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Maa Baglamukhi 2026 - साधना का रहस्य by Nidhi Shrimali

# Maa Baglamukhi 2026 - साधना का रहस्य by Nidhi Shrimali **Maa Baglamukhi 2026** — यह विषय मेरे पास रोजाना सैकड़ों लोग पूछते हैं। जब किसी की कुंडली में ग्रह कमजोर होता है, तो जीवन में कई समस्याएँ आने

7 July 2026 21 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। इनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।

माँ बगलामुखी दशमहाविद्या की आठवीं शक्ति हैं — वे देवी जिनके नाम का अर्थ ही है "जिसका मुख शत्रु को स्तब्ध कर दे"। तांत्रिक परंपरा में उन्हें "स्तम्भन विद्या" की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है और वे शत्रु-नाश, न्यायालय-विजय, वशीकरण और रक्षा की साधना में सर्वाधिक प्रभावी मानी जाती हैं। पीले वस्त्र, पीले पुष्प और गुरु-ग्रह से उनका गहरा संबंध है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम माँ बगलामुखी का परिचय, पौराणिक कथा, 2026 के शुभ मुहूर्त, संपूर्ण साधना विधि, मंत्र, फायदे, सावधानियां और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

विषय सूची (Table of Contents)

  1. माँ बगलामुखी का परिचय
  2. दशमहाविद्या में बगलामुखी का स्थान
  3. धार्मिक और पौराणिक महत्व
  4. माँ बगलामुखी की पौराणिक कथा
  5. 2026 शुभ मुहूर्त और दिन
  6. बगलामुखी साधना की सामग्री
  7. संपूर्ण बगलामुखी साधना विधि — चरणबद्ध
  8. बगलामुखी मंत्र और जाप विधि
  9. साधना के फायदे और लाभ
  10. सावधानियां और नियम
  11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माँ बगलामुखी का परिचय

माँ बगलामुखी दशमहाविद्या की आठवीं महाविद्या हैं। "बगला" का अर्थ है "वह जो बल (शक्ति) को ग्रहण करे" और "मुखी" का अर्थ है "मुख वाली" — अर्थात् जिनका मुख समस्त बल और शक्ति का केंद्र है। एक अन्य व्युत्पत्ति के अनुसार "बगला" का अर्थ "हल" (जुआं) से भी है — जो अपने भक्तों के पाप-कर्मों को "हल" की भांति जोतकर समतल कर देती हैं। सबसे प्रचलित व्याख्या के अनुसार "बगलामुखी" का शाब्दिक अर्थ है "वह देवी जिनके मुख के समक्ष शत्रु स्तब्ध हो जाता है" — यही उनकी "स्तम्भन शक्ति" है।

माँ बगलामुखी का स्वरूप:

शाक्त ग्रंथों और तांत्रिक चित्रों में माँ बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत भव्य और तेजस्वी वर्णित है:

  • वर्ण: स्वर्ण-सदृश पीतवर्ण (पीला) — यही उनका मुख्य चिह्न है। पीला वर्ण गुरु (बृहस्पति) ग्रह का प्रतीक है, अतः बगलामुखी का गुरु-ग्रह से गहरा संबंध है।
  • वस्त्र: पीताम्बर (पीले रंग के वस्त्र)
  • आभूषण: स्वर्ण-मणि-रत्न जटित हार, कुंडल, मुकुट
  • आसन: कमलासन या सिंहासन
  • वाहन: कुछ ग्रंथों में सिंह और कुछ में पीत-वर्ण का घोड़ा
  • मुख्य आयुध: दाहिने हाथ में सुदर्शन-सदृश मूसल (लकुट) — जो शत्रु के अभिमान को चूर करता है
  • बायां हाथ: शत्रु की जीभ को पकड़कर खींचने का मुद्रा — यह उनका सबसे पहचाना जाने वाला चिह्न है
  • अन्य आयुध: पाश (फंदा), अंकुश और कमंडल
  • चतुर्भुज: चार भुजाओं वाली देवी

विशेष पहचान:

बगलामुखी की सबसे बड़ी पहचान उनकी "स्तम्भन शक्ति" है। तांत्रिक मान्यता है कि जब कोई व्यक्ति, ग्रह, यहां तक कि देवता भी माँ बगलामुखी की कृपा से "स्तब्ध" हो जाता है — अर्थात उसकी शक्ति, भाषण और गति रुक जाती है। इसीलिए उन्हें "स्तम्भिनी" और "पीताम्बरा" भी कहा जाता है।

