक को बुद्धि, वाणी चातुर्य, व्यापार, लेखन और मित्रों का सहयोग देती है।

बुध दशा के शुभ फल:

  • बुद्धि और विवेक में वृद्धि
  • व्यापार में लाभ
  • वाणी चातुर्य
  • लेखन में सफलता
  • मित्रों का सहयोग
  • विद्या की प्राप्ति
  • गणित, तर्क शक्ति बढ़ती है
  • छोटी यात्राएं
  • सामाजिक प्रतिष्ठा

बुध दशा के अशुभ फल:

  • वाणी दोष
  • छल, कपट
  • व्यापार में हानि
  • मित्रों से धोखा
  • तंत्रिका रोग
  • चर्म रोग
  • मानसिक भ्रम
  • याददाश्त कमजोर

बुध की अंतर्दशा:

  • बुध-बुध: 1 वर्ष 7 माह
  • बुध-सूर्य: 1 वर्ष 1 माह
  • बुध-चंद्र: 1 वर्ष 1 माह
  • बुध-मंगल: 2 वर्ष 1 माह
  • बुध-राहु: 1 वर्ष 11 माह
  • बुध-गुरु: 1 वर्ष 4 माह
  • बुध-शनि: 2 वर्ष 9 माह
  • बुध-केतु: 2 वर्ष 6 माह
  • बुध-शुक्र: 1 वर्ष 7 माह

बुध का गोचर:

बुध हर राशि में लगभग 25-30 दिन रहता है। कन्या राशि में बुध अपनी उच्च/स्वराशि में होता है। बुध का गोचर 1, 2, 3, 5, 6, 9, 10, 11 भावों में शुभ और 4, 7, 8, 12 भावों में अशुभ माना जाता है।

केस स्टडी: 2025 में एक 22 वर्षीय छात्र मेरे पास आया। IIT-JEE की तैयारी कर रहा था लेकिन गणित और तर्क में कमजोर था, याददाश्त भी कमजोर थी। कुंडली में बुध वृश्चिक राशि में 8वें भाव में था, केतु से पीड़ित। मैंने बुधवार व्रत, विष्णु पूजा, पन्ना धारण, और "ॐ बुधाय नमः" मंत्र जाप करने की सलाह दी। 8 महीने में उसने JEE क्रैक कर लिया। बुध उपायों का सशक्त प्रभाव है।


कमजोर और बलवान बुध की पहचान

बलवान बुध के संकेत:

  • मिथुन या कन्या राशि में
  • लग्न में या 1, 2, 5, 9, 10 भाव में
  • गुरु, शुक्र, शनि से दृष्टि/युति
  • बुधवार को जन्म
  • अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती नक्षत्र में
  • हरे रंग का प्रयोग
  • पन्ना रत्न धारण

कमजोर बुध के संकेत:

  • मीन राशि में (नीच)
  • 4, 6, 8, 12 भाव में
  • राहु, केतु, मंगल से पीड़ित
  • चंद्र से युति (कभी-कभी)
  • बुध की दशा/अंतर्दशा अशुभ

कमजोर बुध के लक्षण:

  • बुद्धि की कमी
  • वाणी दोष
  • याददाश्त कमजोर
  • व्यापार में हानि
  • छल, कपट
  • मित्रों से धोखा
  • चर्म रोग
  • तंत्रिका रोग
  • मानसिक भ्रम
  • गणित में कमजोरी

बुध मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय

1. बुधवार का व्रत

बुधवार को व्रत रखना बुध को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय है। व्रत के दिन हरे वस्त्र धारण करें, हरे रंग की वस्तुओं का दान करें।

2. भगवान विष्णु की पूजा

बुधवार को भगवान विष्णु की पूजा करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु को अर्पित करें।

3. बुध मंत्र का जाप

रोजाना 108 बार "ॐ बुधाय नमः" या "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः" का जाप करें। मंत्र जाप बुधवार को विशेष फलदायी है।

4. पन्ना रत्न धारण

शुद्ध पन्ना (Emerald) सोने की अंगूठी में बुधवार को सुबह 7-8 बजे धारण करें। रत्न कम से कम 3-5 रत्ती का हो।

5. हरे रंग का प्रयोग

रोजमर्रा के जीवन में हरा, हल्का हरा, पन्ना हरा रंग अधिक प्रयोग करें। बिस्तर, वस्त्र, मोबाइल कवर सब में हरा रंग रखें।

