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Maha Shivratri 2020 महाशिवरात्रि जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Maha Shivratri 2020

महाशिवरात्रि जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


Maha Shivratri 2020

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पंडित एन एम श्रीमाली जी के अनुसार  फ़रवरी का महिना है और इस माह भोलेनाथ का सबसे बड़ा पर्व जो की 21 फ़रवरी 2020 को आने वाला है वो मनाया जायेंगा| 21 फ़रवरी 2020 को महाशिवरात्रि का पर्व पुरे भारत वर्ष में धूम धाम से मनाया जायेंगा| और हर साल यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है| Maha Shivratri 2020

शिव क्या है: शिव क्या है शिव का अर्थ क्या है महाशिवरात्रि आगामी 21 फ़रवरी 2020 को आने वाली है तो हम महाशिवरात्रि पर पूजा आराधना हम भोलेनाथ की करते है शिव भगवान को याद करते है परन्तु क्या आपको शिव के अर्थ के बारे में पता है तो आज हम आपको शिव का क्या अर्थ है उसके बारे में हम आपको बतायेंगे शिव मंगलमय और मंगल दाता है| कल्याण कर्ता है| देवो के देव महादेव कहलाते है| महादेव क्यों कहते है इनको क्युकी ये पंच देवो के प्रधान माने जाते है| वेदों में आगम और निर्गम शास्त्रों के अधिष्दाता भी भोलेनाथ को माना जाता है| भोलेनाथ यानि शिव का अर्थ अजन्मा, अव्यक्त, अनंत, ब्रमाण्ड के सर्जनकर्ता, स्रष्टि के पालनकर्ता, और संहारक के रूप में भगवान भोलेनाथ को देखा जाता है| और सही मायने में शिव का अर्थ यही वास्तविक अर्थ है| महाशिवरात्रि के दिन हम भोलेनाथ के प्रतिरूप यानि शिवलिंग की पूजा आराधना करते है|Maha Shivratri 2020

शिवलिंग की हम पूजा आराधना क्यों करते है

पंडित एन एम श्रीमाली जी के अनुसार शिवलिंग का मतलब होता है बिंदुनाथ बिंदु का मतलब होता है देवी और नाथ का मतलब होता है शिव और इन दोनों शब्दों से मिलकर बिंदुनाथ से मिलकर शिवलिंग बना है| तो शिवलिंग का वास्तविक अर्थ है आदि और अनंत यानि आदि शक्ति और देवों के देव शिव का जब मिलन हुआ तो शिवलिंग की उत्पति हुई और इस चतुर्दशी के दिन ही भोलेनाथ हमारी धरती पर शिवलिंग के रूप में स्थापित हुए इसीलिये इस महापर्व को हम इस शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करके शिवलिंग की पूजा आराधना करके मानते है| ये भोलेनाथ के प्रतिरूप माने जाते है तो आज आपने जाना होगा की शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या है देखिये महाशिवरात्रि के दिन हम शिवलिंग की पूजा आराधना करते है| पर हमे किन किन चीजो से पूजा आराधना भोलेनाथ की करनी चाहिए| पूजा आराधना में अमूल्य मंत्र और विधि होती है जिसके द्वारा शिवलिंग की पूजा आराधना की जाती है और महाशिवरात्रि के दिन यदि आप इन 6 तत्वों का इस्तेमाल करके पूजा आराधना भोलेनाथ की करते है यानि 6 उपचार विधि के द्वारा भोलेनाथ की पूजा आराधना करते है तो आपको भोलेनाथ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है| Maha Shivratri 2020

छ:षडोपचार विधि क्या है

  • रुद्राभिषेक: रुद्राभिषेक से व्यक्ति की आत्मशुद्धी हो जाती है|
  • गंध: गंध अर्पित करने से उसे पुण्य की प्राप्ति होती है| भोलेनाथ हमे पुण्य प्रदान करते है|
  • नैवेद्य: नैवेद्य भोलेनाथ को निवेदित करने से हमारी आयु में वृद्धि होती है|
  • दूब: दूब से हमे धन की प्राप्ति होती है| और हमारे धन में वृद्धि होती है, हमारे वैभव में वृद्धि होती है|
  • दीप प्रज्वलन: दीप प्रज्वलन करने से हमे ज्ञान की प्राप्ति होती है| हमारे ज्ञान में वृद्धि होती है, हमारे ज्ञान तंतु शरीर के वो जाग्रत हो जाते है और हमे भोलेनाथ की विशेष कृपा और उनका सही अर्थ प्राप्त होता है|
  • ताम्बुल: ताम्बुल से हमे भोग की उपलब्धि होती है|