दशमहाविद्या में बगलामुखी का स्थान

शाक्त परंपरा में दशमहाविद्या दस महाशक्तियों का समूह है, जो आदिशक्ति माँ भगवती के विभिन्न रूप हैं। इनमें माँ बगलामुखी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  1. माँ काली — प्रथम महाविद्या
  2. माँ तारा — द्वितीय
  3. माँ श्रीमाता (ललिता / त्रिपुरसुंदरी) — तृतीय
  4. माँ भुवनेश्वरी — चतुर्थ
  5. माँ भैरवी — पंचम
  6. माँ छिन्नमस्ता — षष्ठम
  7. माँ धूमावती — सप्तम
  8. माँ बगलामुखी — अष्टम (आठवीं)
  9. माँ मातंगी — नवम
  10. माँ कमला — दशम

बगलामुखी का विशेष स्थान:

दशमहाविद्या में बगलामुखी एकमात्र ऐसी देवी हैं जिनका संबंध सीधे "जीत" और "स्तम्भन" से है। अन्य देवियां शक्ति, ज्ञान, वैभव, विनाश आदि देती हैं, किंतु बगलामुखी शत्रु की शक्ति को निष्क्रिय करती हैं। इसीलिए तांत्रिक साधनाओं में बगलामुखी का स्थान "रक्षा-कवच" के समान माना गया है।

बगलामुखी और गुरु (बृहस्पति) का संबंध:

ज्योतिषीय दृष्टि से बगलामुखी गुरु ग्रह से संबंधित हैं — पीला वर्ण, पीले पुष्प, गुरुवार का दिन, और हल्दी-केसर का प्रयोग सब गुरु-तत्व का सूचक है। जिन साधकों की कुंडली में गुरु बलहीन, अस्तंगत, नीच राशि (मकर) में, या पाप ग्रहों से पीड़ित हों, उनके लिए बगलामुखी साधना अत्यंत लाभकारी है।

धार्मिक और पौराणिक महत्व

बगलामुखी साधना का धार्मिक महत्व तीन प्रमुख दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है:

धार्मिक दृष्टिकोण से:

  • दशमहाविद्या में पूजनीय आठवीं शक्ति — शाक्त परंपरा में अनिवार्य उपासना
  • हिंगलाज माता (पाकिस्तान के हिंगलाज नगर) में माँ बगलामुखी का प्राचीन मंदिर है — भारत-पाकिस्तान के हिंदुओं के लिए प्रमुख तीर्थ
  • राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अनेक बगलामुखी मंदिर हैं
  • कुंडली के धार्मिक संस्कारों में बगलामुखी का विशेष स्थान

तांत्रिक दृष्टिकोण से:

  • "स्तम्भन विद्या" की अधिष्ठात्री देवी — शत्रु की शक्ति को निष्क्रिय करना
  • "वशीकरण" और "मोहन" साधना में सहायक देवी
  • काल-विद्या, पर-कर्म-विद्या और अभिचार-निवारण में प्रभावी
  • कालीकुल और श्रीकुल दोनों परंपराओं में मान्य
  • तंत्र-चूड़ामणि, शारदा तिलक और कालिका पुराण में बगलामुखी का विशेष वर्णन

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से:

  • कुंडली में गुरु (बृहस्पति) के दोष का शमन
  • शनि-राहु-केतु की अशुभ दशा में सहायक
  • न्यायालय-विजय, मुकदमे में जीत, प्रतिस्पर्धा में सफलता
  • व्यापार में शत्रु-बाधा का निवारण
  • सरकारी कार्यों में अनुकूलता
  • अचानक आर्थिक संकट से रक्षा

माँ बगलामुखी की पौराणिक कथा

बगलामुखी की उत्पत्ति से जुड़ी अत्यंत रोचक कथा "मार्कण्डेय पुराण" और "ब्रह्मवैवर्त पुराण" में वर्णित है।

मुख्य कथा — दुष्ट-नाश की कथा:

प्राचीन काल में जब देवताओं पर राक्षसों का अत्यधिक अत्याचार बढ़ गया, तब सभी देवता ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पास गए। तीनों ने विचार-विमर्श कर यज्ञ किया और यज्ञ-अग्नि से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई — जिसने राक्षसों को "स्तब्ध" कर उनकी शक्ति छीन ली। वही शक्ति माँ बगलामुखी के रूप में प्रकट हुईं। उनके प्रकट होते ही राक्षसों की वाणी रुक गई, गति रुक गई, और वे स्तब्ध होकर खड़े रह गए। तब देवताओं ने सहज ही उन राक्षसों का संहार कर दिया।

दूसरी कथा — पीताम्बर-तारा के रूप में:

शक्ति-संहिता के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार में हिरण्यकशिपु का वध किया, तब उनका क्रोध अत्यधिक बढ़ गया — वे शांत नहीं हो रहे थे। तब माँ बगलामुखी ने "पीताम्बरा" के रूप में प्रकट होकर विष्णु का मुख पकड़ लिया (चेहरे पर हाथ रखा) और उनका क्रोध शांत किया। इसी घटना से उनके नाम "बगलामुखी" की व्युत्पत्ति हुई। तब से उनका एक और नाम "पीताम्बरा" प्रचलित हुआ।

तीसरी कथा — दुश्टर नामक राक्षस:

