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राहु दोष निवारण राहु पूजा का महत्व और लाभ

# राहु दोष निवारण राहु पूजा का महत्व और लाभ | राहु दोष निवारण पूजा > ✨ **ल ेखिक ा परिचय:** यह ल ेख **गुरुमूर्ति निधिश्रीमाली जी** द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है।

7 July 2026 13 min read|By Nidhi Shrimali

⚡ संक्षेप में — राहु दोष निवारण

लेखिका: निधि श्रीमाली | वैदिक ज्योतिषी, 18+ वर्षों का अनुभव
अद्यतन: अगस्त 2026 | पढ़ने का समय: 14 मिनट
रेटिंग: ★★★★★ 4.9/5 (1,425+ परामर्श समीक्षाओं से)

राहु दोष का लक्षण भ्रम है — निर्णय में स्पष्टता का अभाव, अकारण भय, व्यसन, और वह विशेष अनुभव कि जो चाहा वह मिलने पर भी संतोष नहीं हुआ। मुख्य उपाय दुर्गा उपासना, शनिवार को नारियल-उड़द का दान, और कुत्तों को भोजन। राहु पूजा शनिवार अथवा अमावस्या को की जाती है।


विषय सूची

  1. राहु कौन है
  2. राहु दोष के लक्षण
  3. कुंडली में राहु दोष के योग
  4. बारह भावों में राहु
  5. काल सर्प दोष
  6. राहु पूजा का महत्व
  7. राहु पूजा विधि
  8. पूजा सामग्री
  9. राहु मंत्र
  10. घर पर किए जाने वाले उपाय
  11. गोमेद रत्न — चेतावनी
  12. राहु का शुभ पक्ष

राहु कौन है

राहु कोई भौतिक ग्रह नहीं है। यह चंद्रमा की कक्षा और क्रांतिवृत्त के दो कटान बिंदुओं में से एक है — उत्तर लुनार नोड। दूसरा बिंदु केतु है, और ये दोनों सदैव एक-दूसरे से ठीक 180 अंश की दूरी पर रहते हैं।

पुराणों में इसकी कथा है — समुद्र मंथन के समय स्वरभानु नामक असुर ने छल से अमृत पी लिया। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया, परंतु अमृत के प्रभाव से वह मरा नहीं। सिर 'राहु' और शरीर 'केतु' बन गया। इसी कारण राहु को बिना शरीर का सिर कहा जाता है — अर्थात् भूख, जिसकी कोई सीमा नहीं; इच्छा, जो कभी तृप्त नहीं होती।

यह कथा केवल कथा नहीं है। अठारह वर्षों के अनुभव में मैंने पाया है कि राहु दोष का सबसे सटीक वर्णन यही है — राहु आपको कोई वस्तु तीव्रता से चाहने पर विवश करता है, और वह मिल जाने पर भी संतोष नहीं देता। जजमान बार-बार यही बताते हैं: "जो चाहा था वह मिल गया, फिर भी कुछ अधूरा लगता है।"

स्वरूपछाया ग्रह; उत्तर लुनार नोड
देवतादुर्गा, भैरव
दिनशनिवार (कुछ परंपराओं में बुधवार)
रत्नगोमेद (हेसोनाइट)
धातुसीसा, अष्टधातु
दाननारियल, उड़द दाल, सरसों का तेल, नीला-काला वस्त्र, तिल
महादशा18 वर्ष
गोचरएक राशि में लगभग 18 माह; सदैव वक्री

राहु दोष के लक्षण

राहु के लक्षण अन्य ग्रहों से भिन्न हैं। शनि विलंब देता है, मंगल टकराव, परंतु राहु भ्रम देता है — और यही उसे पहचानना कठिन बनाता है।

  • निर्णय में स्पष्टता का अभाव। सही-गलत का बोध धुँधला हो जाता है। बाद में लगता है कि वह निर्णय कैसे लिया।
  • अकारण भय और चिंता। ऐसा भय जिसका कोई ठोस कारण न हो; रात में बेचैनी।
  • व्यसन। मदिरा, धूम्रपान, जुआ, अत्यधिक मोबाइल — राहु का सबसे स्पष्ट लक्षण। नशा मुक्ति के प्रकरणों में राहु प्रायः प्रमुख कारक होता है।
  • छल का सामना करना — धोखा, अकारण अपयश, ऐसे आरोप जो निराधार हों।
  • अचानक हानि — बिना पूर्व संकेत। राहु सूचना नहीं देता।
  • ऐसे रोग जिनका निदान न हो। जाँच सामान्य आती है, कष्ट बना रहता है। एलर्जी, त्वचा रोग, अनिद्रा, घबराहट।
  • विदेश की ओर आकर्षण — यह शुभ पक्ष भी हो सकता है।
  • परछाईं दिखना, बुरे स्वप्न, श्मशान या साँप के स्वप्न।
  • अतृप्ति — प्राप्ति के बाद भी संतोष का अभाव। यही राहु का मूल स्वरूप है।

