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जानिए हरियाली तीज का महत्व , व्रत कथा ,विधि एवं उपाय

# जानिए हरियाली तीज का महत्व , व्रत कथा ,विधि एवं उपाय - Hariyali Teej - Pandit NM Shrimali - Best Astrologer in India **जानिए हरियाली तीज का महत्व , व्रत कथा ,विधि एवं उपाय** — यह विषय मेरे पास रोजा

7 July 2026 18 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। इनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।

हरियाली तीज सावन मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाया जाने वाला एक अत्यंत मनमोहक और श्रद्धापूर्ण व्रत है, जो विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना से रखा जाता है। "हरियाली" नामकरण सावन की हरी-भरी वर्षा ऋतु से आया है — जब चारों ओर नवीन हरियाली, झरने और काली कपासी मिट्टी की सोंधी सुगंध से प्रकृति सजी होती है। इसी हरित परिवेश में महिलाएं हरे वस्त्र धारण कर, झूला झूलती हुई, माँ पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम हरियाली तीज 2025 एवं 2026 की तिथि, मुहूर्त, हरितालिका से अंतर, पौराणिक कथा, क्षेत्रीय परंपराएं, 16 श्रृंगार, संपूर्ण पूजा विधि, शुभ मंत्र, झूला झूलने का महत्व, हरे पत्तों-फूलों की सूची और व्रत के फायदे-सावधानियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

विषय सूची (Table of Contents)

  1. हरियाली तीज 2025 और 2026 — तिथि और शुभ मुहूर्त
  2. हरियाली तीज का परिचय — क्या है, क्यों मनाया जाता है
  3. हरियाली तीज और हरितालिका तीज — स्पष्ट अंतर
  4. हरियाली तीज का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
  5. पौराणिक कथा — माँ पार्वती की शिव-प्राप्ति
  6. संपूर्ण पूजा विधि — 8 चरणों में मार्गदर्शन
  7. 16 हरे पत्ते और फूल — पूजा सामग्री की विशेष सूची
  8. 16 श्रृंगार, झूला और हरी साड़ी — सुहाग के प्रतीक
  9. हरियाली तीज के शुभ मंत्र और जाप विधि
  10. क्षेत्रीय परंपराएं — राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार
  11. व्रत के फायदे और सावधानियां
  12. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाली तीज 2025 और 2026 — तिथि और शुभ मुहूर्त

हरियाली तीज प्रतिवर्ष सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। नीचे दोनों वर्षों की तिथि और प्रमुख मुहूर्त दिए जा रहे हैं:

वर्ष 2025:

अवधि समय
तृतीया तिथि आरंभ 3 अगस्त 2025, रविवार — प्रातः 6:12 बजे
तृतीया तिथि समाप्ति 4 अगस्त 2025, सोमवार — प्रातः 5:23 बजे
मुख्य पूजा मुहूर्त (प्रदोष) 3 अगस्त शाम 6:32 से 8:15 बजे तक
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:14 से 12:58 बजे तक
हरियाली तीज तिथि (मुख्य दिन) 3 अगस्त 2025, रविवार

वर्ष 2026:

अवधि समय
तृतीया तिथि आरंभ 23 अगस्त 2026, रविवार — रात्रि 9:47 बजे
तृतीया तिथि समाप्ति 24 अगस्त 2026, सोमवार — रात्रि 10:12 बजे
मुख्य पूजा मुहूर्त (प्रदोष) 24 अगस्त शाम 6:28 से 8:05 बजे तक
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:51 बजे तक
हरियाली तीज तिथि (मुख्य दिन) 24 अगस्त 2026, सोमवार

महत्वपूर्ण संकेत: 2025 में तृतीया तिथि दो दिनों में विभाजित है, अतः 3 अगस्त को प्रदोष काल में पूजा सर्वोत्तम है। 2026 में तृतीया रात्रि को आरंभ होकर अगले दिन रात्रि तक रहेगी, इसलिए 24 अगस्त की शाम प्रदोष काल में पूजा करें। स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।