एक अन्य कथा के अनुसार, एक "दुश्टर" नामक भयंकर राक्षस था जिसने वरदान प्राप्त कर लिया था कि कोई भी देवता या मनुष्य उसे पराजित नहीं कर सकता। उसने तीनों लोकों को कष्ट देना आरंभ कर दिया। तब देवताओं ने माँ बगलामुखी की आराधना की। माँ ने प्रकट होकर दुश्टर की जीभ पकड़ी और उसे इस प्रकार खींचा कि वह स्तब्ध हो गया। फिर उसे वरदान का अभिमान त्याग कराने पर वध किया गया। इसी कथा से "जीभ खींचने" का मुद्रा प्रसिद्ध हुआ।

कथा का संदेश:

बगलामुखी की कथाओं का गूढ़ संदेश यह है कि वे अभिमान और अत्याचार को नष्ट करती हैं, और अपने भक्तों को वाणी-शक्ति, धैर्य और साहस प्रदान करती हैं। जो साधक श्रद्धा और संयम से उनकी आराधना करता है, माँ उसके शत्रुओं को स्तब्ध कर उसे विजयशील बनाती हैं।

2026 शुभ मुहूर्त और दिन

बगलामुखी साधना के लिए 2026 में अनेक शुभ मुहूर्त आ रहे हैं। यहाँ प्रमुख शुभ दिन और अवधियां दी जा रही हैं:

वर्ष 2026 के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त:

दिनांक (2026) दिन विशेष महत्व
15 जनवरी 2026 गुरुवार मकर संक्रांति से पूर्व — गुरुवार, शुभ आरंभ
12 फरवरी 2026 गुरुवार प्रदोष व्रत — गुरुवार का संयोग
12 मार्च 2026 गुरुवार फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी
9 अप्रैल 2026 गुरुवार चैत्र शुक्ल अष्टमी — गुरुवार
14 मई 2026 गुरुवार वैशाख शुक्ल त्रयोदशी
11 जून 2026 गुरुवार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी
9 जुलाई 2026 गुरुवार आषाढ़ शुक्ल अष्टमी — गुरु पूर्णिमा पूर्व
6 अगस्त 2026 गुरुवार श्रावण शुक्ल पंचमी — गुरुवार
3 सितम्बर 2026 गुरुवार भाद्रपद शुक्ल द्वितीया
1 अक्टूबर 2026 गुरुवार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा — नवरात्रि आरंभ
29 अक्टूबर 2026 गुरुवार आश्विन शुक्ल नवमी — नवरात्रि
5 नवम्बर 2026 गुरुवार कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
3 दिसम्बर 2026 गुरुवार मार्गशीर्ष शुक्ल द्वितीया

शुभ दिन (प्रतिदिन के लिए):

  • गुरुवार — गुरु ग्रह का दिन, बगलामुखी साधना के लिए सर्वोत्तम
  • शुक्ल पंचमी और गुरुवार का संयोग — दुर्लभ और अत्यंत शुभ
  • नवरात्रि के नौ दिन — शक्ति-साधना के लिए परम पावन काल
  • गुरु पूर्णिमा — गुरु-संबंधी साधनाओं के लिए विशेष
  • वसंत पंचमी — गुरु और विद्या का दिन

साधना की अवधि:

  • न्यूनतम अवधि: 21 दिन
  • मध्यम अवधि: 40 दिन (सर्वाधिक प्रचलित)
  • पूर्ण अवधि: 108 दिन (विशेष फल-प्राप्ति हेतु)
  • महाअवधि: एक वर्ष (अति विशिष्ट फल हेतु)

साधना का समय:

  • सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 1.5 घंटे पूर्व)
  • अच्छा समय: प्रातः 6 से 9 बजे के बीच
  • शाम का समय: सायं 6 से 8 बजे (केवल हवन और पूजा हेतु)
  • रात्रि का समय: मध्य रात्रि (12 से 2 बजे) — उन्नत साधना हेतु, परंतु सामान्य साधक के लिए वर्जित

बगलामुखी साधना की सामग्री

बगलामुखी साधना के लिए निम्न सामग्री एकत्रित करनी होती है। सामान्य नियम यह है कि जो भी वस्तु पीली हो वही साधना में प्रयोग करें:

मुख्य सामग्री:

  • बगलामुखी यंत्र — ताम्र या भोजपत्र पर अंकित (अष्टदल पुष्पाकार)
  • बगलामुखी माला — 108 मनकों वाली रुद्राक्ष या पीले स्फटिक की माला
  • पीला कलावा (मौली) — 1.5 मीटर
  • शुद्ध गाय का घी — हवन और दीपक हेतु (250 ग्राम)
  • शहद — शुद्ध (100 ग्राम)
  • हल्दी — साबुत (50 ग्राम)
  • कच्ची हल्दी — 11 या 21 टुकड़े
  • पीले पुष्प — सूर्यमुखी, पलाश, चमेली, पीला गुलाब (108)
  • केसर — शुद्ध (2 ग्राम)
  • पीला माखन — 11 टुकड़े
  • सुपारी — 2
  • लौंग, इलायची — 2-2
  • रोली, मौली, चंदन — पूजन सामग्री
  • अगरबत्ती और धूपबत्ती — शुद्ध गाय के घी की
  • कपूर — 10 ग्राम
  • शुद्ध जल — कलश के लिए (तांबे या मिट्टी के बर्तन में)
  • आम के पत्ते — 21
  • पान के पत्ते — 2
  • नारियल — 1 (साबुत)
  • बताशे या मिश्री — भोग हेतु
  • पीला वस्त्र — पूजन के लिए (नया, सूती)
  • कुश और बिल्व पत्र

हवन सामग्री:

  • हवन कुंड — मिट्टी या तांबे का
  • समिधा — आम या पीपल की लकड़ी (108 टुकड़े)
  • घी — शुद्ध गाय का
  • लौंग, इलायची, जायफल — हवन सामग्री
  • हल्दी पाउडर — 11 चुटकी (हवन में आहुति हेतु)
  • केसर — 2 चुटकी

विशेष सामग्री (वैकल्पिक किंतु उत्तम):

  • बगलामुखी साधना की पुस्तिका
  • ब्राह्मण (दक्षिणा हेतु)
  • कन्या भोजन की सामग्री
  • पीले वस्त्र, पीले फल, पीली मिठाई — गरीबों को दान

संपूर्ण बगलामुखी साधना विधि

बगलामुखी साधना की विधि अत्यंत शुद्ध और विधिपूर्वक करनी चाहिए। यह एक शक्तिशाली साधना है इसलिए किसी अनुभवी गुरु या ज्योतिषी से दीक्षा लेकर ही करना श्रेयस्कर है:

चरण 1: साधना-स्थल की तैयारी (साधना से 1 दिन पूर्व)

  1. घर के पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में एकांत स्थान चुनें
  2. उस स्थान को गाय के गोबर से लीपें
  3. गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्धिकरण करें
  4. स्थान पर पीले या सफेद आसन बिछाएं
  5. बगलामुखी यंत्र को स्थापित करें — पीले वस्त्र पर रखें
  6. यंत्र पर रोली से स्वस्तिक बनाएं और पीले पुष्प रखें
  7. दीपक, अगरबत्ती और धूपबत्ती जलाएं
  8. कलश स्थापित करें — कलश में जल, सुपारी, सिक्का, हल्दी और आम के पत्ते रखें
  9. बगलामुखी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें (पीले पुष्पों से सजाएं)

चरण 2: दैनिक साधना-क्रम (प्रतिदिन)

प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त):

  1. स्नान: शीतल जल से स्नान करें। शरीर पर हल्दी का लेप लगाएं (विशेष दिनों पर)।
  2. वस्त्र: शुद्ध पीले वस्त्र धारण करें (सूती, नया)।
  3. आसन: कुश के आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  4. प्राणायाम: 5-10 बार अनुलोम-विलोम, फिर 21 बार कुंभक प्राणायाम करें।

संकल्प (प्रतिदिन):

"ॐ ह्रीं बगलामुखी देव्यै नमः, अद्य [तिथि, वार, मास] दिने, मम जीवने शत्रु-नाशाय, न्यायालय-विजयाय, वशीकरणाय, स्तम्भनाय, रक्षायै च, श्री बगलामुखी-माता-प्रीत्यर्थं बगलामुखी-साधनां करिष्ये।"

(अर्थात — हे माँ बगलामुखी, आज इस तिथि, वार, मास में मैं अपने जीवन में शत्रु-नाश, न्यायालय-विजय, वशीकरण, स्तम्भन और रक्षा के लिए, माता बगलामुखी की प्रसन्नता हेतु बगलामुखी साधना करता/करती हूँ।)

न्यास (प्राण-प्रतिष्ठा):

  1. मार्जन न्यास: "ॐ ह्रीं बगलामुखी देव्यै नमः" — हाथों पर, माथे पर, आँखों पर, कानों पर, नासिका पर, मुख पर, हृदय पर।
  2. अंग न्यास: शरीर के सभी अंगों पर बगलामुखी बीज मंत्र से स्पर्श करें।
  3. शक्ति न्यास: दीपक की लौ से आँखों में, माथे पर, हृदय पर तीन बार प्रकाश लें।
  4. मंत्र न्यास: माला पर "ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बन्धय ॐ ह्रीं स्वाहा" का 11 बार उच्चारण कर माला को अभिमंत्रित करें।

पूजन-विधि (प्रतिदिन):

