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ज्येष्ठ मास महत्व ज्येष्ठ माह 2026: महत्व, तिथि, व्रत, उपाय

# ज्येष्ठ मास महत्व ज्येष्ठ माह 2026: महत्व, तिथि, व्रत, उपाय और गुरु माँ निधि **ज्येष्ठ मास महत्व ज्येष्ठ माह 2026** — यह विषय मेरे पास रोजाना सैकड़ों लोग पूछते हैं। जब किसी की कुंडली में ग्रह कमजोर

7 July 2026 16 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। इनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।

ज्येष्ठ मास हिन्दू पंचांग का दूसरा माह है जो हर वर्ष मई-जून के मध्य आता है। यह माह विष्णु जी का प्रिय महीना माना जाता है और इसमें पड़ने वाली निर्जला एकादशी, शनि जयंती, बुध प्रदोष व चंपा षष्ठी जैसे व्रत-त्यौहार धन, संतान और आरोग्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम ज्येष्ठ माह 2026 की तिथियों, धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व, कथा, व्रत-विधि, मंत्र, फायदे और सावधानियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

विषय सूची (Table of Contents)

  1. ज्येष्ठ मास क्या है — परिचय
  2. ज्येष्ठ माह 2026 की तिथियां और मुख्य पर्व
  3. ज्येष्ठ मास का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
  4. ज्येष्ठा नक्षत्ररानी की पौराणिक कथा
  5. ज्येष्ठ मास के प्रमुख व्रत-त्यौहार — निर्जला एकादशी, शनि जयंती, बुध प्रदोष
  6. शनि जयंती विशेष — पूजा विधि और मंत्र
  7. ज्येष्ठ मास के शुभ मंत्र — विष्णु, लक्ष्मी और बुध
  8. व्रत-उपाय — धन, संतान और स्वास्थ्य के लिए
  9. ज्येष्ठ मास के 6 प्रमुख फायदे
  10. सावधानियां और नियम
  11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्येष्ठ मास क्या है — परिचय

ज्येष्ठ मास हिन्दू विक्रम संवत् का दूसरा माह है जो सामान्यतः मई के मध्य से जून के मध्य तक चलता है। इस माह का नामकरण आकाश में स्थित ज्येष्ठा नक्षत्र (जो कि 18 नक्षत्रों में से एक है) के आधार पर हुआ है। ज्येष्ठा का अर्थ ही "सबसे वरिष्ठ" या "श्रेष्ठ" होता है — इसलिए यह महीना वैदिक मान्यता में "श्रेष्ठ मास" के रूप में जाना जाता है।

ज्येष्ठ मास में सूर्य वृषभ राशि से मिथुन राशि की ओर गमन करता है। ग्रीष्म ऋतु का प्रकोप अपने चरम पर होता है — ताप बढ़ने से शरीर में पित्त की वृद्धि होती है। ऐसे में इस माह में सात्विक आहार, जल का संयम और विष्णु-लक्ष्मी की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी माह भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार के बाद अपनी शांत अवस्था में विश्राम किया था, अतः यह मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस माह में पड़ने वाली निर्जला एकादशी का व्रत विष्णु जी की कृपा का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है।

ज्येष्ठ मास का संबंध माता लक्ष्मी और नक्षत्ररानी ज्येष्ठा देवी से भी है। माना जाता है कि इस माह में धन-समृद्धि, व्यापार-वृद्धि और संतान सुख के लिए विशेष उपाय करने से देवी ज्येष्ठा स्वयं प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाती हैं।

ज्येष्ठ माह 2026 की तिथियां और मुख्य पर्व

ज्येष्ठ मास 2026 की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं (दक्षिण भारतीय पंचांग के अनुसार ये तिथियां लगभग 13-14 दिन आगे-पीछे हो सकती हैं):

तिथि/पर्व 2026 की तारीख (अमांत) दिन
ज्येष्ठ मास प्रारंभ 17 मई 2026 रविवार
अमावस्या (शनि जयंती से एक दिन पूर्व) 6 जून 2026 शनिवार
शनि जयंती (अमावस्या) 7 जून 2026 रविवार
निर्जला एकादशी (पद्मिनी एकादशी) 15 जून 2026 सोमवार
वट सावित्री व्रत (कुछ क्षेत्रों में) 16 जून 2026 मंगलवार
बुध प्रदोष व्रत 18 जून 2026 गुरुवार
चंपा षष्ठी (छप्पन भोग) 24 जून 2026 बुधवार
ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा 28 जून 2026 रविवार
ज्येष्ठ मास समाप्ति 30 जून 2026 मंगलवार