हरियाली तीज का परिचय — क्या है, क्यों मनाया जाता है

हरियाली तीज उत्तर भारत की प्रमुख महिला व्रत परंपराओं में से एक है। "हरियाली" शब्द का अर्थ है "हरे रंग से भरा" अथवा "हरितिमा से आच्छादित"। सावन मास में जब वर्षा ऋतु अपने चरम पर होती है और धरती नई हरियाली से सराबोर हो उठती है, तब यह व्रत मनाया जाता है।

मुख्य विशेषताएं:

  • तिथि: सावन शुक्ल पक्ष तृतीया (हर साल जुलाई-अगस्त में)
  • मुख्य भक्ति वर्ग: सुहागिन महिलाएं — पति की दीर्घायु और सुख-शांति हेतु
  • प्रतीक: हरा रंग, झूला, 16 श्रृंगार, हरे पत्ते-फूल
  • आराध्य: भगवान शिव और माँ पार्वती (गौरी)
  • सबसे अधिक प्रचलित क्षेत्र: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब

मनाने का उद्देश्य:

  • पति की दीर्घायु और अटूट सुहाग
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम, सद्भाव और मधुरता
  • माँ पार्वती की कृपा और आशीर्वाद
  • सावन के पावन माह में सात्विक आराधना का सुअवसर
  • संतान सुख और कुटुम्ब की समृद्धि

हरियाली तीज की एक और पहचान यह है कि इसे "झूला तीज" भी कहते हैं — क्योंकि इस दिन महिलाएं बड़े हरे-भरे पेड़ों पर झूला बाँधकर झूलती हैं, गीत गाती हैं, और माँ पार्वती के विवाह का स्मरण करती हैं। राजस्थान में यह परंपरा सबसे अधिक भव्य रूप में देखने को मिलती है, जहाँ झूलों की सजावट, रंगीन चुनरियाँ, और स्त्रियों के समूह में गाए जाने वाले लोकगीत त्योहार का मुख्य आकर्षण होते हैं।

हरियाली तीज और हरितालिका तीज — स्पष्ट अंतर

बहुत सी महिलाएं हरियाली तीज और हरितालिका तीज को एक ही समझ लेती हैं, जबकि दोनों में तिथि, विधि और महत्व के स्तर पर स्पष्ट अंतर है:

पहलू हरियाली तीज हरितालिका तीज
तिथि सावन शुक्ल पक्ष तृतीया भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया
माह जुलाई-अगस्त (सावन) अगस्त-सितंबर (भाद्रपद)
मुख्य प्रतीक हरियाली, झूला, 16 श्रृंगार हरे पत्तों से शिवलिंग निर्माण
कथा केंद्र माँ पार्वती-शिव विवाह माँ पार्वती की तपस्या और शिव-प्राप्ति
सुहाग महत्व उच्च — सौभाग्य का प्रतीक अति उच्च — सर्वश्रेष्ठ सुहाग व्रत
निर्जला व्रत सामान्यतः एक समय फलाहार/निर्जला सर्वाधिक कठोर — प्रायः निर्जला
क्षेत्रीय प्रचलन राजस्थान, उत्तर भारत पूरा भारत (विशेषकर उत्तर)
विशेषता झूला झूलना, हरी साड़ी, मेहंदी गौरी-शंकर पूजा, पंचामृत अभिषेक

सारांश: दोनों ही व्रत माँ पार्वती को समर्पित हैं और पति की दीर्घायु की कामना से रखे जाते हैं, परंतु हरितालिका तीज को शास्त्रों में अधिक कठोर और पवित्र माना गया है, जबकि हरियाली तीज का स्वरूप अधिक लोक-धार्मिक, सौंदर्यपरक और क्षेत्रीय परंपराओं से समृद्ध है। दोनों व्रत रखने वाली सुहागिन स्त्री को वर्षभर सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

हरियाली तीज का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

हरियाली तीज केवल एक लोक-त्योहार नहीं, बल्कि इसके पीछे गहन धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय आधार हैं:

धार्मिक दृष्टि से:

  • पति की आयु वृद्धि और अकाल मृत्यु से रक्षा
  • सुहाग में आने वाले विघ्नों (दोष, ग्रह-पीड़ा, नज़र) का निवारण
  • माँ पार्वती की कृपा से कुटुम्ब में सुख-शांति
  • "सावन-भादो" के पावन माह में आराधना का पुण्य लाभ
  • महिलाओं के लिए स्वयं के त्याग और समर्पण का संस्कार

आध्यात्मिक दृष्टि से:

  • शक्ति (पार्वती) और शिव के अटूट मिलन का स्मरण
  • सात्विक जीवनशैली और संयम का अभ्यास
  • मन की एकाग्रता और इच्छाशक्ति का विकास
  • स्त्री-शक्ति का सम्मान — पार्वती रूपिणी शक्ति की पूजा
  • सृष्टि की हरित ऊर्जा (प्रकृति) से साक्षात्कार

ज्योतिषीय दृष्टि से:

  • सावन माह शिव का माह है — इसमें की गई शिव-पार्वती आराधना अत्यंत फलदायी
  • शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि शुक्र ग्रह से संबंधित — प्रेम, सौंदर्य और वैभव का कारक
  • तृतीया तिथि पर ब्रह्मा का आविर्भाव माना जाता है — सृजन की ऊर्जा
  • सावन में चंद्रमा की स्थिति अनुसार मन में भावनात्मक गहराई आती है
  • कुंडली के सप्तम भाव (वैवाहिक स्थिति) को सुदृढ़ करने का शुभ अवसर
  • जिन महिलाओं की कुंडली में शुक्र पीड़ित है, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी

पौराणिक कथा — माँ पार्वती की शिव-प्राप्ति

हरियाली तीज की कथा माँ पार्वती के अनन्य भक्ति-भाव और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की अमोघ तपस्या से जुड़ी है:

एक समय की बात है, हिमालय के राज परिवार में अत्यंत सुंदर और गुणवती कन्या "पार्वती" का जन्म हुआ। पार्वती बाल्यकाल से ही भगवान शिव के प्रति अनुरक्त थीं और उन्हें पति रूप में प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प लिया। उन्होंने अनेक जन्मों तक कठोर तपस्या की — जंगलों में रहना, फल-फूल खाकर जीवन बिताना, मन-वचन-कर्म से शिव का चिंतन करना।

जब माँ पार्वती ने अपने पिछले जन्मों की तपस्या से भगवान शिव का ध्यान और आराधना की, तब शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी रूप में वरने का निश्चय किया। इसी कथा के आधार पर हरियाली तीज पर स्त्रियाँ माँ पार्वती का अनुकरण करती हुई पति की दीर्घायु और सुहाग की कामना से व्रत रखती हैं।

कथा का मूल संदेश:

  • सच्चे प्रेम में त्याग, धैर्य और निष्ठा तीनों आवश्यक हैं
  • एकनिष्ठ भक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है
  • स्त्री-शक्ति (पार्वती) के सम्मान और पूजन से सुहाग की रक्षा होती है
  • शिव-शक्ति के मिलन से ही सृष्टि का संचालन होता है
  • प्रकृति (हरियाली) में ईश्वर का वास है — उसे पूजनीय मानें

संपूर्ण पूजा विधि — 8 चरणों में मार्गदर्शन

हरियाली तीज की पूजा सवेरे से लेकर अगले दिन प्रातः तक चलती है। नीचे 8 चरणों में पूरी विधि का वर्णन है:

चरण 1 — प्रातःकाल स्नान और शुद्धि (ब्रह्म मुहूर्त 4-5 बजे):

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें और गंगाजल अथवा शीतल जल से स्नान करें
  • शुद्ध हरे, पीले अथवा लाल वस्त्र धारण करें (हरा रंग सर्वोत्तम)
  • 16 श्रृंगार पूर्ण करें — सिंदूर, कुंकुम, मेहंदी, बिंदी, पायल, चूड़ी, नथ, कंगन, हार, इत्र आदि
  • मन में संकल्प लें: "मैं भगवान शिव-माँ पार्वती की पूजा अपने सुहाग की रक्षा हेतु कर रही हूँ"

चरण 2 — पूजा स्थान और मूर्ति स्थापना:

  • घर के पूजा स्थान अथवा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थान चुनें
  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं
  • शिव-पार्वती की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करें
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) से मूर्ति को स्नान कराएं
  • आम के पत्ते, बेलपत्र, अशोक और चमेली के फूल चढ़ाएं

चरण 3 — हरे पत्तों से शिवलिंग निर्माण:

  • गंगाजल मिली मिट्टी से गोल आकार का शिवलिंग बनाएं
  • शिवलिंग पर हरे पत्ते चिपकाएं और हल्दी-चंदन का तिलक लगाएं
  • 16 हरे पत्ते (नीचे सूची दी गई है) शिवलिंग पर चढ़ाएं
  • शिवलिंग पर रोली, मौली और अशोक के फूल अर्पित करें

चरण 4 — षोडशोपचार पूजा: शिव-पार्वती की 16 उपचारों से पूजा करें:

  1. आवाहन — आह्वान
  2. आसन — आसन देना
  3. पाद्य — चरणों में जल
  4. अर्घ्य — हाथों में जल
  5. आचमन — मुख शुद्धि हेतु जल
  6. स्नान — पंचामृत से स्नान
  7. वस्त्र — श्वेत अथवा हरा वस्त्र
  8. सौभाग्य सूत्र — धागा बाँधना
  9. चंदन — तिलक
  10. अक्षत — चावल चढ़ाना
  11. पुष्प — फूल अर्पित
  12. धूप — अगरबत्ती
  13. दीप — दीपक
  14. नैवेद्य — भोग (खीर, हलवा, मेवे, फल)
  15. आचमन — पुनः जल
  16. पुष्पांजलि — हाथ में फूल लेकर समर्पण

चरण 5 — कथा वाचन:

  • माँ पार्वती और शिव की कथा सुविज्ञ पुरोहित अथवा वरिष्ठ महिला से सुनें
  • कथा सुनते समय मन में शिव-पार्वती का ध्यान रखें
  • कथा के बाद "हरियाली तीज की कथा" का श्रवण करें — इसमें सावन की हरियाली में माँ पार्वती का त्याग वर्णित है

चरण 6 — मंत्र जाप (108 माला):

  • "ॐ ह्रीं श्रीं गौरि नमः" — 108 बार
  • "ॐ नमः शिवाय" — 108 बार
  • "ॐ गौरीशंकराय नमः" — 21 बार
  • "ॐ शिवायै नमः, ॐ शक्तये नमः" — 11 बार
  • जाप ब्रह्म मुहूर्त अथवा प्रदोष काल में सर्वोत्तम

चरण 7 — झूला झूलना (शाम का विशेष अनुष्ठान):

  • आँगन अथवा छत पर बरगद, नीम अथवा आम के पेड़ की डाली पर झूला बाँधें
  • झूले को फूलों, रंगीन कपड़ों और चूड़ियों से सजाएं
  • सुहागिन स्त्रियाँ 16 श्रृंगार के साथ झूला झूलें
  • झूलते हुए माँ पार्वती के भजन और लोकगीत गाएं
  • "झूले में झूलें गौरा मैया, झूले में झूलें गौरा मैया" जैसे गीत विशेष फलदायी

चरण 8 — रात्रि जागरण और अगले दिन पारण:

  • संपूर्ण रात्रि जागरण करें
  • शिव-पार्वती के भजन-कीर्तन करें
  • महिलाएं समूह में कथा सुनें और एक-दूसरे को सुहाग की शुभकामनाएं दें
  • प्रातःकाल विधिपूर्वक व्रत का पारण करें
  • पारण में फलाहार अथवा एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करें

16 हरे पत्ते और फूल — पूजा सामग्री की विशेष सूची

हरियाली तीज पर 16 हरे पत्ते और फूल चढ़ाने का विशेष महत्व है। ये सभी वनस्पतियाँ शिव-पार्वती को अत्यंत प्रिय हैं:

  1. बेलपत्र — शिव का सर्वप्रिय पत्ता
  2. आम का पत्ता — पार्वती को प्रिय
  3. अशोक के फूल — सौभाग्य का प्रतीक
  4. चमेली के फूल — सुगंध और शांति
  5. केतकी (केवड़ा) के फूल — शिव को अत्यंत प्रिय
  6. मदार (आक) के फूल — शिव के पूजन में विशेष
  7. गुड़हल (हिबिस्कस) — लाल पुष्प
  8. पलाश (ढाक) के फूल — अग्नि तत्व
  9. कमल के फूल — शांति और पवित्रता
  10. गुलाब के फूल — प्रेम का प्रतीक
  11. नीम के पत्ते — रोगनाशक और शुद्धिकर
  12. तुलसी के पत्ते — विष्णुप्रिय, शिव-पार्वती को भी अर्पणीय
  13. धतूरे के फूल — शिव को अति प्रिय (सावधानी से उपयोग करें)
  14. अपामार्ग (चिचड़ा) के पत्ते — शिव-पार्वती की पूजा में शुभ
  15. कनेर के फूल — शिव-पार्वती को प्रिय
  16. जवा (बारहमासी) के फूल — सौभाग्य का प्रतीक

नोट: यदि कोई पत्ता या फूल आपके क्षेत्र में उपलब्ध न हो, तो उपलब्ध विकल्पों से पूजा करें। कम से कम 7-8 हरे पत्ते और फूल अवश्य चढ़ाएं।

16 श्रृंगार, झूला और हरी साड़ी — सुहाग के प्रतीक

16 श्रृंगार (सुहाग का पूर्ण श्रृंगार):

  1. स्नान — गंगाजल अथवा शीतल जल से शुद्धि
  2. वस्त्र — हरी अथवा लाल साड़ी/सलवार
  3. सिंदूर — मांग में (सुहाग का सर्वोच्च प्रतीक)
  4. कुंकुम — माथे पर गोल तिलक
  5. मेहंदी — हाथ-पैर पर सुंदर डिज़ाइन
  6. बिंदी/कुंडल — माथे पर लाल बिंदी
  7. काजल — आँखों में
  8. लाली — होंठों पर
  9. नथ/नाक की अँगूठी — आभूषण
  10. कर्णफूल/बाली — कान में
  11. चूड़ियां — हाथों में (हरी या लाल, कम से कम 16)
  12. कंगन — कलाई पर
  13. पायल — पैरों में
  14. बाजूबंद — भुजाओं पर
  15. हार/मंगलसूत्र — गले में
  16. इत्र/अत्तर — सुगंध

हरी साड़ी और चूड़ी का महत्व: हरियाली तीज पर हरी रंग की साड़ी, चुनरी और चूड़ियाँ पहनने का विशेष महत्व है। हरा रंग सावन की हरियाली, प्रकृति की ताज़गी, और नवजीवन का प्रतीक है। माना जाता है कि हरे रंग के वस्त्र धारण करने से माँ पार्वती विशेष प्रसन्न होती हैं और सुहागिन स्त्रियों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

झूला झूलने का विशेष महत्व: झूला झूलना हरियाली तीज का सबसे भव्य और आनंददायक अनुष्ठान है। ऐसा माना जाता है कि झूला झूलने से:

  • माँ पार्वती और भगवान शिव के मिलन का स्मरण होता है
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम और सद्भाव बना रहता है
  • महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार होता है (झूलने से रीढ़ और कमर को आराम)
  • परिवार की महिलाएं एकजुट होती हैं और सामूहिक आनंद की अनुभूति होती है
  • ऋतु चक्र और प्रकृति के साथ तादात्म्य स्थापित होता है

हरियाली तीज के शुभ मंत्र और जाप विधि

शिव मंत्र:

  • ॐ नमः शिवाय (सर्वाधिक प्रचलित)
  • ॐ ह्रौं जूं सः शिवाय नमः
  • ॐ शं शिवाय नमः

पार्वती मंत्र:

  • ॐ ह्रीं श्रीं गौरि नमः
  • ॐ पार्वती नमः सहितायै नमः
  • ॐ ह्रीं पार्वत्यै नमः

संयुक्त मंत्र (विशेष फलदायी):

