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Dakshinavarti Shankh Advantages | दक्षिणावर्ती शंख के लाभ

Dakshinavarti Shankh

Dakshinavarti Shankh


धार्मिक ग्रंथों में शंख का विशेष महत्व है। अष्ट सिद्धियों व नव निधियों में शंख को भी एक अमूल्य निधि और रत्न कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में शंख की अपार महिमा एवं उपयोगिता है। देवी-देवताओं के पूजन में ज्योतिष और तांत्रिक साधनाओं और मांगलिक कार्यों के प्रारम्भ में इसकी विशेष उपयोगिता है।  भगवान विष्णु के चार आयुधों में शंख प्रमुख है। प्रत्येक विशेष पूजा में शंख द्वारा अभिषेक का महत्तव है। समुद्र देव द्वारा निर्मित इस तेजस्वी शंख को जो मनुष्य अपने घर और व्यापार स्थल के पूजा स्थान अथवा तिजोरी में रखकर नित्य पूजा करता है, उस व्यक्ति की दरिद्रता, अभाव, असफलता और सभी रोगों का नाश होता है। ऎसा शास्त्रों में भी लिखा है। मां लक्ष्मी और शंख की उत्पत्ति समुद्र से एक साथ ही हुई है।इसलिए शंख को देवी लक्ष्मी का सहोदर अर्थात भाई कहा जाता है और ऐसी मान्यता है की शंख जिसके घर में होता है, वहां लक्ष्मी स्थिर होकर रहती है और सब मंगल ही मंगल होता है शंख समुद्र मंथन के समय प्राप्त चौदह अनमोल रत्नों में से एक है।

Dakshinavarti Shankh,

By Pandit NM Shrimali

शंख दो प्रकार के होते हैं:- दक्षिणावर्ती एवं वामावर्ती। लेकिन एक तीसरे प्रकार का भी शंख पाया जाता है जिसे मध्यावर्ती या गणेश शंख कहा गया है।

* वामवर्ती शंख का पेट बाईं ओर खुला होता है। इसके बजाने के लिए एक छिद्र होता है। इसकी ध्वनि से रोगोत्पादक कीटाणु कमजोर पड़ जाते हैं।

दक्षिणावर्ती शंख का पेट दाई ओर खुला होता है | दक्षिणावर्ती शंख दो प्रकार के होते हैं नर और मादा। जिसकी परत मोटी हो और भारी हो वह नर और जिसकी परत पतली हो और हल्का हो, वह मादा शंख होता है।

दक्षिणावर्ती शंख को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। अनंत फल प्रदान करने वाला यह शंख विशेष महत्वपूर्ण है। इसके नाद से सभी बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। इस शंख की स्थापना से आयु, यश, धन की प्राप्ति होती है।

दक्षिणावर्ती शंख पूजा : दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना यज्ञोपवीत पर करनी चाहिए। शंख का पूजन केसर युक्त चंदन से करें। प्रतिदिन नित्य क्रिया से निवृत्त होकर शंख की धूप-दीप-नैवेद्य-पुष्प से पूजा करें और तुलसी दल चढ़ाएं।

प्रथम प्रहर में पूजन करने से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। द्वितीय प्रहर में पूजन करने से धन- सम्पत्ति में वृद्धि होती है। तृतीय प्रहर में पूजन करने से यश व कीर्ति में वृद्धि होती है। चतुर्थ प्रहर में पूजन करने से संतान प्राप्ति होती है।

दक्षिणावर्ती शंख के लाभ :-

1  शंख को नादब्रह्म और दिव्य मंत्र की संज्ञा दी गई है। शंख की ध्वनि को ॐ की ध्वनि के समकक्ष माना गया है। शंखनाद से आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शंख से निकलने वाली ध्वनि जहां तक जाती है वहां तक बीमारियों के कीटाणुओं का नाश हो जाता है। Dakshinavarti Shankh

2 किसी शुभ मुहूर्त में दक्षिणावर्ती शंख को गंगाजल, गोघृत, कच्चा दूध, मधु, गुड़ आदि से अभिषेक करके अपने पूजा स्थल में लाल कपड़े के आसन पर स्थापित कर लीजिए, इससे लक्ष्मी का चिर स्थायी वास बना रहेगा। प्रतिदिन उसके सामने बैठकर इस मंत्र का जाप करें- ‘ॐ श्री लक्ष्मी सहोदराय नम:’

प्रतिदिन इस मंत्र का कम से कम पांच बार जाप करें, कमाई से लेकर शोहरत तक के मौके मिलेंगे, आर्थिक अभाव दूर होंगे। Dakshinavarti Shankh

3 दक्षिणवर्ती शंख को तिजोरी में रखने से धन, रसोई घर में रखने से अन्न और वस्त्र-संग्रह में रखने से पदार्थों में वृद्धि होती है।

4 दक्षिणवर्ती शंख में स्वच्छ जल भरकर जिस स्थान पर छिड़का जाता है, वहां से हर तरह की बुराई का नाश होता है। किसी भी तरह की ऊपरी शक्ति अपना प्रभाव नहीं जमा पाती। Dakhinavarti Shankh