तो ये षडोपचार विधि से यदि हम महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की पूजा आराधना करते है तो हमे भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और इन सभी चीजो का क्या महत्व है, इनका क्या अर्थ है और इनसे हमे क्या प्राप्त होता है| ये हमने आपको बताया| इस विधि से पूजन हम भोलेनाथ का महाशिवरात्रि के दिन करते है| उसके बाद हमे ॐ शिवेभ्य नम: जो की पहले हमने आपको बताया इस मंत्र का उच्चारण आपको महाशिवरात्रि के दिन करना है| ॐ शिवेभ्य नम: मंत्र का उच्चारण रुद्राक्ष की माला से करे| उसके पश्चात् शिव पंचाक्षर स्त्रोत, रूद्र गायत्री, रुद्राष्टकम, लिंगाष्टकम, शिवमहिमन स्त्रोत इन सभी का पाठ विशेष फलदाई महाशिवरात्रि के दिन रहता है| देखिये बहुत सारे से श्लोक है मंत्र है कई बार समय की कमी के कारण या फिर हम इनका उच्चारण शुद्ध तरीके से नही कर पाते है इनका उच्चारण करने में असमर्थ रहते है इसीलिये हम इनका उच्चारण नही कर पाते है| तो यदि आप इस महाशिवरात्रि इन सभी का उच्चारण अगर नही भी कर पाए| ॐ नम शिवाय  का जाप कीजिए| और ॐ नम शिवाय के जाप करने में भी अगर आप असमर्थ है तो भोलेनाथ का बीज मंत्र जिसे हम एकाक्श्री मंत्र के नाम से जानते है उसका उच्चारण इस महाशिवरात्रि के दिन जरुर करना चाहिए| शब्द में इतनी शक्ति है की वो विश्व की पूरी स्रष्टि को एक साथ समाहित अपने आप में कर लेता है| इसी से स्रष्टि का प्रारंभ हुआ है| और इसी से स्रष्टि की समाप्ति हुई है| यानि प्रारंभिक शब्द भी है और अंतिम शब्द भी पर ही जाकर खत्म होता है स्रष्टि की जब रचना हुई थी| तो सबसे पहला अक्षर पहला नामाक्षर ॐ उत्पन्न हुआ था| ॐ का अपना एक विशेष महत्व है के नाद से हमारे शरीर में उत्पन्न जो रोगाणु है उनका नाश होता है| ॐ के उच्चारण से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है| हमारी मानसिक शांति में वृद्धि होती है एकाग्रता हमारी बढती है| के उच्चारण में वह ताकत है की समस्त रोगों से लड़ने की एक इस छोटे से अक्षर में शक्ति होती है इसीलिये ये भोलेनाथ का बीज मंत्र माना जाता है| तो इस महाशिवरात्रि आप और कुछ नही कर पाए तो पुरे दिन मंत्र का उच्चारण अपने मन में जरुर करे| अब मंत्र को हम कई तरीको से इस्तेमाल करके हमारे जीवन में रही समस्याओं का समाधान कर सकते है| तो इस महाशिवरात्रि पर का उच्चारण किस प्रकार से करे की आपके जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का निवारण हो जाये| Maha Shivratri 2020

पंडित जी के अनुसार सबसे पहले यदि आपके घर में कोई बच्चा पढाई में कमजोर है उसका पढाई में मन नही लग रहा है| बुद्धि से उसको जल्दी भूलने की बीमारी है यानि यादाश्त उसकी कमजोर है तो आपको केशरिया रंग से को जरुर लिखना चाहिए| वो केशर चंदन जो आता है उससे आप अक्षर को किसी भी सफ़ेद कागज पर अवतरित कर दे| उसको अंकित कर दे| उसके बाद में उस बच्चे के सामने उस पेपर को रख दे और उस बच्चे को उस के ऊपर ध्यान केन्द्रित करने के लिये बोले उसे बोले की वो अपने आज्ञा चक्र यानि मष्तिष्क के एक दम बीचो बीच ललाट में इस अक्षर को केन्द्रित करे इस अक्षर का ध्यान लगाने के बाद में उस बच्चे की बुद्धि बहुत ही प्रखर होंगी उसका ध्यान बढेंगा पढाई में वो धीरे धीरे तेज होने लगेगा और इस महाशिवरात्रि पर यह उपाय करने से आप देखिएगा आपके बच्चे का जो पढाई में मन नही लगता था उसका ध्यान भटकता रहता है उसमे किस तरह से उसे मुक्ति मिलती है और उसकी बुद्धि एक दम से तीक्षण हो जाती है और ये मंत्र ये जो हमने आपको उपाय बताये ये उपाय केवल बच्चो के लिये ही नही है| जो लोग शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए है या बुद्धि से जुड़े काम करते है अपनी बुद्धि को और प्रखर करना चाहते है उन सभी को ये उपाय जरुर करना चाहिए| Maha Shivratri 2020

