# अक्षय तृतीया 2025: 30 अप्रैल की तिथि, मुहूर्त, शुभ कार्य और पूजा विधि - Pandit NM Shrimali - Best Astrologer in India
> ✨ **लेखिका परिचय:** यह लेख **गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी** द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। इनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और पंडित NM श्रीमाली की मुख्य ज्योतिषी हैं।
वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पूरे भारत में "अक्षय तृतीया" के रूप में मनाया जाता है — यह उस दिन है जिसका फल कभी क्षीण नहीं होता। 30 अप्रैल 2025, बुधवार के दिन यह पावन पर्व आ रहा है, जब रोहिणी नक्षत्र और सिद्ध योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम अक्षय तृतीया 2025 और 2026 दोनों वर्षों की तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक-आध्यात्मिक-ज्योतिषीय महत्व, पौराणिक कथा, छह शुभ कार्य, पूजा विधि, मंत्र, लाभ, सावधानियां और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
## विषय सूची (Table of Contents)
1. [अक्षय तृतीया क्या है — परिचय और "अक्षय" का अर्थ](#अक्षय-तृतीया-क्या-है)
2. [अक्षय तृतीया 2025 और 2026 — तिथि और शुभ मुहूर्त](#अक्षय-तृतीया-2025-और-2026)
3. [अक्षय तृतीया का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व](#अक्षय-तृतीया-का-महत्व)
4. [अक्षय तृतीया की पौराणिक कथाएं](#अक्षय-तृतीया-की-पौराणिक-कथाएं)
5. [अक्षय तृतीया के छह शुभ कार्य](#छह-शुभ-कार्य)
6. [अक्षय तृतीया की संपूर्ण पूजा विधि](#पूजा-विधि)
7. [अक्षय तृतीया के शुभ मंत्र](#शुभ-मंत्र)
8. [अक्षय तृतीया के लाभ और सावधानियां](#लाभ-और-सावधानियां)
9. [अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न](#अक्सर-पूछे-जाने-वाले-प्रश्न)
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## अक्षय तृतीया क्या है — परिचय और "अक्षय" का अर्थ
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक मास में शुक्ल पक्ष (चंद्रमा की बढ़ती हुई कलाओं) और कृष्ण पक्ष (घटती कलाओं) के दौरान तृतीया तिथि आती है — लेकिन **वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया** को एक विशेष दर्जा प्राप्त है। इसे "अक्षय तृतीया" कहा जाता है।
शब्द "अक्षय" संस्कृत के "क्षय" (नाश, ह्रास) में "अ" (निषेध) लगाकर बना है — अर्थात **"जिसका कभी क्षय न हो"**। "तृतीया" का अर्थ है चंद्रमा के कलात्मक चक्र की तीसरी तिथि। जब ये दोनों मिलते हैं तब "अक्षय तृतीया" बनता है — एक ऐसा दिन जिसमें किया गया कोई भी शुभ कार्य, दान, जप या पुण्य कर्म क्षीण नहीं होता, बल्कि उसका फल अनंत गुना बढ़ जाता है।
वैदिक साहित्य में इसे "श्रवण का दिन", "अमृत सिद्धि का दिन" और "चिरंजीवी कर्म का दिन" भी कहा गया है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अपना छठा अवतार परशुराम के रूप में लिया, त्रेता युग का आरंभ हुआ, महाभारत का ग्रंथ लेखन आरंभ हुआ और गणेश जी ने महाभारत को लिपिबद्ध किया। यही कारण है कि वैदिक ज्योतिष में इसे **"सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त"** माना जाता है — ऐसा संयोग वर्ष में केवल एक बार ही बनता है।