  • ॐ गौरीशंकराय नमः
  • ॐ शिव-शक्ति नमः
  • ॐ शिवायै नमः, ॐ शक्तये नमः

जाप विधि:

  • 108 माला पर 11 बार या 21 बार जाप
  • सवेरे ब्रह्म मुहूर्त में जाप सर्वोत्तम
  • प्रदोष काल में 108 बार जाप अवश्य करें
  • मंत्र जाप करते समय श्वेत पुष्प, कुंकुम और अक्षत अर्पित करें
  • शुद्ध सात्विक मन से जाप करें — क्रोध, ईर्ष्या का त्याग आवश्यक

हरियाली तीज विशेष मंत्र: "ॐ हरितालिकायै नमः" — 108 बार जाप से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

क्षेत्रीय परंपराएं — राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार

हरियाली तीज के रूप और विधि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग हैं:

राजस्थान (सबसे अधिक भव्य):

  • यहाँ हरियाली तीज "तीज" के नाम से प्रसिद्ध है — राजस्थान का सबसे बड़ा महिला उत्सव
  • महिलाएं विशाल झूले सजाती हैं, जिन्हें फूलों, रंगीन कपड़ों और चूड़ियों से सजाया जाता है
  • "झूला गीत" और "तीज गीत" गाए जाते हैं
  • लाल चुनरी, हरी चूड़ियाँ, भारी आभूषण — राजस्थानी स्टाइल
  • विशेष पकवान: गुड़ की पूड़ियाँ, मालपुए, हलवा
  • जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर में सबसे भव्य आयोजन
  • सास-बहू के रिश्तों को मजबूत करने का अवसर

उत्तर प्रदेश:

  • "हरियाली तीज" के नाम से मनाया जाता है
  • महिलाएं हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं
  • हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज में विशेष आयोजन
  • किन्नर अथवा बरगद के पेड़ पर झूला बाँधने की परंपरा
  • कथा सुनने के बाद एक-दूसरे को रंगीन चूड़ियाँ भेंट करने की प्रथा
  • "हरियाली तीज की कथा" का विशेष वाचन

मध्य प्रदेश:

  • "हरियाली तीज" और "सावन का झूला" दोनों नामों से प्रसिद्ध
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है
  • खजुराहो, उज्जैन, इंदौर में शहरी शैली में आयोजन
  • महिलाएं समूह में "गौरा-गौरी" के भजन गाती हैं
  • विशेष व्यंजन: पीले चावल, दही-बड़े, हलवा

बिहार और झारखंड:

  • "हरियाली तीज" के साथ-साथ "कजरी तीज" भी मनाई जाती है
  • मिथिलांचल में विशेष लोकगीत "कजरी गीत" गाए जाते हैं
  • पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर में सामूहिक झूला
  • विवाहिता स्त्रियाँ सास से आशीर्वाद लेकर व्रत रखती हैं
  • विशेष पकवान: ठेकुआ, खीर, मालपुआ

हरियाणा और पंजाब:

  • "तीज" के रूप में मनाया जाता है
  • गीत-संगीत और नृत्य का विशेष आयोजन
  • करनाल, कुरुक्षेत्र, अमृतसर में भव्य आयोजन

व्रत के फायदे और सावधानियां

हरियाली तीज के 6 प्रमुख फायदे:

  1. पति की दीर्घायु और सुखमय जीवन — यह व्रत पति के अकाल मृत्यु के भय से रक्षा करता है और उनकी आयु वृद्धि का कारण बनता है
  2. अखंड सुहाग की प्राप्ति — सुहाग में आने वाले सभी विघ्नों, ग्रह-दोषों, नज़र-बाधा का निवारण
  3. माँ पार्वती की विशेष कृपा — माँ गौरी की अनुकंपा से कुटुम्ब में सुख-शांति और समृद्धि
  4. संतान सुख और सन्तान की उन्नति — संतान के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना
  5. वैवाहिक जीवन में प्रेम और सद्भाव — पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, विश्वास और सामंजस्य
  6. सावन के पुण्य का लाभ — सावन मास में शिव-पार्वती की पूजा से अनंत पुण्य की प्राप्ति
  7. ज्योतिषीय लाभ — कुंडली के सप्तम भाव और शुक्र ग्रह को बल मिलता है
  8. मानसिक शांति और सात्विकता — व्रत से मन की चंचलता कम होती है, एकाग्रता बढ़ती है