एक ईमानदार सावधानी: ये लक्षण केवल राहु के नहीं हैं। चिंता, अनिद्रा और अनिर्णय के अनेक कारण हैं — ज्योतिषीय और चिकित्सकीय दोनों। राहु दोष तब सार्थक होता है जब कुंडली और जीवन के अनुभव, दोनों एक ही दिशा में संकेत करें।

कुंडली में राहु दोष के योग

ये वे योग हैं जिन्हें मैं वास्तव में देखती हूँ:

योगप्रभाव
राहु-सूर्य युति (ग्रहण योग)आत्मविश्वास और पिता से संबंध पर प्रभाव; पितृ दोष का भी संकेत
राहु-चंद्र युति (ग्रहण योग)मानसिक अशांति, भ्रम, भय, अनिद्रा — सर्वाधिक कष्टकारी
राहु-मंगल युति (अंगारक योग)तीव्र क्रोध, दुर्घटना, आक्रामकता
राहु-गुरु युति (चांडाल योग)गुरु का अपमान, विवेक पर आवरण, धर्म से विमुखता
राहु-शनि युतिदीर्घकालिक बाधा, गहरी निराशा
राहु 1, 4, 7, 8 भाव मेंक्रमशः स्व, गृह, विवाह और आयु पर प्रभाव
राहु की महादशा या अंतर्दशायही सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है — दशा के बिना योग प्रायः निष्क्रिय रहता है

अंतिम पंक्ति पर विशेष ध्यान दें। कुंडली में राहु का योग होना और उसका सक्रिय होना दो भिन्न बातें हैं। ग्रहण योग वाले अनेक व्यक्तियों को जीवनभर कोई विशेष कष्ट नहीं होता, क्योंकि राहु की दशा नहीं आई। यही कारण है कि समान योग वाले दो व्यक्तियों का अनुभव पूर्णतः भिन्न होता है — और यही कारण है कि सामान्य लेख से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं।

बारह भावों में राहु

राहु का प्रभाव भाव पर निर्भर करता है। राहु 3, 6, 10 और 11 भाव में शुभ फल देता है — यह बात प्रायः नहीं बताई जाती।

भावप्रभाव
1बेचैन महत्वाकांक्षा, पहचान में भ्रम, रूप-परिवर्तन की इच्छा
2वाणी कठोर, बचत में कमी, कुटुंब से मतभेद
3शुभ। साहस, संवाद शक्ति, स्वप्रयास से उन्नति
4गृह में असंतोष, माता से दूरी, भूमि विवाद
5सट्टे में हानि, संतान की चिंता, अपरंपरागत प्रेम
6सर्वाधिक शुभ। शत्रु, ऋण और रोग पर विजय
7विवाह में भ्रम, संदेह, अपरंपरागत संबंध
8आकस्मिक घटनाएँ, संयुक्त धन में उलझन, शल्य चिकित्सा
9विदेश योग, परंतु आस्था और पिता से दूरी
10शुभ। अचानक पदोन्नति, प्रसिद्धि — परंतु अस्थिरता के साथ
11शुभ। आय में वृद्धि, नए स्रोत, संपर्कों से लाभ
12व्यय, विदेश, अनिद्रा — परंतु आध्यात्मिक गहराई भी

काल सर्प दोष

जब जन्म कुंडली में सातों दृश्य ग्रह राहु और केतु की धुरी के एक ही ओर आ जाएँ, तो काल सर्प दोष बनता है। यह जन्म कुंडली की स्थिति है, गोचर की नहीं — अर्थात् राहु का गोचर किसी में नया काल सर्प दोष नहीं बना सकता।

इसके बारह प्रकार होते हैं, जो राहु-केतु की भाव स्थिति पर निर्भर करते हैं, और इनमें आरोही (अनंत से शेषनाग) और अवरोही भेद भी होता है। कष्ट की तीव्रता प्रकार, दशा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती है।

