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 Benefits Of Mala किस माला के जाप का क्या फल मिलता है

 Benefits Of Mala

 किस माला के जाप का क्या फल मिलता है


 Benefits Of Mala

पंडित एन एम श्रीमाली जी बताते है की जीवन में प्रत्येक व्यक्ति आगे बढ़ने के लिए कर्म और धर्म साथ-साथ लेकर चलता है। आम आदमी के कर्म के साथ ही हमारे जगत में कुछ प्राकृतिक शक्तियां भी निहित हैं, जिन्हें हम मंत्र के द्वारा प्राप्त करते हैं। पूजा अर्चना के बाद विशेष प्राप्ति या सिद्धि के लिए मंत्र जाप किया जाता है। इसके माध्यम से आप मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपके द्वारा किया गया मंत्र जाप का उचित फल नहीं मिलता है और आप के साथ कुछ न कुछ अनिष्ट होता रहता है।  Benefits Of Mala

पंडित जी के अनुसार भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ का बहुत अधिक महत्व है। किसी भी काम को करने से पहले पूजा-पाठ की जाती है जिससे कि आगे चल कर कोई समस्या उत्पन्न न हो। इसी साथ लोगों के मन में हर देवी-देवताओं के प्रति अपनी श्रृद्धा है जो अपने-अपने तरीके से व्यक्त करते है।

इसी तरह पूजा-पाठ के साथ-साथ तंत्र-मंत्र का भी विशेष महत्व है। यह आप अच्छी तरह जानते है कि तंत्र-मंत्र के पिता भगवान शिव है।

जिससे कि इन्हें हम लोग अपना आराध्य देव और उनके शक्ति स्वरूप मां दुर्गा को अपनी माता मानते हैं। भगवान शिव सभी की हर मनोकामना पूर्ण करते है। भगवान शिव ऐसे भगवान है जिसे प्रसन्न करना मुश्किल काम नही है।  Benefits Of Mala

देवी-देवताओं की पूजा-पाठ करने के लिए विभिन्न प्रकार के मालाओं का इस्तेमाल करते है, लेकिन हमें किस माला का किस देवी-देवता का जाप करना है यह नही जानते जिससे कि हमारी मनोकामना पू्र्ण नही होती। जानिए किस माला से किस मनोकामना की पूर्ति होती है।

अलग अलग माला के प्रयोग के लाभ क्या हैं और क्या तरीका है?

– रुद्राक्ष की माला

– सामान्यतः किसी भी मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं

शिव जी और उनके परिवार के लोगों के मन्त्र रुद्राक्ष पर विशेष लाभकारी होते हैं

महामृत्युंजय और लघुमृत्युंजय मन्त्र केवल रुद्राक्ष पर ही जपना चाहिए

रुद्राक्ष जिसे भगवान शिव का अंश माना जाता है। इससे शिव का जाप कर आससानी से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है। अगर आप शिव भगवान को प्रसन्न करना चाहते है तो रुद्राक्ष की माला से शिव के मंत्रों का जाप करे।

– स्फटिक की माला

– यह माला एकाग्रता , सम्पन्नता  और शान्ति की माला मानी जाती है

माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी के मन्त्र इस माला से जपना उत्तम होता है

– धन प्राप्ति और एकाग्रता के लिए स्फटिक की माला धारण करना भी अच्छा होता है

मां अम्बा की उपासना करने के लिए स्फटिक की माला से जप करना शुभ माना जाता है।

– चन्दन की माला

– चन्दन की माला दो प्रकार की होती है – लाल चन्दन और श्वेत चन्दन

– देवी के मन्त्रों का जाप लाल चन्दन की माला से करना फलदायी होता है

भगवान् कृष्ण के मन्त्रों के लिए सफ़ेद चन्दन की माला का प्रयोग कर सकते हैं

मां दुर्गा की उपासना लाल रंग के चंदन की माला, जिसे रक्त चंदन माला कहा जाता है, से करना चाहिए।

– हल्दी की माला

– विशेष प्रयोगों तथा मनोकामनाओं के लिए हल्दी की माला का प्रयोग किया जाता है

– बृहस्पति देव तथा माँ बगलामुखी के मन्त्रों के लिए हल्दी की माला का प्रयोग होता है

