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राहु ग्रह 2026: कुंडली में राहु का प्रभाव, उपाय, मंत्र और

# राहु ग्रह 2026: कुंडली में राहु का संपूर्ण ज्ञान, प्रभाव, उपाय और रत्न > ✨ **लेखिका परिचय:** यह लेख **गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी** द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया

7 July 2026 14 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। उनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और वे पंडित एनएम श्रीमाली की प्रमुख ज्योतिषी हैं।


विषय सूची (Table of Contents)

  1. मेरा व्यक्तिगत अनुभव — राहु ग्रह और भ्रम की शक्ति
  2. राहु ग्रह का परिचय — देवता, मिथक और महत्व
  3. खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं
  4. राहु का शरीर पर प्रभाव
  5. कुंडली में राहु की स्थिति का महत्व
  6. अनुकूल और प्रतिकूल राशियां
  7. राहु का कारकत्व
  8. राहु की दशा और गोचर का प्रभाव
  9. कमजोर और बलवान राहु की पहचान
  10. राहु मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय
  11. राहु मंत्र और पूजा विधि
  12. राहु रत्न और धातु
  13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
  14. निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह

मेरा व्यक्तिगत अनुभव — राहु ग्रह और भ्रम की शक्ति

नमस्ते, मैं निधि श्रीमाली हूं। पिछले 15 वर्षों में मैंने देखा है कि राहु ग्रह जातक के भ्रम, माया, छल, विदेश, अचानक लाभ/हानि और अध्यात्म का प्रतिनिधित्व करता है। राहु "छाया ग्रह" है — इसका भौतिक शरीर नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत शक्तिशाली है। राहु बलवान हो तो जातक अचानक धन, यश और विदेश यात्रा पाता है। कमजोर या पीड़ित हो तो भ्रम, कर्ज, छल और मानसिक तनाव आता है।

केस स्टडी: 2024 में मेरे पास अहमदाबाद का एक 38 वर्षीय व्यक्ति आया। कह रहे थे कि सब कुछ अच्छा चल रहा था, अचानक 2 साल पहले व्यापार में भारी नुकसान हुआ, पत्नी ने छोड़ दिया, मानसिक तनाव बहुत है। कुंडली देखी तो राहु वृष राशि में 10वें भाव में था, शनि के साथ युति में — अचानक पतन हुआ था। मैंने शनिवार व्रत, राहु मंत्र जाप, गोमेद धारण, काले तिल के दान की सलाह दी। 7 महीने में मानसिक शांति आई, व्यापार में सुधार शुरू हुआ। राहु उपायों का सशक्त प्रभाव है।

💡 मेरा वादा: हर बात, हर उपाय, हर टिप वही है जो मैंने अपने 15 वर्षों के क्लिनिकल अनुभव में सीखा है।


राहु ग्रह का परिचय

राहु हिंदू ज्योतिष का एक छाया ग्रह है। इसका कोई भौतिक शरीर नहीं है, लेकिन सूर्य और चंद्र को ग्रसने (ग्रहण) की शक्ति है। राहु को राहु, भौमासुर, स्वर्णभानु, तमोमय, असुर आदि नामों से जाना जाता है।

राहु की मिथक कथा:

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, राहु एक "असुर" थे। जब समुद्र मंथन के समय अमृत निकला, तब देवताओं और असुरों में अमृत के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ। भगवान विष्णु ने "मोहिनी" का रूप धारण कर अमृत का वितरण किया। राहु ने देवता का रूप धारण कर अमृत चुराकर पी लिया। जब सूर्य और चंद्र ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को बताया, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से राहु का वध किया। लेकिन राहु ने अमृत पी लिया था, इसलिए वह मरे नहीं — उनका शरीर दो भागों में बंट गया। राहु ऊपर का भाग है और केतु नीचे का भाग। तब से राहु सूर्य और चंद्र को ग्रसता (ग्रहण) है — यही "सूर्य ग्रहण" और "चंद्र ग्रहण" का कारण है।

राहु का प्रतीक और तत्व:

  • रंग: काला, गहरा नीला, धुआंधार
  • धातु: सीसा, मिश्र धातु
  • रत्न: गोमेद (Hessonite) / लहसुनिया
  • दिन: शनिवार (राहु काल)
  • दिशा: दक्षिण-पश्चिम
  • तत्व: वायु
  • देवता: राहु, दुर्गा जी, गणेश जी
  • संख्या: 4
  • मंत्र: ॐ राहवे नमः

खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं

राहु भौतिक ग्रह नहीं है — यह पृथ्वी की कक्षा में एक बिंदु है जहां चंद्र की कक्षा पृथ्वी की कक्षा को काटती है। इसे "लूनर नोड" या "राहु कक्षा" कहते हैं।

प्रमुख ज्योतिषीय तथ्य:

  • भ्रमण काल: लगभग 18.5 वर्ष (राशि चक्र)
  • राशि परिवर्तन: लगभग 18 महीने प्रति राशि
  • प्रकृति: छाया ग्रह (भौतिक शरीर नहीं)
  • स्वामी नक्षत्र: कृत्तिका, आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद
  • विपरीत राशि: कन्या (राहु धनु में तो केतु मिथुन में, विपरीत)
  • ग्रहण कारक: सूर्य/चंद्र ग्रहण लगाता है

राहु के गण:

  • रजस गण (राजसिक प्रकृति)
  • तमस प्रधान (अंधकार)
  • पाप ग्रह (छाया पाप)
  • भ्रम ग्रह (भ्रम, माया)
  • विपरीत कारक — अचानक बदलाव

राहु की विशेषताएं:

  • अमृत पिया — अमृत पीने से अविनाशी
  • शरीर नहीं — छाया है
  • भ्रमण पीछे — वक्री गति
  • अचानक फल — अचानक लाभ/हानि

राहु का शरीर पर प्रभाव

राहु शरीर में विषैले तत्व, वायु, मनोविकार और अचानक रोग का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रमुख अंग:

  • मन (भ्रमित)
  • नसें
  • त्वचा (काले दाग)
  • श्वसन नली
  • बड़ी आंत
  • पैर
  • सिर
  • विषैले तत्व
  • लिंग

कमजोर/पीड़ित राहु के शारीरिक लक्षण:

  • मानसिक भ्रम, भय
  • अवसाद
  • विषैले कीटों का काटना (सांप, बिच्छू)
  • त्वचा रोग, कुष्ठ
  • कैंसर (दुर्लभ किंतु गंभीर)
  • मिर्गी
  • मनोविकार
  • नींद न आना
  • दुःस्वप्न
  • हिस्टीरिया
  • अचानक बेहोशी

💡 निधि जी का विशेष टिप: यदि आपको बार-बार बुरे सपने आते हैं, मानसिक भ्रम रहता है, या सांप का भय लगता है — तो राहु की कुंडली अवश्य जांचें। कभी-कभी राहु की पीड़ा अचानक दुर्घटनाओं को भी आमंत्रित करती है।


कुंडली में राहु की स्थिति का महत्व

राहु कुंडली में 12 भावों में अलग-अलग प्रभाव देता है:

भाव प्रभाव
1st भाव (लग्न) भ्रम, माया, अचानक घटना
2nd भाव कुटुम्ब, धन, वाणी (कपट)
3rd भाव पराक्रम, भाई-बहन (शुभ यहाँ)
4th भाव माता, भूमि, गृह सुख
5th भाव संतान, बुद्धि (भ्रमित)
6th भाव शत्रु नाश, रोग (शुभ यहाँ)
7th भाव विवाह, साझेदारी
8th भाव आयु, रहस्य (अशुभ)
9th भाव भाग्य, धर्म, पिता
10th भाव कर्म, पद (अचानक)
11th भाव आय, लाभ (अचानक)
12th भाव व्यय, विदेश, मोक्ष (शुभ यहाँ)

कुंडली में राहु की विशेष स्थितियां:

  • राहु-शनि युति: कर्म, अचानक परिवर्तन
  • राहु-मंगल युति: साहस, क्रोध, अचानक
  • राहु-गुरु युति: आध्यात्मिक भ्रम/ज्ञान
  • राहु-शुक्र युति: काम, अवैध संबंध
  • राहु-सूर्य युति: पिता से अनबन
  • राहु-चंद्र युति (ग्रहण योग): मानसिक भ्रम
  • राहु-बुध युति: वाणी में छल, चतुराई
  • राहु-केतु युति: कालसर्प योग (1, 7 भाव)
  • राहु 1, 7 भाव में और बाकी ग्रह इनके बीच: कालसर्प दोष

अनुकूल और प्रतिकूल राशियां

राहु की मित्र राशियां:

  • मिथुन (राहु की मित्र)
  • कन्या (मित्र)
  • धनु (मित्र)
  • मीन (मित्र)

राहु की शत्रु राशियां:

  • मेष (शत्रु)
  • वृष (शत्रु)
  • कर्क (शत्रु)
  • सिंह (शत्रु)
  • वृश्चिक (शत्रु)
  • मकर (शत्रु)
  • कुंभ (शत्रु)
  • तुला (शत्रु - कुछ संदर्भ में)

राहु की सम राशि:

  • राहु की गणना स्वामित्व से नहीं होती — वह शनि और मंगल के साथ कार्य करता है।

नक्षत्र:

  • कृत्तिका, आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद (राहु के नक्षत्र)
  • राहु 5 नक्षत्रों का स्वामी है

राहु का कारकत्व

राहु ज्योतिष में अनेक चीजों का कारक है:

प्रमुख कारकत्व:

  1. भ्रम, माया — माया का कारक
  2. विदेश — विदेश यात्रा, प्रवास
  3. छल, कपट — छल, धोखा
  4. अचानक लाभ/हानि — रातोंरात बदलाव
  5. अध्यात्म — आध्यात्मिक साधना
  6. तांत्रिक शक्ति — तंत्र-मंत्र
  7. सांप, विषैले जीव — सांप का भय
  8. चर्म रोग — त्वचा रोग
  9. मनोविकार — मानसिक रोग
  10. वायु — वायु तत्व
  11. सीसा — धातु
  12. गोमेद — रत्न
  13. नीला, काला — रंग
  14. 4, 8, 12 संख्या — शुभ संख्या

राहु से जुड़े पेशे:

  • ज्योतिषी
  • तांत्रिक
  • जादूगर
  • अपराधी, चोर
  • राजनीतिज्ञ
  • वैज्ञानिक
  • आविष्कारक
  • मनोचिकित्सक
  • विदेश यात्रा गाइड
  • फोटोग्राफर
  • जासूस
  • तंत्र-मंत्र विशेषज्ञ
  • सांप पकड़ने वाला
  • रसायनज्ञ

राहु की दशा और गोचर का प्रभाव

राहु की महादशा (18 वर्ष):

राहु की दशा 18 वर्ष की होती है। यह जातक को अचानक बदलाव, विदेश यात्रा, भ्रम, छल और आध्यात्मिक अनुभव देती है।

राहु दशा के शुभ फल:

  • अचानक धन लाभ
  • विदेश यात्रा/प्रवास
  • आध्यात्मिक उन्नति
  • राजनीतिक सफलता
  • अचानक यश
  • नई खोज, आविष्कार
  • तांत्रिक सिद्धि
  • माया, भौतिक सुख

राहु दशा के अशुभ फल:

  • भ्रम, माया
  • छल, कपट
  • कर्ज
  • सांप, विषैले जीवों से भय
  • मानसिक तनाव
  • अचानक हानि
  • मनोविकार
  • कालसर्प दोष
  • दुःस्वप्न
  • सामाजिक अपमान

राहु की अंतर्दशा:

  • राहु-राहु: 2 वर्ष 8 माह
  • राहु-सूर्य: 1 वर्ष 1 माह
  • राहु-चंद्र: 1 वर्ष 1 माह
  • राहु-मंगल: 1 वर्ष 6 माह
  • राहु-गुरु: 1 वर्ष 2 माह
  • राहु-शनि: 2 वर्ष 6 माह
  • राहु-बुध: 1 वर्ष 5 माह
  • राहु-केतु: 2 वर्ष 8 माह
  • राहु-शुक्र: 1 वर्ष 2 माह