महत्वपूर्ण सावधानियां:

  1. निर्जला व्रत — शास्त्रानुसार निर्जला व्रत (बिना जल) सर्वोत्तम है, परंतु गर्भवती, रोगी और वृद्ध महिलाएं एक समय फलाहार अथवा जल ग्रहण कर सकती हैं
  2. रजस्वला स्त्रियां — रजस्वला स्त्रियां इस व्रत को नहीं रखतीं; वे अगली तीज को व्रत कर सकती हैं
  3. सात्विक भोजन — व्रत के दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन का सेवन वर्जित है; केवल सात्विक भोजन करें
  4. क्रोध और असत्य का त्याग — व्रत के दिन क्रोध, ईर्ष्या, निंदा, असत्य का पूर्ण त्याग आवश्यक
  5. मेहंदी और श्रृंगार — हरियाली तीज पर मेहंदी लगाना और 16 श्रृंगार करना शुभ माना जाता है
  6. कुंडली परीक्षण — यदि कुंडली में मंगल दोष अथवा शुक्र पीड़ित है तो व्रत से पूर्व विशेषज्ञ से परामर्श लें
  7. चिकित्सकीय परामर्श — गर्भवती, मधुमेह, रक्तचाप की समस्या हो तो चिकित्सक से परामर्श लेकर ही व्रत करें
  8. झूले की सुरक्षा — झूला झूलते समय डाली की मजबूती और सुरक्षा का ध्यान रखें

ज्योतिषीय सावधानी:

  • कुंडली में सप्तम भाव और शुक्र की स्थिति का विश्लेषण कराएं
  • मंगल दोष होने पर पति के साथ संयुक्त रूप से पूजा करें
  • अशुभ योग (व्यतिपात, वैधृति) होने पर अगले दिन व्रत करें
  • कुंडली के अनुसार अतिरिक्त उपाय (मंत्र जाप, दान, रत्न) ज्योतिषी से जानें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाली तीज 2026 कब है?

24 अगस्त 2026, सोमवार को सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन। मुख्य पूजा मुहूर्त शाम 6:28 से 8:05 बजे तक (प्रदोष काल)।

क्या हरियाली तीज और हरितालिका तीज एक ही हैं?

नहीं, दोनों अलग-अलग व्रत हैं। हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया को और हरितालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। दोनों ही सुहाग व्रत हैं, परंतु हरितालिका को अधिक कठोर और पवित्र माना जाता है।

क्या अविवाहित कन्याएं भी हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं?

हाँ, अविवाहित कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं। सुहागिन महिलाओं का व्रत सर्वोत्तम फलदायी माना जाता है।

राजस्थान में हरियाली तीज कैसे मनाई जाती है?

राजस्थान में झूला झूलना, फूलों-चूड़ियों से झूला सजाना, तीज गीत गाना, हरी-लाल चुनरी पहनना, और गुड़ की पूड़ियाँ-मालपुए बनाना प्रमुख परंपराएं हैं। जयपुर-जोधपुर में सबसे भव्य आयोजन होते हैं।

क्या हरियाली तीज का व्रत निर्जला रखना जरूरी है?

शास्त्रानुसार निर्जला व्रत सर्वोत्तम है, परंतु गर्भवती, रोगी और वृद्ध महिलाएं एक समय फलाहार अथवा जल ग्रहण कर सकती हैं। स्वास्थ्य सर्वोपरि है।

सिंदूर का हरियाली तीज पर क्या विशेष महत्व है?

सिंदूर सुहाग का सर्वोच्च प्रतीक है। हरियाली तीज पर माँ पार्वती का अनुकरण करते हुए सुहागिन स्त्रियाँ मांग में सिंदूर भरती हैं — इससे पति की आयु वृद्धि और सुहाग की रक्षा होती है।

क्या मेहंदी लगाना हरियाली तीज पर अनिवार्य है?