विशेष संयोग 2026 का: इस वर्ष शनि जयंती रविवार को पड़ रही है, जो "भैरव चतुर्दशी" योग के साथ मिलकर अत्यंत फलदायी संयोग बना रहा है। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष है, उनके लिए यह दिन विशेष उपायों के लिए श्रेष्ठ है।

महत्वपूर्ण: ज्येष्ठ मास में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास/अधिक मास) का संयोग 2026 में नहीं है। अगला अधिक मास 2027 में आएगा। यह सामान्य ज्येष्ठ मास है, अधिक मास नहीं।

ज्येष्ठ मास का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

ज्येष्ठ मास को तीन दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है — धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय। तीनों का अपना-अपना विशेष महत्व है।

धार्मिक दृष्टि से:

  • भगवान विष्णु का प्रिय मास — निर्जला एकादशी विष्णु जी को समर्पित सबसे बड़ा व्रत है
  • माता लक्ष्मी की उपासना का उत्तम समय — व्यापारियों के लिए वर्ष का सबसे शुभ काल
  • शनि जयंती — शनि देव की कृपा पाने का अवसर
  • वट सावित्री — सुहागिन स्त्रियों के लिए पति की दीर्घायु का व्रत

आध्यात्मिक दृष्टि से:

  • ग्रीष्म ऋतु में तप और संयम से मन की एकाग्रता बढ़ती है
  • निर्जला व्रत से शरीर में पित्त शांत होता है और मन स्थिर होता है
  • ज्येष्ठा नक्षत्र की ऊर्जा से मानसिक शक्ति और धैर्य में वृद्धि
  • विष्णु-लक्ष्मी की संयुक्त उपासना से कुंडली के द्वितीय और सप्तम भाव पर शुभ प्रभाव

ज्योतिषीय दृष्टि से:

  • ज्येष्ठ मास में बुध ग्रह की तीव्रता बढ़ती है — वाणी, व्यापार, बुद्धि से जुड़े मामलों में उपाय प्रभावी
  • शनि अमावस्या को शनि जयंती के रूप में — शनि दोष निवारण का सर्वोत्तम अवसर
  • ज्येष्ठा नक्षत्र बुध ग्रह से शासित है — बुध संबंधी दोषों (पारिवारिक कलह, व्यापार में हानि) के लिए लाभकारी
  • विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्यों के लिए ज्येष्ठ मास की कुछ तिथियां शुभ और कुछ वर्जित

ज्येष्ठा नक्षत्ररानी की पौराणिक कथा

वामन पुराण और नारद पुराण के अनुसार, अत्यंत सुंदर राजकुमारी ज्येष्ठा देवी ने अपनी कठोर तपस्या से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया था। वे इंद्रलोक में नक्षत्रों की रानी के रूप में विराजमान हैं। उनकी कथा इस प्रकार है:

प्राचीन काल में चंद्रवंशी राजा मरीचि की पुत्री ज्येष्ठा थीं। उनका विवाह राजा इंद्रसेन से हुआ था। एक बार किसी श्राप के कारण ज्येष्ठा ने अपनी पति और पुत्रों को खो दिया। तब उन्होंने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने प्रकट होकर उन्हें वरदान दिया — "तुम नक्षत्रलोक में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करोगी और तुम्हारे नाम से ही एक मास प्रसिद्ध होगा।"

तभी से ज्येष्ठा नक्षत्र स्वर्ग में अपनी पत्नी के साथ निवास करती हैं और ज्येष्ठ मास उनके सम्मान में मनाया जाता है। माना जाता है कि ज्येष्ठ मास में जो स्त्री-पुरुष दान-पुण्य, व्रत-उपवास करते हैं, उन पर ज्येष्ठा माता की विशेष कृपा बरसती है।

दूसरी कथा — माता लक्ष्मी की कथा के अनुसार: ज्येष्ठ मास में माता लक्ष्मी ने समुद्र मंथन के बाद पहली बार प्रकट होकर भगवान विष्णु की शरण ली थी। इसीलिए यह मास धन-समृद्धि, व्यापार-वृद्धि और गृह-सौभाग्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। व्यापारी वर्ग इस माह में माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करता है।