राहु का गोचर:

राहु हर राशि में लगभग 18 महीने रहता है। राहु और केतु हमेशा विपरीत राशि में रहते हैं। राहु का गोचर 3, 6, 10, 11 भावों में शुभ और 1, 2, 4, 5, 7, 8, 9, 12 भावों में अशुभ माना जाता है।

केस स्टडी: 2025 में एक 32 वर्षीय युवक मेरे पास आया। कह रहा था कि 6 महीने पहले विदेश जाने का सुनहरा अवसर मिला था, पासपोर्ट बन गया, वीजा भी लग गया, लेकिन अचानक कंपनी ने ऑफर कैंसिल कर दिया। कुंडली में राहु कुंभ राशि में 9वें भाव में था (भाग्य स्थान), शनि के साथ — विदेश यात्रा रुक गई। मैंने राहु मंत्र जाप, नाग पंचमी व्रत, गोमेद धारण करने की सलाह दी। 4 महीने में बेहतर ऑफर मिल गया। राहु उपायों का सशक्त प्रभाव है।


कमजोर और बलवान राहु की पहचान

बलवान राहु के संकेत:

  • 3, 6, 10, 11 भाव में (शुभ)
  • शनि, मंगल से युति/दृष्टि
  • गुरु से दृष्टि (आध्यात्मिक)
  • कालसर्प दोष में नहीं
  • अचानक सफलता
  • विदेश यात्रा

कमजोर/पीड़ित राहु के संकेत:

  • 1, 2, 4, 5, 7, 8, 9, 12 भाव में (अशुभ)
  • चंद्र से युति (ग्रहण योग)
  • सूर्य से युति (पितृ पीड़ा)
  • कालसर्प दोष
  • शुक्र से युति (अवैध संबंध)
  • गुरु से पीड़ित (अध्यात्मिक भ्रम)

कमजोर राहु के लक्षण:

  • मानसिक भ्रम
  • सांप का भय
  • बुरे सपने
  • अवसाद
  • छल, कपट
  • अचानक हानि
  • मनोविकार
  • चर्म रोग
  • विदेश में कठिनाई

राहु मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय

1. शनिवार का व्रत

शनिवार को व्रत रखना राहु को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय है। व्रत के दिन काले वस्त्र धारण करें, हनुमान जी की पूजा करें।

2. दुर्गा जी की पूजा

राहु दशा/अंतर्दशा के समय मां दुर्गा की पूजा करें। "ॐ दुं दुर्गायै नमः" मंत्र का जाप करें। नवरात्रि में विशेष पूजा करें।

3. गणेश जी की पूजा

राहु गणेश जी को प्रिय है। "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें। बुधवार और शनिवार को गणेश पूजा करें।

4. राहु मंत्र का जाप

रोजाना 108 बार "ॐ राहवे नमः" या "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः" का जाप करें। मंत्र जाप शनिवार को विशेष फलदायी है।

5. गोमेद रत्न धारण

शुद्ध गोमेद (Hessonite) चांदी या पन्ना (5 धातु मिश्रण) की अंगूठी में शनिवार को रात्रि को धारण करें। रत्न कम से कम 3-5 रत्ती का हो।

6. काले तिल का दान

शनिवार को काले तिल, काले वस्त्र, काली उड़द दाल, लोहे की वस्तु का दान करें।

7. पीपल के पेड़ की पूजा

शनिवार की शाम पीपल के पेड़ में जल, तिल, काला कपड़ा चढ़ाएं। प्रदक्षिणा करें। राहु मंत्र का जाप करें।

8. नाग पंचमी का व्रत

नाग पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) को व्रत रखें। नाग देवता की पूजा करें। नाग मंत्र का जाप करें।

9. काला रंग का प्रयोग

रोजमर्रा के जीवन में काला, गहरा नीला, धुआंधार रंग अधिक प्रयोग करें। बिस्तर, वस्त्र, मोबाइल कवर सब में काला रंग रखें।

