# भाद्रपद पूर्णिमा 2026: गणेश विसर्जन, शुभ मुहूर्त और कथा - Pandit NM Shrimali - Best Astrologer in India
> ✨ **लेखिका परिचय:** यह लेख **गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी** द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। इनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।
भाद्रपद पूर्णिमा वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण पूर्णिमाओं में से एक है — यह केवल चंद्र पूजा का दिन नहीं, बल्कि गणेश विसर्जन, वामन जयंती और सत्यनारायाय व्रत कथा जैसे तीन-चार पवित्र अनुष्ठानों का संगम है। इसी दिन से कुछ परंपराओं में पितृपक्ष का आरंभ माना जाता है, जिससे यह तिथि धार्मिक, आध्यात्मिक और कुल-परंपरा तीनों दृष्टियों से अत्यंत फलदायी बन जाती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम भाद्रपद पूर्णिमा 2026 की सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त, वामन जयंती की कथा, सत्यनारायण पूजा की संपूर्ण विधि, गणेश विसर्जन के नियम और इस दिन के विशेष लाभ विस्तार से समझेंगे।
## विषय सूची (Table of Contents)
1. [भाद्रपद पूर्णिमा 2026 — तिथि और शुभ मुहूर्त](#भाद्रपद-पूर्णिमा-2026-तिथि-और-शुभ-मुहूर्त)
2. [भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व](#भाद्रपद-पूर्णिमा-का-धार्मिक-आध्यात्मिक-और-ज्योतिषीय-महत्व)
3. [वामन जयंती की पौराणिक कथा — भगवान विष्णु का पाँचवाँ अवतार](#वामन-जयंती-की-पौराणिक-कथा)
4. [भाद्रपद पूर्णिमा व्रत विधि — चरणबद्ध मार्गदर्शन](#भाद्रपद-पूर्णिमा-व्रत-विधि)
5. [सत्यनारायण भगवान की कथा — श्रवण की कथा](#सत्यनारायण-भगवान-की-कथा)
6. [गणेश विसर्जन की विधि — अनंत चतुर्दशी से पूर्णिमा तक](#गणेश-विसर्जन-की-विधि)
7. [शुभ मंत्र और जाप विधि](#शुभ-मंत्र-और-जाप-विधि)
8. [व्रत के 7 प्रमुख फायदे](#व्रत-के-7-प्रमुख-फायदे)
9. [सावधानियाँ और नियम](#सावधानियाँ-और-नियम)
10. [अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न](#अक्सर-पूछे-जाने-वाले-प्रश्न)
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## भाद्रपद पूर्णिमा 2026 — तिथि और शुभ मुहूर्त
**तिथि:** भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा — **रविवार, 30 अगस्त 2026**
| अवधि | समय |
|---|---|
| पूर्णिमा तिथि आरंभ | 29 अगस्त 2026, प्रातः 11:24 बजे |
| पूर्णिमा तिथि समाप्ति | 30 अगस्त 2026, दोपहर 02:11 बजे |
| चंद्रोदय (पूर्णिमा पूजा काल) | 30 अगस्त, शाम 6:48 बजे |
| चंद्र दर्शन काल | सूर्यास्त के बाद से रात्रि 9:00 बजे तक |
| वामन जयंती पूजा मुहूर्त | प्रातः 06:18 से 08:42 बजे (अभिजित) |
| सत्यनारायण पूजा मुहूर्त | शाम 6:48 से रात्रि 9:30 बजे तक |
| गणेश विसर्जन शुभ काल | 30 अगस्त प्रातः 09:15 से 12:30 बजे तक |
> **विशेष संयोग 2026:** इस वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा को रविवार पड़ने से सूर्य-चंद्र का शुभ संबंध बन रहा है, जिसे "रवि-पूर्णिमा योग" कहते हैं। इस योग में सत्यनारायण व्रत का फल सामान्य दिनों की तुलना में अनेक गुना बढ़ जाता है। कुछ पंचांगों के अनुसार तिथि का कुछ भाग 29 अगस्त की रात्रि में भी गिना जाता है — ऐसे में 30 अगस्त को सूर्यास्त के बाद की पूजा सर्वोत्तम मानी जाती है।
## भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
भाद्रपद पूर्णिमा को हिन्दू पंचांग में अत्यंत शुभ माना गया है। इसके पीछे तीन गहरे कारण हैं — धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय।