हल्दी की माला से ज्ञान और संतान प्राप्ति के मन्त्रों का जाप भी कर सकते हैं

काली का आह्वान करने के लिए काली हल्दी या नील कमल की माला का प्रयोग करना है।

सूर्य के दोष और उन्हें प्रसन्न करने के लिए माणिक्य, गारनेट, बिल की लकड़ी की माला का उपयोग शुभ माना गया है।

मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगल ग्रह के मंत्र के साथ मूंगे और लाल चंदन की माला से जाप करना चाहिए और वही बुध ग्रह के लिए पन्ने की बनी हुई की माला से जाप करना चाहिए।  Benefits Of Mala

बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए हल्दी या जीया पोताज और शुक्र के लिए स्फटिक की माला से जाप करें।

अगर आप बगलामुखी की साधना कर रहे हैं तो आपको पीली हल्दी या जीयापोता की माला का इस्तेमाल करना चाहिए।

कमलगट्टे की माला-

–  कमलगट्टे की माला का प्रयोग धन वैभव प्राप्ति के लिए किया जाता है.

शत्रुओं के नाश के लिए भी कमलगट्टे का प्रयोग किया जाता है.

– मंत्र जाप के बाद इस माला को पूजा स्थान में रखना चाहिए.

लक्ष्मीमंत्र का जाप हमेशा कमलट्टे की माला से करना चाहिए। वहीं तुलसी और चंदन की माला से विष्णु भगवान के मंत्र का जाप करना चाहिए।

– तुलसी की माला

– वैष्णव परंपरा में इस माला का सर्वाधिक महत्व है

भगवान् विष्णु और उनके अवतारों के मन्त्रों का जाप इसी माला से किया जाता है

– यह माला धारण करने पर वैष्णव परंपरा का पालन जरूर करना चाहिए

तुलसी की माला पर कभी भी देवी और शिव जी के मन्त्रों का जप नहीं करना चाहिए

चंद्रमा की शांति के लिए आप जिस मंत्र का जाप कर रहे है उस मंत्र का जाप मोती की माला से करना चाहिए।

राहु के लिए गोमेद, चंदन और कच्चे कोयले की माला उपयोगी है, वहीं केतु के लिए लहसुनिया की माला शुभ माना जाता है।
अगर आप माता लक्ष्मी की उपासना धन प्राप्त करने के लिए उनकी लाल रंग के रेशमी धागे वाली 30 मनकों की माला से जाप करें,परंतु अगर आप अपनी कोई मनोकामना पूरी होते देखना चाहते हैं तो आपके लिए 27 रुद्राक्षों की माला उपयोगी है।

मोक्ष प्राप्ति या शांति के लिए किए जा रहे मंत्र जाप के लिए 108 रुद्राक्ष को सफेद धागें से पिरोंकर जाप करें। मनोकामना पूर्ण होगी।
सर्वोत्तम उपाय का आनंद रुद्राक्ष से आता है भोलेनाथ का श्रृंगार है  Benefits Of Mala

माला जप की विधि 
माला जप करने के लिए आसन अच्छा होना चाहिए। माला जप के लिए लाल या सफ़ेद आसान होना चाहिए। यह आसन ऊनी या कुश का होना चाहिए। कपड़े का आसन नहीं होना चाहिए। माला जप करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। जाप करते समय माला के ऊपर सुमेरु को कभी क्रास नहीं करना चाहिए। सुमेरु के पास जाते ही दुबारा आप को वापस होना चाहिए। जब कभी माला जाप आरम्भ करें तो माला को शुद्ध जल से धो लें और उसका तिलक करके धूप दिखाए। इसके पश्चात् प्रार्थना करें कि आप हमारे मकसद में हमें सफल करें।

कैसे करें मंत्रो का चयन
आम तौर पर व्यक्ति ये सोचता है कि यह मंत्र धन का है या लाभ का है या इससे यह लाभ होता है। व्यक्ति मंत्र अपने हिसाब से शुरू करता है, माला जपता है, लेकिन उसका फल नहीं प्राप्त होता है। लेकिन ध्यान रहे कि कभी भी अपने पुरोहित या गुरु के आदेश के बिना माला से मंत्र जाप करना शुरु न करें, अन्यथा इसका दुष्परिणाम भी आपको झेलना पड़ सकता है। माला की पूजा किए बिना तो कभी जाप करना ही नहीं चाहिए। अगर कोई ऐसी विकट स्थिति आ जाये तो अपने इष्ट देव या अपने गुरु का ध्यान करके आप मंत्र जाप आरम्भ कर सकते हैं।

माला का जाप करते समय रखें ये सावधानियां!

