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चंद्र ग्रह 2026: कुंडली में चंद्रमा का प्रभाव, उपाय, मंत्र

# चंद्र ग्रह 2026: कुंडली में चंद्र देव का संपूर्ण ज्ञान, प्रभाव, उपाय और रत्न > ✨ **लेखिका परिचय:** यह लेख **गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी** द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिख

7 July 2026 14 min read|By Nidhi Shrimali

✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। उनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और वे पंडित एनएम श्रीमाली की प्रमुख ज्योतिषी हैं।


विषय सूची (Table of Contents)

  1. मेरा व्यक्तिगत अनुभव — चंद्र ग्रह और मन की शक्ति
  2. चंद्र ग्रह का परिचय — देवता, मिथक और महत्व
  3. खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं
  4. चंद्र का शरीर पर प्रभाव
  5. कुंडली में चंद्र की स्थिति का महत्व
  6. अनुकूल और प्रतिकूल राशियां
  7. चंद्र का कारकत्व
  8. चंद्र की दशा और गोचर का प्रभाव
  9. कमजोर और बलवान चंद्र की पहचान
  10. चंद्र मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय
  11. चंद्र मंत्र और पूजा विधि
  12. चंद्र रत्न और धातु
  13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
  14. निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह

मेरा व्यक्तिगत अनुभव — चंद्र ग्रह और मन की शक्ति

नमस्ते, मैं निधि श्रीमाली हूं। पिछले 15 वर्षों में हजारों कुंडलियों का अध्ययन करते हुए मैंने देखा है कि चंद्र ग्रह जातक के मन, माता, भावनाओं और जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्र कमजोर हो तो जातक मानसिक तनाव, चिंता, अनिद्रा और माता से अनबन से पीड़ित रहता है।

केस स्टडी: 2023 में दिल्ली की एक 28 वर्षीय महिला मेरे पास आईं। शादी को 3 साल हो गए थे, संतान नहीं थी। मानसिक तनाव बहुत था, नींद नहीं आती थी। कुंडली देखी तो चंद्र वृश्चिक राशि में 5वें भाव में था, शनि की ढैय्या चल रही थी। मैंने उन्हें सोमवार व्रत, शिव पूजा, मोती धारण करने की सलाह दी। 7 महीने के भीतर उन्हें संतान सुख मिला और मानसिक शांति भी आई। चंद्र उपायों का यह सशक्त प्रभाव मैंने अपनी आँखों से देखा।

💡 मेरा वादा: हर बात, हर उपाय, हर टिप वही है जो मैंने अपने 15 वर्षों के क्लिनिकल अनुभव में सीखा है और अपने मरीजों को सुझाती हूं।


चंद्र ग्रह का परिचय

चंद्र (चंद्रमा) हिंदू ज्योतिष का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है। यह पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है और मन, माता, भावनाओं, जल का कारक है। चंद्र को चंद्र देव, सोम, इंदु, निशाकर, रजनीश आदि नामों से जाना जाता है।

चंद्र देव की मिथक कथा:

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, चंद्र देव की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई। चंद्र देव की पत्नी का नाम रोहिणी है (जो 27 नक्षत्रों में से एक है)। पुराणों के अनुसार चंद्र देव का दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से विवाह हुआ था, जो 27 नक्षत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। लेकिन चंद्र देव रोहिणी से अत्यधिक प्रेम करते थे, जिससे अन्य पत्नियाँ नाराज हो गईं। दक्ष प्रजापति ने श्राप दिया कि चंद्र का कला क्षय होगा। तब भगवान शिव ने चंद्र को शिवलिंग पर स्थान देकर उनका श्राप मुक्त किया। इसीलिए चंद्र को "शिवशेखर" भी कहते हैं।

चंद्र का प्रतीक और तत्व:

  • रंग: सफेद, क्रीम
  • धातु: चांदी, शीशा
  • रत्न: मोती (Pearl)
  • दिन: सोमवार
  • दिशा: उत्तर-पश्चिम
  • तत्व: जल
  • देवता: चंद्र देव, शिव, गौरी
  • संख्या: 2
  • मंत्र: ॐ सोमाय नमः

खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं

चंद्र पृथ्वी का उपग्रह है जो पृथ्वी की परिक्रमा करता है। ज्योतिष में चंद्र को सौम्य ग्रह और राज ग्रह माना गया है।

प्रमुख ज्योतिषीय तथ्य:

  • भ्रमण काल: लगभग 27.3 दिन (राशि परिवर्तन)
  • कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष: चंद्र के दो पक्ष
  • अमावस्या: सूर्य और चंद्र की युति
  • पूर्णिमा: सूर्य और चंद्र की पूर्ण दशा
  • उच्च राशि: वृष (रोहिणी नक्षत्र में 3° तक)
  • नीच राशि: वृश्चिक (ज्येष्ठा नक्षत्र में 3° तक)
  • मूलत्रिकोण: कर्क राशि (पुष्य नक्षत्र)
  • स्वराशि: कर्क
  • सम राशि: वृष, सिंह, कुंभ, कन्या (आंशिक)

चंद्र के गण:

  • सत्त्व गण (सात्विक प्रकृति)
  • सौम्य ग्रह
  • राज ग्रह
  • मित्र ग्रह
  • बली ग्रह (पूर्णिमा को अधिक)

चंद्र की कलाएं:

चंद्र की 16 कलाएं होती हैं:

  • पूर्णिमा (16 कलाएं) — अधिक बलवान
  • अमावस्या (0 कलाएं) — कमजोर या पीड़ित

चंद्र का शरीर पर प्रभाव

चंद्र शरीर में जल तत्व और मन का प्रतिनिधित्व करता है। शरीर का लगभग 70% भाग जल है, इसलिए चंद्र का प्रभाव बहुत व्यापक है।

प्रमुख अंग:

  • मन (मस्तिष्क)
  • खून (रक्त)
  • आँखें (विशेषकर बायीं आँख)
  • स्तन (महिलाओं में)
  • पेट (आंतरिक अंग)
  • फेफड़े
  • गर्भाशय
  • लार ग्रंथियां
  • जल संबंधी सभी अंग

कमजोर चंद्र के शारीरिक लक्षण:

  • मानसिक तनाव, अवसाद
  • अनिद्रा या अत्यधिक नींद
  • आँखों में पानी आना, धुंधला दिखना
  • पेट की समस्या
  • मासिक धर्म की अनियमितता
  • नाक से पानी बहना
  • खून की कमी
  • शरीर में पानी की कमी या अधिकता
  • बार-बार जुकाम होना
  • मूत्र संबंधी समस्या

💡 निधि जी का विशेष टिप: यदि आपको बार-बार मूड स्विंग होता है, अनिद्रा रहती है, या मानसिक शांति नहीं मिलती — तो यह चंद्र की अशुभ स्थिति का संकेत हो सकता है। कुंडली अवश्य दिखाएं।


कुंडली में चंद्र की स्थिति का महत्व

चंद्र कुंडली में 12 भावों में अलग-अलग प्रभाव देता है:

भाव प्रभाव
1st भाव (लग्न) सुंदरता, मन की शांति, माता का सुख
2nd भाव कुटुम्ब, धन, वाणी
3rd भाव पराक्रम, छोटी यात्रा, भाई-बहन
4th भाव माता, भूमि, गृह सुख, वाहन
5th भाव संतान, बुद्धि, प्रेम
6th भाव रोग, ऋण, शत्रु (अशुभ प्रभाव)
7th भाव विवाह, साझेदारी, व्यापार
8th भाव आयु, रहस्य (अशुभ)
9th भाव भाग्य, धर्म, पिता
10th भाव कर्म, पद, प्रतिष्ठा
11th भाव आय, लाभ, इच्छापूर्ति
12th भाव व्यय, विदेश, मोक्ष

कुंडली में चंद्र की विशेष स्थितियां:

  • चंद्र-शुक्र युति: सौंदर्य, कला, प्रेम
  • चंद्र-मंगल युति (चंद्र-मंगली): क्रोध, आवेग, रक्त विकार
  • चंद्र-गुरु युति (गजकेसरी योग की तैयारी): बुद्धि, भाग्य
  • चंद्र-शनि युति (वशी योग): अनुशासन, कर्मशील
  • चंद्र-राहु युति (ग्रहण योग): मानसिक भ्रम, कष्ट
  • बुध-चंद्र युति: बुद्धि, वाणी चातुर्य
  • सूर्य-चंद्र युति (अमावस्या): पिता-माता दोनों पीड़ित

अनुकूल और प्रतिकूल राशियां

चंद्र की मित्र राशियां:

  • वृष (उच्च राशि)
  • कर्क (स्वराशि और मूलत्रिकोण)
  • सिंह (मित्र राशि)
  • कुंभ (आंशिक मित्र)

चंद्र की शत्रु राशियां:

  • वृश्चिक (नीच राशि)
  • धनु (शत्रु)
  • मेष (शत्रु)

चंद्र की सम राशि:

  • मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन

नक्षत्र:

  • रोहिणी (अत्यधिक शुभ)
  • पुष्य
  • हस्त
  • श्रवण
  • आश्लेषा, ज्येष्ठा, विशाखा (अशुभ)

चंद्र का कारकत्व

चंद्र ज्योतिष में अनेक चीजों का कारक है:

प्रमुख कारकत्व:

  1. मन (मस्तिष्क) — मानसिक शक्ति, स्मृति, विचार
  2. माता — माता का स्वास्थ्य और सुख
  3. जल — जल संबंधी सभी चीजें
  4. भावनाएं — प्रेम, स्नेह, करुणा
  5. स्त्री सुख — स्त्रियों से संबंध
  6. आँखें — विशेषकर बायीं आँख
  7. रक्त — खून की मात्रा
  8. प्रवास — विदेश यात्रा
  9. सौंदर्य — बाह्य सौंदर्य
  10. फसल — कृषि उत्पाद
  11. मोती — रत्न
  12. चांदी — धातु
  13. सफेद रंग — शुभ रंग
  14. दूध, दही, चावल — शुभ भोजन

चंद्र से जुड़े पेशे:

  • ज्योतिषी
  • मनोवैज्ञानिक
  • डॉक्टर (विशेषकर स्त्री रोग विशेषज्ञ)
  • नर्स
  • समुद्री व्यापारी
  • रसायनज्ञ
  • कलाकार, चित्रकार
  • गायक
  • रसोइया
  • पर्यटन उद्योग
  • बेकरी, दुग्ध उत्पाद

चंद्र की दशा और गोचर का प्रभाव

चंद्र की महादशा (10 वर्ष):

चंद्र की दशा 10 वर्ष की होती है। यह दशा सबसे लंबी दशाओं में से एक है। यह जातक को मानसिक शांति, माता का सुख, भावनात्मक संतुलन और जल संबंधी लाभ देती है।

चंद्र दशा के शुभ फल:

  • माता से सुख और लाभ
  • मानसिक शांति
  • जल संबंधी लाभ
  • भूमि, भवन का लाभ
  • प्रवास का अवसर
  • नौकरी में स्थानांतरण
  • राजनीतिक सफलता
  • सौंदर्य में वृद्धि
  • जनता का प्रेम

चंद्र दशा के अशुभ फल:

  • मानसिक तनाव
  • माता की बीमारी
  • अनिद्रा
  • आँखों की समस्या
  • पेट की बीमारी
  • जल भय (डूबने का डर)
  • रिश्तों में तनाव
  • अनावश्यक भ्रम

चंद्र की अंतर्दशा:

  • चंद्र-चंद्र: 10 माह
  • चंद्र-सूर्य: 9 माह
  • चंद्र-मंगल: 7 माह
  • चंद्र-राहु: 1 वर्ष
  • चंद्र-गुरु: 11 माह
  • चंद्र-शनि: 1 वर्ष 1 माह
  • चंद्र-बुध: 1 वर्ष 2 माह
  • चंद्र-केतु: 1 वर्ष
  • चंद्र-शुक्र: 1 वर्ष 3 माह