कथा का संदेश: ज्येष्ठा माता की कथा हमें सिखाती है कि कठिन समय में भी धैर्य और भगवान के प्रति समर्पण बनाए रखना चाहिए। संकट अस्थायी होते हैं, ईश्वर की कृपा स्थायी।

ज्येष्ठ मास के प्रमुख व्रत-त्यौहार

ज्येष्ठ मास में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्यौहार आते हैं। प्रत्येक का अपना विशेष महत्व और विधि है:

1. निर्जला एकादशी (पद्मिनी एकादशी)

  • तिथि 2026: 15 जून 2026, सोमवार
  • महत्व: वर्ष की सबसे कठोर और फलदायी एकादशी — भगवान विष्णु को समर्पित
  • विशेषता: बिना जल पीए रखा जाने वाला व्रत — एक बार भी जल नहीं पीना होता
  • फल: सभी पापों का क्षय, मोक्ष की प्राप्ति, विष्णु लोक में स्थान

2. शनि जयंती

  • तिथि 2026: 7 जून 2026, रविवार
  • महत्व: शनि देव के आविर्भाव का दिन — शनि दोष निवारण का सर्वोत्तम अवसर
  • विशेषता: काले तिल, सरसों का तेल, लोहे की वस्तु का दान
  • फल: साढ़ेसाती, ढैय्या, शनि पीड़ा से मुक्ति, नौकरी-व्यापार में स्थिरता

3. बुध प्रदोष व्रत

  • तिथि 2026: 18 जून 2026, गुरुवार
  • महत्व: बुध ग्रह की शांति के लिए विशेष व्रत
  • विशेषता: प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के 2 घंटे 24 मिनट) में शिव पूजा
  • फल: वाणी में मधुरता, व्यापार-लाभ, बुद्धि-विवेक में वृद्धि

4. वट सावित्री व्रत (कुछ क्षेत्रों में)

  • तिथि 2026: 16 जून 2026, मंगलवार (ज्येष्ठ अमावस्या से अगले दिन)
  • महत्व: सुहागिन स्त्रियों द्वारा पति की दीर्घायु के लिए
  • विशेषता: बरगद के वृक्ष की पूजा, सावित्री-सत्यवान की कथा
  • फल: पति की आयु वृद्धि, सुहाग की रक्षा

5. चंपा षष्ठी (छप्पन भोग)

  • तिथि 2026: 24 जून 2026, बुधवार
  • महत्व: माँ भगवती की पूजा — 56 भोग लगाने का दिन
  • विशेषता: बंगाल और पूर्वी भारत में प्रमुख, कन्या पूजन विशेष
  • फल: संतान सुख, गृह-कलेश का निवारण, माँ की कृपा

शनि जयंती विशेष — पूजा विधि और मंत्र

शनि जयंती ज्येष्ठ मास का सबसे बड़ा व्रत है। शनि देव की कृपा पाने के लिए यह दिन सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।

पूजा सामग्री:

  • काले तिल, सरसों का तेल, काले कपड़े की चादर
  • शनि देव की मूर्ति या तस्वीर
  • लोहे का कड़ा, काले चने, गुड़, सरसों
  • सरसों का तेल का दीपक
  • नीलम या अमेथिस्ट (यदि धारण करते हों)
  • धूप-दीपक, कुमकुम, अक्षत, फूल

पूजा विधि — चरणबद्ध:

  1. प्रातःकाल स्नान के बाद काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें
  2. शनि देव की मूर्ति पूजा स्थान पर स्थापित करें, काले कपड़े की चादर बिछाएं
  3. तिलक — सरसों के तेल में काले तिल मिलाकर शनि देव को तिलक लगाएं
  4. अक्षत, पुष्प, धूप-दीपक अर्पित करें
  5. शनि मंत्र का 108 बार जाप करें
  6. हवन — गाय के घी और काले तिल से हवन करें
  7. दान — काले तिल, सरसों का तेल, काले कपड़े, लोहे की वस्तु, गुड़, काले चने का दान करें
  8. विशेष भोग — शनि देव को तिल, गुड़, काले चने का भोग लगाएं
  9. शनि मंदिर जाकर दर्शन करें (यदि संभव हो)

