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Kaal Sarp Pooja Vidhi कालसर्प पूजा क्यों की जाती है और कैसे की जाती है विधि जाने | कालसर्प दोष |

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Kaal Sarp Pooja Vidhi कालसर्प पूजा क्यों की जाती है और कैसे की जाती है विधि जाने

कालसर्प योग

यदि आपकी कुंडली में भी कालसर्प योग की स्थिति बनी हुई है यह स्थिति तब बनती है जब राहू और केतु इन दोनों ग्रहों के बीच में सभी ग्रह आ जाते हैं तब कालसर्प योग की स्थिति बनती है। कई बार कालसर्प पूर्ण रूपेण होता है और कई बार आंशिक कालसर्प योग भी किसी किसी की कुंडली में बनता है। ये योग यदि आपकी कुंडली में हैं तो निश्चित तौर पर आपको कहीं न कहीं कामों के अंदर भटकाव की स्थितियां आप महसूस करते होंगे। जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग की स्थिति हो जाती है उस व्यक्ति के काम अटक अटक कर होते हैं। उसे अपने कामों को पूर्ण करने के लिए बहुत एफर्ट डालना पड़ता है। कई बार 99 पर  जाकर आपका काम अटक जाता है और उस वजह से जीरो से उस व्यक्ति को काम वापस से प्रारंभ करना पड़ता है। व्यक्ति की लाइफ थोड़ी सी स्ट्रगलिंग हो जाती है। अब कालसर्प योग से मुक्ति कैसे प्राप्त की जाए । इसके कितने प्रकार हैं और इसकी पूजन विधि किस प्रकार से की जाती है आदि सभी जानकारी आपको प्रदान करेंगे | सबसे पहले हम आपको बताना चाहते है  कि कालसर्प योग 12 प्रकार के होते हैं | 12 प्रकार के इस प्रकार है- Kaal Sarp Pooja Vidhi

  1. अनंत कालसर्प योग
  2. कुलिक कालसर्प योग
  3. वासुकि कालसर्प योग
  4. शंखपाल कालसर्प योग
  5. पद्म कालसर्प योग
  6. महापद्म कालसर्प योग
  7. तक्षक कालसर्प योग
  8. कर्कोटक कालसर्प योग
  9. शंखचुड़ कालसर्प योग
  10. घातक कालसर्प योग
  11. विषधर कालसर्प योग
  12. शेषनाग कालसर्प योग

ये 12 प्रकार के कालसर्प योग व्यक्ति की कुंडली में पाए जाते हैं और ज्योतिषशास्त्र में हम 12 प्रकार के कालसर्प योग की चर्चा करते हैं। इस कालसर्प योग की वजह से हमारे जीवन में जो प्रभाव पड़ते हैं उसके बारे में हमने आपको बताया अब इसका उपाय क्या किया जाए। Kaal Sarp Pooja Vidhi

उपाय  

सबसे प्रभावी उपाय कालसर्प योग का होता है कि इसकी पूजा की जाए। इसका निवारण किया जाए ताकि व्यक्ति के काम बनने लगे | उसकी लाइफ में वो ग्रोथ करे | उन्नति के शिखर पर पहुंचे क्योंकि अगर इस योग का निवारण नहीं हो तो व्यक्ति के जीवन में स्ट्रगल की स्थिति बार बार उत्पन्न होती है। कार्य अटक कर ही होते हैं वो व्यक्ति अपने जीवन में उन्नति नहीं कर पाता। अब हमारे यहां पर हमारे संस्थान में हमारे प्रखांड पंडितों के द्वारा कालसर्प योग निवारण की पूजा विशेष रूप से करवाई जाती है। जो हमारे पंडित इस पूजा को विधि विधान से करते हैं। इसकी विधि अब हम आपको आज के दिन बताने वाले है आप चाहें तो हमारे संस्थान में आकर यहां आकर आप कालसर्प योग की पूजा करवा सकते हैं और अगर आप आने में असमर्थ हैं जैसे हमारे कई क्लाइंट जो आउट ऑफ इंडिया के होते हैं और दूरी की वजह से वे नहीं आ पाते हैं तो ऑनलाइन हमारे द्वारा इस पूजा को संपन्न करवाया जाता है। अब ऑनलाइन संपन्न करवाते समय यजमान खुद वीडियो कॉल के माध्यम से उपस्थित रहते हैं आप चाहें तो इस पूरी पूजा का लाभ बैठकर वीडियो कॉल के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं और अगर आप पूरे टाइम बैठने में असमर्थ है तो संकल्प लेकर आप इस पूजा को अपने लिए समर्पित करके जा सकते हैं उसके बाद में हमारे पंडितों के द्वारा ये पूजा विधि विधान से करवाई जाती है। इसका पूरा वीडियो आपको भेजा जाता है। Kaal Sarp Pooja Vidhi