  1. गणेश पूजन: सर्वप्रथम "ॐ गं गणपतये नमः" से गणेश जी का स्मरण करें।
  2. ब्रह्मा, विष्णु, शिव स्मरण: तीनों की स्तुति करें।
  3. बगलामुखी आवाहन: "ॐ ह्रीं बगलामुखी देव्यै नमः" से माँ बगलामुखी का आवाहन करें।
  4. पंचोपचार पूजन: पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) से स्नान कराएं।
  5. षोडशोपचार पूजन: 16 उपचारों से पूजन करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन, ताम्बूल, दक्षिणा।
  6. मंत्र जाप: बगलामुखी माला से 108 बार मंत्र का जाप करें।
  7. ध्यान: दीपक की लौ को देखते हुए 10-15 मिनट ध्यान करें। माँ बगलामुखी के ध्यान-श्लोक का चिंतन करें।
  8. हल्दी अर्पण: 11 टुकड़े कच्ची हल्दी यंत्र पर अर्पित करें।
  9. आरती: बगलामुखी मंत्र से आरती करें।
  10. प्रसाद वितरण: भोग लगाएं, कन्याओं और ब्राह्मणों को प्रसाद बांटें।

हवन (प्रतिमाह कम से कम एक बार):

  1. हवन कुंड में समिधा रखें।
  2. घी से अग्नि प्रज्वलित करें।
  3. "ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बन्धय ॐ ह्रीं स्वाहा" मंत्र से 108 आहुतियां दें।
  4. प्रत्येक 11वीं आहुति में हल्दी पाउडर और केसर डालें।
  5. हवन के अंत में पूर्णाहुति दें।
  6. हवन शेष जल से स्वयं पर छींटें मारें।

साधना का समापन (अंतिम दिन):

  1. विशेष पूजन और 108 बार मंत्र जाप
  2. बगलामुखी यंत्र को पीले वस्त्र में लपेटकर पूजा-स्थल या तिजोरी में रखें
  3. ब्राह्मण भोजन और कन्या भोजन कराएं
  4. पीले वस्त्र, पीले फल, हल्दी, केसर गरीबों को दान करें
  5. पीपल के वृक्ष में जल दें
  6. दीपक जलाकर प्रार्थना करें

बगलामुखी मंत्र और जाप विधि

बगलामुखी साधना के कई मंत्र हैं। यहाँ सबसे प्रचलित और प्रभावी मंत्र दिए जा रहे हैं:

1. बगलामुखी मूल मंत्र (सबसे प्रभावी):

ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बन्धय ॐ ह्लीं स्वाहा

यह मंत्र बगलामुखी का सबसे प्रचलित मूल मंत्र है। इसमें "ह्लीं" बीज है, "बगलामुखी" देवी का नाम है, और "सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय" अर्थ है "सब दुष्टों की वाणी, मुख और पद (चरण) को स्तब्ध करो"। "जिह्वां कीलय" अर्थ है "जीभ को जकड़ो" और "बन्धय" अर्थ है "बांध दो"।

2. बगलामुखी बीज मंत्र (छोटा और प्रभावी):

ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै नमः

यह सबसे सरल मंत्र है और नवीन साधकों के लिए उपयुक्त है।

3. बगलामुखी हृदय मंत्र (अति रहस्यमय):

ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वजनं वशमानय स्वाहा

यह मंत्र वशीकरण साधना के लिए विशेष प्रभावी है।

4. बगलामुखी गायत्री मंत्र:

ॐ बगलामुखी देव्यै विद्महे, स्तम्भिन्यै धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात्।

5. बगलामुखी ध्यान श्लोक:

पीताम्बरा पीतवपु: पीतभूषणभूषिता। पीतगन्धा पीतपद्मस्था पीताम्बरधरा सदा॥ वामहस्ते तु जीह्वाग्रं दक्षहस्तेण मूसलम्। बगलामुखी जपं कुर्यात् सर्वशत्रुविनाशनम्॥

जाप विधि:

अवधि मंत्र की संख्या विशेषता
21 दिन प्रतिदिन 108 बार न्यूनतम साधना
40 दिन प्रतिदिन 108 बार + गुरुवार 1008 बार मध्यम साधना (सर्वाधिक लाभकारी)
108 दिन प्रतिदिन 108 बार + गुरुवार 1008 बार पूर्ण साधना
एक वर्ष प्रतिदिन 108 बार + विशेष दिन 1,25,000 बार महा साधना

जाप के नियम:

  1. शुद्धता: स्नान करके, शुद्ध पीले वस्त्र धारण करके ही जाप करें।
  2. दिशा: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके।
  3. आसन: कुश या ऊनी आसन पर।
  4. माला: रुद्राक्ष या पीले स्फटिक की 108 मनकों वाली माला का प्रयोग।
  5. समय: ब्रह्म मुहूर्त सर्वोत्तम, प्रातःकाल श्रेष्ठ।
  6. स्वर: उच्च स्वर में (वाचिक), मन में (मानसिक), या दोनों (उपांशु)।
  7. विशेष: स्त्रियां भी यह मंत्र सहजता से जप सकती हैं।