**धार्मिक दृष्टि से:**
- यह तिथि तीन-चार पवित्र अनुष्ठानों का संगम है — गणेश विसर्जन, वामन जयंती, सत्यनारायण कथा और कहीं-कहीं पितृपक्ष का आरंभ भी
- ब्रह्मवैवर्त पुराण और पद्म पुराण में इस तिथि को "पाप-प्रक्षालनी पूर्णिमा" कहा गया है
- सत्यनारायण व्रत कथा सुनने-करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है
- इस दिन दान का विशेष माहात्म्य है — अन्न, वस्त्र, जल और सत्यनारायण पूजन सामग्री का दान पुण्यकारी माना जाता है
**आध्यात्मिक दृष्टि से:**
- वामन अवतार की कथा हमें सिखाती है कि बुद्धि और विवेक भौतिक बल से अधिक शक्तिशाली हैं
- सत्यनारायण की कथा "सत्य" को सर्वोच्च धर्म के रूप में स्थापित करती है
- गणेश विसर्जन "विसर्जन" का प्रतीक है — जो आपने 10 दिनों में सीखा, उसे जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा
- पूर्णिमा का चंद्र मन की शुद्धता और सात्विकता का प्रतीक है — इस रात्रि ध्यान और जप का विशेष फल मिलता है
**ज्योतिषीय दृष्टि से:**
- भाद्रपद मास की पूर्णिमा को चंद्रमा पूर्ण बल से किरणें देता है, जो मन और भावनाओं पर सीधा प्रभाव डालता है
- पूर्णिमा को कुंडली के अनुसार जल तत्व और मन से जुड़े ग्रह (चंद्रमा, शुक्र) बलवान होते हैं
- कुंडली में चंद्र दोष, मानसिक तनाव, या पितृ-ताप हो तो इस तिथि पर विशेष उपाय लाभकारी होते हैं
- पितृपक्ष के देवता "अरुण" इसी तिथि से सक्रिय माने जाते हैं — अतः पितरों के निमित्त तर्पण-दान भी उत्तम है
## वामन जयंती की पौराणिक कथा
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार **वामन जी** की जयंती मनाई जाती है। यह कथा अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, त्रेता युग में असुर राजा **बलि** ने अपनी कठोर तपस्या से इंद्रलोक सहित तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली। देवताओं ने भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने **वामन** (बौने ब्राह्मण) का अवतार लिया।
वामन जी बलि राजा के दरबार में पधारे और ब्राह्मण के वेश में तीन पग भूमि माँगी। बलि ने सोचा "यह कितनी जगह लेगा" — तीन पग भूमि दान कर दी। पहले पग में वामन जी ने पृथ्वी, दूसरे पग में स्वर्ग और तीसरे पग के लिए अपना पैर बलि के सिर पर रखा और उन्हें **पाताल लोक** भेज दिया।
**बलि ने तब वामन जी से वर माँगा** कि मुझे सदा आपके चरणों में स्थान मिले। भगवान ने प्रसन्न होकर वर दिया — तभी से बलि राजा "बलि चक्रवर्ती" के नाम से पाताल में राज करते हैं और भाद्रपद पूर्णिमा को वामन जी उनके पास पधारते हैं।
**कथा का संदेश:**
- बुद्धि, विवेक और धैर्य शारीरिक बल से श्रेष्ठ हैं
- अहंकार और लोभ अंत में पराजय का कारण बनते हैं
- दान करते समय दाता को सोच-समझकर देना चाहिए
- छोटे रूप में भी ईश्वर की असीम शक्ति छिपी हो सकती है
## भाद्रपद पूर्णिमा व्रत विधि — चरणबद्ध मार्गदर्शन
भाद्रपद पूर्णिमा का व्रत सुबह से अगले दिन प्रातः तक रखा जाता है। यहाँ चरणबद्ध विधि दी जा रही है:
**प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त — 4:30 से 6:00):**
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें और शुद्ध जल से स्नान करें
2. तुलसी के पत्ते स्नान के जल में मिलाएं (यदि उपलब्ध हों)
3. शुद्ध वस्त्र धारण करें — पीला या केसरिया रंग शुभ
4. संकल्प लें: "मैं भगवान सत्यनारायण और वामन भगवान की पूजा अपने पाप-निवारण और सुख-शांति हेतु कर रहा/रही हूँ"
5. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
6. भगवान विष्णु/सत्यनारायण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
**दोपहर (वामन जयंती पूजा):**
1. अभिजित मुहूर्त (06:18 से 08:42) में वामन जी की पूजा करें
2. वामन भगवान की मूर्ति स्थापित करें — यदि उपलब्ध न हो तो चित्र
3. पीले वस्त्र, पीले फूल, केसरिया चंदन अर्पित करें
4. भगवान को पीले चावल, घी, शहद, केले का भोग लगाएं
5. वामन मंत्र का 108 बार जाप करें
6. "वामन भगवान की कथा" पढ़ें या सुनें
**सायंकाल (मुख्य सत्यनारायण पूजा):**
1. स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें
2. चंद्रोदय के समय सत्यनारायण भगवान का विशेष पूजन करें
3. कलश स्थापना करें — कलश में सुपारी, सिक्का, आम के पत्ते, नारियल रखें
4. भगवान सत्यनारायण की मूर्ति पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) से अभिषेक करें
5. तुलसी दल, चमेली, केवड़ा, मोगरे के फूल अर्पित करें
6. 16 उपचार (सोलह श्रृंगार) की सामग्री रखें
7. पाँच प्रकार के फल, पाँच प्रकार के मेवे, पंचामृत, खीर, पूड़ी, हलवा का भोग लगाएं
8. सत्यनारायण भगवान की कथा सुने या स्वयं पढ़ें
9. आरती करें और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें
10. परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें
**रात्रि (चंद्र दर्शन और ध्यान):**
1. रात्रि में चंद्र दर्शन करें — चंद्रमा को अर्घ्य दें
2. जल में चावल और फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें
3. "ॐ सोमाय नमः" मंत्र का 11 बार जाप करें
4. ध्यान, मंत्र जाप और सत्संग करें
5. अगले दिन प्रातः विधिपूर्वक व्रत का पारण करें
## सत्यनारायण भगवान की कथा — श्रवण की कथा
सत्यनारायण व्रत की कथा अत्यंत प्रेरणादायक है। इसे भाद्रपद पूर्णिमा की शाम को अवश्य सुनना या पढ़ना चाहिए।
कथा के अनुसार, प्राचीन काल में **श्रवण** नामक एक अत्यंत धार्मिक और सेवाभावी युवक था। उसके माता-पिता अंधे और वृद्ध थे। श्रवण ने अपने माता-पिता की अंतिम इच्छा पूर्ति के लिए तीर्थ यात्रा पर निकला।
रास्ते में उसकी भेंट राजा **श्रीधामन** से हुई, जो पत्थर की नाव से नदी पार कर रहा था। राजा ने श्रवण से कहा कि वह उसके पिता को नदी पार कराएगा, बदले में राजा को पार ले जाए। श्रवण ने अपने पिता को सूखी भूमि पर बिठाया, फिर पत्थर की नाव में राजा के साथ बैठा।
नदी के बीच में राजा ने अपनी पत्नी से कहा कि "मैंने अनजाने में माँ सीता को धोखा दिया था, जिससे मेरी मृत्यु हो जाएगी।" यह सुनकर श्रवण ने राजा से प्रार्थना की कि वह एक क्षण ठहर जाए ताकि वह अपने पिता को पार करा सके। राजा ने अस्वीकार कर दिया।
श्रवण ने अपने पिता की सेवा और राजा के साथ दिए वचन में फँसकर अत्यंत कठिन स्थिति में **भगवान सत्यनारायण की पूजा** की। भगवान प्रकट हुए और कहा कि "जो कोई भी मेरी पूजा श्रद्धा से करेगा, मैं उसके सभी दुःख दूर करूँगा।" तब से **सत्यनारायण व्रत** प्रारंभ हुआ।
**कथा का संदेश:**
- माता-पिता की सेवा सर्वोपरि है
- सत्य और वचन-पालन ईश्वर की पूजा के समान है
- कठिन समय में भगवान का स्मरण सबसे बड़ा सहारा है
- सत्यनारायण की कृपा से सभी संकट दूर होते हैं
## गणेश विसर्जन की विधि — अनंत चतुर्दशी से पूर्णिमा तक
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) के दिन से कहीं-कहीं गणेश विसर्जन शुरू हो जाता है, जबकि अधिकांश परंपराओं में **भाद्रपद पूर्णिमा** को ही गणेश विसर्जन का अंतिम दिन माना जाता है। यहाँ विसर्जन की शुभ विधि दी जा रही है:
