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जानिए बिल्व पत्र का महत्व ,प्रकार एवं उपाय – Bilv Patra

Bilv Patra

जानिए बिल्व पत्र का महत्व ,प्रकार एवं उपाय – Bilv Patra

Bilv Patra गुरु माँ निधि जी श्रीमाली ने बताया है की भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त उन पर उनकी प्रिय चीज़ें अर्पित करते हैं. इन्हीं में से एक बेल पत्र है जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. सिर्फ एक बेल पत्र चढ़ाने भर से शिव जी बेहद खुश हो जाते हैं. मान्यता है कि अगर भगवान शिव पर बेलपत्र नहीं चढ़ाया तो उनकी पूजा अधूरी रह जाती है. हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करना है तो एक बेलपत्र और एक कलश जल अर्पित कर दें. इससे भगवान शिव न सिर्फ खुश होंगे बल्कि आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी भी करेंगे Bilv Patra

 बिल्व पत्र का महत्व

 बिल्व तथा श्रीफल नाम से प्रसिद्ध यह फल बहुत ही काम का है। यह जिस पेड़ पर लगता है वह शिवद्रुम भी कहलाता है। बिल्व का पेड़ संपन्नता का प्रतीक, बहुत पवित्र तथा समृद्धि देने वाला है।

बेल के पत्ते शंकर जी का आहार माने गए हैं, इसलिए भक्त लोग बड़ी श्रद्धा से इन्हें महादेव के ऊपर चढ़ाते हैं। शिव की पूजा के लिए बिल्व-पत्र बहुत ज़रूरी माना जाता है। शिव-भक्तों का विश्वास है कि पत्तों के त्रिनेत्रस्वरूप् तीनों पर्णक शिव के तीनों नेत्रों को विशेष प्रिय हैं। Bilv Patra

बेल पत्र से जुड़ी पौराणिक कथा

गुरु माँ निधि जी श्रीमाली के अनुसार अमृत पाने के लिए राक्षस और देवताओं के बीच समुद्र मंथन हुआ था. इस समुद्र मंथन में सबसे पहले जो जल निकला वह हलाहल नाम का विष था. इस विष का प्रभाव इतना तेज था कि सभी राक्षस और देवता गण जलने लगे. विष इतना प्रभावशाली था कि इससे पूरी सृष्टि जल जाती. इस विष की तपन को सहन कर पाना सबकी क्षमता से बाहर था. ऐसे में सभी लोग भगवान शिव के पास पहुंचे. भगवान शिव को सारी घटना बताइ. तब भगवान शिव ने सृष्टी को बचाने के लिए उस विष को पी लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और उनके शरीर की तपन बढ़ गई. इस दौरान शिव के शरीर का तापमान कम करने के लिए उनका गंगा जल से अभिषेक किया गया और देवताओं ने उन्हें बेल पत्र का सेवन कराया. जिसके प्रभाव से भगवान शिव को काफी आराम लगा और उनके शरीर का ताप कम होने लगा. तभी से ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है. इसी वजह से भगवान शिव को बेल पत्र चढ़ाने से वो भक्तों की सारी मनोकामना पूरी करते हैं. Bilv Patra

बिल्व पत्र के प्रकार 

बिल्व पत्र चार प्रकार के होते हैं – अखंड बिल्व पत्र, तीन पत्तियों के बिल्व पत्र, छः से 21 पत्तियों तक के बिल्व पत्र और श्वेत बिल्व पत्र। इन सभी बिल्व पत्रों का अपना-अपना आध्यात्मिक महत्व है

  1. अखंड बिल्व पत्र का विवरण बिल्वाष्टक में इस प्रकार है – ‘‘अखंड बिल्व पत्रं नंदकेश्वरे सिद्धर्थ लक्ष्मी’’। यह अपने आप में लक्ष्मी सिद्ध है। एकमुखी रुद्राक्ष के समान ही इसका अपना विशेष महत्व है। यह वास्तुदोष का निवारण भी करता है।