हमारी प्रार्थना करने के विभिन्न तरीके हैं , कभी सरल शब्दों से,कभी कीर्तन से और कभी मन्त्रों से. इनमे मंत्र सबसे ज्यादा प्रभावशाली मानते जाते हैं , क्योंकि ये मन को तुरंत एकाग्र कर देते हैं और शीघ्र प्रभाव देते हैं. हर मंत्र से अलग तरह का प्रभाव और शक्ति उत्पन्न होती है इसलिए मंत्र का जप करने के लिए अलग अलग तरह की मालाओं का प्रयोग किया जाता है.  Benefits Of Mala

हमारी प्रार्थना करने के विभिन्न तरीके हैं , कभी सरल शब्दों से,कभी कीर्तन से और कभी मन्त्रों से. इनमे मंत्र सबसे ज्यादा प्रभावशाली मानते जाते हैं , क्योंकि ये मन को तुरंत एकाग्र कर देते हैं और शीघ्र प्रभाव देते हैं. हर मंत्र से अलग तरह का प्रभाव और शक्ति उत्पन्न होती है इसलिए मंत्र का जप करने के लिए अलग अलग तरह की मालाओं का प्रयोग किया जाता है. ऐसा करने से अलग अलग मन्त्रों की शक्ति का लाभ मिल सकता है. माला का प्रयोग इसलिए भी किया जाता है ताकि मंत्र जप की संख्या में त्रुटी न हो सके. माला में लगे हुये दानों को मनका कहा जाता है. सामान्यतः माला में १०८ मनके होते हैं परन्तु कभी कभी इसमें २७ अथवा ५४ मनके भी होते हैं.  Benefits Of Mala

माला के प्रयोग की सावधानियां और नियम क्या हैं?

– माला के मनकों की संख्या कम से कम २७ या १०८ होनी चाहिए. हर मनके के बाद एक गाँठ जरूर लगी होनी चाहिए.

– मंत्र जप के समय तर्जनी अंगुली से माला का स्पर्श नहीं होना चाहिए साथ ही सुमेरु का उल्लंघन भी नहीं होना चाहिए.

– मंत्र जप के समय माला किसी वस्त्र से ढंकी होनी होनी चाहिए या गोमुखी में होनी चाहिए.

– मंत्र जाप करने के पूर्व हाथ में माला लेकर प्रार्थना करनी चाहिए कि माला से किया गया मंत्र जाप सफल हो .

– माला हमेशा व्यक्तिगत होनी चाहिए , दूसरे की माला का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

– जिस माला से मंत्र जाप करते हैं , उसे धारण नहीं करना चाहिए.

– माला हमेशा 108 या 27 दाने की होनी चाहिए.

– मंत्र जाप के बाद माला को मंदिर में रखना चाहिए उसे धारण नहीं करना चाहिए.  Benefits Of Mala

माला जाप करते समय रखें विशेष सावधानी 
माला जाप करते समय आप को यह मालूम होना चाहिए कि कितनी संख्या में आप को माला जाप करना है। इसके लिए जो स्थान निश्चित होता है, आप उसी स्थान पर माला जप करें। उचित आसन पर करें और माला जाप के दौरान मौन रहें। कोशिश करें कि आप की आंखे बंद हों। जब आप पालथी मार कर बैठें तो आप का मेरुदण्ड सीधा होना चाहिए। कभी भी दीवार के सहारे नहीं बैठना चाहिए। माला जप करते समय आप को मंत्र पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए और श्वांस की गति पर ध्यान देना चाहिए। कभी भी माला जाप करने के लिए जल्दबाजी में न बैठें। जब तक आपकी निश्चित संख्या पूर्ण न  हो, आप आसान पर से न उठें और उठना ही पड़ जाए तो दोबारा से जप आरम्भ करें

माला जप के बाद करना न भूलें यह कार्य 
जब माला जाप कर लें, तो उसके बाद आप हाथ में जल और अक्षत लें और अपने इष्टदेव या अपने गुरुदेव का ध्यान कर मन ही मन संकल्प करं कि मैंने जो भी पूजा की है, यह आपको समर्पित है। इस भाव से जल और अक्षत रख दें तो आप का किया हुआ माला जाप और मंत्र जाप आप को उचित फल देता है। माला जाप के बाद हवन की विधि है। जितना माला जाप किया गया हो, हमेशा उसका दशांश हवन करना चाहिए।  Benefits Of Mala

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