Daan Mahtva दान से बदलें ग्रहों की दशा | ज्योतिष अनुसार दान के चमत्कारी उपाय
Daan Mahtva दान देने से बदल सकती है ग्रहों की दशा
Daan Mahtva गुरु माँ निधि जी श्रीमाली के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में दान का विशेष महत्व बताया गया है। यह माना जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल है, तो उचित दान करके उसकी दशा को सुधारा जा सकता है। दान केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार है।
ग्रह और दान का संबंध
गुरु माँ निधि जी श्रीमाली बताते है की हर ग्रह एक विशेष धातु, रंग, अनाज और वस्त्र से जुड़ा होता है। जब किसी जातक की कुंडली में कोई ग्रह पीड़ित होता है, तो उससे संबंधित वस्तुओं का दान करना लाभदायक होता है। इससे ग्रह शांत होते हैं और शुभ फल देने लगते हैं।
ग्रहों को अनुकूल बनाता है दान
गुरु माँ निधि जी श्रीमाली के अनुसार कुंडली में जब कोई ग्रह विपरीत परिणाम दे रहा हो तो उससे सम्बंधित उपाय करने आवश्यक होते हैं। ग्रहों की अनुकूलता पाने के लिए उनसे सम्बंधी मंत्रों का जाप, उपवास, नित्य विशिष्ट पूजा के अलावा दान करना भी एक उपाय माना जाता है। वराह पुराण के अनुसार सभी दानों में अन्न व जल का दान सर्वश्रेष्ठ है। हर सक्षम व्यक्ति को सूर्य संक्रांति, सूर्य व चंद्र ग्रहण, अधिक मास व कार्तिक शुक्ल द्वादशी को अन्न व जल का दान अवश्य करना चाहिए। ज्योतिष में मूल रूप से नव ग्रहों की विभिन्न प्रकृति होती है। जैसे सौम्य व पाप ग्रह, शीतल व अग्नि तत्व वाले, वक्री और सीधी गति वाले। हर ग्रह का एक मूल स्वभाव है और उसी अनुरूप दान करना चाहिए। सूर्य देव उपवास, कथा श्रवण व नमक के परित्याग से, चंद्र भगवान शिव के मंत्रों के जाप से, मंगल ग्रह उपवास के अलावा मंत्रजाप से, तो बुध ग्रह गणपति की आराधना के साथ दान से सर्वाधिक प्रसन्न होते हैं। देव गुरु सात्विक रूप से उपवास रखने मात्र से प्रसन्न होते हैं। दैत्य गुरु शुक्र गौ सेवा और दान व कन्याओं को उपहार देने से प्रसन्न होते हैं। न्याय के देवता शनि महाराज को मनाने के लिए जप तप, उपवास व दान के अलावा शुद्ध व सात्विक जीवन शैली होनी चाहिए। छाया ग्रह राहु व केतु जाप के साथ दान से ही प्रसन्न होते हैं। इस प्रकार नौ में से पांच ग्रह है, बुध, शुक्र, शनि, राहु व केतु जो दान के बिना प्रसन्न नहीं होते। Daan Mahtva
किस ग्रह के लिए क्या दान करें:
- सूर्य (Sun): गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन, लाल वस्त्र।
लाभ: सम्मान, आत्मविश्वास और सरकारी कार्यों में सफलता। - चंद्रमा (Moon): चावल, दूध, सफेद वस्त्र, चाँदी।
लाभ: मानसिक शांति, माता का सुख और भावनात्मक संतुलन। - मंगल (Mars): मसूर की दाल, रक्तदान, लाल चंदन।
लाभ: साहस, ऊर्जा और भूमि से जुड़े कार्यों में सफलता। - बुध (Mercury): हरे वस्त्र, मूंग की दाल, पन्ना।
लाभ: बुद्धिमत्ता, संचार क्षमता और व्यापार में वृद्धि। - गुरु (Jupiter): पीली दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, किताबें।
लाभ: शिक्षा, धर्म, और संतान सुख में सुधार। - शुक्र (Venus): सफेद वस्त्र, घी, इत्र, चावल।
लाभ: सौंदर्य, प्रेम संबंध, और भोग-विलास में वृद्धि। - शनि (Saturn): काली उड़द, लोहा, तेल, काले वस्त्र।
लाभ: स्थिरता, कर्मफल, और दीर्घकालिक योजनाओं में सफलता। - राहु और केतु: नीले या भूरे वस्त्र, कंबल, नारियल।
लाभ: अचानक आने वाली समस्याओं से राहत, मानसिक संतुलन।
Daan Mahtva दान कैसे और कब करें?
