Bhumi Poojan | भूमि पूजा | By Astrologer Nidhi Ji Shrimali |

निवारण पूजा 25 | Panditnmshrimali

Bhumi Poojan


The land is considered to be the mother of the whole world, the guardian of the world, hence the status of mother has also been given to the earth in Hindu scriptures. We all know that what we get from the earth is a house to live in, food to eat, rivers, springs, streets, roads all pass through the chest of the earth. Therefore, in the scriptures, there is a law to worship the land before the construction of any work on the land, whether it is to build a house or public buildings or roads. It is believed that many types of obstacles arise in the construction work due to not worshipping the land.

Why do Bhumi Puja:-

Whenever any kind of construction work is started on any new land, before that the worship of the land is done, it is believed that if there is any kind of defect on the land, or any mistake made by the owner of that land knowingly or unknowingly. If this has happened, Mother Earth showers her grace by forgiving mistakes on all kinds of faults by worshipping the land. Many times when a person buys land, it may be that the land has become impure due to the wrong actions of the former owner of the said land, so it is re-sanctified by Bhoomi Pujan. It is believed that the construction work gets completed smoothly if the land is worshipped. There is no loss of the organism during or after construction and at the same time, one gets freedom from other problems.

Bhoomi poojan is also necessary because if there are any defects related to the land, then after worship it gets destroyed and that place becomes holy for building construction. Not only this, after the worship of the land, the work of construction of the building is also completed well.

Silver snake is kept in the foundation at the time of Bhumi Pujan:-

The land on which the construction work takes place is first cleared.
According to Vastu Shastra, beneath the earth is Hades, whose lord is Sheshnag, the servant of Lord Vishnu. He has kept the earth on his hood. The purpose of worshipping a silver snake in the foundation at the time of Bhumi Pujan is to get the blessings of Sheshnag.
By keeping the snake in the foundation, it is believed that just as Sheshnag has taken care of the earth, in the same way, Sheshnag should also take care of his building. The building will be safe and longevity.

The same faith and belief work behind keeping the Kalash in the worship of the land that it will get the blessings of Lord Sheshnag. According to the scriptures, Sheshnag resides in Ksheer Sagar, so by pouring milk, curd, ghee in the Kalash, Sheshnag is invoked with mantras in the Kalash, due to which Sheshnag gets the direct grace of God.
It is believed that keeping a coin and betel nut in the Kalash gives the blessings of Lakshmi and Ganesha. Considering the Kalash as the symbol of the universe and the form of Vishnu, it is prayed that Goddess Lakshmi may reside in this land and Sheshnag should always support the house built on the land.

The person who wants to get the Bhoomi Pujan done, Pandit ji I already take a resolution in his name and as we all know, Lord Ganesha is worshipped before doing any auspicious work. So Bhoomi Puja also begins with the worship of Lord Ganesha, first of all, Ganesha is invoked.
Mantras related to land worship will be chanted by Pandit ji. Bhoomi Puja will be done by 2-3 Pandit ji with full rituals.

This puja can be done by astrologer Nidhi ji Shrimali online or offline at a very nominal cost. Astrologer Nidhi ji Shrimali ji explains and guides the proper Bhoomi Puja remedies. If you want to do Bhoomi Puja, then Astrologer Nidhi Ji Shrimali is the best choice in India.

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भूमि पूजा


भूमि को सारे जगत की माता, जगत का संरक्षक माना जाता है, इसलिए हिंदू शास्त्रों में भी धरती को माता का दर्जा दिया गया है। हम सब जानते हैं कि धरती से हमें जो मिलता है वह रहने के लिए घर है, खाने के लिए भोजन है, नदियाँ, झरने, गलियाँ, सड़कें सब धरती की छाती से होकर गुजरती हैं। इसलिए शास्त्रों में भूमि पर किसी भी कार्य के निर्माण से पूर्व भूमि पूजन का विधान है चाहे वह घर बनाना हो या सार्वजनिक भवन या सड़क बनाना हो। ऐसा माना जाता है कि भूमि की पूजा न करने से निर्माण कार्य में कई तरह की बाधाएं आती हैं।

क्यों करते हैं भूमि पूजा:-

जब भी किसी नई भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाता है तो उसके पूर्व उस भूमि की पूजा की जाती है, ऐसा माना जाता है कि यदि उस भूमि में किसी प्रकार का दोष है, या उस भूमि के स्वामी द्वारा जानबूझ कर कोई गलती की गई है या अनजाने में। यदि ऐसा हुआ है तो धरती माता की पूजा कर सभी प्रकार के दोषों को क्षमा करके धरती माता अपनी कृपा बरसाती है। कई बार जब कोई व्यक्ति जमीन खरीदता है, तो हो सकता है कि उक्त भूमि के पूर्व मालिक के गलत कार्यों के कारण भूमि अशुद्ध हो गई हो, इसलिए भूमि पूजन द्वारा इसे फिर से पवित्र किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यदि भूमि की पूजा की जाती है तो निर्माण कार्य सुचारू रूप से पूरा हो जाता है। निर्माण के दौरान या बाद में जीव की कोई हानि नहीं होती है और साथ ही साथ अन्य समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

भूमि पूजन इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि यदि भूमि से संबंधित कोई दोष हो तो पूजा के बाद उसका नाश हो जाता है और वह स्थान भवन निर्माण के लिए पवित्र हो जाता है। इतना ही नहीं भूमि पूजन के बाद भवन निर्माण का कार्य भी बखूबी पूरा होता है।

भूमि पूजन के समय नींव में रखा जाता है चांदी का सांप:-

  • जिस भूमि पर निर्माण कार्य होता है, सबसे पहले उसे साफ किया जाता है।
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार, पृथ्वी के नीचे पाताल लोक है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु के सेवक शेषनाग हैं। उसने पृथ्वी को अपने फन पर रखा है। भूमि पूजन के समय नींव में चांदी के सर्प की पूजा करने का उद्देश्य शेषनाग की कृपा प्राप्त करना है।
  • सर्प को नींव में रखने से यह माना जाता है कि जिस प्रकार शेषनाग ने पृथ्वी की देखभाल की है, उसी प्रकार शेषनाग को भी अपने भवन की देखभाल करनी चाहिए। भवन सुरक्षित और दीर्घायु होगा।
  • भूमि की पूजा में कलश रखने के पीछे भी यही आस्था और विश्वास काम करता है कि इससे भगवान शेषनाग की कृपा प्राप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार क्षीर सागर में शेषनाग का वास होता है इसलिए कलश में दूध, दही, घी डालकर कलश में मंत्रों से शेषनाग का आह्वान किया जाता है जिससे शेषनाग को भगवान की सीधी कृपा प्राप्त होती है।
  • माना जाता है कि कलश में सिक्का और सुपारी रखने से लक्ष्मी और गणेश की कृपा मिलती है। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक और विष्णु का रूप मानकर उनसे प्रार्थना की जाती है कि देवी लक्ष्मी इस भूमि में विराजमान रहें और शेषनाग हमेशा भूमि पर बने घर का समर्थन करें।

जो व्यक्ति भूमि पूजन करवाना चाहते हैं , पंडित जी पहले से ही उसके नाम पर संकल्प लेते हैं और जैसा कि हम सभी जानते हैं, किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। तो भूमि पूजा भी भगवान गणेश की पूजा के साथ शुरू होती है, सबसे पहले गणेश जी का आह्वान किया जाता हैं |
पंडित जी द्वारा भूमि पूजा से संबंधित मंत्रों का जाप किया जाएगा। भूमि पूजा 2-3 पंडित जी द्वारा पूरे विधि-विधान से करेंगे।

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