## अक्षय तृतीया 2025 और 2026 — तिथि और शुभ मुहूर्त
| विवरण | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| तिथि | 30 अप्रैल 2025, बुधवार | 19 अप्रैल 2026, रविवार |
| तृतीया तिथि आरंभ | 29 अप्रैल, प्रातः 5:38 बजे | 18 अप्रैल, अपराह्न 1:21 बजे |
| तृतीया तिथि समाप्ति | 30 अप्रैल, प्रातः 7:13 बजे | 19 अप्रैल, दोपहर 3:11 बजे |
| रोहिणी नक्षत्र | 30 अप्रैल, प्रातः 6:23 से रात्रि 9:00 तक | 19 अप्रैल, प्रातः 5:40 से रात्रि 8:15 तक |
| पूजा शुभ मुहूर्त | प्रातः 6:23 से 9:30 बजे तक | प्रातः 5:40 से 8:00 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 11:51 से 12:39 बजे तक | दोपहर 11:45 से 12:33 बजे तक |
> **ज्योतिषीय नोट:** 2025 में रोहिणी नक्षत्र के साथ सिद्ध योग का संयोग प्रातःकाल बन रहा है, इसलिए सोने की खरीदारी, नया कारोबार, भूमि-भवन का लेन-देन और मुंडन जैसे शुभ कार्य प्रातः 6:30 से 9:30 के बीच करना सर्वोत्तम रहेगा।
**विशेष संयोग 2025:** इस वर्ष अक्षय तृतीया पर तृतीया तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों ही बुधवार को पड़ रहे हैं — अर्थात बुध ग्रह की कृपा भी इस दिन विशेष रूप से प्राप्त होगी। बुध व्यापार, बुद्धि, संवाद और धन का कारक है — इसलिए नया व्यापार शुरू करने वालों के लिए यह दिन दुर्लभ अवसर है।
## अक्षय तृतीया का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
**धार्मिक दृष्टि से:**
- इस दिन किया गया दान, जप, तप और शुभ कार्य अक्षय हो जाता है — कभी क्षीण नहीं होता
- वैशाख मास में भगवान विष्णु विशेष रूप से सत्य लोक में विराजमान रहते हैं
- मोक्ष की प्राप्ति के इच्छुक साधक इस दिन व्रत, जप और दान को अत्यंत फलदायी मानते हैं
- तीर्थ स्थानों पर स्नान का विशेष महत्व — विशेषकर गंगा, यमुना, गोदावरी, कावेरी और नर्मदा में
- भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की उपासना का सर्वोत्तम दिन
**आध्यात्मिक दृष्टि से:**
- "अक्षय" शब्द साधक को अनित्यता के बंधन से मुक्ति का संदेश देता है
- इस दिन किया गया आत्म-चिंतन, मंत्र-जाप और ध्यान चित्त की अनंत शुद्धि का कारण बनता है
- कुबेर के ध्यान से धन-समृद्धि के साथ-साथ अहंकार का क्षय होता है
- मोह-माया से विरक्ति और ईश्वर-भक्ति में अनुरक्ति बढ़ती है
- सात्विक आहार-विहार से सात्विकता का विकास
**ज्योतिषीय दृष्टि से:**
- तृतीया तिथि तेज, साहस और पराक्रम की कारक है
- रोहिणी नक्षत्र चंद्रमा का स्वयं का नक्षत्र है — कृषि, सौंदर्य, प्रेम, कला और समृद्धि का प्रतीक
- वैशाख मास सूर्य की उच्च राशि मेष में संक्रमण काल है — जातकों में ऊर्जा और उत्साह का संचार
- इस वर्ष सिद्ध योग और रोहिणी का संयोग मिलकर **"सर्वार्थ सिद्धि योग"** बना रहा है
- ज्योतिष शास्त्र में इसे "अभिजित मुहूर्त" जैसा ही पुण्य काल माना गया है
## अक्षय तृतीया की पौराणिक कथाएं
**कथा 1 — त्रेता युग का आरंभ:**
पौराणिक मान्यता के अनुसार, सतयुग के अंतिम काल में पृथ्वी पर अधर्म बढ़ने लगा था। तब भगवान विष्णु ने त्रेता युग का सूत्रपात किया और **वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन** त्रेता युग का शुभारंभ हुआ। इसी दिन से सत्य, धर्म, त्याग और तप की नई धारा प्रवाहित हुई। इसीलिए कहा जाता है कि अक्षय तृतीया को किया गया कोई भी शुभ कार्य तीनों लोकों में अक्षय फल देता है।
