Astro Gyaan

ॐ का महत्त्व

ॐ का महत्त्व

सृष्टि के आरम्भ में सर्वप्रथम जो शब्द उत्पन्न हुआ वह ॐ ही था । सनातन धर्म के समस्त श्लोक एवं मंत्र का आरम्भ इसी एकाक्षरी मंत्र से होता है । ॐ वह सात्विक शक्ति है , जिसके जाप के समय होने वाले स्पंदन से शरीर के अन्दर व्याप्त सभी प्रकार के रोगाणुओ का नाश हो जाता है । ॐ का बारम्बार उच्चारण हमारे लिए कई प्रकार से उपयोगी होता है । हमारे आसपास के वातावरण को रमणीय बनाने एवं जीवन में खुशहाली लेन के लिए भी इसका जाप और ध्यान उपयोगी है । ॐ मंत्र का उच्चारण शरीर में नयी उर्जा विकसित करता है एवं शरीर के विभिन्न अंगो को स्पंदित करता है । प्रणव मंत्र ॐ सृष्टि के आरम्भ में सर्वप्रथम उत्पन्न हुआ एकाक्षरी मंत्र है । प्र – अर्थात प्रकृति से उत्पन्न संसार रूपी महासागर तथा प्रणव इसे पार करने के लिए नाव के समान है । इसीलिए ओमकार को प्रणव कहते है । ॐ अक्षर का अर्थ जिसका कभी क्षरण न हो । ऐसे तीन अक्षरोँ – अ उ और म से मिलकर बना है ऊँ । माना जाता है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से सदा ऊँ की ध्वनी निसृत होती रहती है । हमारी और आपके हर श्वास ऊँ की ही ध्वनि ही निकलती है । यही हमारे – आपके श्वास की गति को नियंत्रित करता है । माना गया है कि अत्यन्त पवित्र और शक्तिशाली है ऊँ । किसी भी मंत्रसे पहले यदि ऊँ जोड़ दिया जाए तो वह पूर्णतया शुद्ध और शक्ति – समपन्न हो जाता है । किसी देवी – देवता , ग्रह या ईश्वर के मंत्रोँ के पहले ऊँ लगाना आवश्यक होता है , जैसे – श्रीराम का मंत्र – ऊँ रामाय नमः । विष्णु का मंत्र – ऊँ विष्णवे नमः । शिवका मंत्र ऊँ नमः शिवाय प्रसिद्ध है । कहा जाता है कि ऊँ से रहित कोई मंत्र फलदायी नही होता , चाहे उसका कितना भी जाप हो । मंत्र के रूप मेँ मात्र ऊँ ही पर्याप्त है । माना जाता है कि एक बार ऊँ का जाप हजार बार किसी मंत्र के जाप से महत्वपूर्ण है । जिनकी स्मरण शक्ति कमजोर हो , पढाई में कमजोर विद्यार्थी और अधिक दिमाग और बोलचाल का करने वाले व्यक्तियों के लिए यह सर्वोत्तम उपासना है । प्रात : काल पूर्व दिशा की ओर मुह कर , ज्ञान मुद्रा में बैठ कर अधर खुली आँखों से केसरी रंग के महामंत्र ॐ का ध्यान अपनी दोनों भौहो के बीच में करे ।कम से कम 108 बार इसी विधि से ॐ का उच्चारण करे । इस उपासना से बुद्धि का विकास होता है , वाणी प्रखर होती है , ओजस्विता आती है ।जाप के बाद आँखों को धीरे से बंद कर , अपनी हथेलियों को रगड़कर समस्त चहरे पर लगाने से अंग पुष्ट होते है एवं शारीर में कांति आती है । जिनके यंहा धन का आभाव हो , ऋण की अधिकता हो , दरिद्रता , व्यापार में हनी से परेशान हो , धन रुकता नहीं हो तथा कोई कार्य करने में बाधा आती हो , उन्हें पीले वस्त्र धारण कर ॐ का ध्यान करना चाहिए । यह कार्य दिनभर में कभी भी किया जा सकता है । किन्तु सूर्योदय और सूर्यास्त के समय किया जाये तो ज्यादा फलदायक होता है । प्रतिदिन 15 मिनिट तक यह जाप करने से दरिद्रता और कामो में आने वाली रूकावटे दूर होने लगाती है । ॐ ब्रह्माण्डका नाद है एवं मनुष्यके अन्तरमेँ स्थित ईश्वरका प्रतीक । सबके हृदयस्थ इस ऊँ प्रतीक को बार – बार प्रणाम ।

Back to list

Leave a Reply

Your email address will not be published.