महत्वपूर्ण बात — काल सर्प दोष वाले अनेक व्यक्ति अत्यंत सफल होते हैं। यह दोष संघर्ष देता है, असफलता अनिवार्य नहीं करता। विस्तृत जानकारी के लिए काल सर्प दोष की संपूर्ण गाइड देखें।

राहु पूजा का महत्व

राहु पूजा का उद्देश्य राहु को समाप्त करना नहीं है — यह संभव भी नहीं। उद्देश्य है उसके प्रभाव की तीव्रता कम करना और भ्रम के स्थान पर स्पष्टता लाना।

शास्त्रीय दृष्टि से राहु कर्म-फल का वाहक है। पूजा उस फल को मिटाती नहीं, अपितु उसके आने का ढंग कोमल कर देती है — जैसे ऋण समाप्त न होकर पुनर्निर्धारित हो जाए।

व्यवहार में जजमान जो सबसे अधिक बताते हैं, वह कोई चमत्कार नहीं होता। वे कहते हैं कि निर्णय लेना सरल हो गया, अकारण भय घट गया, और यह अनुभव कि "हर ओर से रुकावट है" समाप्त हो गया। यह वास्तविक लाभ है, और यह किसी विशेष परिणाम की गारंटी से भिन्न है।

राहु पूजा कब आवश्यक है:

  • राहु की महादशा या अंतर्दशा प्रारंभ होने पर
  • ग्रहण योग (राहु-सूर्य या राहु-चंद्र युति) होने पर
  • काल सर्प दोष के सक्रिय काल में
  • राहु का गोचर जन्म राशि, लग्न अथवा 8वें भाव पर आने पर
  • व्यसन, अकारण भय अथवा निदान-रहित रोग की स्थिति में
  • बार-बार छल या अपयश का सामना करने पर

राहु पूजा विधि

शुभ समय: शनिवार, अमावस्या, अथवा ग्रहण काल। सायंकाल का समय राहु के लिए अधिक उपयुक्त माना गया है। राहु काल में यह पूजा वर्जित नहीं, अपितु कुछ परंपराओं में उपयुक्त मानी जाती है।

  1. संकल्प — अपना नाम, गोत्र, नक्षत्र और उद्देश्य स्पष्ट रूप से कहें। यह चरण पूजा को आपसे जोड़ता है; इसे न छोड़ें।
  2. गणेश पूजन — प्रत्येक वैदिक कर्म में प्रथम। राहु का देवता गणेश भी माने जाते हैं, अतः यह दोहरा महत्व रखता है।
  3. कलश स्थापना
  4. राहु यंत्र अथवा प्रतिमा की स्थापना — दक्षिण-पश्चिम दिशा में, नीले या काले वस्त्र पर।
  5. अभिषेक — जल, दूध, सरसों के तेल से।
  6. अर्पण — नीले पुष्प, नारियल, उड़द दाल, तिल, नीला वस्त्र, सरसों का तेल का दीपक।
  7. मंत्र जाप — राहु बीज मंत्र का 18,000 बार जाप शास्त्रीय संख्या है। व्यक्तिगत पूजा में 1,008 या 108 बार भी किया जाता है।
  8. दुर्गा उपासना — दुर्गा सप्तशती अथवा दुर्गा चालीसा का पाठ। यह राहु का सर्वप्रमुख उपाय है।
  9. हवन — दूर्वा और तिल की आहुति सहित।
  10. दान — नारियल, उड़द, तिल, नीला-काला वस्त्र, सरसों का तेल। यही वह चरण है जो शास्त्रीय दृष्टि से कर्म-ऋण का निपटान करता है, अतः इसे औपचारिकता न मानें।
  11. आरती और प्रसाद वितरण

यदि आप स्वयं पूजा नहीं करा सकते अथवा योग्य पंडित उपलब्ध नहीं है, तो हम इसे ई-पूजा के रूप में कराते हैं — आपके नाम, गोत्र और नक्षत्र से संकल्प लिया जाता है और रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई जाती है।

पूजा सामग्री

अनाजउड़द दाल (काली)
वस्त्रनीला अथवा काला
पुष्पनीले पुष्प; कनेर
विशेषनारियल (साबुत), तिल, सरसों का तेल, दूर्वा
धातुसीसा अथवा अष्टधातु
दीपकसरसों के तेल का
समिधादूर्वा
नैवेद्यनारियल, तिल के लड्डू
दिशादक्षिण-पश्चिम

राहु मंत्र

बीज मंत्र — दैनिक जाप हेतु सर्वोत्तम:

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ कयानश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा।
कया शचिष्ठया वृता॥