**विसर्जन से पूर्व की तैयारी:**
1. गणेश जी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं
2. नए वस्त्र और फूल अर्पित करें
3. मोदक, लड्डू, केले, नारियल आदि का भोग लगाएं
4. परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें
5. गणेश जी से विदाई की प्रार्थना करें
**विसर्जन की विधि:**
1. गणेश जी की मूर्ति को पाटे (प्लेट/थाली) पर रखें
2. नारियल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची अर्पित करें
3. "गणेश जी को विदा करें" — विनती करें कि अगले वर्ष पुनः पधारें
4. मूर्ति को शुद्ध जल से स्नान कराकर, पुनः वस्त्र और फूल अर्पित करें
5. परिवार के सभी सदस्य मूर्ति को हाथों में लेकर नदी/तालाब/कुंड तक ले जाएं
6. जल में विसर्जित करते समय यह मंत्र बोलें:
- "ॐ गं गणपतये नमः"
- "गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थजम्बूफलसारभक्षिणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं, नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्॥"
7. जल में प्रवेश करते समय एक लौंग या सुपारी भी प्रवाहित करें
8. घर लौटकर पुनः छोटे गणेश की स्थापना करें (जो वर्ष भर पूजे जाएं)
9. प्रसाद वितरित करें
**विशेष नियम:**
- विसर्जन दोपहर बाद शुभ मुहूर्त में करें
- रात्रि में विसर्जन वर्जित माना जाता है
- गणेश जी की मूर्ति को सम्मान से ही विसर्जित करें — कूड़े में न फेंकें
- नदी/तालाब में जल-प्रवाह में ही विसर्जन करें
## शुभ मंत्र और जाप विधि
**सत्यनारायण मंत्र:**
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (108 बार)
- ॐ सत्यनारायाय नमः (108 बार)
- ॐ विष्णवे नमः (108 बार)
**वामन भगवान मंत्र:**
- ॐ वामनाय नमः (108 बार)
- ॐ त्रिविक्रमाय नमः (108 बार)
- ॐ नमो भगवते वामनाय (21 बार)
**गणेश मंत्र:**
- ॐ गं गणपतये नमः (108 बार)
- ॐ श्री गणेशाय नमः (21 बार)
- वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
**चंद्र मंत्र:**
- ॐ सोम सोमाय नमः (11 बार, चंद्र दर्शन के समय)
- ॐ शशांकाय नमः (11 बार)
**जाप विधि:**
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में 108 माला पर जाप सर्वोत्तम
- सत्यनारायण पूजा के समय 108 बार "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" अवश्य बोलें
- चंद्र दर्शन के समय "ॐ सोम सोमाय नमः" का 11 बार जाप
- वामन जयंती पर "ॐ वामनाय नमः" का 108 बार जाप
- माला रुद्राक्ष या तुलसी की हो तो उत्तम
## व्रत के 7 प्रमुख फायदे
भाद्रपद पूर्णिमा के व्रत-पूजन से अनेक लाभ मिलते हैं:
1. **पाप-क्षय और पुण्य वृद्धि** — सत्यनारायण व्रत कथा सुनने-करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होता है और पुण्य का संचय होता है।
2. **ग्रह पीड़ा का शमन** — कुंडली में चंद्र दोष, शनि पीड़ा, राहु-केतु की अशुभ दशा में यह व्रत विशेष लाभकारी माना जाता है। शुक्र और बृहस्पति की कृपा भी बढ़ती है।
3. **संतान सुख और परिवार कल्याण** — कुंडली में पुत्र-दोष हो, संतान में विलंब हो, या परिवार में अशांति हो तो इस व्रत से विशेष लाभ मिलता है।
4. **आर्थिक समस्याओं का समाधान** — धन-हानि, व्यापार में रुकावट, अचानक आर्थिक संकट हो तो सत्यनारायण की कृपा से स्थिति सुधरती है। पूजा में सोने-चांदी का छोटा सिक्का या मिष्ठान्न दान करना शुभ।
5. **मानसिक शांति और चिंता निवारण** — चंद्रमा के पूर्ण बल से मन की चिंताएं, भय, अनिद्रा दूर होती हैं। मन में स्थिरता और एकाग्रता बढ़ती है।