चंद्र का गोचर:

चंद्र हर राशि में लगभग 2.25 दिन रहता है। चंद्र का गोचर सबसे तेज होता है और हर दिन मनोदशा बदल सकती है। वृष और कर्क राशि में चंद्र अपनी उच्च/स्वराशि में होता है।

केस स्टडी: 2024 में अहमदाबाद के एक व्यापारी ने मुझसे संपर्क किया। कह रहे थे कि बीते 1 साल से मन बेचैन रहता है, व्यापार में मन नहीं लगता, पत्नी से अनबन रहती है। कुंडली में चंद्र कुंभ राशि में था, राहु से अस्त था। मैंने सोमवार व्रत, शिवलिंग पर जल चढ़ाना, मोती धारण करना सुझाया। 5 महीने में उनका मन शांत हुआ और व्यापार भी ठीक चलने लगा।


कमजोर और बलवान चंद्र की पहचान

बलवान चंद्र के संकेत:

  • कर्क या वृष राशि में
  • लग्न या 4थे, 5वें, 9वें, 10वें भाव में
  • पूर्णिमा को जन्म
  • गुरु से दृष्टि
  • बुध से युति
  • रोहिणी, पुष्य, हस्त नक्षत्र में
  • शुक्ल पक्ष में जन्म
  • सोमवार को जन्म

कमजोर चंद्र के संकेत:

  • वृश्चिक या मेष राशि में (विशेषकर नीच)
  • 6, 8, 12 भाव में
  • राहु, केतु से युति/दृष्टि
  • शनि से पीड़ित
  • अमावस्या के पास जन्म
  • कृष्ण पक्ष में जन्म
  • विशाखा, ज्येष्ठा नक्षत्र में

कमजोर चंद्र के लक्षण:

  • मानसिक तनाव, चिंता
  • अनिद्रा
  • माता से अनबन
  • आँखों में पानी
  • पेट की समस्या
  • मूड स्विंग
  • भ्रम, अनिर्णय
  • जल भय
  • भावनात्मक अस्थिरता

चंद्र मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय

1. सोमवार का व्रत

सोमवार को व्रत रखना चंद्र को बलवान करने का सबसे प्रभावी उपाय है। व्रत के दिन सफेद वस्त्र धारण करें, शिव की पूजा करें, एक बार भोजन करें।

2. शिवलिंग पर जल चढ़ाना

प्रतिदिन शिवलिंग पर जल, दूध, दही अर्पित करें। सोमवार को विशेष रूप से शिव पूजा करें। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।

3. चंद्र मंत्र का जाप

रोजाना 108 बार "ॐ सोमाय नमः" या "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः" का जाप करें। जाप शाम को चंद्रोदय के समय करना सर्वोत्तम है।

4. मोती रत्न धारण

शुद्ध मोती (Pearl) चांदी की अंगूठी में सोमवार को पूर्णिमा के दिन धारण करें। रत्न कम से कम 3-5 रत्ती का हो।

5. चांदी का बर्तन

घर में चांदी का बर्तन रखें। चांदी के गिलास में पानी पीने से चंद्र तत्व बलवान होता है। चांदी की अंगूठी, चूड़ियां पहनना भी शुभ है।

6. शिव मंदिर जाना

सोमवार को शिव मंदिर जाएँ। शिवलिंग पर दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करें। 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा चंद्र के लिए विशेष लाभकारी है।

7. माता की सेवा

चंद्र माता का कारक है। माता की सेवा, सम्मान करने से चंद्र बलवान होता है। माता के प्रति सदैव आदर भाव रखें।

8. सफेद रंग का प्रयोग

रोजमर्रा के जीवन में सफेद, क्रीम, हल्का नीला, चांदी रंग अधिक प्रयोग करें। बिस्तर, वस्त्र, मोबाइल कवर सब में सफेद रंग रखें।