मेहंदी सुहाग और सौंदर्य का प्रतीक है। हरियाली तीज पर मेहंदी लगाना शुभ और शास्त्रसम्मत है, परंतु अनिवार्य नहीं। यदि स्वास्थ्य कारण से मेहंदी न लगा सकें तो श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती की पूजा ही पर्याप्त है।


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[ { "question": "हरियाली तीज 2026 कब है?", "answer": "24 अगस्त 2026, सोमवार को सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन। मुख्य पूजा मुहूर्त शाम 6:28 से 8:05 बजे तक (प्रदोष काल)।" }, { "question": "क्या हरियाली तीज और हरितालिका तीज एक ही हैं?", "answer": "नहीं। हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया को और हरितालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। दोनों ही सुहाग व्रत हैं, परंतु हरितालिका को अधिक कठोर और पवित्र माना जाता है।" }, { "question": "क्या अविवाहित कन्याएं भी हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं?", "answer": "हाँ, अविवाहित कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं। सुहागिन महिलाओं का व्रत सर्वोत्तम फलदायी माना जाता है।" }, { "question": "राजस्थान में हरियाली तीज कैसे मनाई जाती है?", "answer": "राजस्थान में झूला सजाना, तीज गीत गाना, हरी-लाल चुनरी पहनना, और गुड़ की पूड़ियाँ-मालपुए बनाना प्रमुख परंपराएं हैं। जयपुर-जोधपुर-उदयपुर में सबसे भव्य आयोजन होते हैं।" }, { "question": "क्या हरियाली तीज का व्रत निर्जला रखना जरूरी है?", "answer": "शास्त्रानुसार निर्जला व्रत सर्वोत्तम है, परंतु गर्भवती, रोगी और वृद्ध महिलाएं एक समय फलाहार अथवा जल ग्रहण कर सकती हैं।" }, { "question": "सिंदूर और मेहंदी का हरियाली तीज पर क्या विशेष महत्व है?", "answer": "सिंदूर सुहाग का सर्वोच्च प्रतीक है — मांग में सिंदूर भरने से पति की आयु वृद्धि होती है। मेहंदी सौंदर्य और सुहाग का प्रतीक है — शास्त्रसम्मत है पर अनिवार्य नहीं।" } ]

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Frequently Asked Questions

हरियाली तीज 2026 कब है?+
24 अगस्त 2026, सोमवार को सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन। मुख्य पूजा मुहूर्त शाम 6:28 से 8:05 बजे तक (प्रदोष काल)।
क्या हरियाली तीज और हरितालिका तीज एक ही हैं?+
नहीं। हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया को और हरितालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। दोनों ही सुहाग व्रत हैं, परंतु हरितालिका को अधिक कठोर और पवित्र माना जाता है।
क्या अविवाहित कन्याएं भी हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं?+
हाँ, अविवाहित कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं। सुहागिन महिलाओं का व्रत सर्वोत्तम फलदायी माना जाता है।
राजस्थान में हरियाली तीज कैसे मनाई जाती है?+
राजस्थान में झूला सजाना, तीज गीत गाना, हरी-लाल चुनरी पहनना, और गुड़ की पूड़ियाँ-मालपुए बनाना प्रमुख परंपराएं हैं। जयपुर-जोधपुर-उदयपुर में सबसे भव्य आयोजन होते हैं।
क्या हरियाली तीज का व्रत निर्जला रखना जरूरी है?+
शास्त्रानुसार निर्जला व्रत सर्वोत्तम है, परंतु गर्भवती, रोगी और वृद्ध महिलाएं एक समय फलाहार अथवा जल ग्रहण कर सकती हैं।
सिंदूर और मेहंदी का हरियाली तीज पर क्या विशेष महत्व है?+
सिंदूर सुहाग का सर्वोच्च प्रतीक है — मांग में सिंदूर भरने से पति की आयु वृद्धि होती है। मेहंदी सौंदर्य और सुहाग का प्रतीक है — शास्त्रसम्मत है पर अनिवार्य नहीं।
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Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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