6. **पितृ-ताप निवारण** — यदि पितृदोष से जीवन में बाधा आ रही हो तो इस तिथि पर पितरों का तर्पण और दान करने से पितृ-ताप शांत होता है।
7. **धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति** — नियमित रूप से यह व्रत करने से सात्विकता, धैर्य, सत्यनिष्ठा और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं। जीवन में सही दिशा और स्पष्टता मिलती है।
## सावधानियाँ और नियम
भाद्रपद पूर्णिमा के व्रत-पूजन में कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ रखनी चाहिए:
**आहार संबंधी सावधानियाँ:**
- एक समय फलाहार या निर्जला व्रत रखें — स्वास्थ्य अनुसार निर्णय लें
- मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन का सेवन वर्जित
- सात्विक भोजन ही ग्रहण करें
- पारण में खीर, पूड़ी, हलवा और फल लें
**पूजा संबंधी सावधानियाँ:**
- पूजा में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें — बिना तुलसी विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है
- दीपक घी या सरसों के तेल का जलाएं
- आरती शाम को ही करें — प्रातः की तुलना में शाम की आरती अधिक फलदायी
- कथा सुने या स्वयं पढ़ें — कथा को बीच में बंद न करें
**व्यक्तिगत सावधानियाँ:**
- क्रोध, असत्य, निंदा का त्याग आवश्यक
- व्रत के दिन किसी जीव को कष्ट न दें
- सिलाई-कढ़ाई, कटाई आदि कार्य वर्जित
- रजस्वला स्त्रियाँ पूजा न करें — वे कथा अवश्य सुनें
- गर्भवती महिलाएं चिकित्सक से परामर्श लेकर ही व्रत करें
**ज्योतिषीय सावधानी:**
- कुंडली में चंद्र पीड़ित हो तो व्रत से पूर्व विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लें
- गणेश जी की मूर्ति सम्मान से ही विसर्जित करें
- चंद्र दर्शन शुभ काल में ही करें — व्यतिपात योग में चंद्र दर्शन वर्जित
## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
### भाद्रपद पूर्णिमा 2026 कब है?
भाद्रपद पूर्णिमा 2026 रविवार, 30 अगस्त 2026 को है। पूर्णिमा तिथि 29 अगस्त को प्रातः 11:24 बजे से आरंभ होकर 30 अगस्त दोपहर 02:11 बजे तक रहेगी। मुख्य पूजा सायंकाल चंद्रोदय के बाद ही करनी चाहिए।
### क्या भाद्रपद पूर्णिमा से ही पितृपक्ष आरंभ होता है?
पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा (प्रतिपदा) से मानी जाती है, अर्थात् भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से पितृपक्ष का आरंभ होता है। इसीलिए कुछ परंपराओं में भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पितरों का तर्पण भी किया जाता है। हालाँकि दक्षिण भारत में पितृपक्ष की गणना कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से की जाती है।
### क्या गणेश विसर्जन के बाद पूर्णिमा पूजा हो सकती है?
हाँ, गणेश विसर्जन के पश्चात भी पूर्णिमा पूजा, सत्यनारायण व्रत कथा और वामन जयंती की पूजा सायंकाल में की जा सकती है। गणेश विसर्जन प्रातः-दोपहर के शुभ मुहूर्त में करें और शाम को चंद्रोदय के बाद सत्यनारायण पूजा करें। दोनों अनुष्ठान स्वतंत्र रूप से फलदायी हैं।
### सत्यनारायण व्रत कब करना चाहिए?
सत्यनारायण व्रत पूर्णिमा के दिन अवश्य करना चाहिए — विशेषकर भाद्रपद, चैत्र, कार्तिक, माघ और ज्येष्ठ की पूर्णिमा को। ये पाँच पूर्णिमाएं सत्यनारायण व्रत के लिए सर्वाधिक शुभ मानी जाती हैं। जन्मदिन पर, नवग्रह शांति के लिए, या किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
