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Raksha Bandhan – रक्षा बंधन का महत्व

raksha bandhan

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) 2019

रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है |यह  त्यौहार श्रावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | यह भाई-बहन के मध्य प्रेम, रक्षा का प्रतिक है , यह बहन के प्रति भाई के कर्तव्यों को स्मरण कराता  है | रक्षा बंधन,रक्षा सूत्र (raksha bandhan) इसके नाम से ही स्पष्ट है रक्षा का बंधन अर्थात भाई द्वारा बहन को रक्षा का वचन देना |पोराणिक कथाओ के अनुसार एक बार जब देव युद्ध के दोरान दानवो से हारने  लगे तब वे देव राज इंद्र के पास गये उस समय देवी इन्द्राणी ने सभी देवों को भयभीत देख कर उनके कलाई पर एक एक रक्षा सूत्र बांध दिया जिससे सभी देवों को हिम्मत मिली और वे युद्ध में विजय हुए | यही से रक्षा सूत्र बांधने  की प्रथा आरम्भ हुई | श्रावण पूर्णिमा होने के कारण इस दिन ब्राह्मण,पडित आदि समुद्र तट पर अपने जनेऊ बदलते है और समुद्र की पूजा करते है | तथा इस दिन इसी दिन ऋषि मुनिओ के उपदेशो की पूर्णाहुति दी जाती है इसके बाद ब्राह्मण राजाओ के हाथ में राखी बांधते थे इसलिए आज भी ब्राह्मण अपने यजमानो के हाथ में राखी बांधते है | रक्षा बंधन का एक बहुत अच्छा उदाहरण  मध्य कालीन युग में राजपूत रानी कर्मवती द्वारा मुग़ल शासक हुमायु को अपनी रक्षा हेतु राखी भेजी थी | और हुमायु ने रानी कर्मवती को बहन मान कर उनकी रक्षा की | रक्षा बंधन का एक और उदाहरण भारतीय राजा पुरु को अलेक्जेंडर की पत्नी ने राखी भेजी थी क्योकि उस समय पुरु की प्रखरता से अलेक्जेंडर बहुत विचलित रहने लगा था , इस तनाव में आकर उनकी पत्नी ने पुरु को राखी भेजी और पुरु ने उनको बहन मान कर उनकी रक्षा की | रक्षा बंधन (raksha bandhan) के त्यौहार को सलूनो और सावनी भी कहते है क्योकि  यह सावन की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | कही कही ये बलेव नाम से प्रसिद्ध हैं क्योकि इस दिन भगवान विष्णु ने बलि नामक राजा के अभिमान को तोडा था | महाराष्ट्र में यह त्यौहार नारियल पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है |वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है, कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है। एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन बहन को देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिये उपवास रखती है। इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन माना जाता है \

अपनी राशि अनुसार बांधे भाई को राखी  Raksha Bandhan:- 

मेष राशि:-

यदि आपके भाई की राशि मेष है तो उसे लाल रंग की राखी बांधे | लाल रंग की राखी मेष राशि वालो के लिए बहुत ही शुभ फल  व सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगी |और आपके भाई की नौकरी मे परेशानी आ रही है तो वह मिट जाएगी    

वृषभ राशि:-

यदि आपके  भाई की राशि वृषभ है तो उसे सफ़ेद रंग की राखी बांधे  | इससे  आपके भाई को मानसिक   शांति प्राप्त होगी |एवं मावे की मिठाई खिलाए 

मिथुन राशि

यदि आपके भाई की राशि मिथुन है तो उसे हरे रंग की राखी बांधे | यह आपके भाई की वैचारिक शक्ति को बढ़ाएगी |

कर्क राशि

यदि आपके भाई की राशि कर्क  है तो उसे चमकीला सफेद रंग की राखी बांधे | यह आपके भाई के भावनात्मक रिश्तो को मजबूत बनाने में सहायक होगी |

सिंह राशि

यदि आपके भाई की राशि सिंह है तो उसे  सुनहरा पीला रंग या गुलाबी रंग की राखी बांधे | यह आपके भाई को नेतृत्व प्रदान करेगी |

कन्या राशि

यदि आपके भाई की राशि  है तो उसे हरे रंग की राखी बांधे | यह आपके भाई के जीवन में शुभ परिणाम लाएगी |

तुला राशि

यदि आपके भाई की राशि  है तो उसे सफेद रंग की राखी बंधे रंग  की राखी बांधे | यह आपके भाई को न्याय करने की क्षमता प्रदान करेगी |

वृश्चिक राशि

यदि आपके भाई की राशि  है तो उसे चांदी की राखी बांधे | इससे आपके भाई को शांति प्राप्त होगी तथा रोगो मुक्ति मिलेगी |

धनु राशि

यदि आपके भाई की राशि  है तो उसे पिले रंग की राखी बांधे | इससे आपके भाई शन्ति का अनुवभव होगा|

मकर राशि

यदि आपके भाई की राशि  है तो उसे नील रंग की राखी बांधे | इससे  आपके भाई को प्राप्त होगी |

कुम्भ राशि

यदि आपके भाई की राशि  है तो उसे नील रंग की राखी बांधे | इससे  आपके भाई मनोबल बढ़ेगा |

मीन राशि

यदि आपके भाई की राशि  है तो उसे पिले रंग की राखी बांधे | इससे आपके भाई को मानसिक तथा अंधरुनी शन्ति प्राप्त होगी |

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यदि किसी को बहन न हो तो वह अपने मित्र की बहन या ब्राह्मण से राखी बंधवा सकते है , और यदि किसी को भाई न हो तो वह कृष्ण भगवान  को राखी अवश्य बांधे |

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Raksha Bandhan राखी बाँधने का शुभ महूर्त :-

वर्ष 2019 में रक्षा बंधन 15 अगस्त , को मनाया जायगा |

राखी बांधने के शुभ महूर्त

सुबह – 5 :59 से शाम  5 : 59 

अवधि – 12  घंटे  |भद्रा काल 5 :59 से पहले समाप्त |

दोपहर महूर्त – 1 :44  से 4 :2 2 तक 

 

भद्रा-पुच्छकाल में राखी बंधवा सकते है यह शास्त्रसम्मत है। इस काल में भी शुभ फल की प्राप्ति होगी। भाई बहनों में प्रेम सम्बन्ध बना रहेगा। Raksha Bandhan


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