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ज्योतिष शास्त्र में प्रश्न कुंडली का तात्पर्य – Prashna Kundali

Prashna Kundali

ज्योतिष शास्त्र में प्रश्न कुंडली का तात्पर्य – Prashna Kundali

Prashna Kundali गुरु माँ निधि जी  श्रीमाली  बताया है की कई बार लोगों की उलझन होती है कि उन्हें अपना क जन्म समय या जन्मतिथि सही पता नहीं होती। ऐसे में ज्योतिष संबंधी फलादेश कैसे किए जाएं? किस तरह उनका भविष्य जाना जाए? इन सब प्रश्नो का ‘सटीक जवाब प्रश्न कुंडली है। प्रश्न कुंडली में कार्य भाव और कार्येश की भूमिका अहम होती है। कार्य से यहां अर्थ उस विचार या इच्छा से है जिसके लिए प्रश्न कुंडली बनाई जाती है। जैसे अगर कोई व्यक्ति यह जानना चाहता है कि क्या वह यात्रा करेगा? इस स्थिति में कार्यभाव तृतीय भाव हो गया। कार्येश से मतलब कुंडली के उस भाव से है, जिससे संबंधित प्रश्न किया गया है। इस प्रश्न में यात्रा के विषय में कहा गया है तो तृतीय भाव का स्वामी कार्येश हो गया। इस प्रकार प्रश्न कुंडली में कार्य भाव और कार्येश का संबंध प्रश्न की सफलता दर्शाता है। Prashna Kundali

प्रश्न कुंडली क्या है 

गुरु माँ निधि जी  श्रीमाली के अनुसार प्रश्न कुंडली वास्तव में समय विशेष की एक कुंडली है जो उस समय बनाई जाती है, जिस समय जातक प्रश्न पूछता है। इस कुंडली से जातक के प्रश्न का ही भविष्य देखने का प्रयास किया जाता है। इस विधि में सवाल कुछ भी हो सकता है। आमतौर पर तात्कालिक समस्या ही सवाल होती है। ऐसे में समस्या समाधान का जवाब देने के लिए प्रश्न कुंडली सर्वाधिक उपयुक्त तरीका है। ध्यान रखने की बात यह है कि प्रश्न के सामने आते ही उसकी कुंडली बना ली जाए। इससे समय के फेर की समस्या नहीं रहती। इसके साथ ही जातक की मूल कुंडली भी मिल जाए और वह प्रश्न कुंडली को को केंद्रित  करती हो तो समस्या का हल ढूंढना और भी आसान हो जाता है। कई बार जातक जो मूल कुंडली लेकर आता है, वह भी संदेह के घेरे में होती है। गुरु माँ निधि जी श्रीमाली जी ने बताया है कि जातक का ज्योतिषी के पास आने का समय और जातक की कुंडली दोनों आमतौर पर एक-दूसरे के पूरक होते हैं। ऐसे में प्रश्न कुंडली बना लेना फलादेश के सही होने की गारंटी को बढ़ा देता है। पहले जब हाथ से कुंडली बनाई जाती थी, तब हाथों हाथ प्रश्न कुंडली बनाना संभव नहीं था लेकिन वर्तमान दौर में कंप्यूटर और सक्षम सॉफ्टवेयर की मदद से हाथों हाथ कुंडलियां बनाई जा रही है। कई चैनल्स पर पूछे जाने वाले लाइव प्रश्नों का जवाब भी प्रश्न कुंडली के द्वारा ही दिया जाता है। अब ज्योतिषी जातक की मूल कुंडली के साथ ही प्रश्न कुंडली बना लेते हैं। यह फलादेश के काम को और भी आसान बना देता है। यही नहीं प्रश्न कुंडली के जरिए व्यक्ति के स्वभाव और व्यक्तित्व को भी जाना जा सकता है।

जन्म समय समस्या का समाधान:

हालांकि पिछले कुछ सालों में अस्पतालों में शिशु के जन्म लेते ही अस्पताल स्टाफ नवजात के टैग लगाकर सही जन्म समय उस पर लिख देता है। बावजूद इसके जन्म समय को लेकर कई तरह की उलझनें बनी हुई है। आमतौर पर शिशु के गर्भ से बाहर आने को ही जन्म समय माना जाता  है। इसके अलावा माता से नाल के कटने या पहली सांस लेने को भी जन्म समय लेने का मत ज्योतिष में देखने को मिलता है। ऐसे में प्रश्न कुंडली ऐसा जवाब है, जिससे जन्म तिथि और जन्म समय के बिना फलादेश किया जा सकता है। सामान्यतया प्रश्न कुंडली की आयु वार्षिक मानी गई है। प्रश्न कुंडली में लग्न समय निश्चित होता है। प्रश्न कर्ता की चिंताओं की जानकारी चंद्रमा से देखी जा सकती है। प्रश्न कुंडली के लग्न भाव में बली चंद्र की स्थिति निवास, चिंताएं दूसरे भाव में धन, तीसरे भाव में घर से दूर रहने की चिंताएं, चौथे भाव में मकान-पानी से संबंधित परेशानी, पांचवे भाव में संतान, छठे भाव में ऋण, सातवें भाव में विवाह या साझेदारी, आठवें भाव में पैतृक सम्पति या अप्रत्याशित लाभ नवम भाव में चंद्र लंबी दूरी की यात्राएं दशम भाव में आजीविका, एकादश भाव में आयु-वृद्धि, पदोन्नति, द्वादश भाव में बली चंद्र विदेश यात्रा से जुड़ी चिंताएं होने का संकेत देता है। Prashna Kundali

प्रश्न कुण्डली में कारक तत्वों का निर्धारण 

  • प्रश्न कुण्डली का लग्न प्रश्नकर्ता का प्रतिनिधित्व करता है. प्रश्न या समस्या को व्यक्ति विशेष का सवाल कहा जाता है. तो जातक के पूछे गए प्रश्न के भाव एवं उसके स्वामी द्वारा उसका निर्धारण किया जाता है.
  • प्रश्नकर्ता का प्रश्न रिश्ते, वित्तीय निवेश, कैरियर मुद्दों, पारिवारिक मामलों, संघर्ष और मुकदमों, वस्तुओं के खोने या लापता लोगों आदि के बारे में हो सकता है. उदाहरण के लिए यदि पति या पत्नी से संबंधित प्रश्न हो तो सप्तम भाव को देखा जाएगा तथा सप्तमेश उसका कारक होगा.
  • इसी प्रकार से बिजनेस या काम से संबंधित प्रश्न हो तो दशम भाव एवं दशमेश का अवलोकन किया जाता है. इस प्रकार प्रश्नकर्ता की समस्या में कारक ग्रह प्रभावित होता है. विशेष रूप से उस भाव में स्थित किसी भी अन्य ग्रहों का होना भी हो सकता है जो आगे वर्णनात्मक जानकारी प्रदान कर सकता है, लेकिन समस्या के लिए एक ही कारक लिया जाना चाहिए.
  • अधिकांशत: चंद्रमा अनेक स्थिति के लिए एक सामान्य कारक रहता है. इसके द्वारा प्रशनकर्ता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. क्योंकि घटना या सवाल से तुरंत स्पष्ट नहीं हो सकता है कि मामले की गहराई से संबंधित मुद्दों को कैसे समझें इसलिए, चंद्रमा की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण सामान्य कारक है.
  • प्रश्न कुंडली में चंद्रमा की स्थिति प्रश्न के विषय में काफी कुछ बताने में सहायक होती है. परंतु हमेशा यह तथ्य कारगर सिद्ध नहीं हो पाता क्योंकि कुण्डली में कई अनेक बातें भी होती हैं जिन्हें जानना आवश्यक होता है तभी हम सही फलित कर पाने में सक्षम हो सकते हैं. Prashna Kundali

 प्रश्न कुण्डली के प्रत्येक भाव का महत्व |  

  • पहला भाव | 1st House

जातक के व्यक्तित्व और उपस्थिति, स्वास्थ्य, विचार और सामान्य जीवन का पता चलता है.