6. तुलसी की पूजा

प्रतिदिन तुलसी के पौधे की पूजा करें। तुलसी में जल दें, परिक्रमा करें। "ॐ तुलसायै नमः" मंत्र का जाप करें।

7. मंदिर जाना

बुधवार को विष्णु मंदिर जाएँ। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, चंदन अर्पित करें। नारद जी की पूजा भी बुधवार को करें।

8. गायत्री मंत्र का जाप

रोजाना सुबह "ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं..." गायत्री मंत्र का जाप करें। यह बुद्धि और स्मृति बढ़ाता है।

9. मौन व्रत

एक दिन मौन व्रत रखें — बिल्कुल न बोलें। इससे वाणी पर नियंत्रण आता है और बुध बलवान होता है।

10. दान

बुधवार को हरी सब्जियां, हरे वस्त्र, मूंग दाल, पन्ना, चने की दाल का दान करें। विद्यार्थियों को स्टेशनरी, किताबें दान करें।

11. बुध हवन

बुधवार को "ॐ बुधाय स्वाहा" मंत्र से हवन करें। हवन में मूंग दाल, चने की दाल, हरे चंदन का प्रयोग करें। 11 बुधवार तक हवन करें।

💡 निधि जी का विशेष टिप: मौन व्रत बुध को बलवान करने का सबसे सरल और अनोखा उपाय है। एक बुधवार पूरा दिन बिल्कुल मौन रहें — न बोलें, न लिखें। यह वाणी को शक्ति देता है और बुध की कृपा प्राप्त होती है।


बुध मंत्र और पूजा विधि

बुध के प्रमुख मंत्र:

मूल मंत्र:

ॐ बुधाय नमः

बीज मंत्र:

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

विशेष मंत्र:

ॐ बुधाय विद्महे
बुद्धिदात्रे धीमहि
तन्नो बुधः प्रचोदयात्

बुधवार विशेष मंत्र:

ॐ बुध देवाय नमः, बुधवार प्रभो नमः
विद्यां बुद्धिं ददामि, वाणीं सत्यां प्रयच्छ मे

बुध पूजा विधि:

  1. समय: बुधवार की सुबह
  2. स्थान: पूजा स्थल
  3. वस्त्र: हरा
  4. सामग्री:
    • भगवान विष्णु की मूर्ति
    • हरे पुष्प
    • तुलसी के पत्ते
    • चंदन
    • पीले रंग की वस्तुएं
    • मूंग दाल
  5. विधि:
    • स्नान करके शुद्ध हों
    • हरे वस्त्र धारण करें
    • भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें
    • तुलसी के पत्ते, हरे फूल अर्पित करें
    • "ॐ बुधाय नमः" मंत्र से पूजा करें
    • गायत्री मंत्र का जाप करें
    • प्रसाद बांटें

बुध रत्न और धातु

पन्ना (Emerald):

  • रंग: हरा, गहरा हरा, पन्ना हरा
  • धातु: सोना (मुख्य), चांदी (वैकल्पिक)
  • अंगूली: कनिष्ठा (छोटी उंगली) या अनामिका
  • समय: बुधवार, सुबह 7-8 बजे
  • शुद्धता: प्राकृतिक, कोलंबिया या जांबिया का
  • वजन: कम से कम 3 रत्ती
  • फायदे:
    • बुद्धि और स्मृति बढ़ती है
    • वाणी चातुर्य
    • व्यापार में लाभ
    • लेखन में सफलता
    • परीक्षा में सफलता
    • मित्रों का सहयोग
    • गणित में निपुणता
    • कारोबार में स्थिरता

बुध की धातु:

पारा (Mercury), कांसा (Bronze), पीतल (Brass) — पीतल के बर्तन में पानी पीने, पीतल के बर्तन में भोजन करने, कांसे की अंगूठी पहनने से बुध तत्व बलवान होता है।

बुध के रंग:

  • मुख्य: हरा, हल्का हरा
  • वस्त्र: हरा, पन्ना हरा, हल्का पीला
  • फूल: हरे पत्ते, तुलसी, पीला गुलाब
  • अगरबत्ती: चंदन, केसर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बुध कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?

