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Dussehra Vijay Dashmi

Dussehra Vijay Dashmi

Dussehra : Vijay Dashmi


Dussehra Vijay Dashmi

बुराई पर अच्छाई का दिन है विजय दशमी Dussehra Vijay Dashmi

हिन्दू धर्म में दशहरा अथवा विजय दशमी Dussehra Vijay Dashmi का बहुत ही महत्व है। यह दिन बुराई पर अच्छाई, झूठ पर सच्चाई की विजय का प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष आश्विन मास की दशमी तिथि पर यह अत्यंत शुभ पर्व पूरे भारत में उल्लास के साथ मनाया जाता है।
दशहरा का पावन पर्व न केवल हमारी आध्यात्मिक ऊर्जा को ही बढ़ाता है। बल्कि यह दिन शास्त्रों में किसी भी मांगलिक कार्य के लिए वर्ष भर के प्रशस्त दिनों में से भी एक है। सभी तरह के शुभ कार्य व अनुष्ठान आदि दशहरा के दिन अनंत फल देने वाले हो जाते हैं। दशहरा शक्तिपूजन का दिन है। इसीलिए प्राचीन शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप आज तक क्षत्रिय-क्षत्रपों के यहां शक्ति के पूजन के रूप में अस्त्र-शस्त्रों का अर्चना-पूजन होता है। सभी कार्यों में सिद्धि प्रदान करने वाला दशहरा पर्व है। जो सभी मनोवांछित फल प्रदान करता है।

पंडित एन एम श्रीमाली के अनुसार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन को विजयदशमी Dussehra Vijay Dashmi भी कहते हैं। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए इस दशमी को विजयदशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा। इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा देता है।

विजयदशमी की रात को इन उपायों के करने से प्राप्त होगी संपति और यश

आईए जानें  Dussehra Vijay Dashmi विजयदशमी के दिन गोमती चक्र  से कुछ उपाय कर धन संबंधी समस्याओं को कैसे दूर किया जा सकता है:-

– अगर आप का पैसा कहीं रूका हुआ हो अथवा हर जगह हानि ही हानि हो रही हो ऐसे में दशहरे के दिन कुल 11 गोमती चक्र का हल्दी से तिलक करें। तत्पश्चात भगवान भोलेनाथ को याद करते हुए इन्हें पीले कपड़े में बांधकर नदी में प्रवाहित कर दें।

– अगर परिवार के किसी सदस्य को बार-बार नजर लग रही तो तीन गोमती च्रक लेकर उसे अपने उपर सात बार उतार कर पीछे की ओर फेंक दें। लेकिन ध्यान रहे भूलकर भी पीछे मुड़कर ना देखें।

– यदि कोई दुश्मन आपको बार-बार परेशान कर रहा हो तो हनुमानजी के दाएं कंधे से सिंदूर लेकर अभिमंत्रित गोमती चक्र पर तिलक करें तथा उसे लाल कपड़े में बांधकर अपने अपने गले में पहले लें।

– आवश्यकता से अधिक खर्च होता हो तो दशहरे के दिन अभिमंत्रित 11 गोमती चक्रों को पीले कपड़े में बांधकर लक्ष्मीजी की पूजा करें। इन चक्रों को घर के धनस्थान या फिर तिजोरी में रख दें।

 

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