पौराणिक मंत्र:

अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥

सरल नाम मंत्र:

ॐ रां राहवे नमः

शास्त्रीय जाप संख्या 18,000 है। नित्य अभ्यास के लिए शनिवार को 108 बार पर्याप्त है। जाप शनिवार सायंकाल, दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुख करके करें।

घर पर किए जाने वाले उपाय

ये उपाय बिना पंडित और बिना व्यय किए जा सकते हैं। मेरे अनुभव में इनका प्रभाव किसी बड़ी पूजा से कम नहीं है — क्योंकि ये नित्य होते हैं।

प्रतिदिन

  • कुत्तों को भोजन दें। राहु का सबसे सरल और सर्वाधिक प्रभावी उपाय। रोटी, दूध — जो संभव हो।
  • दुर्गा चालीसा का पाठ करें। दुर्गा राहु की अधिष्ठात्री देवी हैं।
  • गायत्री मंत्र 108 बार, प्रातः पूर्व दिशा की ओर।
  • असत्य से बचें। यह उपाय है, उपदेश नहीं। राहु का कष्ट छल और अधैर्य से आता है — और आत्म-वंचना भी इसमें सम्मिलित है।

शनिवार को

  • नारियल बहते जल में प्रवाहित करें। राहु के लिए विशेष उपाय।
  • उड़द दाल, तिल, सरसों का तेल और नीला-काला वस्त्र दान करें — किसी आवश्यकतामंद को, पात्र में नहीं।
  • भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • राहु बीज मंत्र 108 बार।

अन्य

  • अमावस्या को दान और पितरों के लिए तर्पण।
  • व्यसन का त्याग। राहु और व्यसन का सीधा संबंध है; एक भी व्यसन छोड़ना किसी भी पूजा से अधिक प्रभावी है।
  • चाँदी का हाथी घर में रखना — पारंपरिक उपाय।
  • घर स्वच्छ और अव्यवस्था-रहित रखें। राहु अव्यवस्था में बल पाता है।
  • मोबाइल और स्क्रीन का समय घटाएँ। आधुनिक राहु का सबसे सामान्य रूप यही है।

गोमेद रत्न — चेतावनी

गोमेद (हेसोनाइट) राहु का रत्न है, और यह नीलम की श्रेणी का रत्न है — शक्तिशाली, शीघ्र प्रभावी, और बिना कुंडली विश्लेषण धारण करने पर हानिकारक।

गोमेद राहु को शांत नहीं करता — वह राहु को बल देता है। यदि कुंडली में राहु पहले से प्रबल है, तो गोमेद वही बेचैनी, भ्रम और अविवेक बढ़ाएगा जिसे आप घटाना चाहते थे। मेरे पास ऐसे प्रकरण नियमित आते हैं।

यदि धारण करना ही हो तो नियम कठोर हैं — चाँदी अथवा अष्टधातु में, मध्यमा अंगुली में, शनिवार को, शुक्ल पक्ष में। माणिक्य, मोती, मूँगा अथवा पुखराज के साथ कदापि नहीं — राहु सूर्य, चंद्र, मंगल और गुरु से मैत्री नहीं रखता। तीन दिन का परीक्षण अवश्य करें; यदि नींद बिगड़े, विवाद हों अथवा हानि हो, तो तुरंत उतार दें।

बिना जोखिम राहु का उपाय चाहिए तो ऊपर दिए गए मंत्र और दान का मार्ग अपनाएँ। उनमें कोई हानि नहीं है। रत्न कुंडली विश्लेषण के पश्चात ही, किसी लेख के आधार पर नहीं — इस लेख के आधार पर भी नहीं।

राहु का शुभ पक्ष

यह भाग आवश्यक है, क्योंकि राहु के विषय में भय अनुपात से अधिक है।

राहु केवल कष्टकारी नहीं है। वह असाधारण उपलब्धि का ग्रह भी है। जिन क्षेत्रों में परंपरा से हटकर आगे बढ़ना पड़ता है — तकनीक, विदेश व्यापार, वायुयान, फिल्म, राजनीति, अनुसंधान, औषधि — वहाँ सफल व्यक्तियों की कुंडली में राहु प्रायः बलवान होता है।

3, 6, 10 और 11 भाव में राहु शुभ फल देता है। 6वें भाव का राहु शत्रु, ऋण और रोग पर विजय देता है; 11वें का आय बढ़ाता है; 10वें का अचानक पदोन्नति और प्रसिद्धि।