शनि जयंती के विशेष उपाय:

  • काले कुत्ते को रोटी खिलाएं
  • काले कौवे को भीगा चना दें
  • निर्धन व्यक्ति को काले कंबल का दान करें
  • पीपल के वृक्ष में जल दें
  • सरसों के तेल का दीपक शनि मंदिर में जलाएं

ज्येष्ठ मास के शुभ मंत्र

ज्येष्ठ मास में मुख्य रूप से विष्णु, लक्ष्मी, बुध और शनि के मंत्रों का जाप फलदायी होता है:

विष्णु मंत्र (निर्जला एकादशी के लिए विशेष):

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
  • ॐ विष्णवे नमः
  • ॐ नारायणाय नमः

लक्ष्मी मंत्र (धन-समृद्धि के लिए):

  • ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं नमः
  • ॐ महालक्ष्म्यै नमः
  • ॐ श्रीं श्रीयै नमः

बुध मंत्र (बुध प्रदोष और व्यापार के लिए):

  • ॐ बुं बुधाय नमः
  • ॐ ब्रह्मपुत्राय नमः

शनि मंत्र (शनि जयंती के लिए):

  • ॐ शं शनैश्चराय नमः
  • ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
  • ॐ हं हनुमते नमः (शनि पीड़ा में हनुमान जी की पूजा भी प्रभावी)

जाप विधि:

  • 108 माला पर 11 बार या 21 बार जाप करें
  • ब्रह्म मुहूर्त (4-5 बजे) में जाप सर्वोत्तम
  • शनिवार को शनि मंत्र का जाप विशेष फलदायी
  • बुधवार को बुध मंत्र का जाप प्रभावी
  • प्रदोष काल में शिव मंत्र का जाप अवश्य करें

व्रत-उपाय — धन, संतान और स्वास्थ्य के लिए

ज्येष्ठ मास में कुछ विशेष उपाय विभिन्न समस्याओं के लिए किए जा सकते हैं:

धन-समृद्धि के लिए:

  • निर्जला एकादशी का व्रत रखें — व्यापार में वृद्धि
  • शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा करें
  • शुक्रवार को पीले वस्त्र धारण करें और पीले फूल चढ़ाएं
  • तुलसी के पौधे में जल दें
  • कुबेर मंत्र का 108 बार जाप करें

संतान सुख के लिए:

  • चंपा षष्ठी पर कन्या पूजन करें
  • सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाएं
  • संतान गोपाल मंत्र का जाप करें
  • कन्याओं को भोजन कराएं
  • गाय को हरा चारा खिलाएं

स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए:

  • निर्जला व्रत रखने से शरीर के विषैले तत्व निकलते हैं
  • प्रतिदिन सुबह तुलसी के 5 पत्ते खाएं
  • गर्म पानी का सेवन करें
  • सात्विक भोजन करें
  • रात्रि जागरण से बचें

शनि दोष निवारण के लिए:

  • शनि जयंती पर काले तिल का तेल शनि मंदिर में चढ़ाएं
  • शनिवार को पीपल में जल दें
  • काले कुत्ते को रोटी खिलाएं
  • हनुमान चालीसा का पाठ करें
  • नीलम रत्न धारण करें (कुंडली अनुसार)

ज्येष्ठ मास के 6 प्रमुख फायदे

  1. धन-समृद्धि की प्राप्ति: माता लक्ष्मी की कृपा से व्यापार में वृद्धि, आर्थिक संकट दूर, अटके हुए धन की प्राप्ति। ज्येष्ठ मास में किए गए लक्ष्मी पूजन का फल वर्ष भर बना रहता है।

  2. बुध-शनि ग्रह की शांति: बुध प्रदोष व्रत और शनि जयंती के उपायों से कुंडली में बुध-शनि के दोष शांत होते हैं। वाणी में मधुरता, व्यापार में स्थिरता, पारिवारिक कलेश का निवारण।

  3. सभी पापों का क्षय: निर्जला एकादशी का व्रत सभी प्रकार के पापों को नष्ट करने वाला माना जाता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में नई ऊर्जा और शुभता आती है।

  4. संतान सुख और गृह-कलेश निवारण: चंपा षष्ठी और संतान गोपाल मंत्र के जाप से संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। गृह में सुख-शांति बनी रहती है।