पंडित एन एम श्रीमाली जी के अनुसार वाद विवादों से आप घीरे हुए है| कोर्ट केश के कोई मामले आपके अटके हुए है आपके अधिकारी वर्ग आपसे बहुत नाराज रहते है कोई मामले कोई समस्याएं ऐसी है जिनमे आप उलझ गए है और जिनका समाधान आपको नही मिल पा रहा है| आप अपने अधिकारियो को अपने बोस को समझा नही पा रहे है| तो आपको महाशिवरात्रि के दिन नील रंग के को एक सफ़ेद पेपर पर लिख कर के उसका ध्यान करना चाहिए| और ये आपको महाशिवरात्रि से 11 दिन तक ये उपाय करना है| इससे आपके मन में आज्ञाचक्र जाग्रत होंगा| आप सकारात्मक सोच से भर जायेंगे आपका एक ओरा जाग्रत होंगा| और उसके बाद आप अपनी बात अपने अधिकारियों तक पहुचाएंगे तो वो आपकी बातो को सुनेंगे| आपकी समस्याओं का निवारण हो जायेंगा किसी भी वाद विवाद में आप नही पड़ेंगे और जो समस्याएं कोर्ट केश बहुत लम्बे समय से आपके हल नही हो रहे है वो हल होते हुए दिखाई देंगे| तो ये एक बहुत ही छोटा सा उपाय है एकाक्श्री नामाक्षर का| Maha Shivratri 2020

मतलब शिव और इस शब्द का कितना अधिक महत्व है ये अभी हमने आपको बताया रिश्तो में आपके घर में बहुत अधिक मन मुटाव और तनाव है संतान से आपके रिश्ते अच्छे नही है दाम्पत्य जीवन सुखमय नही है कुटुंब से आपकी हर समय बहस होती रहती है परिवारिक सदस्यों में खीचा तानी का माहौल रहता है घर में एक कलह का वातावरण है आप अपने शब्दों को बोलते हो और कोई आपके पारिवारिक सदस्य उसको गलत सोच लेते है यानि गलत तरीके से उपस्थित हो जाते है तो इन समस्या से आप निपटने के लिये महाशिवरात्रि के दिन आपको सफ़ेद का ध्यान अपने मन में करना है अपने ललाट पे यानि दोनों भोहों के बीच में आपको सफ़ेद अबीर से लिखना है और आंखे आधी खुली और आधी बंद रख के आपको मंत्र का ध्यान करना है देखिये ये कार्य आप 21 दिन तक करेंगे 21 दिन के बाद में आपके अन्दर जो ओरा जाग्रत होगा इससे आपके पारिवारिक कलह का वातावरण ख़त्म हो जायेंगा| आप जो बोलेंगे वो बात उल्टी नही पड़ेंगी सभी पारिवारिक सदस्य आपकी बातो को समझेंगे आपके रिश्ते पहले की तरह सामान्य हो जायेंगे| तो है ना नाम का कितना बड़ा चमत्कार| एक अंतिम उपाय हम आपको और बतायेंगे

