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श्वेतार्क गणपति

श्वेतार्क गणपति - Pandit Nm Shrimali

श्वेतार्क गणपति भगवान गणेश को अनेक नाम से जाना जाता है, इनमें से इनका एक नाम श्वेतार्क गणपति भी हैं। धार्मिक मान्यताओं में धन, सुख-सौभाग्य, समृद्धि और प्रसन्नता के लिए श्वेतार्क के गणेश की मूर्ति शुभ मानी जाती है. श्वेतार्क के भगवान गणेश आक के पौधे की जड़ में बनी प्राकृतिक बनावट रुप में होते हैं। शास्त्रों में श्वेतार्क के बारे में कहा गया है- कि “जहां कहीं भी यह पौधा अपने आप उग आता है, उसके आस-पास पुराना धन गड़ा होता है। तथा जिस घर में भी श्वेतार्क की जड़ रहेगी, वहां से दरिद्रता स्वयं ही दूर हो जाएगी। श्वेतार्क गणपति सौभाग्यदायक व प्रसिद्धि प्रदान करने वाले मने जाते है। श्वेतार्क की जड़ को तंत्र प्रयोग एवं सुख-समृद्धि हेतु बहुत उपयोगी मानी जाती है।इस जड़ से साडी विप्तिया समाप्त हो जाती है। यह पौधा भगवान गणेश के स्वरुप होने के कारण धार्मिक आस्था को गहरा करता है. इसकी जड़ कम से कम 15 वर्ष से जयादा पुरानी हो उसमें स्वत: ही गणेश जी की प्रतिमा बन जाती है | यह प्रक्रति का एक आश्चर्य ही है | श्वेतक आक की जड़ (मूल ) यदि खोदकर निकल दी जाये तो निचे की जड़ में गणपति जी की प्रतिमा प्राप्त होगी | यह मूर्त सामान्य लक्ष्मी व गणपति की प्रतिमाओं से भिन्न होती है | यह प्रतिमा किसी धातु अथवा पत्थर की नहीं बल्कि जंगल में पाये जाने वाले एक पौधे को श्वेत आक के नाम से जाना जाता है | व्यापार स्थल पर किसी भी प्रकार की समस्या हो तो वहां श्वेतार्क गणपति की स्थापना करने से सारी बाधाए स्वत: ही दूर हो जाती है। श्वेतार्क गणपति पूजा रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क गणपति को पूर्व दिशा की तरफ ही स्थापित करे। पूजा में गणपति को लाल कनेर के पुष्प अवश्य ही समर्पित करे। तथा श्वेत आक की जड़ की माला में गणेश मंत्रों का जप करने से सर्वकामना सिद्ध अवश्य ही होती है. श्वेतार्क गणपति की पूजा में लाल वस्त्र, लाल आसान, लाल पुष्प, लाल चंदन, मूंगा अथवा रूद्राक्ष की माला का प्रयोग करना चाहिए. तथा लड्डू का भोग अर्पित करना चाहिए. “ऊँ वक्रतुण्डाय हुम्” मंत्र का जप करते हुए श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ श्वेतार्क गणपति की पूजा कि जानी चाहिए। शास्त्रों में श्वेतार्क गणपति की पूजा का विशेष विधान बताया गया है. शास्त्रो के अनुसार घर में इस प्रतिमा को स्थापित करने से ऋद्धि-सिद्धि कि प्राप्ति होती है. तथा जंहा यह प्रतिमा होगी उस स्थान में कोई भी शत्रु हानि नहीं पहुंचा सकता | इस प्रतिमा के सामने नित्य बैठकर गणपति जी का मूल मन्त्र जपने से गणपति की कृपा प्राप्त होती है | दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा के साथ ही श्वेतार्क गणपति की पूजा करने से बाधा दूर होती हैं और कार्यों में आई रुकावटें स्वत: ही दूर हो जाती हैं. श्वेतार्क गणपति समस्त प्रकार के विघ्नों के नाश के लिए सर्वपूजनीय है. श्वेतार्क-गणेश के सम्मुख मन्त्र का प्रतिदिन 11 माला”ॐ गणेशाय नम:” का ‘जप’ करना चाहिए।

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