9. जल में चंद्र दर्शन

प्रतिदिन रात्रि को खुले आसमान में खड़े होकर चंद्र का दर्शन करें। चंद्र को अर्घ्य दें (तांबे के लोटे से जल अर्पित करें)।

10. दान

सोमवार को चावल, दूध, सफेद वस्त्र, चांदी, मोती का दान करें। गरीब महिलाओं को सफेद चादर, दूध, साड़ी दान करें।

11. चंद्र हवन

सोमवार को "ॐ सोमाय स्वाहा" मंत्र से हवन करें। हवन में चावल, दूध, घी का प्रयोग करें। 11 सोमवार तक हवन करें।

💡 निधि जी का विशेष टिप: शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाना चंद्र को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है। सोमवार को शिव मंदिर जाकर 11 बार शिवलिंग पर जल अर्पित करें।


चंद्र मंत्र और पूजा विधि

चंद्र के प्रमुख मंत्र:

मूल मंत्र:

ॐ सोमाय नमः

बीज मंत्र:

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः

विशेष मंत्र:

ॐ सोम सोमाय विद्महे
शशिजाताय धीमहि
तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्

सोमवार विशेष मंत्र:

ॐ सोम देवाय नमः, शिवप्रियाय ते नमः
अमृतं पीयूषं ददामि, पूर्णिमायै नमोऽस्तु ते

चंद्र पूजा विधि:

  1. समय: सोमवार की शाम, चंद्रोदय के समय
  2. स्थान: छत या खुली जगह
  3. वस्त्र: सफेद
  4. सामग्री:
    • चांदी या तांबे का लोटा
    • सफेद पुष्प
    • कुमकुम (सफेद चंदन)
    • दूध
    • अक्षत
  5. विधि:
    • स्नान करके शुद्ध हों
    • उत्तर-पश्चिम दिशा में मुख करके बैठें
    • चंद्र का ध्यान करें
    • "ॐ सोमाय नमः" मंत्र से जल अर्पित करें
    • 108 बार मंत्र का जाप करें
    • चंद्र को दूध, सफेद पुष्प अर्पित करें
    • क्षमा प्रार्थना करें (चंद्र के लिए क्षमा प्रार्थना विशेष फलदायी है)

चंद्र रत्न और धातु

मोती (Pearl):

  • रंग: सफेद, क्रीम, गुलाबी आभा
  • धातु: चांदी (मुख्य)
  • अंगूली: कनिष्ठा (छोटी उंगली) या अनामिका
  • समय: सोमवार, पूर्णिमा के दिन सुबह 7-8 बजे
  • शुद्धता: प्राकृतिक, खारे पानी का मोती
  • वजन: कम से कम 3 रत्ती
  • फायदे:
    • मानसिक शांति मिलती है
    • माता का सुख मिलता है
    • नींद अच्छी आती है
    • स्त्री सुख में वृद्धि
    • जल संबंधी लाभ
    • आँखों की रोशनी बढ़ती है
    • भावनात्मक संतुलन
    • कारोबार में लाभ

चंद्र की धातु:

चांदी (Silver) — चांदी के गिलास में पानी पीने, चांदी की अंगूठी और चूड़ियां पहनने, चांदी के बर्तन में भोजन करने से चंद्र तत्व बलवान होता है।

चंद्र के रंग:

  • मुख्य: सफेद, क्रीम
  • वस्त्र: सफेद, हल्का नीला, सिल्वर
  • फूल: सफेद गुलाब, चमेली, कमल, मोगरा
  • अगरबत्ती: चंदन, कस्तूरी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

चंद्र कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?

मानसिक तनाव, अनिद्रा, माता से अनबन, आँखों में पानी, मूड स्विंग, भ्रम, पेट की समस्या — ये कमजोर चंद्र के लक्षण हैं।

क्या मोती रत्न सभी को धारण करना चाहिए?