**कथा 2 — परशुराम अवतार:**
भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म **वैशाख शुक्ल तृतीया** को प्रातःकाल रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। परशुराम ने अपने कुल में क्षत्रियों के अत्याचारों को देखकर 21 बार पृथ्वी को क्षत्रियों से रहित किया। उनका जन्म ही इस बात का प्रमाण है कि यह दिन कर्म, साहस और धर्म की स्थापना का दिन है।
**कथा 3 — गणेश जी और महाभारत:**
महाभारत के युद्ध के बाद जब श्रीकृष्ण ने व्यास जी से इस इतिहास को लिखवाने का विचार किया, तब गणेश जी ने **अक्षय तृतीया** के दिन ही महाभारत का लेखन आरंभ किया। माना जाता है कि गणेश जी ने बिना रुके, बिना विराम के लिखा — और उनकी लेखनी टूट जाने पर भी उन्होंने अपने दांत का उपयोग किया। यह कथा इस दिन की **बुद्धि, स्मृति और विद्या** की शक्ति को प्रमाणित करती है।
**कथा 4 — कुबेर को धन का अधिपति:**
शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने कुबेर को **"यक्षराज"** और धन का अधिपति नियुक्त किया। लंका के स्वामी कुबेर को नौ निधियां प्राप्त हुईं। तभी से अक्षय तृतीया को धन-संबंधी शुभ कार्यों — सोना खरीदना, नया व्यापार शुरू करना, भूमि-भवन का सौदा — के लिए सर्वोत्तम दिन माना जाता है।
**कथा 5 — देवी अन्नपूर्णा का प्राकट्य:**
शक्ति परंपरा के अनुसार, इसी दिन काशी में माँ अन्नपूर्णा ने अन्न, धन और समृद्धि के रूप में प्रकट होकर भूख से पीड़ित मनुष्यों को भोजन प्रदान किया। इसलिए भोजन-दान और अन्नदान को भी इस दिन अत्यंत पुण्यकारक माना जाता है।
## अक्षय तृतीया के छह शुभ कार्य
**1. सोना खरीदना:**
अक्षय तृतीया को सोने की खरीदारी सर्वाधिक शुभ मानी जाती है। सोना माँ लक्ष्मी का प्रतीक है — इसलिए इस दिन खरीदा गया सोना घर में स्थायी लक्ष्मी की स्थापना का कारण बनता है। शुभ मुहूर्त में कम से कम एक छोटी सोने की वस्तु — सिक्का, अंगूठी, चूड़ी, हार, या बिस्किट — अवश्य खरीदें। 2025 में प्रातः 6:30 से 9:30 के बीच खरीदारी करना सर्वोत्तम रहेगा।
**2. नया व्यापार / कारोबार शुरू करना:**
इस दिन नया व्यापार, नई दुकान का शुभारंभ, नई कंपनी का रजिस्ट्रेशन, या नई नौकरी ज्वाइन करना अत्यंत शुभ फल देता है। रोहिणी नक्षत्र की कृपा से व्यापार में स्थिरता, ग्राहकों की वृद्धि और लाभ में निरंतरता आती है। 2025 में बुधवार के दिन पड़ने के कारण बुध-संबंधित कार्य — लेखन, संचार, व्यापार, लेखांकन — विशेष रूप से फलीभूत होंगे।
**3. भूमि और मकान खरीदना:**
अक्षय तृतीया को भूमि, भवन, फ्लैट, दुकान या प्लॉट की खरीदारी-बिक्री शुभ मानी जाती है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई संपत्ति कई पीढ़ियों तक सुख-शांति प्रदान करती है। रजिस्ट्री, मुहूर्त-नक्षत्र और वास्तु-पूजन अवश्य करवाएं।
**4. विवाह:**
यदि मुंहूर्त के अनुसार विवाह की तिथि निश्चित न हो पाई हो, तो अक्षय तृतीया को विवाह करना शुभ माना जाता है। विशेषकर वे जोड़े जिनकी कुंडली में विवाह में बार-बार विलंब हो रहा हो, उनके लिए यह दिन पुनः प्रयास का अवसर है। विवाह में **सिद्ध योग** का विशेष प्रभाव पड़ता है।
