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श्री राम के परम भक्त , संकटमोचन एवं सुख समृद्धि के दाता श्री हनुमान

shree Hanuman

श्री राम के परम भक्त , संकटमोचन एवं सुख समृद्धि के दाता श्री हनुमानshree Hanuman

shree Hanuman गुरु माँ निधि जी श्रीमाली जी ने बताया है की चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जन्मोत्सव मनाई जाती है। चैत्र माह की पूर्णिमा पर भगवान राम की सेवा के उद्देश्य से भगवान शंकर के ग्यारहवें रुद्र ने अंजना के घर हनुमान के रूप में जन्म लिया था,  इसलिए यह त्योहार को वानरों के देव भगवान श्री हनुमान के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार हिन्दूओं का विशेष त्योहार है तथा इस  त्योहार को  पूरे भारत में मनाया जाता है। हनमुान जी को भगवान वरूण के नाम से भी जाना जाता है  shree Hanuman

गुरु माँ निधि जी श्रीमाली  के अनुसार हनुमान जी का जन्म 58 हजार 112 वर्ष पहले त्रेतायुग के अन्तिम चरण में चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6.03 बजे भारत देश में आज के झारखण्ड राज्य के गुमला जिले के आंजन नाम के छोटे से पहाड़ी गाँव के एक गुफा में हुआ था।  shree Hanuman

ऐसी मान्यता है की हनुमान जन्मोत्सव के दिन जो भी व्यक्ति हनुमानजी की भक्ति और दर्शन करता है, उसके सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। भक्त गण प्रातः काल से ही भगवान हनुमान के पूजा व दर्शन हेतु मंदिरों में जाते है। श्री हनुमान जी को शक्ति व ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति को भूत-प्रेत से छुटकारा चाहिए होता है तो वह भगवान श्री हनुामन की पूजा आराधना करता है।  इस दिन भक्त हनुमानजी की मूर्ति पर तेल, टीका एवं सिंदूर चढ़ाते है। बहुत लोग इस दिन उपवास भी रखते हैं।  shree Hanuman

१२ साल बाद गुरु आदित्य संयोग 

हनुमान जी के प्राकट्य दिवस पर गुरु आदित्य का युति संबंध 12 वर्ष बाद बन रहा है, जो अत्यंत ही श्रेष्ठ योग है। ग्रह गोचर की गणना के अनुसार बृहस्पति का एक राशि में गोचर 1 वर्ष का होता है और वर्ष में आने वाला मुख्य त्यौहार भी वर्ष में एक बार ही आता है। इस गणना को दृष्टिगत रखते हुए देखें तो हनुमान जी के प्राकट्य दिवस पर गुरु आदित्य का यह संयोग 12 वर्ष बाद बन रहा है। 

हनुमान जी श्री राम के परम भक्त के रूप में 

श्री हनुमान जी, श्री राम के परम भक्त थे हनुमान जी श्री राम भगवान के परम भक्त थे। उन्होंने श्री राम भगवान के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ बलिदान किया था। उन्होंने श्री राम भगवान के लिए सभी संभव कार्य किए और उनकी सेवा में निरंतर तत्पर रहे। उन्होंने सीता माता की खोज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तथा उनकी भक्ति, निष्ठा व सेवा का सम्पूर्ण वर्णन ‘‘श्री रामायण’’ में किया गया है।  shree Hanuman

 हनुमान जी का पंचमुखी रूप 

अहिरावण ने माँ भवानी के लिए पाँच दीपक जलाए थे, जिन्हें पांच दिशाओं मे पांच अलग-अलग जगहों पर रखा गया। इन पाँच दीपकों को एक साथ बुझाने पर ही अहिरावण का वध संभव था। अतः अहिरावण के वध हेतु हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया।

श्री पंचमुखी हनुमान के पाँच मुख इस प्रकार हैं, उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख। इस रूप को धारण कर उन्होंने सभी पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर श्री राम और लक्ष्मण को मुक्त कराया।

शनि को शांत करने के लिए हनुमान की पूजा अर्चना 

गुरु माँ निधि जी श्रीमाली ने बताया है की  अगर शनि को शांत करना है तो भगवान श्री हनुमान जी को प्रसन्न करना चाहिए। ऐसा इसलिए कहा गया है कि जब हनुमानजी ने शनिदेव का घमंड तोड़ा था तब सूर्यपुत्र शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया है कि उनकी भक्ति करने वालों की राशि पर आकर भी वे कभी उन्हें पीड़ा नहीं देंगे।     shree Hanuman

भगवान हनुमान को संकटमोचन भी कहा गया है 

भगवान हनुमान को “संकटमोचन” कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अनेक संकटों को दूर करने में अपनी शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया है। भगवान हनुमान की कथाओं में उन्होंने रामायण के कई संकटों को दूर किया है, जैसे कि भयंकर राक्षस रावण के सम्मुख सीता माता को बचाना, सुग्रीव को उनके राज्य का पुनर्प्राप्त करवाना और लंका के नष्ट होने में मदद करना।

इसके अलावा, भगवान हनुमान की उपस्थिति से भी संकटों का नाश होता है। भक्तों के जीवन में अनेक संकट और परेशानियां उत्पन्न होती हैं, जिन्हें दूर करने के लिए उन्हें भगवान हनुमान का भक्ति और पूजन करना चाहिए। इसी कारण से भगवान हनुमान को “संकटमोचन” कहा जाता है। केसरी तथा माता अंजना के पुत्र श्री हनुमान को महावीर, बजरंगबली, मारुती, पवनपुत्र, अंजनीपुत्र तथा केसरीनन्दन के नाम से भी जाना जाता है।

हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना रहेगा लाभदायी 

हनुमान जयंती के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत ही शुभ माना जाता है। हनुमान चालीसा में हनुमान जी की गुणगान और उनके भक्तों के जीवन में उनकी कृपा से हुए बदलावों के बारे में वर्णन होता है। इस पाठ से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और उनके आशीर्वाद से सभी प्रकार के संकट और मुसीबतों से बचाव मिलता है।

इसके अलावा, हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन शुद्ध होता है और दिमाग में शांति मिलती है। इस पाठ को करने से भक्त की भविष्य में सफलता मिलती है और उनके जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

इसलिए, हनुमान जयंती के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत ही उपयोगी होता है। इससे हम अपने जीवन में सकारात्मकता लाते हैं और अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करते हैं। shree Hanuman

हनुमान जन्मोत्सव के दिन करे विशेष उपाय 

पारिवारिक खुशहाली के लिए

अगर आप अपने परिवार को हमेशा खुशहाल और घर के सदस्यों की लगातार तरक्की होते देखना चाहते हैं तो हनुमान जन्मोत्सव के दिन सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक या फिर बजरंग बाण का पाठ जरूर करें।

जटिल समस्या के निवारण के लिए

अगर आपके जीवन में कोई ऐसी समस्या है जिसका निवारण आपको लाख कोशिशों के बाद भी नहीं मिल पा रहा है तो इसके लिए आप हनुमान जन्मोत्सव के दिन मारुति नंदन को बनारसी पान जरुर चढ़ाएं।

कार्य में बाधाओं को खत्म करने के लिए

इसके अलावा हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान मंदिर में 11 काले उड़द के दाने, सिंदूर, फूल, चमेली का तेल, प्रसाद, गुलाब के फूल की माता आदि अर्पित करें। इतना करने के बाद हनुमान चालीसा या फिर सुंदरकांड का पाठ करें। ऐसा करने हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और कार्य में आ रही बाधाएं दूर होती है। साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

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