सच्चे मन और निस्वार्थ भाव से दान करें। किसी भी दिखावे या लाभ की भावना से किया गया दान पूर्ण फल नहीं देता।
सूर्योदय के समय दान करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना अधिक फलदायक होता है।
स्वास्थ्य और आयु की समस्या के लिए अन्न और जल का दान करें।
रोजगार की प्राप्ति के लिए प्रकाश का दान करें (तुलसी के नीचे या मंदिर में दीपक जलाएं)।
शीघ्र विवाह के लिए सुहाग की वस्तुओं का दान करें।
मुकदमे में विजय के लिए मीठी वस्तु (मिवई) का दान करें।
संतान प्राप्ति के लिए वृक्ष लगाएं और नियमित जल दान करें (जल डालें)।
दुर्घटना से रक्षा के लिए काले तिल का दान करें।
क्या दान नहीं करें
गुरु माँ निधि जी श्रीमाली के अनुसार दान हमेशा फलदाई हो ऐसा नहीं है। शास्त्रों में भी अतिदान वर्जित माना गया है दान के कारण ही कर्ण, बलि आदि महान हुए लेकिन गलत चीज के दान करने से उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ा। गुरु माँ निधि जी श्रीमाली के अनुसार इन स्थितियों में दान नहीं करना चाहिए।
जातक की कुंडली जो ग्रह उच्च का है उससे सम्बंधित दान नहीं देना चाहिए। नीच ग्रह से सम्बंधित दान कभी लेना नहीं चाहिए।
गुरु सप्तम भाव में हो तो साधु या धर्म स्थल के पुजारी को नए कपड़ों का दान नहीं करें, इससे संतान पर बुरा असर पड़ता है।
दशम भाव में गुरु व चतुर्थ स्थान चंद्रमा से गजकेसरी योग बनने पर जातक को धर्मार्थ स्थल, मंदिर, मस्जिद आदि नहीं बनवानी चाहिए। इससे जातक पर झूठे इल्जाम लगतेहैं और सजा भी हो सकती है।
चंद्रमा छठे घर जिस जातक के कुंडली में चंद्रमा छठे घर में हो तो उसे आमजन के लिए कुआं ,तालाब के लिए दान नहीं देना चाहिए।
यदि चंद्रमा बारहवें घर में हो तो भिखारियों को नित्य भोजन ना कराएं. समचातराल में कर सकते हैं। ऐसा करने में स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है।
यदि शुक्र भाग्य भाव में हो तो ऐसे जातक को पढ़ाई के लिए छात्रवृति, पुस्तकें व दवा के लिए पैसे दान नहीं करने चाहिए (पुस्तके व दवा दी जा सकती है)।
यदि शनि अष्टम भाव में हो तो ऐसे जातक को किसी के लिए मुफ्त प्रयोगार्थ आवास का निर्माण नहीं कराना चाहिए।
शनि लग्न में व गुरु पंचम भाव में हो तो ऐसे जातकों को कभी भी ताम्बे का दान नहीं करें। ऐसे में अशुभ समाचार प्राप्त होते हैं।
हालांकि दान देने में कोई मनाही नहीं है लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखते हुए वर्जित वस्तुओं का दान करने से बचना चाहिए।
निष्कर्ष
गुरु माँ निधि जी श्रीमाली के अनुसार दान एक शक्ति है, जो न केवल हमारे आसपास की ऊर्जा को सकारात्मक बनाता है, बल्कि हमारे ग्रहों की दशा को भी सुधार सकता है। यदि आप ज्योतिषीय उपायों में विश्वास रखते हैं, तो उचित दान से आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकते हैं।
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Written by
Nidhi Shrimali
Vedic Astrologer
Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.