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Kese Kare Ganesh Yantra Se BHagwan Ganesh Ji KI pooja

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Kese Kare Ganesh Yantra Ke BHagwan Ganesh Ji KI pooja


Ganesh Yantra भगवान गणेश को भगवान शिव तथा मां पार्वती के पुत्र के रूप में जाना जाता है जिनकी पूजा तथा उपासना से कार्यों में आने वाले विघ्न बाधाएं दूर हो जातीं हैं तथा कार्यों में सफलता प्राप्त होती है जिसके चलते ज्योतिष में हजारों सालों से श्री गणेश मंत्र का प्रयोग भगवान गणेश का आशिर्वाद प्राप्त करने के लिए तथा अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए चलता रहा है वैदिक ज्योतिषी श्री गणेश यंत्र के प्रयोग का परामर्श नये कार्यों को शुरु करने के लिए तथा उनमें सफलता प्राप्त करने के लिए, कार्यों में आने वाली विघ्न बाधाओं को दूर करने के लिए, सुख, समृद्धि, धन, वैभव, श्री गणेश कृपा तथा अन्य बहुत सी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता हैं
 
श्री गणेश यंत्र को स्थापित करने से प्राप्त होने वाले लाभ किसी जातक को पूर्ण रूप से तभी प्राप्त हो सकते हैं जब जातक द्वारा स्थापित किया जाने वाला श्री गणेश यंत्र शुद्धिकरण, प्राण प्रतिष्ठा तथा उर्जा संग्रह की प्रक्रियाओं के माध्यम से विधिवत बनाया गया हो तथा विधिवत न बनाए गए श्री गणेश यंत्र को स्थापित करना कोई विशेष लाभ प्रदान करने में सक्षम नहीं होता।  Ganesh Yantra शुद्धिकरण के पश्चात श्री गणेश यंत्र को श्री गणेश मंत्रो की सहायता से एक विशेष विधि के माध्यम से उर्जा प्रदान की जाती है किसी भी श्री गणेश यंत्र की वास्तविक शक्ति इस यंत्र को श्री गणेश मंत्रों द्वारा प्रदान की गई शक्ति के अनुपात में ही होती है तथा इस प्रकार जितने अधिक मंत्रों की गणेश के साथ किसी श्री गणेश यंत्र को उर्जा प्रदान की गई हो, उतना ही वह श्री गणेश यंत्र शक्तिशाली होगा। 
 
विधिवत बनाया गया श्री गणेश यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषि के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए श्री गणेश यंत्र को बुधवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिएGanesh Yantra  इसके अतिरिक्त आप अपने श्री गणेश यंत्र को इस दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं।
 
श्री गणेश यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार श्री गणेश मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने श्री गणेश यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, भगवान गणेश से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। आपका श्री गणेश यंत्र अब स्थापित हो चुका है तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने श्री गणेश यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 श्री गणेश बीज मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। यदि आपने अपने श्री गणेश यंत्र को अपने बटुए अथवा गले में धारण किया है तो स्नान के बाद इसे अपने हाथ में लें तथा उपरोक्त विधि से इसका पूजन करें तथा अपना इच्छित फल इससे मांगें। अपने पास स्थापित किए गये श्री गणेश यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके श्री गणेश यंत्र के मध्य एक गणेशशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है  गणेश यंत्र सबसे महत्वपूर्ण, शुभ और शक्तिशाली यंत्र होता है जो न केवल लाभ देता है तथा व्यक्ति के लिए शुभ फलदायक होता है. गणेश भगवान को विघ्नहर्ता तथा सर्वकार्यों में प्रथम पूज्य माना जाता है, इन्हीं के यंत्र स्वरुप को अपनाकर व्यक्ति सभी कष्टों से मुक्ति एवं सुख तथा समृद्धि पाता है. यह यंत्र समस्त सांसारिक इच्छाओँ को पूरा करने का स्रोत है. किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करनी हो तो भगवान गणेश की पूजा उत्तम फल प्रदान करने वाली होती है. भगवान गणेश का पूजन यंत्र के रूप में करने से शुभ फलों में वृद्धि होती है  चिउड़ा अथवा नारिकेल अथवा मरिच से प्रतिदिन एक हजार आहुति देने से एक महीने के भीतर बहुत बड़ी सम्पत्ति प्राप्त होती है। जीरा, सेंधा नमक एवं काली मिर्च से मिश्रित अष्टद्रव्यों से प्रतिदिन एक हजार आहुति देने से व्यक्ति एक ही पक्ष (15दिनों) में कुबेर के समान धनवान् हो जाता है। इतना ही नहीं प्रतिदिन मूलमन्त्र से 444 बार तर्पण करने से मनुष्यों को मनो वांिछत फल की प्राप्ति हो जाती हैश्री गणेश यंत्र के सामने गाय के घी से मिश्रित अन्न की आहुतियाँ देने से समृद्धि की कमी नहीं होती. Ganesh Yantra अष्टद्रव्यों से प्रतिदिन आहुति देने से व्यक्ति धनवान बनता है. भगवान श्रीगणेश यंत्र की स्थापना करने पर यंत्र के समक्ष  सुबह-शाम दीपक व भोग लगाएं तथा आरती किया करें. श्रीगणेश यंत्र की स्थापना ईशाण कोण में करें. स्थापना इस प्रकार करें कि यंत्र का मुख पश्चिम की ओर रहे.
 
गणेश यंत्र महत्व और लाभ | Benefits and Significance of Ganesh Yantra
 
Ganesh Yantra यंत्र की पूजा, साधना की एक ऐसी विधि है, जिसका उल्लेख शास्त्रों में दिया गया है. यंत्र स्तोत्र का पाठ करने मात्र से इनकी आराधना हो जाती है साधक को आसन पर बैठकर दीपक जलाकर यज्ञ करना चाहिए इससे उसके सारे मनोरथ पूर्ण होंगे इसकी आराधना करने से साधक के शत्रुओं का शमन तथा कष्टों का निवारण होता है.  परंतु विशेष रूप से बुद्धि, शास्त्रार्थ और प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करने, सर्वश्रेष्ठ, प्रभावी एवं उपयुक्त मानी गई है. असाध्य रोगों से छुटकारा पाने, संकट से उद्धार पाने और नवग्रहों के दोष से मुक्ति के लिए भी इस मंत्र की साधना की जा सकती है.  वैदिक एवं पौराणिक शास्त्रों में इनका वर्णन अनेक स्थलों पर मिलता है. इसका जप नित्य नियत संख्या में ही करना चाहिए जप का दशांश हवन, तर्पण करके ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए.श्रीगणेश यंत्र का नित्य विधि-विधान से पूजन करने से विशेष उपलब्धियां और सिद्धियां प्राप्त होती है। धन की प्राप्ति, अष्ट सिद्धि एवं नव निधि की प्राप्ति के लिए यह अचूक यंत्र है। Ganesh Yantra

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