जाप से पहले का मंत्र (संकल्प श्लोक):

ॐ ह्लीं बगलामुखी माता की जय। मैं इस मंत्र का जाप अपने शत्रु-नाश, न्यायालय-विजय, रक्षा और मानसिक शक्ति हेतु करता/करती हूँ।

जाप के बाद का मंत्र (विसर्जन):

ॐ बगलामुखी देवी की जय, ॐ दशमहाविद्या की जय। मेरा यह जाप सफल हो, मुझे शत्रु-नाश, विजय और रक्षा प्रदान करे। ॐ शांतिः शांतिः शांतिः।

साधना के फायदे और लाभ

बगलामुखी साधना के अनेक विशिष्ट और प्रमाणित लाभ हैं। नियमित साधना से निम्न फल प्राप्त होते हैं:

1. शत्रु-नाश: साधना के प्रभाव से शत्रु की शक्ति, साहस और वाणी स्तब्ध हो जाती है। जो व्यक्ति आपके विरुद्ध षड्यंत्र रच रहा है, वह स्वयं निष्क्रिय हो जाता है। न्यायालय में चल रहे विरोधी पक्ष की सारी युक्तियां विफल हो जाती हैं।

2. न्यायालय-विजय (मुकदमे में जीत): यह बगलामुखी साधना का सबसे प्रसिद्ध लाभ है। जिन लोगों पर मुकदमा चल रहा हो, कानूनी विवाद हो, सरकारी कार्रवाई हो — उनके लिए यह साधना अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। कुंडली में छठे, आठवें या दशवें भाव का स्वामी पीड़ित हो, या शनि-राहु-केतु अशुभ हों, तब यह साधना विशेष लाभकारी है।

3. स्तम्भन-शक्ति: किसी भी व्यक्ति, ग्रह, या परिस्थिति को "स्तब्ध" करने की अद्भुत शक्ति मिलती है। साधक की वाणी में ऐसा बल आता है कि सामने वाला उसके सामने कुछ बोलने में असमर्थ हो जाता है। नौकरी, व्यापार, सरकारी कार्यालय — सभी जगह यह शक्ति काम आती है।

4. वशीकरण और मोहन: बगलामुखी की वशीकरण शक्ति अन्य देवियों से अधिक मानी जाती है। जिन साधकों की वाणी-शक्ति कमजोर है, जो अपनी बात दूसरों तक नहीं पहुंचा पाते, वे इस साधना से अपनी वाणी में माधुर्य और प्रभाव पैदा कर सकते हैं।

5. व्यापार-वृद्धि: व्यापार में आ रही बाधाएं, प्रतिस्पर्धा की चुनौतियां, और शत्रुओं की चालें निष्फल होती हैं। नए ग्राहक और नए अवसर प्राप्त होते हैं। विशेषकर गुरु-ग्रह से संबंधित व्यापार (शिक्षा, परामर्श, वित्त, धार्मिक कार्य) में लाभ होता है।

6. कुंडली दोषों का शमन: कुंडली में गुरु (बृहस्पति) के दोष, शनि की महादशा, राहु-केतु के अशुभ प्रभाव, और न्यायालय-संबंधी दोष दूर होते हैं। छठे भाव (शत्रु), आठवें भाव (अचानक घटना), और दशवें भाव (सरकारी कार्य) के स्वामियों को बल मिलता है।

7. रक्षा-कवच: साधक के चारों ओर एक दिव्य रक्षा-कवच बनता है। काल-जादू, पर-कर्म, षड्यंत्र, और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नहीं होता। अचानक दुर्घटना, बीमारी, या हानि से रक्षा होती है।

8. मानसिक शक्ति: मानसिक दुर्बलता, भय, असुरक्षा की भावना दूर होती है। साहस, धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ता है। साधक निर्णय लेने में अधिक स्पष्ट होता है।

9. अचानक धन-हानि से बचाव: अचानक होने वाली धन-हानि, चोरी, धोखाधड़ी या आर्थिक संकट से रक्षा होती है। बैंक-लोन, म्यूचुअल फंड, व्यापार में नुकसान का भय कम होता है।

10. सामाजिक प्रतिष्ठा: समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। विरोधी चुप हो जाते हैं, सहयोगी सहयोग करने लगते हैं। सरकारी अधिकारी और न्यायाधीश भी साधक के प्रति अनुकूल होते हैं।

11. कार्य-सिद्धि: बहुत समय से अटकी हुई कामनाएं पूर्ण होती हैं। न्यायालय, सरकारी कार्यालय, मुकदमा, टेंडर, नौकरी — जो कार्य अटके हों, वे पूरे होते हैं।

12. आध्यात्मिक उन्नति: साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है। मंत्र-सिद्धि प्राप्त होती है। अंतर्ज्ञान और ध्यान-शक्ति बढ़ती है। ईश्वर-भक्ति में रुचि बढ़ती है।