5 धन प्राप्ति का ऐसा ही एक अचूक टोटका इस प्रकार है-टोटकाशुक्ल पक्ष के किसी शुक्रवार के दिन सुबह नहाकर साफ वस्त्र धारण करें और अपने सामने इस दक्षिणावर्ती शंख को रखें। शंख पर केसर से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं और इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का जप करें। मंत्र जप के लिए स्फटिक की माला का प्रयोग करें।मंत्रऊँ श्रीं ह्रीं दारिद्रय विनाशिन्ये धनधान्य समृद्धि देहि देहि नम:इस मंत्रोच्चार के साथ-साथ एक-एक चावल इस शंख के मुंह में डालते रहें। चावल टूटे न हो इस बात का ध्यान रखें। इस तरह रोज एक माला मंत्र जप करें। यह प्रयोग 30 दिन तक करें। पहले दिन का जप समाप्त होने के बाद शंख में चावल रहने दें और दूसरे दिन एक डिब्बी में उन चावलों को डाल दें। इस तरह एक दिन के चावल दूसरे दिन उठाकर डिब्बे में डालते रहें।।30 दिन बाद जब प्रयोग समाप्त हो जाए तो चावलों व शंख को एक सफेद कपड़े में बांधकर अपने पूजा घर में, फैक्ट्री, कारखाने या ऑफिस में स्थापित कर दें। इस प्रयोग से आपके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होगी। Dakshinavarti Shankh

6 सेहत में फायदेमंद शंख : शंखनाद से सकारात्मक ऊर्जा का सर्जन होता है जिससे आत्मबल में वृद्धि होती है। शंख में प्राकृतिक कैल्शियम, गंधक और फास्फोरस की भरपूर मात्रा होती है। प्रतिदिन शंख फूंकने वाले को गले और फेफड़ों के रोग नहीं होते। 
शंख बजाने से चेहरे, श्वसन तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का व्यायाम होता है। शंख वादन से स्मरण शक्ति बढ़ती है। शंख से मुख के तमाम रोगों का नाश होता है। गोरक्षा संहिता, विश्वामित्र संहिता, पुलस्त्य संहिता आदि ग्रंथों में दक्षिणावर्ती शंख को आयुर्वद्धक और समृद्धि दायक कहा गया है। Dakhshinavarti Shankh


पेट में दर्द रहता हो, आंतों में सूजन हो अल्सर या घाव हो तो दक्षिणावर्ती शंख में रात में जल भरकर रख दिया जाए और सुबह उठकर खाली पेट उस जल को पिया जाए तो पेट के रोग जल्दी समाप्त हो जाते हैं। नेत्र रोगों में भी यह लाभदायक है। यही नहीं, कालसर्प योग में भी यह रामबाण का काम करता है।

इसमें भरकर सूर्य को जल चढ़ाएं तो नेत्रों के रोगों से भी मुक्ति मिलती है और अगर रात के समय समय इसमें जल भर कर रखा जाएँ और दिन में उसे घर में छिडका जाएँ तो घर में सुख शान्ति बढती है, सभी परेशानियाँ दूर हो जाती है.Dakshinavarti Shankh

कार्य स्थल के लिए ( For Work Place ) :

क्योकि इस शंख के अदभुत और चमत्कारिक लाभ होते है इसीलिए ये सर्वाधिक मूल्यवान और दुर्लभ होता है,अगर आपको अलसी दक्षिणावर्ती शंख मिल जाएँ तो उसको प्राण प्रतिष्ठित कर स्थापित करना चाहियें. इससे लक्ष्मी हमेशा के लिए शंख में विराजमान रहती है. जब आप शंख को व्यापार स्थल पर स्थापित कर रहे हो तो आप निम्नलिखित श्लोक का जप करें.

  • श्लोक (Verses ) :

दक्षिणावर्तेशंखाय यस्य सद्मनितिष्ठति।

मंगलानि प्रकुर्वंते तस्य लक्ष्मीः स्वयं स्थिरा।

चंदनागुरुकर्पूरैः पूजयेद यो गृहेडन्वहम्।

स सौभाग्य कृष्णसमो धनदोपमः।।

तंत्र शास्त्र में दक्षिणावर्ती शंख 

तंत्र विद्या या प्रयोगों में भी दक्षिणावर्ती शंख अपना ख़ास स्थान रखता है. उनका मानना है कि पूर्ण विधि विधान से इसमें जल रखने से कई तरह की बाधाएं दूर होती है और इसमें से सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है जो नकारात्मक ऊर्जा व छाया को दूर कर देती है. अगर इसमें भरकर रखें गए जल को व्यक्ति, वास्तु या किसी स्थान पर छिडका जाएँ तो ये जल उनपर लगे तंत्र मंत्र प्रभाव व टोने टोटकों को भी समाप्त कर देता है. Dakhshinavarti Shankh

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