  5. स्वास्थ्य लाभ और शारीरिक शुद्धि: निर्जला व्रत से शरीर का डिटॉक्सीफिकेशन होता है। पित्त शांत होता है, पाचन सुधरता है, मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।

  6. मोक्ष की ओर अग्रसर: पद्मिनी एकादशी (निर्जला एकादशी) का व्रत भगवान विष्णु की कृपा से विष्णु लोक की प्राप्ति कराता है। यह व्रत मृत्यु के बाद की यात्रा को भी सरल बनाता है।

  7. नौकरी और करियर में सफलता: शनि जयंती के उपाय कुंडली में शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिए वरदान साबित होते हैं। नौकरी में पदोन्नति, व्यापार में मुनाफा, सरकारी सेवा में सफलता मिलती है।

सावधानियां और नियम

ज्येष्ठ मास में कुछ विशेष सावधानियां रखनी चाहिए:

  1. निर्जला व्रत स्वास्थ्य अनुसार: निर्जला एकादशी ग्रीष्म ऋतु में आती है। गर्भवती स्त्रियां, बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति और बच्चे निर्जला व्रत न रखें — एक समय फलाहार कर सकते हैं।

  2. तामसिक भोजन का त्याग: मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज का सेवन इस माह वर्जित। सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।

  3. क्रोध और असत्य का परित्याग: व्रत के दिन क्रोध, झूठ, चुगली का त्याग करें। मन की शुद्धता से ही व्रत का फल मिलता है।

  4. अन्न-जल दान का विशेष महत्व: ग्रीष्म ऋतु में प्यासे व्यक्ति को जल दान, भूखे को अन्न दान का पुण्य इस माह अत्यधिक बढ़ जाता है।

  5. शुभ और अशुभ कार्य: ज्येष्ठ मास में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्यों के लिए शुभ तिथि और मुहूर्त पंचांग से अवश्य देखें। कुछ तिथियां इन कार्यों के लिए वर्जित मानी जाती हैं।

  6. देवी ज्येष्ठा की पूजा में सतर्कता: माना जाता है कि ज्येष्ठ मास में ज्येष्ठा नक्षत्र की ऊर्जा तीव्र होती है। रात्रि को अकेले बाहर जाने, किसी अंधेरे स्थान पर जाने से बचें।

  7. तिलक और माला: शनि जयंती पर सरसों के तेल का तिलक अवश्य लगाएं। काले या नीले रंग की माला धारण करें।

  8. गर्भवती स्त्रियों के लिए विशेष सावधानी: ज्येष्ठ मास में गर्भवती स्त्रियों को अधिक कठोर व्रत नहीं रखने चाहिए। चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्येष्ठ मास 2026 कब से कब तक है?

ज्येष्ठ मास 2026 अमांत पंचांग के अनुसार 17 मई 2026 से 30 जून 2026 तक रहेगा। शनि जयंती 7 जून और निर्जला एकादशी 15 जून को है। पुरुषोत्तम (अधिक) मास 2026 में नहीं है।

क्या ज्येष्ठ मास में शादी कर सकते हैं?

शास्त्रानुसार ज्येष्ठ मास में विवाह वर्जित माना जाता है। यह मास कठिन तपस्या और सात्विक जीवन का मास है। विवाह के लिए वैशाख, ज्येष्ठ शुक्ल या माघ मास अधिक शुभ माने जाते हैं। हालांकि पंचांग अनुसार कुछ विशेष शुभ मुहूर्तों में विवाह संभव है — इसके लिए विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लें।

निर्जला एकादशी 2026 कब है और क्यों सबसे कठोर है?

निर्जला एकादशी 2026 — 15 जून 2026, सोमवार को है। इसे "सबसे कठोर एकादशी" कहते हैं क्योंकि व्रत रखने वाले को 24 घंटे तक एक बूंद भी जल नहीं पीना होता। सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक बिना जल-अन्न रहकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसका फल सभी अन्य एकादशियों से अधिक माना जाता है।

शनि जयंती 2026 कैसे करें और क्या चढ़ाएं?

शनि जयंती 2026 — 7 जून 2026, रविवार को है। इस दिन काले तिल, सरसों का तेल, काले चने, गुड़, लोहे की वस्तु का दान करें। काले कपड़े पहनें, शनि मंदिर जाएं, काले कुत्ते को रोटी खिलाएं। शनि मंत्र "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का 108 बार जाप करें।

क्या बुध प्रदोष का विशेष महत्व है?