पूजा के प्रारम्भ की प्रक्रिया

संकल्प की प्रक्रिया

  1. आपका नाम, पिता का नाम, गोत्र आपको पता होना चाहिए। उस समय पंडित जी जैसे जैसे संकल्प बोलते है वैसे वैसे संकल्प आपको भी बुलवाया जाता है। यानि यजमान को बुलवाया जाता है और उसके बाद में पूजा प्रारंभ की जाती है तो सबसे पहले संकल्प की प्रक्रिया होती है |
  2. उसके बाद में गणेश पूजन क्योंकि आप सभी जानते हैं कि गणेश जी का आह्वान किए बिना किसी भी पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। प्रथम पूज्य इसीलिए सबसे पहले उनका आह्वान किया जाता है।

षोडश मातृका पूजा का प्रारम्भ 

  1. उसके बाद में षोडश मातृका बनाई जाती है और षोडश मातृका का आह्वान किया जाता है जिसमें सोलह देवियां शामिल होती है उसमें यजमान की कुलदेवी भी शामिल होती है।
  2. उन षोडश मातृका पूजन के साथ साथ यजमान की कुलदेवी का पूजन भी किया जाता है। उसके बाद में नव ग्रह बनाए जाते हैं। चावल के द्वारा नवग्रह स्थापित किए जाते हैं उन नौ ग्रह का आह्वान किया जाता है।
  3. नौ ग्रहों की पूजा आराधना की जाती है। सर्व देवता पूजन भी उसके बाद में संपन्न किया जाता है सभी देवताओं का आह्वान किया जाता है | अब देखिए कि पूजा के अंदर हम ये विधि हर पूजा में अर्पित करते हैं हर पूजा में इस विधि को किया जाता है। कारण कि जब नौ ग्रहों का आह्वान कर दिया हमारी पूजा में वो सम्मिलित हो गए | सभी देवता पूजा में सम्मिलित हो गए।
  4. हमारी सोलह मातृका यानी सोलह देवियां जिसमें कुल देवी भी शामिल है वे सभी पूजा में सम्मिलित हो गए तो हमारी पूजा निर्विघ्न संपन्न होती है और हम इनका आह्वान इसलिए करते हैं ताकि हमारी पूजा निर्विघ्न संपन्न और उस पूजा का यथेष्ट फल यजमान को प्राप्त हो सके।

नव ग्रहों की पूजा

  1. नव ग्रहों की पूजा करते हैं उसके बाद में जो यंत्र हम पूजा में रखते हैं उन यंत्रों का पूजन विधि विधान से किया जाता है उन्हें स्थापित किया जाता है ताकि वो प्राण प्रतिष्ठित अभिमंत्रित और सिद्ध हो सके।
  2. पूजन के बाद में वो यंत्र यजमान को पहुंचाए जाते हैं वो अपने घर के पूजा कक्ष में उन्हें स्थापित करते हैं ताकि उसका प्रभाव क्षेत्र उस पूजा का प्रभाव उन पर पड़े और उन यंत्रों का प्रतिदिन दर्शन से भी उनको काफी अच्छा रिजल्ट प्राप्त होता है | उनकी समस्या दूर हो जाती है।  उसके बाद में आदि देवता प्रत्यादी देवता राहू और काल का पूजन किया जाता है।
  3. उसके बाद में नाग देवता क्योंकि कालसर्प में नाग देवता का पूजन बहुत मायने रखता है। उनके नामों का ही ये कालसर्प दोष माना जाता है। कुंडली में इसलिए नाग देवता का आह्वान करना उनका पूजन करना बहुत ज्यादा आवश्यक रहता है।
  4. दिग्पाल आदि देवता प्रत्याशी देवता और नाग देवता का पूजन किया जाता है|