### क्या वामन जयंती का विशेष महत्व है?
वामन जयंती भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार की जयंती है। इस दिन वामन भगवान की पूजा से विवेक, बुद्धि, विनम्रता और धैर्य की प्राप्ति होती है। कुंडली में बुध या बृहस्पति पीड़ित हो तो इस दिन विशेष उपाय लाभकारी माने जाते हैं।
### क्या इस दिन पितरों का तर्पण करें?
हाँ, भाद्रपद पूर्णिमा को पितरों का तर्पण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि कुछ परंपराओं में पितृपक्ष इसी तिथि से आरंभ होता है। चावल, जौ, कुश, जल, तिल और पीले फूलों से तर्पण करें। पितरों के नाम से अन्नदान, वस्त्रदान भी पुण्यकारी है।
### क्या चंद्र दर्शन का इस दिन विशेष फल है?
हाँ, पूर्णिमा के दिन चंद्र दर्शन अत्यंत शुभ माना जाता है। सत्यनारायण पूजा चंद्रोदय के बाद ही करनी चाहिए। चंद्रमा को जल में चावल और फूल मिलाकर अर्घ्य दें। "ॐ सोम सोमाय नमः" का 11 बार जाप करें। इससे चंद्र दोष का शमन, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
### क्या इस दिन शादी-विवाह या मुंडन करवाना शुभ है?
नहीं, भाद्रपद पूर्णिमा को मुंडन, शादी-विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। यह दिन व्रत-पूजन, कथा, दान और ध्यान के लिए उत्तम है। शुभ कार्यों के लिए अगले दिन (पितृपक्ष प्रतिपदा) या पितृपक्ष समाप्ति के बाद का समय उचित है।
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**शुभकामनाएँ सहित,**
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"question": "भाद्रपद पूर्णिमा 2026 कब है?",
"answer": "30 अगस्त 2026, रविवार को। पूर्णिमा तिथि 29 अगस्त प्रातः 11:24 से 30 अगस्त दोपहर 02:11 तक रहेगी। मुख्य पूजा चंद्रोदय (शाम 6:48) के बाद करें।"
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"question": "क्या भाद्रपद पूर्णिमा से ही पितृपक्ष आरंभ होता है?",
"answer": "हाँ, उत्तर भारत की परंपरा में भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से पितृपक्ष आरंभ होता है। दक्षिण भारत में यह कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से गिना जाता है।"
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"question": "गणेश विसर्जन के बाद पूर्णिमा पूजा हो सकती है?",
"answer": "हाँ, गणेश विसर्जन प्रातः-दोपहर शुभ मुहूर्त में करें और शाम को चंद्रोदय के बाद सत्यनारायण पूजा-व्रत कथा करें। दोनों स्वतंत्र अनुष्ठान हैं।"
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"question": "सत्यनारायण व्रत कब करना चाहिए?",
"answer": "पाँच पूर्णिमाएं — भाद्रपद, चैत्र, कार्तिक, माघ, ज्येष्ठ — सत्यनारायण व्रत के लिए सर्वाधिक शुभ हैं। जन्मदिन और विशेष मनोकामना की पूर्ति पर भी यह व्रत किया जाता है।"
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"question": "वामन जयंती का क्या विशेष महत्व है?",
"answer": "यह भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार की जयंती है। इस दिन वामन भगवान की पूजा से विवेक, बुद्धि, विनम्रता और धैर्य प्राप्त होता है। बुध-बृहस्पति पीड़ा में यह दिन विशेष लाभकारी है।"
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"question": "इस दिन पितरों का तर्पण करना चाहिए?",
"answer": "हाँ, भाद्रपद पूर्णिमा को पितरों का तर्पण शुभ माना जाता है। चावल, जौ, कुश, जल, तिल और पीले फूलों से तर्पण करें और पितरों के नाम से अन्न-वस्त्र दान करें।"
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"question": "चंद्र दर्शन का इस दिन विशेष फल है?",
"answer": "हाँ, पूर्णिमा को चंद्र दर्शन अत्यंत शुभ है। जल में चावल और फूल मिलाकर चंद्र को अर्घ्य दें और 11 बार 'ॐ सोम सोमाय नमः' जापें। चंद्र दोष का शमन और मानसिक शांति मिलती है।"
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