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पंचतत्व का मनुष्य के जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव एवं पंचतत्व के असंतुलन की स्थिति में किये जाने वाले उपाय – Effects of five elements on human life

Effects of five elements on human life

पंचतत्व का मनुष्य के जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव एवं पंचतत्व के असंतुलन की स्थिति में किये जाने वाले उपाय – Effects of five elements on human life

Effects of five elements on human life – गुरु माँ निधि जी श्रीमाली ने बताया है की  इस सृष्टि की रचना पंचतत्वों से मिलकर हुई है-आकाश, पृथ्वी, जल, वायु और अग्नि। हालांकि इन सबका स्वतंत्र अस्तित्व है,किन्तु जब इन्हें एकत्रित किया जाता है तो इनकी सामूहिक ऊर्जा का प्रभाव लाभप्रद होता है। किसी भी निवास स्थल पर पंचतत्वों की संतुलित उपस्थिति अनिवार्य है, इनसे घर प्रकंपित होता है और निरंतर सकारात्मक ऊर्जाओं का प्रवाह बना रहता है। यदि भवन का प्रारूप इन पंच महाभूतों का संतुलन रखते हुए बनाया जाए तो उसमें निवास करने वालों के शरीर की आंतरिक ऊर्जाएं उनसे सांमजस्य स्थापित करके सामान्य बनी रहेंगी और वे स्वस्थ्य व संपन्न रहेंगे। Effects of five elements on human life

आकाश – पांच तत्वों में आकाश एक ऐसा तत्व है जो सुनने की शक्ति प्रदान करता है।  आकाश तत्व के स्वामी ग्रह देव गुरु बृहस्पति है तथा आराध्य देवता परमपिता ब्रह्मा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में आकाश तत्व का सही अनुपात बनाए रखने के लिए घर में मीठे स्वर और शांति भरा माहौल होना बेहद जरूरी है।  यदि घर में आकाश तत्व में कमी होगी तो घर में आकर लड़ाई झगड़ें होते रहेंगे। 

घर का मध्य भाग यानी की ब्रह्मस्थान – आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए इस हिस्से का खुला होना बेहद जरूरी है जिससे की इस हिस्से में वायु का गमन हो सके। यही कारण था कि पुराने जमाने के लोग घर के मध्य में खुला छत रखते थे ताकि घर के कोने कोने तक रोशनी और वायु पहुंच सके।  ऐसा करने से घर के लोगो के बिच प्रेम भरा सम्बन्ध बना रहता है। 

 पृथ्वी पांच तत्वों में पृथ्वी एक ऐसी तत्व है जो प्राणियों को सूंघने की शक्ति प्रदान करती है। पृथ्वी तत्व पर 3 तत्व विशेष रूप से हावी होते है और वो तत्व है : अग्नि, जल और वायु तत्व। पृथ्वी अर्थात मिट्टी या भूमि इसलिए भूमि का चयन करते समय उस भूमि के आकार और प्रकार पर विशेष रूप से ध्यान दें चाहिए और तभी निवास स्थल, व्यवसाय स्थल या फिर धार्मिक स्थल का चयन करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, भवन या निवास स्थल के लिए हमेशा वर्गाकार या फिर आयताकार भूमि का ही चयन करना चाहिए। असामान्य आकार वाले भूमि का चयन बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।  भूमि का चयन इस प्रकार करें कि भवन के दक्षिण पश्चिम यानी की नैऋत्य कोण पर पृथ्वी तत्व का स्वामित्व और आधिपत्य होना चाहिए। दक्षिण पश्चिम दिशा में ज्यादा भारी निर्माण करना चाहिए। Effects of five elements on human life

पृथ्वी की सबसे शक्तिशाली गुण है सहनशीलता इसलिए दक्षिण पश्चिम में भारी निर्माण या मोटी दीवारों का निर्माण करना अत्यधिक शुभ साबित होता है।  इस दिशा में भारी वस्तुओं को रखना शुभ फलदायी साबित होता है। इस बात पर खास ध्यान रखें की दक्षिण पश्चिम में पृथ्वी तत्व की कमी होने से घर में रहने वाले लोगों के संबंधों में असुरक्षा और मनमुटाव उत्पन्न होती है ।