10. गरीबों की सेवा

राहु भ्रम, माया का कारक है। गरीबों, असहायों की सेवा करें, दान दें, भोजन कराएं। यह राहु के भ्रम को दूर करता है।

11. राहु हवन

शनिवार को "ॐ राहवे स्वाहा" मंत्र से हवन करें। हवन में काले तिल, सरसों का तेल, काले चंदन का प्रयोग करें। 11 शनिवार तक हवन करें।

💡 निधि जी का विशेष टिप: नाग पंचमी का व्रत राहु को प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली उपाय है। नाग पंचमी के दिन राहु मंत्र का जाप, नाग देवता की पूजा, और काले तिल का दान अवश्य करें।


राहु मंत्र और पूजा विधि

राहु के प्रमुख मंत्र:

मूल मंत्र:

ॐ राहवे नमः

बीज मंत्र:

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

विशेष मंत्र:

ॐ राहवे विद्महे
नागराजाय धीमहि
तन्नो राहुः प्रचोदयात्

नाग मंत्र:

ॐ नागाय नमः

शनिवार विशेष मंत्र:

ॐ राहु देवाय नमः, शनिवार प्रभो नमः
भ्रमं मायां नाशय, सत्यं ज्ञानं प्रयच्छ मे

राहु पूजा विधि:

  1. समय: शनिवार की रात्रि
  2. स्थान: पूजा स्थल
  3. वस्त्र: काला
  4. सामग्री:
    • राहु/नाग देवता की मूर्ति
    • काले तिल
    • काले वस्त्र
    • सरसों का तेल
    • दूध
  5. विधि:
    • स्नान करके शुद्ध हों
    • काले वस्त्र धारण करें
    • नाग देवता की मूर्ति स्थापित करें
    • दूध, काले तिल अर्पित करें
    • "ॐ राहवे नमः" मंत्र से पूजा करें
    • नाग मंत्र का 108 बार जाप करें
    • प्रसाद बांटें

राहु रत्न और धातु

गोमेद (Hessonite):

  • रंग: नारंगी-लाल, शहद जैसा
  • धातु: चांदी, पन्ना (5 धातु मिश्रण)
  • अंगूली: मध्यमा (बीच की उंगली)
  • समय: शनिवार, रात्रि को
  • शुद्धता: प्राकृतिक, श्रीलंका या भारत का
  • वजन: कम से कम 3 रत्ती
  • फायदे:
    • भ्रम, माया से मुक्ति
    • अचानक लाभ
    • विदेश यात्रा
    • कालसर्प दोष में राहत
    • मानसिक शांति
    • छल से बचाव
    • आध्यात्मिक उन्नति

राहु की धातु:

सीसा (Lead), मिश्र धातु — सीसे की अंगूठी पहनने से राहु तत्व नियंत्रित होता है। 8 धातु मिश्रण भी राहु की धातु मानी जाती है।

राहु के रंग:

  • मुख्य: काला, गहरा नीला, धुआंधार
  • वस्त्र: काला, गहरा नीला
  • फूल: काले तिल (फूल नहीं), नीले फूल
  • अगरबत्ती: कस्तूरी, काले तिल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राहु कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?

मानसिक भ्रम, सांप का भय, बुरे सपने, अवसाद, छल, कपट, अचानक हानि, चर्म रोग।

क्या गोमेद रत्न सभी को धारण करना चाहिए?

नहीं। गोमेद कमजोर राहु वाले जातकों को ही धारण करना चाहिए। पहले कुंडली दिखाएं।

शनिवार व्रत कैसे रखें?

शनिवार की रात्रि राहु मंत्र का जाप करें, काले वस्त्र धारण करें, हनुमान पूजा करें, एक बार भोजन करें (फलाहार)।

कालसर्प दोष का उपाय क्या है?

नाग पंचमी व्रत, राहु-केतु मंत्र जाप, गोमेद-लहसुनिया धारण, काले तिल का दान, पीपल में जल।

राहु दशा अशुभ हो तो क्या करें?

गोमेद धारण करें, शनिवार व्रत रखें, दुर्गा पूजा करें, गणेश पूजा करें, नाग पंचमी व्रत रखें।

क्या महिलाएं गोमेद पहन सकती हैं?

