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Shravan Maas | श्रावण मास का महत्व एवं व्रत विधि

श्रावण मास का महत्व


 शिव– मगलदाता शंकर- कल्याण करने वाला Shravan Maas ,शिव -विरक्त है,त्यागी है ,ऐश्वर्यवान है ,श्मशानवासी है,आक धतूरा भाग का सेवन करने वाले है,सर्प जिनके गले का हर है ,बेल जिनकी सवारी है ,भस्म जिनका श्रृंगार है,श्रावण मास शिव गोरी को प्रिय मास है, जो की शीतल हवा,रिमझिम वर्षा नए पुष्पों पत्तो का आगमन का समय ,इस सुन्दर धरा को हरी हरी कोमल गैस से आच्छादित करने का मास है महिलाओ के लिए संजीवनी बुटी सा मास है ,शिव ही बर्ह्म है और ब्रह्म ही शिव है शिव में से इ कर हटा दे तो शव ही रह जाता है वैसे ही किसी मनुष्य में से शिव निकल जाने पर वह शव ही रह जाता है ,शिव ही सहारक तारक और पालक है,शिव ही सताय है शिव ही सुन्दर है शिव ही कल्याणकारी है यथार्थ सत्यम शिवम् सुंदरम ,शिव शांति है शक्ति है ,पूजा है ,आत्मा है कल्याण हैविरक्ति है मोक्ष है अमृत देने वाले है नटराज है रूद्र है अर्धनारीश्वर है त्रिनेत्रधरी है , Shravan Maas
अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का मास है उत्तम वर की प्रापति का मास है निर्धनता दूर भागने का मास है ,संतान प्राप्ति का मास है शिव की शक्ति पाने का मास है भोले नाथ जल्दी ही प्रसन्ना हो जाते है पुरे श्रावण मास में तथा विशेष तोर से श्रावण मास के सवार को रुद्राभिषेक करे ,शिव स्मरण करे ॐ नम: शिवाय का जप करे|

अनुकूल करे ग्रह – सूर्य ,सूर्य ख़राब स्थिति में है यानि नीच का है शत्रु शृंगी है ,निचे दृष्टि से ग्रस्त है ,यानि आपको सिरदर्द रहता हो ,आखो पर चश्मा हो ह्रदय सम्बन्धी रोग हो ,मनोबल कमजोर हो, पिता से लड़ाई झगड़ा ,अनबन ,हडडी संबंधी रोग हो तो श्रावण के सोमवार को स्फटिक शिवलीग पर जल से अभिषेक करे सफेद ाक के फूल चढ़ाये और १२ मुखी रुद्राक्ष धारण करे ,
चंद्र- चंद्र की स्थिति ख़राब है या नीच का है तो आपको सर्दी जुकाम ,नजला,सिरदर्द ,सफ़ेद डेग ,गले में खराबी ,मेन्टल डिप्रेशन ,टेंशन से ग्रषित रहते है टी श्रावण के मास में विशेष तोर पर सोमवार को कच्चे दूध से अभिषेख करे ,पारद /चांदी के शिवलिंग पर शिव महिमा स्र्त्रो का पाठ करे | शिव यन्त्र पेन्डेन्ट धारण करे | Shravan Maas

मंगल -मंगल दोष है या आप मांगलिक है | या ब्लड प्रेसर ,खूनसम्बन्धी विकार ,क्रोध अधिक आना विवाह में विलम्भ होना तो गिलोय की बूटी  के रस से शिव पर अभिषेक | समस्या का समाधान होगा | १४ मुखी रुद्राक्ष धारण करे |
बुध-बुध दोष है ,बुध कमजोर है नीच का है शत्रु क्षेत्री है तो मानसिक तकलीफ रहेगी बुद्धि का विकास नहीं होगा ,याददास कमजोर होगी ,ऑटो की तकलीफ रहेगी तो विधारा की बूटी के रास से मरगज शिवलिंग पर अभिषेक करे
गुरु – यदि कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो तो संतान सम्बंधित समस्या स्किन problem, चर्बी की समस्या होगी अतः स्फटिक शिवलिंग या महामृतुम्जय यंत्र पर कच्चे दूध में हल्दी मिलाकर अभिषेक करे | पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करें |शुक्र : दैत्य गुरु शुक्र कमज़ोर हो , नीचस्य हो , भग्र श्रेणी हो , तो मल-मूत्र की समस्या शादी में समस्या गुप्तांग संबंधी रोग , यौन रोग , वीर्य की कमी हो सकती है तो पारद शिवलिंग, शिव यंत्र पेंडेंट , छः मुखी रुद्राक्ष पर पंचामृत से अभिषेक करें |

शनि : शनि ग्रह दूषित है तो जोड़ो , मांसपेशियों में तकलीफ , हडियों में तकलीफ , शरीर के स्नायु तंत्र की तकलीफ हो तो महामृत्युम्जय यंत्र पर काले पत्थर के लाजाव्रत शिवलिंग (lapis lazuli shivling) पर सात मुखी रुद्राक्ष , गन्ने का रस से अभिषेक करें |

राहु-केतु : राहु-केतु की समस्या हो तो पितृ दोष , कालसर्प दोष , कोई कचहरी , मुकदमा , पुलिस संबंधी परेशानी हो तो नर्मदेश्वर शिवलिंग पर भांग से अभिषेक करें , आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करें |

Shravan Maas श्रावन मास का महत्व :-

भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के मानसपुत्र सनत कुमार को श्रावन मास की महिमा बताते हुए कहा था कि मेरे तीन नेत्रों में से सूर्य दाहिने ,चन्द्र बाएँ तथा मध्य नेत्र अग्नि है – जैसा कि आप जानते है चन्द्रमा की कर्क राशि व सूर्य की सिंह राशि है | जब सूर्य कर्क से सिंह राशि तक की यात्रा करते है तब ये दोनों संकातिया अत्यंत पुण्य फलदायी हो जाती है , और ये दोनों संकातिया श्रावन मास में हो जाती है | इसलिए भगवान शिव को श्रावन अत्यंत प्रिय है | सोमवार चन्द्र का वार है चन्द्र भगवान  शिव के नेत्र है , सोम ओषधियों के देवता है , शांति व शीतलता प्रदान करने   वाले है , इसलिए सोमवार  को शिवालिये की पूजा , व्रत , उपासना , भजन –कीर्तन करने से शारीरिक , मानसिक कष्ट दूर ओ जाते है | सोलह सोमवार का भी अत्यंत महत्व है , जिसका पालन , पूजन करने से कन्याओ को मनवांछित वर की प्राप्ति होती है |

Shravan Maas इस बार श्रावन मास का प्रारम्भ :-

प्रदोष व्रत शत्रुओं पर विजय हेतु –  सरसों के तेल से अभिषेक

कालसर्प कर्जमुक्ति हेतु – कच्चे दूध से गंगाजल मिलाकर

साधनायें महिलाओं की सौभाग्य प्राप्ति – पंचामृत से

बारह ज्योतिर्लिंग व्यापर वृद्धि –  घी से (गाय के )

बिल्वपत्र पत्र धन प्राप्ति हेतु  –   कच्चे दूध में केसर , मिश्री से

महामृतुम्जय जाप रोग निदान हेतु  –   जल में काले तिल (महामृतुम्जय का जाप )


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