जल- पांच तत्वों में जल एक ऐसी तत्व है जो प्राणियों को सूंघने की शक्ति प्रदान करती है। जल तत्व भूमि या निवास स्थल के उत्तर पूर्व दिशा से संबंधित है । वरुण देव जल तत्व के स्वामी है। मनुष्य के शरीर में जल तत्व स्वाद की पहचान देता है। घर के उत्तर पूर्व दिशा में जल तत्व का अधिपत्य होने के कारण इस दिशा में पानी की टंकी, हैंडपंप, दर्पण या पारदर्शी कांच रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में बरसात का पानी या साफ़ सुथरा जल का स्त्रोत होना शुभ है। लेकिन स्नानघर के लिए घर का पूर्वी हिस्सा और सेप्टिक टैंक के लिए उत्तर पश्चिम दिशा शुभ फलदायी होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में जल तत्व की कमी होने से परिवार के सदस्यों के बीच अनबन बनी रहती है।  

अग्नि तत्त्व-

 पंचतत्वों में अग्नि एक ऐसा तत्व है जो प्राणियों को स्पर्श का ज्ञान प्रदान करता है। प्राणियों में स्पर्श का ज्ञान पांच तत्वों में 2 तत्व प्रदान करते है : पहला – अग्नि और दूसरा वायु। भूमि अथवा भूखंड के दक्षिण पूर्व यानि की आग्नेय कोण में अग्नि तत्व का प्रभाव और आधिपत्य होता है। इसलिए  दक्षिण पूर्व में अग्नि से जुड़े स्थान जैसे की रसोईघर रखना चाहिए।  इसके अलावा इस स्थान में बिजली का मीटर लगवाना शुभ होता है। पंचतत्वों में अग्नि एक ऐसा तत्व है जो प्राणियों को स्पर्श का ज्ञान प्रदान करता है। प्राणियों में स्पर्श का ज्ञान पांच तत्वों में 2 तत्व प्रदान करते है : पहला – अग्नि और दूसरा वायु। भूमि अथवा भूखंड के दक्षिण पूर्व यानि की आग्नेय कोण में अग्नि तत्व का प्रभाव और आधिपत्य होता है। इसलिए  दक्षिण पूर्व में अग्नि से जुड़े स्थान जैसे की रसोईघर रखना चाहिए।  इसके अलावा इस स्थान में बिजली का मीटर लगवाना शुभ होता है।  Effects of five elements on human life

वायु तत्त्व- वायु के बिना तो जीवन की कल्पना ही असंभव है। जल की तरह इसकी दिशा भी गोलाकार है, परन्तु इसकी भरपूर मौजूदगी वास्तु शास्त्रानुसार उत्तर- पश्चिम में मानी गई है, अतः प्रचूर प्राण वायु प्राप्त करने के लिए निर्माण इस प्रकार किया जाए कि उत्तर-पश्चिम से अबाध वायु संचार हो सके ।

इसके लिए उत्तर और पश्चिम दिशाओं में खिड़कियां और रोशनदान रखे जाएं, खुला हिस्सा ज्यादा छोड़ा जाए। एयर कंडीशनर, कूलर या डक्टिंग उत्तर पश्चिम में लगाएं। वायु तत्त्व की मौजूदगी आवास में हमेशा रहे।

इस प्रकार पंच तत्त्वों का ध्यान रखते हुए यदि वास्तु सम्मत घर का निर्माण किया जाए तो उसमें रहने वाले प्राणी हमेशा सुखद स्थितियों में रहते है।

गुरु माँ निधि जी श्रीमाली के अनुसार पंचतत्व असंतुलित होने का व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव  है 

जल तत्व के असंतुलित होने का प्रभाव

यदि घर के उत्तरी भाग में कोई दोष है तो जल तत्व असंतुलित हो जाएगा. ऐसे घर में रहने वाले लोगों की सोच सिमटी हुई होती है. उन्नति के अवसर कम प्राप्त होते हैं, जिससे कि ये जिंदगी को ऊंचे मुकाम पर ले जाने के बजाय जिंदा रहने की आवश्यकताओं को पूरी करने में ही लगे रहते हैं. इस कारण से करियर में भी कोई खास बढ़त नहीं मिलती है. असुरक्षा की भावना बनी रहती है. छोटी-छोटी बातें परेशानियों का सबब बन जाती हैं, जिससे चिंता व तनाव बना रहता है. यदि हालात काबू न किया जाए तो कंट्रोल मुश्किल हो जाता है. वापस नार्मल स्थिति कठिनाई से बनती है. Effects of five elements on human life