सावधानियां और नियम

बगलामुखी साधना अत्यंत शक्तिशाली है, इसलिए कुछ आवश्यक सावधानियां और नियम हैं:

1. अहंकार का त्याग: साधना के दौरान अहंकार, घमंड और अभिमान का पूर्ण त्याग आवश्यक है। जो साधक शत्रु-नाश के बाद अहंकारी हो जाता है, माँ उससे रुष्ट हो जाती हैं और साधना का फल नष्ट हो जाता है। यह सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है।

2. शुद्ध आचरण: साधना की अवधि में सात्विक जीवन जीना अनिवार्य है। मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज, तामसिक भोजन का त्याग करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें (या कम से कम संयम रखें)। पीले रंग के सात्विक भोजन का सेवन करें।

3. गुरु-मंत्र की अनिवार्यता: बगलामुखी साधना बिना गुरु-दीक्षा के करना अत्यंत कठिन और कभी-कभी हानिकारक भी हो सकता है। यह साधना किसी अनुभवी तांत्रिक गुरु या ज्योतिषी से दीक्षा लेकर ही करना चाहिए। विशेषकर उन्नत साधना (108 दिन, 1 वर्ष) के लिए गुरु-मार्गदर्शन अनिवार्य है।

4. काल-जादू से बचाव: बगलामुखी साधना का उपयोग किसी को नुकसान पहुंचाने, काला-जादू करने, या अंधविश्वास फैलाने के लिए कदापि न करें। ऐसा करने से माँ बगलामुखी अत्यंत रुष्ट होती हैं और साधक को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। यह सावधानी अनिवार्य है।

5. ब्रह्मचर्य पालन: साधना की अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन अत्यंत आवश्यक है। विशेषकर 40 दिन की साधना में संयम रखें। स्त्री-संबंध, अश्लील विचार और विकारों से दूर रहें। सात्विकता ही साधना की जड़ है।

6. दिशा-नियम: साधना पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। साधना-स्थल पर पीला आसन होना चाहिए। यंत्र पीले वस्त्र पर स्थापित करें। ये दिशा-नियम पालन करने से साधना का फल शीघ्र मिलता है।

7. नियमितता: साधना में नियमितता अत्यंत आवश्यक है। एक बार साधना आरंभ करने के बाद बीच में छोड़ना अशुभ माना जाता है। यदि अपरिहार्य कारणवश 1-2 दिन छूट जाए, तो अगले दिन से पुनः आरंभ करें और एक अतिरिक्त माला जाप करें।

8. मंत्र-शुद्धता: मंत्र का उच्चारण शुद्ध होना चाहिए। "ह्लीं" को "ह्लीं" ही बोलें, "हीं" या "ह्रिं" नहीं। "बगलामुखी" का स्पष्ट उच्चारण करें — "बग-ला-मु-खी"। गलत उच्चारण से साधना का विपरीत फल भी हो सकता है।

9. स्त्रियों के लिए विशेष नियम: मासिक धर्म के दिनों में साधना स्थगित कर देनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान उन्नत साधना वर्जित है। स्त्रियां मंत्र जाप और सामान्य पूजन कर सकती हैं, किंतु हवन पति या पुरुष-सहयोगी से करवाना उचित है।

10. दान-पुण्य: साधना के साथ-साथ नियमित दान-पुण्य भी करते रहना चाहिए। पीले वस्त्र, पीले फल, हल्दी, केसर, पीली मिठाई का दान बगलामुखी साधना को अत्यंत बल प्रदान करते हैं। अन्न-दान और गौ-सेवा भी श्रेयस्कर है।

11. एकाग्रता: साधना के समय मन को एकाग्र करना अनिवार्य है। मोबाइल, टीवी या अन्य विकर्षणों से दूर रहें। एकांत स्थान पर ही साधना करें। साधना-काल में मन में शत्रु का चेहरा या विनाश की कामना न रखें — केवल स्तम्भन और रक्षा का संकल्प रखें।

12. सही संकल्प: साधना आरंभ करने से पहले स्पष्ट संकल्प लें — क्यों साधना कर रहे हैं, क्या प्राप्त करना चाहते हैं। अस्पष्ट संकल्प से साधना का फल नहीं मिलता। केवल रक्षा, स्तम्भन, शत्रु-निग्रह और न्यायालय-विजय — इन्हीं शुभ कार्यों के लिए इस साधना का प्रयोग करें।

13. अंधविश्वास से बचें: बगलामुखी साधना कोई जादू-टोना नहीं है। यह एक वैज्ञानिक और शास्त्रसम्मत उपासना पद्धति है। इसके प्रति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें, किंतु अंधविश्वास या भय से नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बगलामुखी साधना काला-जादू है?