पंडित एन एम श्रीमाली जी के अनुसार आप बहुत लम्बे समय से बीमारियों से गुजर रहे है, आपके घर में रोगों का वास है| आप चाह कर भी रोगो से मुक्ति नही प्राप्त कर पा रहे है तो आपको कुमकुम से अक्षर को अपने सामने सफ़ेद कागज पर लिख के रखना है और उसका ध्यान आपको भोओ के बीच में लगाना है आंखे अर्द्ध बंद होनी चाहिए| अंगुली आपकी मुड़ी हुई पैक होनी चाहिए उसके बाद आप मंत्र का ध्यान कीजिए जो सीधे और उल्टे हाथ की मध्यमा अंगुली को अपने अंगूठे से मिलाकर आपको रखना है और मंत्र का ध्यान करना है| देखिएगा आपको रोगों से कितनी जल्दी मुक्ति मिलती है आपके स्वास्थ्य में बहुत ही जल्दी सुधार होता है भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और आप जल्दी ही स्वास्थ्य लाभ को प्राप्त करते है| तो अक्षर का अपना बहुत ही विशेष महत्व है स्रष्टि का सर्जन भी से हुआ है और स्रष्टि खत्म भी इस अक्षर पर जाकर होती है| हमारे वेदों में शास्त्रों में जितने भी श्लोक और मंत्र बोले जाते है| वो अक्षर से ही शुरू होते है और उस मंत्र के समापन पर भी वापस बोला जाता है तो है ना का बहुत अधिक महत्व और ये नही है ये साक्षात् शिव के स्वरुप है| ये शिव ही है जिनका उच्चारण हम अपने मन में करते है हर मंत्र के आगे लगाते है हर मंत्र के अंतिम में लगाते है|

तो इस महाशिवरात्रि पर आपको जो हमने ये उपाय बताये है ये आपको जरुर करने है Maha Shivratri 2020

शिव भगवान को कौनसी वस्तु अधिक पसंद है और इस महाशिवरात्रि पर आपको क्या करना चाहिए और क्या नही करना चाहिए

पंडित एन एम श्रीमाली जी के अनुसार हमने आपको पहले ही बता दिया है षडोपचार विधि से आप भोलेनाथ की पूजा आराधना करे अब पूजा में ये छ चीजे तो जो हमने आपको बताई वो तो आपको इस्तेमाल करनी ही है उसके अलावा भोलेनाथ को बेलपत्र बहुत ही प्रिय है बेलपत्र से आप भोलेनाथ को प्रसन्न कर सकते है वो जल्दी ही बेलपत्र से प्रसन्न हो जाते है साथ ही नैवेद्य में आंक, धतुरे भोलेनाथ को बहुत अधिक प्रिय है आपको उन्हें चढ़ाना चाहिए मौसमी फल जैसे गाजर, बेर या जो भी मौसमी फल आ रहा है उसको भी भोलेनाथ को महाशिवरात्रि के दिन अर्पित करना चाहिए भोलेनाथ को महाशिवरात्रि के दिन मतलब महाशिवरात्रि का एक दिन ऐसा होता है जिस दिन भोलेनाथ को कुमकुम चढ़ाया जाता है| क्युकी इस दिन भोलेनाथ का माता पार्वती के साथ में विवाह हुआ था| इसीलिये केवल महाशिवरात्रि के दिन ही कुमकुम भोलोनाथ को चढ़ा सकते है| इसीलिये महाशिवरात्रि के दिन कुमकुम भोलेनाथ को अवश्य चढ़ाये| अन्यथा महाशिवरात्रि के अलावा पुरे साल भोलेनाथ की कभी भी पूजा करे तो कुमकुम भोलेनाथ को नही चढ़ता है| इसलिये इसका विशेष ख्याल रखे| भोलेनाथ को चंदन अतिप्रिय है| और केसर चंदन हो तो वो और भी अच्छा रहेंगा| तो आप भोलेनाथ की जब पूजा आराधना करे तो चंदन का उपयोग जरुर करे भोलेनाथ को जब हम मंदिरों में जाते है शिवालयों में जाते है तो हम भोलेनाथ की परिक्रमा हर देवता की अपनी परिक्रमा होती है हम लगाते जरुर है परिक्रमा परन्तु भोलेनाथ को कभी भी पूरी परिक्रमा नही लगाई जाती है| भोलेनाथ को आधी परिक्रमा लगाने का विधान है तो आप इस बात का जरुर ध्यान रखे की महाशिवरात्रि के दिन आप भोलेनाथ के शिवालयों में दर्शन करने जाए तो उनकी आधी परिक्रमा दे नाकि पूरी इस बात का आपको विशेष ध्यान रखना चाहिए| तो हमने आपको बहुत सारी महाशिवरात्रि से जुडी जानकारी दी है, शिव से जुडी जानकारी दी है, शिवलिंग से नामाक्षर की जानकारी आज आपको प्रदान की है| Maha Shivratri 2020

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