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मांगलिक दोष क्या होता है कुंडली में मांगलिक दोष कैसे देखे और मांगलिक दोष दूर करने के लिए क्या उपाय करे – What is Manglik Dosh

What is Manglik Dosh

मांगलिक दोष क्या होता है कुंडली में मांगलिक दोष कैसे देखे और मांगलिक दोष दूर करने के लिए क्या उपाय करे – What is Manglik Dosh

What is Manglik Dosh गुरु माँ निधि जी श्रीमाली जी ने बताया है की मंगल ग्रहों के सेनापति होने के साथ क्रूर ग्रह के रूप में माना जाता है। इसके साथ ही मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी है। मंगल की स्थिति विवाह के समय जरूर देखी जाती है।   मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय परंपरा है जिसमें विवाह के लिए दो व्यक्तियों के जन्मकुंडली में मंगल ग्रह के विशेष स्थान पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यदि मंगल ग्रह कुंडली में शुभ स्थान पर नहीं होता है या फिर कुंडली में मंगल की दशा चल रही होती है, तो उसे कुंडली में मांगलिक दोष कहा जाता है। मांगलिक दोष वाले जातक का विवाह किसी मांगलिक दोष वाले लड़का या फिर लड़की से होता है।   What is Manglik Dosh

What is Manglik Dosh गुरु माँ निधि जी श्रीमाली जी ने बताया है कि मांगलिक दोष के कारण वैवाहिक जीवन में दिक्कतें आती है। यदि मंगल ग्रह पर बृहस्पति की दृष्टि है तो यह इसके मांगलिक प्रभाव को कम कर सकता है लेकिन पूरी तरह से मांगलिक दोष को समाप्त नहीं कर सकता। 

कुंडली में मंगल दोष कैसे

  • जब भी किसी जातक की कुंडली में मंगल ग्रह भारी होते है तब वह व्यक्ति मांगलिक कहलाता है।
  • गुरु माँ निधि जी श्रीमाली जी के अनुसार जब किसी भी व्यक्ति की कुंडली में मंगल 1, 4, 7, 8, 12 वें स्थान में रहते है तब वह व्यक्ति मांगलिक होता है।
  • जो जातक मांगलिक होते हैं उनका स्वभाव गुस्सैल होता है। बात-बात में उन्हें जल्दी गुस्सा आ जाता है। लेकिन ऐसे जातकों में भूमि से संबंधित कोई भी कार्य करने पर उन्हें बहुत ही शुभ फल प्राप्त होते हैं।
  • कुंडली में मंगल ग्रह भारी होने पर दांपत्य जीवन में कठिनाई आती है।

क्या हैं पगड़ी मंगल तथा चुनरी मंगल ?

मांगलिक के संदर्भ में पगड़ी मंगल तथा चुनरी मंगल ये दो शब्द सुनने को मिलते हैं। पूछते हैं मंगल कौन सा है, पगड़ी मंगल या चुनरी मंगल। आमजन तो असमंजस में पड़ते ही हैं नए ज्योतिषी भी ये शब्द सुनकर दुविधा में पड़ जाते हैं कि ये क्या बला हैं कोई ग्रंथ में तो ये सुनने के लिए नहीं मिला। पहले लड़के आमतौर पर पगड़ी पहनते थे और लड़कियां चुनरी ओढ़ा करती थीं। इसलिए यदि लड़के की कुंडली मांगलिक है तब उसे पगड़ी मंगल कहा जाता हैं और यदि लड़की की कुंडली मांगलिक हैं तब उसे चुनरी मंगल कहा जाता है What is Manglik Dosh

मंगल दोष के अपवाद 

1. एक कुंडली मांगलिक हैं तथा दुसरी कुंडली में चंद्र कुंडली में मंगल 1,4,7,8 तथा 12वें स्थान पर हो तो भी उसे चंद्र मांगलिक माना जाता है और विवाह के योग्य होता है।

2. एक कुंडली में मंगल हैं तथा दुसरी कुंडली में 1,4,7,8 तथा 12 वें स्थान पर शनि, राहू, केतु, सूर्य इनमें से कोई एक ग्रह हो तब भी वह मंगल के सदृश्य माना जाता है। 

3. यदि मेष राशि का मंगल लग्न में, वृश्चिक राशि का मंगल चतुर्थ में, मकर राशि का मंगल सप्तम में, कर्क राशि का मंगल अष्टम में तथा धनु राशि का मंगल द्वादश भाव में, मीन राशि का मंगल सप्तम भाव में तथा कुंभ राशि का मंगल अष्टम भाव में हो तो उसमें मंगलदोष बुरा नहीं माना जाता।

4. एक कुंडली मांगलिक है तथा दूसरी कुंडली मांगलिक नहीं हैं, लेकिन दूसरी कुंडली में , पहली मांगलिक कुंडली का सप्तमेश, 6वें, 8वें अथवा 12वें स्थान पर हो तो मंगलदोष समाप्त करता हैं।

5. मंगल यदि कुंडली में वक्री हो, अस्त हो तब उसका दोष नहीं होता।  

6. मंगल यदि कुंडली में नीच राशि का यानि कर्क राशि में हो, अथवा मिथुन या कन्या राशि जो की शत्रुराशि हैं इसमें हो तब भी उसका दोष नहीं रहता। 

7. मंगल यदि बलवान हैं या गुरू अथवा शुक्र या चंद्रमा ये स्वराशि में होकर मंगल के साथ युति कर रहे हो या मंगल की दृष्टि में हो तब भी मंगलदोष नहीं लगता। 

8. मंगल मकर लग्न में तथा सप्तम मे चंद्रमा कर्क हो तो मंगलदोष दूर करता है।

9. चंद्र मंगल की युति इन स्थानों पर किसी भी स्थान पर हो रही हो तो भी मंगल का परिहार होता है। 

