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Rudraksha ka Mahtva – रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी

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रुद्राक्ष से संबन्धित जानकारिया
Benefits of rudraksha

Rudraksha ka Mahtva (रुद्राक्ष का महत्व) का आयुर्वेदिक और आध्यात्मिक दोनों में अत्यधिक महत्त्व है | पौराणिक और आयुर्वेदिक ग्रंथो में रुद्राक्ष का विस्तृत उल्लेख मिलता है | रुद्राक्ष भगवान् शिव का प्रतिनिधित्व करते है | इनकी उत्पत्ति भगवान् शिव की के नेत्रों से निकले आसुओ से हुई है |

इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है | प्राचीन समय में त्रिपुर  राक्षस था जिसे कोई पराजित नहीं कर पाया इस त्रिपुरासुर ने ब्रम्हा , और सभी देवताओ को जीत  लिया  था तब सभी देवता मिलकर नारायण के  उनसे त्रिपुरासुर को परास्त करने का उपाय पूछने लगे  तब नारायण ने उसका  वध करने के लिए अघोर नामक अस्त्र का निर्माण किया यह प्रज्वलित अग्निमय दिव्यास्त्र था | उस समय सहस्त्र वर्ष पर्यन्त रूद्र ने यानि शिव ने अपनी आँखे खोले रखी | त्राटक के कारण रूद्र की आँखे दुखने लगी और नेत्रों से आंसू टपकने लगे |

उन आंसुओ बूंदो से समस्त लोक  कल्याणार्थ 38 प्रकार के रुद्राक्ष उत्पन्न हुए | रूद्र के सूर्य नेत्र से 12 प्रकार के पीले और लाल रंग के रुद्राक्ष तथा चन्द्र नेत्र के 16 प्रकार के और अग्निनेत्र से 10 प्रकार के काले रुद्राक्ष उत्पन्न हुए | स्वेत रंग का रुद्राक्ष ब्राम्हिन जाति , लाल रंग का क्षत्रिय , पीत वर्ण का रुद्राक्ष वैश्य तथा काले रंग का रुद्राक्ष शुद्र वर्ण का कहा गया है | भगवान् शिव को रुद्राक्ष अति प्रीय है इसलिए उन्होंने उसे गले में धारण किया हुआ है | रुद्राक्ष धारण करना मतलब साक्षात् शिव का आशीर्वाद प्राप्त करना है |

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IDENTIFICATION OF RUDRAKSHA (रुद्राक्ष की पहचान) –

पौराणिक मान्यताओ के अनुसार आवले  के आकर का रुद्राक्ष श्रेष्ठ , बेर के आकार का रुद्राक्ष मध्यम, चने के आकार वाला रुद्राक्ष अधम मन जाता है | इसी प्रकार स्वतः छिद्र वाला रुद्राक्ष श्रेष्ठ और जिसमे छिद्र करना पड़े उसे मध्यम माना जाता है | बराबर गोल , मजबूत डेन श्रेष्ठ मने जाते है | रुद्राक्ष के परिपक्व डेन पानी में डूब जाते है | श्रेष्ठ रुद्राक्ष भस्म के रंग का होता है जो अति दुर्लभ है | ऐसी मान्यता है है की रुद्राक्ष का मुख ब्रम्हा , उपरी भाग शिव तथा पुच्छ यानि निचे का भाग विष्णु है अतः रुद्राक्ष को त्रिदेव का प्रतिनिधित्व कर्ता माना गया है और यह मुक्ति प्रदाता है |

HOW TO USE RUDRAKSHA (रुद्राक्ष धारण करने की विधि) –

रुद्राक्ष को जब आप धारण करे तब आपको यह ध्यान होना चाहिए की उस दिन सोमवार हो | सुबह स्नान आदि से निवृत होकर भगवान् शिव का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष को गंगाजल से या पंचगव्य से दो देना चाहिए | तत्पश्चात भगवान् शिव के बीज मंत्र

ॐ नमः शिवाय

का जाप कम से कम एक माला अवश्य करे | उसके पश्चात् उस पर बिल्बपत्र चढ़ाये और धुप दीप आदि से अभिमंत्रित करे और निम्न मंत्र के द्वारा इसे अभिमंत्रित करे||

ॐ तत्पुरुषाय विदमहे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात ||

किसी भी रुद्राक्ष को धारण करने से पूर्व उसे अभिमंत्रित अवश्य करके धारण करे |

ADVANTAGES OF RUDRAKSHA Rudraksha ka Mahtva (रुद्राक्ष का महत्व) –

रुद्राक्ष यानि रूद्र का अक्ष यानि यह साक्षात् शिव का प्रतिनिधित्व करता है और भोलेनाथ ने इसे स्वयं अपने कंठ में धारण किया है अतः इसे धारण करने से आपको साक्षात् शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और इसे धारण करने के कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं है इसे कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है |

  • रुद्राक्ष धारण करने से हमारे मन की नकारात्मकता ख़त्म होती है और सकारात्मकता बढाती है
  • आपके जीवन में आर्थिक उन्नति होती है और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है
  • मन की एकाग्रता में वृद्धि होती है और मन के भटकाव की स्थिति ख़त्म होती है
  • रुद्राक्ष को धारण करने से विवाह में आ रही बधाये दूर होती है और शीघ्र ही सुयोग्य वर या वधु की प्रप्ति होती है
  • रुद्राक्ष धारण करने से आपकी सभी मनोकामनाए पूरी होती है
  • रुद्राक्ष धारण करने से आपके समस्त शत्रुओ का नाश होता है और आपको अपने कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है
  • विद्या प्राप्ति में रुद्राक्ष सहायक सिद्ध होते है और करियर में आ रही बाधा दूर होती है
  • श्वास  की तकलीफ से मुक्ति मिलती है साथ ही bp की प्रॉब्लम भी रुद्राक्ष धारण करने से ख़त्म होती है

DIFFERENT TYPES OF RUDRAKSHA (रुद्राक्ष के प्रकार) –

रुद्राक्ष एक से लेकर 21 मुखी तक होते है जिनको धारण करने के अलग अलग लाभ है सामान्यतः 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष धारण किये जाते है इनके अलग अलग कार्य है | इसके अलावा गौरी शंकर रुद्राक्ष और गणेश रुद्राक्ष का भी विशेष महत्त्व है | जो की हम अपने अगले आर्टिकल में विस्तार से बताएँगे |

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