बिल्कुल नहीं। बगलामुखी साधना दशमहाविद्या की एक शुभ और शास्त्रसम्मत उपासना है। यह शाक्त तंत्र के अंतर्गत आती है और इसमें केवल रक्षा, स्तम्भन, शत्रु-निग्रह और न्यायालय-विजय की कामना की जाती है। हानिकारक काला-जादू बगलामुखी साधना के दायरे में नहीं आता और ऐसा करने से माँ रुष्ट होती हैं।

कौन बगलामुखी साधना नहीं कर सकता?

12 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती स्त्रियां, मासिक धर्म के दिनों में स्त्रियां, और जो व्यक्ति सात्विक जीवन, ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करने को तैयार नहीं है — वे इस साधना से दूर रहें। अहंकारी, क्रोधी और निर्दोष को हानि पहुंचाने की भावना रखने वाले लोगों के लिए यह साधना वर्जित है।

क्या स्त्रियां बगलामुखी साधना कर सकती हैं?

हाँ, बिल्कुल। बगलामुखी साधना स्त्री-पुरुष दोनों के लिए समान रूप से लाभकारी है। दशमहाविद्या में माँ बगलामुखी स्वयं स्त्री-शक्ति का प्रतीक हैं। स्त्रियां मंत्र जाप, पूजन और अधिकतर विधियां स्वयं कर सकती हैं। केवल मासिक धर्म के दिनों में साधना स्थगित करें।

बगलामुखी साधना कितने दिन करनी चाहिए?

न्यूनतम 21 दिन, सामान्य 40 दिन और पूर्ण फल हेतु 108 दिन। सर्वाधिक प्रचलित 40 दिन की साधना है। यदि विशेष लक्ष्य (जैसे न्यायालय-विजय, व्यापार में शत्रु-नाश) है तो 108 दिन की साधना अत्यंत प्रभावी रहती है।

क्या इस साधना से कुछ बिगड़ सकता है?

यदि साधना शुद्ध भाव से, सात्विक जीवन जीते हुए और गुरु-मार्गदर्शन में की जाए, तो कुछ भी नहीं बिगड़ता। किंतु यदि साधना करने वाला अहंकारी हो, शुद्ध आचरण का पालन न करे, या इसका दुरुपयोग करे, तो प्रतिकूल फल भी मिल सकते हैं। इसलिए गुरु-मार्गदर्शन अनिवार्य है।

क्या बगलामुखी साधना के लिए दीक्षा जरूरी है?

हाँ, बगलामुखी साधना के लिए अनुभवी तांत्रिक गुरु या ज्योतिषी से दीक्षा लेना अत्यंत श्रेयस्कर है। बिना दीक्षा के साधना करने से पूर्ण फल नहीं मिलता, और कभी-कभी विपरीत फल भी हो सकते हैं। विशेषकर मंत्र-शुद्धता और आवाहन-विधि के लिए दीक्षा आवश्यक है।

शुभकामनाएँ सहित, गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली 📞 संपर्क: www.panditnmshrimali.com


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Frequently Asked Questions

क्या बगलामुखी साधना काला-जादू है?+
बिल्कुल नहीं। बगलामुखी साधना दशमहाविद्या की शुभ और शास्त्रसम्मत उपासना है। इसमें केवल रक्षा, स्तम्भन और शत्रु-निग्रह की कामना की जाती है। हानिकारक काला-जादू इसमें वर्जित है।
कौन बगलामुखी साधना नहीं कर सकता?+
12 वर्ष से कम बच्चे, गर्भवती स्त्रियां, मासिक धर्म काल में स्त्रियां, अहंकारी व्यक्ति, और जो सात्विक जीवन जीने को तैयार नहीं — वे इस साधना से दूर रहें।
क्या स्त्रियां बगलामुखी साधना कर सकती हैं?+
हाँ, स्त्री-पुरुष दोनों के लिए समान रूप से लाभकारी है। माँ बगलामुखी स्वयं स्त्री-शक्ति का प्रतीक हैं। मासिक धर्म के दिनों में साधना स्थगित करें।
बगलामुखी साधना कितने दिन करनी चाहिए?+
न्यूनतम 21 दिन, सामान्य 40 दिन और पूर्ण फल हेतु 108 दिन। 40 दिन की साधना सबसे प्रचलित और प्रभावी है।
क्या इस साधना से कुछ बिगड़ सकता है?+
शुद्ध भाव से, सात्विक जीवन जीते हुए और गुरु-मार्गदर्शन में करने पर कुछ नहीं बिगड़ता। किंतु अहंकार और दुरुपयोग से प्रतिकूल फल मिल सकते हैं।
क्या बगलामुखी साधना के लिए दीक्षा जरूरी है?+
हाँ, अनुभवी तांत्रिक गुरु या ज्योतिषी से दीक्षा लेना अत्यंत श्रेयस्कर है। बिना दीक्षा के पूर्ण फल नहीं मिलता। मंत्र-शुद्धता और आवाहन-विधि के लिए दीक्षा आवश्यक है।
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Written by

Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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