बुद्धि की कमी, वाणी दोष, याददाश्त कमजोर, व्यापार में हानि, छल, चर्म रोग, मित्रों से धोखा।

क्या पन्ना रत्न सभी को धारण करना चाहिए?

नहीं। पन्ना कमजोर बुध वाले जातकों को ही धारण करना चाहिए। पहले कुंडली दिखाएं।

बुधवार व्रत कैसे रखें?

बुधवार की सुबह विष्णु मंदिर जाएँ, हरे वस्त्र धारण करें, तुलसी पूजा करें, एक बार भोजन करें (फलाहार या खिचड़ी)।

बुध अस्त क्यों नहीं होता?

बुध सूर्य के सबसे निकट का ग्रह है और 28° से अधिक दूर नहीं जाता, इसलिए अस्त नहीं होता।

बुध दशा अशुभ हो तो क्या करें?

पन्ना धारण करें, बुधवार व्रत रखें, विष्णु पूजा करें, तुलसी की सेवा करें, गायत्री मंत्र का जाप करें।

क्या महिलाएं पन्ना पहन सकती हैं?

हां, महिलाएं पन्ना पहन सकती हैं। कुंडली के अनुसार निर्णय लें।

बुध किस दिशा में रहता है?

उत्तर दिशा में। सोते समय सिर उत्तर दिशा में रखना शुभ होता है।

मंगल किस दिशा में रहता है?

दक्षिण दिशा में। मंगल (मंगलवार) का अपना दिन है।

बुध किस देवता से जुड़ा है?

बुध देवता विष्णु जी हैं। बुधवार को विष्णु पूजा करना शुभ होता है।



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निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह

प्रिय पाठकों, बुध ग्रह आपकी कुंडली में बुद्धि, वाणी, व्यापार, लेखन और मित्रों का प्रतिनिधित्व करता है। यदि बुध बलवान है तो जीवन में बुद्धि, व्यापार, सफलता और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। यदि कमजोर है तो उपाय करके इसे बलवान बनाया जा सकता है।

मेरी 15 वर्षों के अनुभव की सीख:

  1. विष्णु पूजा — बुध को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय
  2. बुधवार व्रत — 11 बुधवार तक अवश्य करें
  3. पन्ना रत्न — कुंडली दिखाकर ही धारण करें
  4. तुलसी सेवा — घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं
  5. हरा रंग — रोजमर्रा में प्रयोग करें
  6. गायत्री मंत्र — प्रतिदिन जाप करें
  7. मौन व्रत — एक बुधवार मौन व्रत अवश्य रखें

शुभकामनाओं सहित,

गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली

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Frequently Asked Questions

बुध कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?+
बुद्धि की कमी, वाणी दोष, याददाश्त कमजोर, व्यापार में हानि, छल, चर्म रोग, मित्रों से धोखा।
क्या पन्ना रत्न सभी को धारण करना चाहिए?+
नहीं। पन्ना कमजोर बुध वाले जातकों को ही धारण करना चाहिए। पहले कुंडली दिखाएं।
बुधवार व्रत कैसे रखें?+
बुधवार की सुबह विष्णु मंदिर जाएँ, हरे वस्त्र धारण करें, तुलसी पूजा करें, एक बार भोजन करें (फलाहार या खिचड़ी)।
बुध अस्त क्यों नहीं होता?+
बुध सूर्य के सबसे निकट का ग्रह है और 28° से अधिक दूर नहीं जाता, इसलिए अस्त नहीं होता।
बुध दशा अशुभ हो तो क्या करें?+
पन्ना धारण करें, बुधवार व्रत रखें, विष्णु पूजा करें, तुलसी की सेवा करें, गायत्री मंत्र का जाप करें।
क्या महिलाएं पन्ना पहन सकती हैं?+
हां, महिलाएं पन्ना पहन सकती हैं। कुंडली के अनुसार निर्णय लें।
बुध किस दिशा में रहता है?+
उत्तर दिशा में। सोते समय सिर उत्तर दिशा में रखना शुभ होता है।
मंगल किस दिशा में रहता है?+
दक्षिण दिशा में। मंगल (मंगलवार) का अपना दिन है।
बुध किस देवता से जुड़ा है?+
बुध देवता विष्णु जी हैं। बुधवार को विष्णु पूजा करना शुभ होता है।
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Written by

Nidhi Shrimali

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