राहु का अध्यात्म से भी गहरा संबंध है। तंत्र, ज्योतिष, गूढ़ विद्या और मनोविज्ञान के गंभीर साधक प्रायः राहु-प्रधान कुंडली वाले होते हैं।

अंत में एक बात जो मैं प्रत्येक जजमान से कहती हूँ। राहु का कष्ट प्रायः स्वयं का बनाया हुआ होता है। राहु दुर्भाग्य नहीं भेजता — वह ऐसी तीव्र इच्छा उत्पन्न करता है जो विवेक पर भारी पड़ जाती है, और हानि उस निर्णय से होती है। इसका अर्थ यह भी है कि उपाय आपके हाथ में है: जहाँ राहु बैठा है, वहाँ अपने उत्साह पर संदेह करें और स्वतंत्र रूप से जाँच करें। यह किसी भी रत्न से अधिक प्रभावी है।


शुभकामनाएँ सहित,
निधि श्रीमाली
प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली


जानिए आपकी कुंडली में राहु कहाँ है

राहु का योग होना और उसका सक्रिय होना दो भिन्न बातें हैं। कष्ट की तीव्रता भाव, दशा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती है — और यही सामान्य लेख नहीं बता सकता।

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[{"question":"राहु दोष के मुख्य लक्षण क्या हैं?","answer":"राहु का मुख्य लक्षण भ्रम है — निर्णय में स्पष्टता का अभाव, अकारण भय और चिंता, व्यसन, छल का सामना, बिना पूर्व संकेत अचानक हानि, और ऐसे रोग जिनकी जाँच सामान्य आती है पर कष्ट बना रहता है। सबसे विशिष्ट लक्षण अतृप्ति है — जो चाहा वह मिलने पर भी संतोष न होना, क्योंकि राहु बिना शरीर का सिर है।"}, {"question":"राहु पूजा कब करनी चाहिए?","answer":"शनिवार, अमावस्या अथवा ग्रहण काल में, और सायंकाल का समय अधिक उपयुक्त माना गया है। विशेष रूप से तब आवश्यक है जब राहु की महादशा या अंतर्दशा प्रारंभ हो, कुंडली में ग्रहण योग हो, काल सर्प दोष सक्रिय हो, राहु का गोचर जन्म राशि या 8वें भाव पर आए, अथवा व्यसन और निदान-रहित रोग की स्थिति हो।"}, {"question":"राहु दोष के लिए सबसे प्रभावी उपाय क्या है?","answer":"दुर्गा उपासना — दुर्गा सप्तशती अथवा दुर्गा चालीसा का पाठ, क्योंकि दुर्गा राहु की अधिष्ठात्री देवी हैं। इसके साथ कुत्तों को भोजन देना, शनिवार को नारियल बहते जल में प्रवाहित करना, और उड़द दाल, तिल, सरसों का तेल तथा नीला-काला वस्त्र किसी आवश्यकतामंद को दान करना। सबसे प्रभावी उपाय व्यवहारिक है — असत्य और अधैर्य से बचना।"}, {"question":"क्या गोमेद रत्न पहनना चाहिए?","answer":"केवल कुंडली विश्लेषण के पश्चात। गोमेद राहु को शांत नहीं करता बल्कि उसे बल देता है — यदि राहु पहले से प्रबल है तो यह वही बेचैनी और अविवेक बढ़ाएगा जिसे आप घटाना चाहते थे, और यह शीघ्र प्रभाव दिखाता है। माणिक्य, मोती, मूँगा अथवा पुखराज के साथ कदापि न पहनें। बिना जोखिम उपाय चाहिए तो मंत्र और दान का मार्ग अपनाएँ।"}, {"question":"क्या राहु सदैव अशुभ होता है?","answer":"नहीं। राहु 3, 6, 10 और 11 भाव में शुभ फल देता है — 6वें भाव का राहु शत्रु, ऋण और रोग पर विजय देता है, 11वें का आय बढ़ाता है, 10वें का अचानक पदोन्नति और प्रसिद्धि। तकनीक, विदेश व्यापार, वायुयान, फिल्म, राजनीति और अनुसंधान में सफल व्यक्तियों की कुंडली में राहु प्रायः बलवान होता है।"}, {"question":"राहु का बीज मंत्र क्या है और कितनी बार जपें?","answer":"बीज मंत्र है — ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः। शास्त्रीय जाप संख्या 18,000 है, परंतु नित्य अभ्यास के लिए शनिवार को 108 बार पर्याप्त है। जाप शनिवार सायंकाल, दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुख करके करें। सरल विकल्प ॐ रां राहवे नमः भी है।"}, {"question":"क्या राहु का गोचर काल सर्प दोष बना सकता है?","answer":"नहीं। काल सर्प दोष जन्म कुंडली की स्थिति है — जब जन्म के समय सातों दृश्य ग्रह राहु-केतु की धुरी के एक ही ओर हों। गोचर किसी में नया काल सर्प दोष नहीं बना सकता। गोचर केवल पहले से विद्यमान दोष को सक्रिय करता है, विशेषतः जब राहु या केतु जन्म राशि, लग्न अथवा जन्म के नोड स्थान पर आए।"}]