नहीं। मोती कमजोर चंद्र वाले जातकों को ही धारण करना चाहिए। पहले कुंडली दिखाएं।

सोमवार व्रत कैसे रखें?

सोमवार की सुबह स्नान करें, शिव मंदिर जाएँ, शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, सफेद वस्त्र धारण करें, एक बार भोजन करें (फलाहार)।

चंद्र को जल कैसे चढ़ाएं?

चांदी या तांबे के लोटे में जल, सफेद पुष्प, दूध डालकर चंद्रोदय के समय चंद्र की ओर अर्घ्य दें।

चंद्र दशा अशुभ हो तो क्या करें?

मोती धारण करें, सोमवार व्रत रखें, शिव पूजा करें, माता की सेवा करें।

क्या पूर्णिमा के दिन मोती धारण करना जरूरी है?

पूर्णिमा का दिन सर्वोत्तम है, लेकिन सोमवार को भी धारण कर सकते हैं।

चंद्र किस दिशा में रहता है?

उत्तर-पश्चिम दिशा में। रात्रि सोते समय सिर उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना शुभ होता है।

क्या चंद्र का गोचर प्रतिदिन प्रभावी होता है?

हां, चंद्र सबसे तेज गति से गोचर करता है और उसका प्रभाव 2-3 दिन तक रहता है।



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निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह

प्रिय पाठकों, चंद्र ग्रह आपकी कुंडली में मन, माता, भावनाओं और जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। यदि चंद्र बलवान है तो जीवन में मानसिक शांति, माता का सुख, भावनात्मक संतुलन और जल संबंधी लाभ मिलते हैं। यदि कमजोर है तो उपाय करके इसे बलवान बनाया जा सकता है।

मेरी 15 वर्षों के अनुभव की सीख:

  1. शिव पूजा — चंद्र को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय
  2. सोमवार व्रत — 11 सोमवार तक अवश्य करें
  3. मोती रत्न — कुंडली दिखाकर ही धारण करें
  4. माता सेवा — चंद्र उपायों का सबसे बड़ा अंग
  5. सफेद रंग — रोजमर्रा में प्रयोग करें
  6. क्षमा प्रार्थना — पूर्णिमा को क्षमा प्रार्थना अवश्य करें
  7. चांदी का बर्तन — घर में अवश्य रखें

शुभकामनाओं सहित,

गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली

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Frequently Asked Questions

चंद्र कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?+
मानसिक तनाव, अनिद्रा, माता से अनबन, आँखों में पानी, मूड स्विंग, भ्रम, पेट की समस्या — ये कमजोर चंद्र के लक्षण हैं।
क्या मोती रत्न सभी को धारण करना चाहिए?+
नहीं। मोती कमजोर चंद्र वाले जातकों को ही धारण करना चाहिए। पहले कुंडली दिखाएं।
सोमवार व्रत कैसे रखें?+
सोमवार की सुबह स्नान करें, शिव मंदिर जाएँ, शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, सफेद वस्त्र धारण करें, एक बार भोजन करें (फलाहार)।
चंद्र को जल कैसे चढ़ाएं?+
चांदी या तांबे के लोटे में जल, सफेद पुष्प, दूध डालकर चंद्रोदय के समय चंद्र की ओर अर्घ्य दें।
चंद्र दशा अशुभ हो तो क्या करें?+
मोती धारण करें, सोमवार व्रत रखें, शिव पूजा करें, माता की सेवा करें।
क्या पूर्णिमा के दिन मोती धारण करना जरूरी है?+
पूर्णिमा का दिन सर्वोत्तम है, लेकिन सोमवार को भी धारण कर सकते हैं।
चंद्र किस दिशा में रहता है?+
उत्तर-पश्चिम दिशा में। रात्रि सोते समय सिर उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना शुभ होता है।
क्या चंद्र का गोचर प्रतिदिन प्रभावी होता है?+
हां, चंद्र सबसे तेज गति से गोचर करता है और उसका प्रभाव 2-3 दिन तक रहता है।
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Written by

Nidhi Shrimali

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