**5. मुंडन / चूडाकर्म संस्कार:**
बालक का मुंडन संस्कार (छठा संस्कार) अक्षय तृतीया को करवाना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र में मुंडन करवाने से बालक के प्रथम बालों के साथ-साथ उसके पूर्व जन्म के दोष भी कट जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि मुंडन के बाद बालक का नवीन जीवन आरंभ होता है।
**6. दान:**
अक्षय तृतीया को किया गया दान कई गुना फल देता है। विशेष रूप से निम्न दान शुभ माने जाते हैं — अन्नदान (भोजन), वस्त्रदान, स्वर्णदान, तिल-गुड़ का दान, गाय को हरा चारा, जरूरतमंदों को धन, मंदिर में दीपक और पूजा सामग्री का दान। दान करते समय "ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः" का उच्चारण करें।
## अक्षय तृतीया की संपूर्ण पूजा विधि
अक्षय तृतीया की पूजा प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में आरंभ करना सर्वोत्तम है। यहां चरणबद्ध विधि दी जा रही है:
**चरण 1 — स्नान और शुद्धि (प्रातः 5:00 - 6:00 बजे):**
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें और गंगाजल या नीम के पानी से स्नान करें
- शुद्ध पीले, केसरिया या सफेद वस्त्र धारण करें
- तिलक, रोली और चंदन लगाएं
- मंत्र: "ॐ अक्षय तृतीयो विष्णुः, मम पुण्यं चिरंजीविनम्। धन-धान्यं समृद्धिं च, देहि मे भगवान् विष्णुः॥"
**चरण 2 — पूजा स्थल की सज्जा (6:00 - 6:30 बजे):**
- पूजा स्थल पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं
- भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
- कुबेर जी की तस्वीर या मूर्ति भी स्थापित करें
- कलश स्थापना करें — कलश में सुपारी, सिक्का, आम के पत्ते और सात मुंगे रखें
- अक्षत (चावल), पान के पत्ते, फूल, अगरबत्ती और दीपक सजाएं
**चरण 3 — संकल्प (6:30 बजे):**
- कलश पर हाथ रखकर संकल्प लें
- संकल्प वाक्य: "मैं [अपना नाम] अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान विष्णु, माँ लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा करता/करती हूँ। मुझे धन, सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति हो।"
**चरण 4 — षोडशोपचार पूजा (6:30 - 7:30 बजे):**
1. **आवाहन** — भगवान विष्णु का आह्वान
2. **आसन** — पद्मासन या सिंहासन देना
3. **पाद्य** — चरणों में जल अर्पित करना
4. **अर्घ्य** — हाथों में जल अर्पित करना
5. **आचमन** — मुख शुद्धि के लिए जल
6. **स्नान** — पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) से स्नान कराना
7. **वस्त्र** — पीला या केसरिया वस्त्र अर्पित करना
8. **सौभाग्य सूत्र** — कलावा (मौली) बांधना
9. **चंदन** — चंदन का तिलक लगाना
10. **अक्षत** — चावल अर्पित करना
11. **पुष्प** — पीले फूल, माला अर्पित करना
12. **धूप** — अगरबत्ती और धूपबत्ती
13. **दीप** — घी का दीपक
14. **नैवेद्य** — पंजामृत, मेवे, फल, खीर
15. **आचमन** — पुनः जल
16. **पुष्पांजलि** — फूल अर्पित कर समापन
**चरण 5 — मंत्र जाप (7:30 - 8:30 बजे):**
- 108 बार "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें
- 108 बार "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का जाप करें
- 108 बार "ॐ ह्रीं श्रीं कुबेराय नमः" का जाप करें