इसे गल्ले में रखकर नित्य पूजन करने से व्यापार में चौमुखी विकास होता है।

  1. तीन पत्तियों वाला बिल्व पत्र

इस बिल्व पत्र के महत्व का वर्णन भी बिल्वाष्टक में आया है जो इस प्रकार है- ‘‘त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम् त्रिजन्म पाप सहारं एक बिल्वपत्रं शिवार्पणम’’ यह तीन गणों से युक्त होने के कारण भगवान शिव को प्रिय है। इसके साथ यदि एक फूल धतूरे का चढ़ा दिया जाए, तो फलों में बहुत वृद्धि होती है।

इस तरह बिल्व पत्र अर्पित करने से भक्त को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। रीतिकालीन कवि श्री पद्माकर जी ने इसका वर्णन इस प्रकार किया है- ‘‘देखि त्रिपुरारी की उदारता अपार कहां पायो तो फल चार एक फूल दीनो धतूरा को’’ भगवान आशुतोष त्रिपुरारी भंडारी सबका भंडार भर देते हैं।

  1. छह से लेकर 21 पत्तियों वाले बिल्व पत्र

कभी-कभी एक ही वृक्ष पर चार, पांच, छह पत्तियों वाले बिल्व पत्र भी पाए जाते हैं। परंतु ये बहुत दुर्लभ हैं।

छह से लेकर 21 पत्तियों वाले बिल्व पत्रये मुख्यतः नेपाल (nepal) में पाए जाते हैं। पर भारत में भी कहीं-कहीं मिलते हैं। जिस तरह रुद्राक्ष कई मुखों वाले होते हैं उसी तरह बिल्व पत्र भी कई पत्तियों वाले होते हैं। Bilv Patra

  1. श्वेत बिल्व पत्र जिस तरह सफेद सांप, सफेद टांक, सफेद आंख, सफेद दूर्वा आदि होते हैं उसी तरह सफेद बिल्वपत्र भी होता है। यह प्रकृति की अनमोल देन है। इस बिल्व पत्र के पूरे पेड़ पर श्वेत पत्ते पाए जाते हैं। इसमें हरी पत्तियां नहीं होतीं। इन्हें भगवान शंकर को अर्पित करने का विशेष महत्व है। Bilv Patra

गुरु माँ निधि जी श्रीमाली द्वारा बताये गए बिल्व पत्र के कुछ उपाय 

  • सोमवार के दिन यदि शिव पूजन में बेलपत्र का इस्तेमाल किया जाता है और इसके कुछ आसान उपाय आजमाए जाते हैं तो शिव पूजन का पूर्ण फल मिलने के साथ घर की सुख समृद्धि भी बनी रहती है। 
  • पांच सोमवार शिवलिंग का मंदिर में जल से अभिषेक करें और 108 बेलपत्र अर्पित करें। बेलपत्र अर्पित करते समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करें और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करें। इसके अलावा यदि आप सोमवार के दिन शिव जी के साथ माता पार्वती का पूजन भी करेंगी तो जल्द ही आपके विवाह के योग बनेंगे।
  • गर आप अपने स्वास्थ्य की कुछ समस्याओं से परेशान हैं तो 108 बेलपत्र चंदन में डुबोएं और ॐ नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें। साथ ही, भगवान शिव से अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
  • एक-एक बेलपत्र दूध में डुबोते हुए शिवलिंग पर चढ़ाएं और प्रत्येक बेलपत्र के साथ ॐ नमः भगवते महादेवाय का जाप करें। साथ ही, संतान प्राप्ति की प्रार्थना करें।
  • यदि आपके पास पैसा नहीं टिकता है और व्यर्थ में खर्च होता है तो आप सोमवार के दिन बेल पत्र के 5 पत्ते शिवलिंग पर चढ़ाएं और उन पत्तों को अपनी पर्स या पैसों वाले स्थान जैसे घर की तिजोरी में रख दें। Bilv Patra

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