हाँ, बुध प्रदोष व्रत बुध ग्रह की शांति के लिए अत्यंत प्रभावी है। जिन लोगों की कुंडली में बुध पीड़ित है, वाणी में दोष है, व्यापार में हानि हो रही है, पारिवारिक कलेश है — उनके लिए यह व्रत रामबाण है। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के 2 घंटे 24 मिनट) में शिवलिंग पर जल चढ़ाकर शिव मंत्र का जाप करें। 2026 में यह 18 जून को है।

क्या निर्जला एकादशी रखना जरूरी है?

निर्जला एकादशी अनिवार्य नहीं है — यह सर्वोत्तम फल देने वाला व्रत है। स्वस्थ व्यक्ति के लिए निर्जला व्रत श्रेष्ठ है, लेकिन गर्भवती, रोगी, बुजुर्ग और बच्चे एक समय फलाहार ले सकते हैं। अन्न-जल का त्याग आंशिक भी हो तो भी व्रत का आंशिक फल मिलता है। मुख्य बात है — विष्णु जी का स्मरण और पूर्ण श्रद्धा।

क्या ज्येष्ठ मास में मुंडन करवा सकते हैं?

ज्येष्ठ मास में मुंडन वर्जित माना जाता है। माना जाता है कि इस माह में बाल काटने से शनि और राहु के दोष बढ़ते हैं। मुंडन के लिए वैशाख, माघ या फाल्गुन मास अधिक शुभ माना जाता है। हालांकि कुछ पंचांगों के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की कुछ तिथियां शुभ हैं।

ज्येष्ठ मास में कौन से कार्य वर्जित हैं?

ज्येष्ठ मास में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, नए वाहन खरीदना, भूमि-भवन का सौदा, गहरी नींद वाले कार्य, और किसी भी प्रकार का हिंसक कार्य वर्जित माना जाता है। इसके बजाय दान, जप, तप, सेवा पर बल दिया जाता है।


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Frequently Asked Questions

ज्येष्ठ मास 2026 कब से कब तक है?+
ज्येष्ठ मास 2026 अमांत पंचांग के अनुसार 17 मई 2026 से 30 जून 2026 तक रहेगा। शनि जयंती 7 जून और निर्जला एकादशी 15 जून को है। 2026 में अधिक (पुरुषोत्तम) मास नहीं है।
क्या ज्येष्ठ मास में शादी कर सकते हैं?+
शास्त्रानुसार ज्येष्ठ मास में विवाह वर्जित माना जाता है। यह तपस्या का मास है। विवाह के लिए वैशाख, माघ या फाल्गुन अधिक शुभ हैं। पंचांग अनुसार कुछ विशेष मुहूर्तों में विवाह संभव — इसके लिए विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लें।
निर्जला एकादशी 2026 कब है और यह सबसे कठोर क्यों है?+
निर्जला एकादशी 2026 — 15 जून 2026, सोमवार को है। इसे सबसे कठोर एकादशी कहते हैं क्योंकि 24 घंटे तक एक बूंद भी जल नहीं पीना होता। फल भी सबसे अधिक मिलता है।
शनि जयंती 2026 कैसे करें और क्या चढ़ाएं?+
शनि जयंती 2026 — 7 जून 2026, रविवार को है। काले तिल, सरसों का तेल, काले चने, गुड़, लोहे की वस्तु का दान करें। काले कपड़े पहनें, काले कुत्ते को रोटी खिलाएं, शनि मंत्र का 108 बार जाप करें।
क्या बुध प्रदोष का विशेष महत्व है?+
हाँ, बुध प्रदोष व्रत बुध पीड़ा, वाणी दोष, व्यापार हानि और पारिवारिक कलेश के लिए रामबाण है। प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल चढ़ाकर शिव मंत्र का जाप करें। 2026 में यह 18 जून को है।
क्या निर्जला एकादशी रखना जरूरी है?+
निर्जला एकादशी अनिवार्य नहीं — सर्वोत्तम फलदायी है। स्वस्थ व्यक्ति निर्जला रखें, गर्भवती, रोगी, बुजुर्ग, बच्चे एक समय फलाहार ले सकते हैं। विष्णु जी का स्मरण और श्रद्धा मुख्य है।
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Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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