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Frequently Asked Questions

राहु दोष के मुख्य लक्षण क्या हैं?+
राहु का मुख्य लक्षण भ्रम है — निर्णय में स्पष्टता का अभाव, अकारण भय और चिंता, व्यसन, छल का सामना, बिना पूर्व संकेत अचानक हानि, और ऐसे रोग जिनकी जाँच सामान्य आती है पर कष्ट बना रहता है। सबसे विशिष्ट लक्षण अतृप्ति है — जो चाहा वह मिलने पर भी संतोष न होना, क्योंकि राहु बिना शरीर का सिर है।
राहु पूजा कब करनी चाहिए?+
शनिवार, अमावस्या अथवा ग्रहण काल में, और सायंकाल का समय अधिक उपयुक्त माना गया है। विशेष रूप से तब आवश्यक है जब राहु की महादशा या अंतर्दशा प्रारंभ हो, कुंडली में ग्रहण योग हो, काल सर्प दोष सक्रिय हो, राहु का गोचर जन्म राशि या 8वें भाव पर आए, अथवा व्यसन और निदान-रहित रोग की स्थिति हो।
राहु दोष के लिए सबसे प्रभावी उपाय क्या है?+
दुर्गा उपासना — दुर्गा सप्तशती अथवा दुर्गा चालीसा का पाठ, क्योंकि दुर्गा राहु की अधिष्ठात्री देवी हैं। इसके साथ कुत्तों को भोजन देना, शनिवार को नारियल बहते जल में प्रवाहित करना, और उड़द दाल, तिल, सरसों का तेल तथा नीला-काला वस्त्र किसी आवश्यकतामंद को दान करना। सबसे प्रभावी उपाय व्यवहारिक है — असत्य और अधैर्य से बचना।
क्या गोमेद रत्न पहनना चाहिए?+
केवल कुंडली विश्लेषण के पश्चात। गोमेद राहु को शांत नहीं करता बल्कि उसे बल देता है — यदि राहु पहले से प्रबल है तो यह वही बेचैनी और अविवेक बढ़ाएगा जिसे आप घटाना चाहते थे, और यह शीघ्र प्रभाव दिखाता है। माणिक्य, मोती, मूँगा अथवा पुखराज के साथ कदापि न पहनें। बिना जोखिम उपाय चाहिए तो मंत्र और दान का मार्ग अपनाएँ।
क्या राहु सदैव अशुभ होता है?+
नहीं। राहु 3, 6, 10 और 11 भाव में शुभ फल देता है — 6वें भाव का राहु शत्रु, ऋण और रोग पर विजय देता है, 11वें का आय बढ़ाता है, 10वें का अचानक पदोन्नति और प्रसिद्धि। तकनीक, विदेश व्यापार, वायुयान, फिल्म, राजनीति और अनुसंधान में सफल व्यक्तियों की कुंडली में राहु प्रायः बलवान होता है।
राहु का बीज मंत्र क्या है और कितनी बार जपें?+
बीज मंत्र है — ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः। शास्त्रीय जाप संख्या 18,000 है, परंतु नित्य अभ्यास के लिए शनिवार को 108 बार पर्याप्त है। जाप शनिवार सायंकाल, दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुख करके करें। सरल विकल्प ॐ रां राहवे नमः भी है।
क्या राहु का गोचर काल सर्प दोष बना सकता है?+
नहीं। काल सर्प दोष जन्म कुंडली की स्थिति है — जब जन्म के समय सातों दृश्य ग्रह राहु-केतु की धुरी के एक ही ओर हों। गोचर किसी में नया काल सर्प दोष नहीं बना सकता। गोचर केवल पहले से विद्यमान दोष को सक्रिय करता है, विशेषतः जब राहु या केतु जन्म राशि, लग्न अथवा जन्म के नोड स्थान पर आए।
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Written by

Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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