वायु तत्व के असंतुलन से होते हैं ये प्रभाव

घर में यदि वायु तत्व असंतुलित हो तो घर के सदस्य कई प्रकार के रोगों से पीडि़त हो सकते हैं. त्वचा रोग, जोड़ों में दर्द होना, अधिक तनाव होना आदि शारीरिक तकलीफें हो सकती हैं. ऐसे लोग अत्यधिक गुस्सा करने वाले हो सकते हैं. लोगों के प्रति भी इनकी धारणा गुस्से वाली हो सकती है. घर में वायु तत्व का असंतुलन कार्यो में रुकावटें पैदा करता है. बनते कार्य रुकने लगते है, जिसके परिणामस्वरुप व्यक्ति गुस्से वाला हो जाता है. लोग भी ऐसे मिलते हैं, जिनसे कार्यो में मदद नही मिलती हैं. जिससे लोगों के प्रति नकारात्मकता का भाव पैदा हो जाता है. व्यक्ति सभी पर ही गुस्सा प्रकट करने लगता है.

आकाश तत्व का असंतुलित होना

आकाश तत्व के असंतुलन का असर व्यक्ति की सोच पर पड़ता है. सोच में किसी भी कार्य को लेकर शंकाएं आने लगती हैं. विचारों की उलझन के कारण व्यक्ति की दक्षता घटने लगती है. इसी कारण से अपनी बात को प्रभावी ढंग से नहीं कह पाता है. फलस्वरुप उसे अपने कार्य में, व्यवसाय में नुकसान उठाना पड़ सकता है

पृथ्वी तत्व का असंतुलन का प्रभाव

पृथ्वी तत्व का असर संबंधो पर होने के कारण यह रिश्तेदारों से संबंध खराब करवाता है. वजह कुछ भी हो, लेकिन नाते-रिश्तेदारों में उठना-बैठना कम करवा देता है. स्थितियां कुछ ऐसी बनने लगती हैं कि वैवाहिक जीवन की खुशियां कम होने लगती हैं. शादी टूटने के आसार भी नजर आने लगते हैं. बच्चे भी अपने करियर में खास प्रगति नहीं कर पाते हैं. करियर में उतार-चढ़ाव बना रहता है.

घर में अग्नि तत्व के असंतुलन होने के प्रभाव

अग्नि तत्व के असंतुलित हो जाने से बिना वजह अपयश मिल सकता है. समाज में अपनी पहचान बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. अग्नि तत्व का संबंध सुरक्षा से है. इसके असंतुलन से चोरी एक्सीडेंट आदि समस्याएं होने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. उत्साह की कमी से व्यक्ति भयभीत व संकोची स्वभाव का हो जाता है. पैसे की तंगी महसूस होती है. घर में शादी संबंध तय होने में दिक्कतें आती हैं. एसिडिटी, बदहजमी जैसे पेट संबंधी रोग हो सकते हैं. Effects of five elements on human life

पंचतत्व  अंसतुलन प्रभाव को दूर करने के उपाय  Effects of five elements on human life

  • घर के पश्चिम का जो हिस्सा दक्षिण के साथ जुड़ा हो उसमें भारी सामान, मशीनें आदि रखें. 
  • घर के पश्चिम का जो हिस्सा उत्तर दिशा के साथ जुड़ा हो उस और पेड़-पौधे लगाएं.
  •  घर के पश्चिम में मध्यम भारी सामानों को जगह दी जा सकती है. 
  • वास्तुदोष नाशक यंत्र घर में रख सकते हैं
  • सेंटर की जमीन पर भी तुलसी का पौधा या कोई अन्य पेड़-पौधे न लगाएं
  • घर के पूजन कक्ष में स्फटिक का श्रीयंत्र रखें. Effects of five elements on human life

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