10. मंगल जिस अरिष्ट स्थान पर है उस स्थान का अधिपति यदि केद्र स्थान 1, 4, 7, 10 या त्रिकोण 5, 9 में हो तब भी मंगल दोष दूर होता है।

11. लग्न में मेष राशि का चतुर्थ में वृश्चिक राशि का, सप्तम् में मकर राशि का कर्क राशि का और द्वादश भाव में धनु राशि का मंगल होने पर मांगलिक दोष नहीं होता है। 

12.  यदि मंगल के साथ बृहस्पति हो या बृहस्पति की मंगल पर दृष्टि हो तो भी मंगल दोष नहीं होता।  

13. मंगल के साथ राहु हो और दूसरे भाव में शुक्र चंद्रमा की युति होने पर भी मंगल दोष का परिहार हो जाता है।  

14. कुंडली मिलान में अगर 28 गुण या इससे अधिक मिलने पर भी मांगलिक दोष होते हुए भी विवाह संस्कार किया जा सकता है

मंगल दोष के प्रभाव

  • जब लग्न में ये स्थिति होती है तो जातक का स्वभाव अत्यधिक तेज, गुस्सैल, और अहंकारी होता है।
  • चतुर्थ में मंगल जीवन में सुखों में कमी करता है और पारिवारिक जीवन में कठिनाइयां आती हैं।
  • सप्तम भाव में मंगल होने से वैवाहिक सम्बन्धों में कठिनाई आती है।
  • अष्टम भाव में स्थित मंगल विवाह के सुख में कमी, ससुराल के सुख में कमी या ससुराल से रिश्ते बिगड़ जाते हैं।
  • द्वादश भाव का मंगल वैवाहिक जीवन में कठिनाई, शारीरिक क्षमताओं में कमी, क्षीण आयु, रोग, कलह को जन्म देता है। What is Manglik Dosh

मांगलिक दोष के लाभ

  • जब मंगल प्रथम यानि लग्न भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति साहसी और पराक्रमी होते हैं। ये कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी विजयी बनकर बाहर निकलते हैं। खेल, सेना, सेवा आदि क्षेत्रों में ये काफी नाम कमाते हैं।
  • यदि चतुर्थ भाव में मंगल हो, तो ऐसे जातक शक्तिशाली और आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। इन्हें भूमि, वाहन, सुख आदि की कमी नहीं रहती।
  • सप्तम भाव में मंगल होने से साझेदारी के काम में सफलता मिलती है। संपत्ति से जुड़े काम में शुभ परिणाम मिलते हैं। ऐसे जातक बड़े पद पर आसीन होते हैं और शरीर से स्वस्थ रहते हैं।
  • अष्टम भाव में मंगल हो, तो आकस्मिक रूप से धन लाभ के योग बनते हैं। साथ-साथ ऐसे जातक सर्जरी में शानदार करियर बना सकते हैं।
  • मंगल के द्वादश भाव में होने से जातक को विदेशों में भूमि-संपदा खरीदने में कामयाबी मिलती है।

क्या 28 वर्ष के बाद मंगलदोष दूर हो जाता है?

कुछ लोगों के मन में यह भी भ्रम है कि आयु के 28 वर्ष के बाद वह कुंडली मांगलिक नहीं होती। ये पुरी तरह से निराधार है। साधारण तौर पर यदि कुंडली मे मंगल दोष हैं तब विवाह 28 वर्ष तक नहीं होने देता, कुछ शुभता उसमें हैं तब 24 वें वर्ष में विवाह करवा देता है, परंतु आमतौर पर 28 वर्ष तक विवाह नहीं होता। 28 वर्ष के बाद कुंडली में मंगल का प्रभाव तो रहेगा ही, हां कुछ हद तक उसका कुप्रभाव कम हो जाता है। What is Manglik Dosh

गुरु माँ निधि जी श्रीमाली के अनुसार मंगल दोष से निजात पाने के उपाय

  • अगर कोई लड़की मांगलिक है, तो शादी से पहले कुंभ विवाह, विष्णु विवाह या फिर अश्वत्थ विवाह कराया जाता है।
  • हर मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • रोजाना शिवलिंग में जलाभिषेक दुधाभिषेक के साथ-साथ लाल रंग का फूल अर्पित करें।
  • मंगल ग्रह यन्त्र की पूजा करे तथा मंगल दोष से मुक्ति के लिए मांगलिक दोष निवारण किट का उपयोग कर सकते है 
  • मंगल दोष की पूजा करके मंगल दोष से निजात पा सकते है 
  • 3 मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते है 
  • घर में आने वाले मेहमानों को मिठाई खिलाने से भी मंगलदोष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  • कन्या में मंगला गौरी की उपासना व्रत करें।
  • चांदी का चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें- चिड़ियों को मीठा डालें। हाथी दांत का टुकड़ा अपने पास रखें।
  •  विवाह से पूर्व घट विवाह [पीपल-विष्णु] कराएं। क्रिया गुप्त रखे- कन्या स्वयं वर का वरण करे।
  • हर मंगलवार के दिन भगवान शिव को शहद अर्पित करें। इससे भी मंगल दोष से निजात मिल जाता है
  • हनुमान जी को केसरिया रंग का चोला अर्पित करें।
  • मंगलवार के दिन एक छोटे आकार के केसरिया गणपति घर ले आएं और नियमित रूप से पूजा करें।

मंगल का वैदिक मंत्र-
ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्।
अपां रेतां सि जिन्वति।।

मंगल का तांत्रिक मंत्र –
ॐ अं अंङ्गारकाय नम:

मंगल का बीज मंत्र –
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

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