हवन प्रारंभ की प्रक्रिया

  1. उसके बाद में हवन प्रारंभ होता है और हवन में राहू केतु नाग देवता और ग्रह शांति के मंत्रों द्वारा आहुतियां दी जाती है।
  2. साथ ही मसूर की दाल उड़द की दाल और दही से आहुतियां हवन में दी जाती है |
  3. उसके पश्चात हवन किया जाता है जिसमें नाग देवता के मंत्र राहू और केतु के मंत्र और ग्रह शांति के मंत्रों के द्वारा मसूर की दाल उड़द की दाल और दही के द्वारा आहूतियां दी जाती है और हवन संपन्न किया जाता है
  4. उसके बाद में बलिदान और लघु अभिषेक किया जाता है और उसके बाद में चांदी के नाग नागिन की जोकि हम पूरी पूजा में स्थापित कर रखते हैं उसको किसी पवित्र सरोवर नदी या तालाब में प्रवाहित किया जाता है।
  5. उसके बाद में क्षमा याचना और समापन इस पूजा का किया जाता है | समापन में क्षमा याचना इसलिए करते है क्योंकि  पूजा के समय कोई मंत्रोच्चारण में त्रुटि हो गई हो पूजा करते समय कुछ हमसे गलती हो गई हो तो हम देवी देवताओं से आह्वान करते हैं कि हमे इस पूजा का फल जरूर प्रदान करें और हमें क्षमा प्रदान करें और हमें आशीर्वाद दें | उसके बाद में ब्राह्मणों के द्वारा यजमान को इस पूजा का फल प्राप्त हो इस उद्देश्य से आशीर्वाद दिया जाता है और ये पूजा संपन्न की जाती है।

ये पूजा हम बहुत ही विधि विधान से इस पूजा को जब हम संपन्न करते हैं तो इस पूजा को प्रारंभ करने से पहले भी हम कुछ बातों का ध्यान रखते हैं। ये सबसे प्रमुख बात तो ये है कि यजमान के नाम से शुभ मुहूर्त देखकर सही दिन देख कर उस पूजा के हिसाब से उपयुक्त चौघड़िया देखकर तिथि और वार देखकर उसके बाद में हम इस पूजा का आयोजन करते हैं। ये पूजा यजमान के नाम से की जाती है ताकि इसका प्रभाव यजमान के ऊपर बहुत अच्छा पड़े और इस पूजा का अच्छा फल उन्हें प्राप्त हो | कोई भी आप हवन करते है अपने घर में | कोई भी शुभ काम करते हैं तब भी आप देखिएगा कि आपके घर में एक पॉजिटिवनेस आती  है और उस पूजा का बहुत जल्दी आपको परिणाम प्राप्त होता है आपके ऊपर उसका प्रभाव पड़ता है तो पूजा इसीलिए बहुत ही आवश्यक है और पूजन बहुत प्रभावशाली रहती है इसलिए सबसे पहले अगर हो सके आप समर्थवान है और पूजा करवा सकते हैं तो पूजा के माध्यम से ही आप अपनी समस्या का हल निकालें और जब बड़े बड़े दोष व्यक्ति के जीवन में होते हैं तो वो दोष पूजा के माध्यम से ही दूर किए जा सकते हैं। श्री राधे। Kaal Sarp Pooja Vidhi[/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_video link=”https://youtu.be/pWIyyE4rQ2w” el_width=”70″ align=”center” image_poster_switch=”no”][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text text_larger=”no”]Note: Daily, Weekly, Monthly, and Annual Horoscope is being provided by Pandit N.M.Shrimali Ji, almost free. To know daily, weekly, monthly and annual horoscopes and end your problems related to your life click on (Kundali Vishleshan) or contact Pandit NM Shrimali  Whatsapp No. 9929391753, E-Mail- [email protected]

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