हां, महिलाएं गोमेद पहन सकती हैं। कुंडली के अनुसार निर्णय लें।

राहु किस दिशा में रहता है?

दक्षिण-पश्चिम दिशा में। सोते समय सिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ होता है।

राहु और केतु में क्या अंतर है?

राहु कुंडली में 1, 7, 8, 12 भावों में अधिक अशुभ और 3, 6, 10, 11 भावों में शुभ फल देता है। केतु आध्यात्मिकता का कारक है।

राहु कब नीच राशि में होता है?

राहु कन्या राशि में नीच का माना जाता है।

राहु का सबसे अच्छा उपाय क्या है?

नाग पंचमी व्रत, राहु मंत्र जाप, गणेश पूजा, काले तिल का दान — ये सबसे अच्छे उपाय हैं।



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इस लेख में बताए गए उपाय सामान्य मार्गदर्शन हैं। आपकी कुंडली के अनुसार सटीक और प्रभावी उपाय जानने के लिए गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी से व्यक्तिगत परामर्श बुक करें।

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निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह

प्रिय पाठकों, राहु ग्रह आपकी कुंडली में भ्रम, माया, छल, विदेश, अचानक परिवर्तन और आध्यात्मिकता का प्रतिनिधित्व करता है। राहु छाया ग्रह है — इसका प्रभाव अचानक और शक्तिशाली होता है। यदि राहु शुभ स्थान में है तो अचानक सफलता मिलती है। यदि पीड़ित है तो उपाय अवश्य करें।

मेरी 15 वर्षों के अनुभव की सीख:

  1. नाग पंचमी व्रत — राहु को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय
  2. शनिवार व्रत — 11 शनिवार तक अवश्य करें
  3. गोमेद रत्न — कुंडली दिखाकर ही धारण करें
  4. गणेश पूजा — बुधवार और शनिवार को करें
  5. काला रंग — रोजमर्रा में प्रयोग करें
  6. गरीबों की सेवा — राहु के भ्रम को दूर करता है
  7. राहु मंत्र जाप — 108 बार प्रतिदिन करें

शुभकामनाओं सहित,

गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली

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Frequently Asked Questions

राहु कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?+
मानसिक भ्रम, सांप का भय, बुरे सपने, अवसाद, छल, कपट, अचानक हानि, चर्म रोग।
क्या गोमेद रत्न सभी को धारण करना चाहिए?+
नहीं। गोमेद कमजोर राहु वाले जातकों को ही धारण करना चाहिए। पहले कुंडली दिखाएं।
शनिवार व्रत कैसे रखें?+
शनिवार की रात्रि राहु मंत्र का जाप करें, काले वस्त्र धारण करें, हनुमान पूजा करें, एक बार भोजन करें (फलाहार)।
कालसर्प दोष का उपाय क्या है?+
नाग पंचमी व्रत, राहु-केतु मंत्र जाप, गोमेद-लहसुनिया धारण, काले तिल का दान, पीपल में जल।
राहु दशा अशुभ हो तो क्या करें?+
गोमेद धारण करें, शनिवार व्रत रखें, दुर्गा पूजा करें, गणेश पूजा करें, नाग पंचमी व्रत रखें।
क्या महिलाएं गोमेद पहन सकती हैं?+
हां, महिलाएं गोमेद पहन सकती हैं। कुंडली के अनुसार निर्णय लें।
राहु किस दिशा में रहता है?+
दक्षिण-पश्चिम दिशा में। सोते समय सिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ होता है।
राहु और केतु में क्या अंतर है?+
राहु कुंडली में 1, 7, 8, 12 भावों में अधिक अशुभ और 3, 6, 10, 11 भावों में शुभ फल देता है। केतु आध्यात्मिकता का कारक है।
राहु कब नीच राशि में होता है?+
राहु कन्या राशि में नीच का माना जाता है।
राहु का सबसे अच्छा उपाय क्या है?+
नाग पंचमी व्रत, राहु मंत्र जाप, गणेश पूजा, काले तिल का दान — ये सबसे अच्छे उपाय हैं।
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Written by

Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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