  • दूसरा भाव | 2nd House

कुटुम्ब पैतृक संपत्ति, धन, गहने, आभूषण और चल संपत्ति, मुंह के भीतरी भागों.

  • तीसरा भाव | 3rd House

छोटे भाई बहन, दोस्तों, पड़ोसियों, संचार, लेखन, घनिष्ठ संबंध, चचेरे भाई, छोटी यात्रा, साहस.

  • चौथा भाव | 4th House

माँ, घर, संपत्ति, भवनों, अचल संपत्ति, खेतों, कुओं, खानों और पृथ्वी के अन्य संसाधनों, वाहनों, परिवार से मिलने वाली खुशी.

  • पांचवां भाव | 5th House

बच्चे, रोमांस, प्रेम संबंधों, खुफिया, उच्च शिक्षा, रचनात्मकता, सट्टा, शेयर और स्टॉक में निवेश., चुनाव, मनोरंजन, इच्छाओं को दर्शाता है.

  • छठा भाव | 6th House

बीमारी, रोग, दुश्मन, नौकर, मातहत, मुकदमेबाजी, अदालती मामलों, ऋण, प्रतियोगिता, पालतू जानवर, किरायेदारों, ऋण, चोर.

  • सातवां भाव | 7th House

जीवन साथी, प्रतिद्वंद्वी, विवाह, प्रेम, सार्वजनिक जीवन, सार्वजनिक छवि के साथ व्यवहार, दुश्मन, चोर, युद्ध.

  • आठवां भाव | 8th House

दीर्घायु, खतरे, बीमार स्वास्थ्य, गुप्त या असंवैधानिक शारीरिक रिश्ते, दुर्घटनाओं, बीमा, विरासत, पति या पत्नी का पैसा, करों, बंधक, पीड़ित, मनोगत विज्ञान से संबंधित मामलों, काला जादू, ध्यान.

  • नवाँ भाव | 9th House

पिता, लंबी यात्रा, धार्मिकता, दिव्य पूजा, दिव्य गुरु, विदेशी देशों की यात्रा, कानून और अदालत, बच्चों की उच्च शिक्षा, मां की बीमारी.

  • दसवां भाव | 10th House

व्यवसाय, सेवा, कैरियर, नौकरी या पेशे के परिवर्तन, पदोन्नति, सामाजिक स्थिति, प्रसिद्धि, किए गए अच्छे या बुरे कर्म, सरकार या शासक, मालिक या नियोक्ता, पिता, पिता की स्थिति के साथ संबंधित होता है.

  • ग्यारहवां भाव | 11th House

बडे़ भाई बहन, दोस्तों, लाभ व सफलता, जीवनसाथी का सुख, माता – पिता की दीर्घायु, पितृ कर्म.

  • बारहवां भाव | 12th House

व्यय, अस्पताल, जेल, तनहाई, गुप्त व्यवहार, दुख, मृत्यु, दान, छिपाना दुश्मन, घाटा, विदेश यात्रा इत्यादि को दर्शाता है. Prashna Kundali

प्रश्न कुंडली के फायदे

जन्म समय का फेर नहीं होता।

 सही सवालों के जवाब स्पष्ट मिलते सकते हैं।

सॉफ्टवेयर के जरिए हाथों-हाथ तैयार हो जाती है।

हर तरह के सवाल का जवाब दिया जा सकता है, बशर्ते सवाल सही हों।

जिन लोगों का जन्म समय नहीं हैं, उनके अलावा जिन लोगों की गलत कुंडली बनी हुई है वे भी अपनी चिंताओं का सही जवाब ले सकते हैं।

भविष्य कथन के बजाय मौजूदा समस्याओं से संबंधित कई सवालों के सटीक जवाब मिलते हैं।

पूर्ण भविष्य कथन के बजाय ऐसे सवाल जिनके हां या ना में उत्तर होते हैं उनके अपेक्षाकृत सटीक जवाब मिलते हैं।

प्रश्न कुंडली के जरिए व्यक्ति के स्वभाव और व्यक्तित्व को भी जाना जा सकता है। Prashna Kundali

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