- 21 बार अक्षय तृतीया स्तोत्र का पाठ करें
**चरण 6 — दान और विसर्जन (8:30 - 9:30 बजे):**
- तिल, गुड़, सफेद वस्त्र, अन्न और सोने-चांदी का दान करें
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं
- गरीबों को दान दें
- गाय को हरा चारा खिलाएं
- मंदिर में दीपक दान करें
## अक्षय तृतीया के शुभ मंत्र
**विष्णु मंत्र:**
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (विष्णु का षोडशाक्षर मंत्र — सर्वोत्तम)
- ॐ नमो नारायणाय (विष्णु का अष्टाक्षर मंत्र)
- ॐ विष्णवे नमः
**लक्ष्मी मंत्र:**
- ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः (सबसे प्रचलित लक्ष्मी मंत्र)
- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं स्वाहा
- ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः
**कुबेर मंत्र:**
- ॐ ह्रीं श्रीं कुबेराय नमः (धन प्राप्ति हेतु)
- ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य पतये नमः
**अक्षय तृतीया विशेष मंत्र:**
- "ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अक्षय फल प्रदायिनी नमः"
- "ॐ अक्षय तृतीया देव्यै नमः"
**जाप विधि:**
- प्रत्येक मंत्र का **108 माला** पर कम से कम **11 बार** जाप करें
- यदि संभव हो तो 21 बार या 108 बार जाप करना श्रेष्ठ है
- माला रुद्राक्ष या तुलसी की हो तो अधिक फलदायी
- जाप के समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
- सात्विक भोजन करें और मन में भगवान विष्णु का ध्यान रखें
## अक्षय तृतीया के लाभ और सावधानियां
**आठ प्रमुख लाभ:**
1. **धन-समृद्धि की प्राप्ति** — माँ लक्ष्मी और कुबेर की कृपा से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है
2. **व्यापार में वृद्धि** — नया व्यापार शुरू करने वालों के लिए अक्षय फलदायी कार्यारंभ
3. **पुण्य का अक्षय भंडार** — इस दिन किया गया दान, जप, तप कभी क्षीण नहीं होता
4. **संतान और परिवार का सुख** — मुंडन संस्कार से बालक के दोषों का निवारण
5. **वैवाहिक जीवन में सुख** — इस दिन विवाह करने से दाम्पत्य जीवन सुखमय रहता है
6. **रोगों से मुक्ति** — भगवान धन्वंतरि की कृपा से स्वास्थ्य लाभ
7. **मोक्ष की ओर अग्रसर** — आध्यात्मिक साधना से आत्मा का उत्थान
8. **पूर्वजों की कृपा** — पितृ-तर्पण से पूर्वज प्रसन्न होते हैं
**पांच सावधानियां:**
1. **रोहिणी नक्षत्र का ध्यान रखें** — सोने की खरीदारी, मुंडन और विवाह जैसे शुभ कार्य रोहिणी नक्षत्र के दौरान ही करें। रोहिणी समाप्ति के बाद ये कार्य न करें।
2. **तामसिक भोजन से बचें** — इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन का सेवन वर्जित है। सात्विक भोजन (दूध, घी, फल, मेवे) ही ग्रहण करें।
3. **चांदी की खरीदारी शुभ नहीं** — अक्षय तृतीया को सोने की खरीदारी शुभ है, लेकिन चांदी की खरीदारी का निषेध माना जाता है। चांदी के आभूषण पहनना भी इस दिन वर्जित माना जाता है।
4. **बाल-नाखून न काटें** — इस दिन बाल या नाखून काटना अशुभ माना जाता है।
5. **दान में कंजूसी न करें** — जो व्यक्ति इस दिन दान करने में कंजूसी करता है, उसे वर्षभर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। श्रद्धापूर्वक अपनी क्षमता के अनुसार दान अवश्य करें।
## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
### अक्षय तृतीया 2025 कब है?
अक्षय तृतीया 2025, 30 अप्रैल बुधवार को है। तृतीया तिथि 29 अप्रैल प्रातः 5:38 से 30 अप्रैल प्रातः 7:13 तक है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र 30 अप्रैल प्रातः 6:23 से रात्रि 9:00 तक रहेगा। इसलिए शुभ कार्य 30 अप्रैल प्रातः 6:30 से 9:30 बजे के बीच करना सर्वोत्तम है।
### क्या सोने की जगह चांदी की खरीदारी शुभ है?
शास्त्रानुसार, अक्षय तृतीया को सोने की ही खरीदारी शुभ मानी जाती है। चांदी की खरीदारी इस दिन वर्जित मानी जाती है। यदि बजट की कमी हो तो छोटी मात्रा में सोने का सिक्का या आभूषण अवश्य खरीदें — यह अक्षय फल देता है।
### रोहिणी नक्षत्र न हो तो क्या करें?
कुछ वर्षों में अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र नहीं होता। ऐसी स्थिति में सोने की खरीदारी शुभ नहीं मानी जाती। ऐसे वर्षों में सोने की खरीदारी अगले दिन या रोहिणी नक्षत्र वाले दिन करना उचित है। अन्य शुभ कार्य — दान, जप, पूजा — तृतीया तिथि में ही किए जा सकते हैं।
### क्या रात्रि में अक्षय तृतीया के शुभ कार्य कर सकते हैं?
शुभ कार्य — विशेषकर सोने की खरीदारी, विवाह, मुंडन, नया व्यापार — प्रातःकाल रोहिणी नक्षत्र में ही करना शास्त्रसम्मत है। रात्रि में केवल पूजा-पाठ, मंत्र-जाप और दान किया जा सकता है। शुभ कार्यों से रात्रि मुहूर्त में बचना चाहिए।
### क्या राशि अनुसार सोने की खरीदारी अलग-अलग शुभ है?
सोना सभी राशियों के लिए शुभ है, परंतु मेष, वृष, कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि वालों के लिए अक्षय तृतीया विशेष फलदायी है। वृश्चिक राशि वालों को सोने के साथ-साथ कुबेर मंत्र का अधिक जाप करना चाहिए।
### क्या ऑनलाइन सोना खरीदना शुभ है?
हां, ऑनलाइन सोने की खरीदारी शुभ मानी जाती है, बशर्ते वह BIS हॉलमार्क प्रमाणित हो और शुभ मुहूर्त में ही ऑर्डर किया जाए। डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ETF भी इस दिन खरीदे जा सकते हैं। ऑर्डर करते समय मन में "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का जाप करें।
### क्या अक्षय तृतीया को उपवास रखना जरूरी है?
अक्षय तृतीया को उपवास अनिवार्य नहीं है, परंतु रखने से अधिक पुण्य मिलता है। निर्जल व्रत, फलाहार या एकाहार — जो भी स्वास्थ्य के अनुकूल हो, व्रत रखा जा सकता है। व्रत रखने वाले सात्विक भोजन करें और दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण रखें।
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अक्षय तृतीया हमें सिखाती है कि **कर्म का फल कभी नष्ट नहीं होता** — हमारा हर शुभ कार्य, हर दान, हर जप अनंत फल देता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि संसार में जो कुछ भी शाश्वत है — धर्म, सत्य, प्रेम, दान — वही सच्ची संपत्ति है। माँ लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए सिर्फ धन की चाहना पर्याप्त नहीं, बल्कि सच्चे मन से दान, सेवा और भक्ति भी आवश्यक है।
अक्षय तृतीया 2025 के इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु, माँ लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा कर अपने जीवन को धन, सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति से भर लें।
**शुभकामनाएँ सहित,**
*गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली*
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"question": "अक्षय तृतीया 2025 कब है और शुभ मुहूर्त क्या है?",
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