Numerology

श्राप फल प्रकरण

किसी  घर में कितना भी धन अये यानि घर के सदस्य खूब धन कमाते हो तो भी कम पड़ता हो , अनायाश ही बडे खर्च आते हो , कर्ज लेना पड़ता हो तथा बाद में उसे चूका नही पते है , धन के लिए बार -बार  दुसरो के सामने हाथ फेलाना पड़ता है | दुसरे लोगो से जो पैसा हम मांगते है वो तो नही मिलता है किन्तु जो पैसा हमें लोगो को चुकाना है वह हमे देना ही पड़ता है , सारा जीवन हाय पैसा हाय पैसा करके रोने की स्थति बनती हो | अगर एसा आपके साथ भी हो रहा है तो में निश्चित रूप से कह सकती हु की आपकी कुंडली में द्वित्य भाव में राहू बता होगा या द्वित्य भाव का मालिक राहू के साथ युति कर रहा होगा |

इस प्रकार के योग में प्रायः माँ बाप , बहन , मोसी , या अपनी पत्नि के परिवार नष्ट होकर उनका सारा धन एसे व्यक्ति को मिलता है परन्तु वह टिकता नही हो | इसका दूसरा कारण यह भी हे कि इस व्यक्ति के पिता या दादा ने दुसरो के घरोहर राशी को हडपा हुआ होता है | या इस व्यक्ति ने अपने पूर्व जन्म  में किसी दुसरे व्यक्ति की सम्पति को हडपा लिया होता है | ऐसे धन पर किसी दुखी आत्मा की वासना बनी हुई होती है | ऐसे व्यक्तियो को बुरे सपने आते है और उन सवप्न में उन्ही लोगो के भयानक चहरे दिखाई पड़ते है |
आइये अब जानते है चतुर्थ स्थान में श्राप फल :- जेसा की आप सभी जानते है कुंडली का चथुर्त स्थान या भाव मन , माता , मष्तिष्क , घर , जायदाद , वाहन , भूमि , शुख का होता है | इस स्थान को “अघ स्वस्तिक” भी कहते है |इस स्थान में पाप ग्रह होने पर मनुष्य सुखी नही रहता है मेरी द्रष्टि में कुंडली के बारह भावो में सबसे महत्वपूर्ण स्थान चतुर्थ स्थान यानि सुख का स्थान ही है क्यूंकि किसी के पास बहुत सम्पति हो परन्तु घर में संतान नही हो , सम्पति तो बहुत  है पर उसका उपभोग करने के लिए स्वस्थ शारीर न हो , यानि व्यक्ति अस्वस्थ हो तो क्या वह इस सम्पति और सुख का अन्नंद ले सकता है | आप बडे अधिकारी है किन्तु आपकी पत्नि झगडालू हो या आपका कहना न मने तो क्या वो व्यक्ति सुखी रह सकता है ? आपके पास सत्ता हे , पॉवर हे , अपार सम्पदा है | सभी प्रकार के वैभव होने के अपरांत भी आपको मानसिक व शारीरिक सुख नही है तो यह सारी धनर सम्पदा निर्थक हे बेकार है |

कई बार हम देखते है कि घर के लोग बहुत समझदार , बुद्धिमान , अपने आदर्शो से समझोता न करने वाले होते है किन्तु कई प्रयास करने पर भी उनकी उन्नति नही होती , अवनति ही होती है पूरा जीवन दरिद्ता में ही गुजरता है | अपने नजदीक के लोगो की अनायास ही मृत्यु हो जाती है | घर में छोटी छोटी बातो पैर लड़ाई झगडे होना , आपसी खीचतान होना, परिवार के किसी सदस्य का आत्महत्या करना या घर छोड़ कर चले जाना | इन सभी कारणों पर विचार करने पर मेरा यह  अनुभव है की इस व्यक्ति की कुंडली में निम्न योग अवश्य मिलेगा |

  1. चतिर्थ स्थान में रहू बेठा हों या चतुर्दश यानि चातुर्य भाव के मालिक के साथ रहू बेठा हो या चतुर्थ भाव में रहू के साथ चंद्रमा , सूर्य या शनि बेठे हो तो मेने जो आपको परिणाम बताये वो देखने को मिलता है | ऐसे योग में व्यक्ति की पीढियों से चली आ  रही सम्पति नष्ट हो जाती है | अकाल व अकारण मृत्यु होती है पिशाच बाधा रहती है| ऐसी स्थिति उत्पन्न होने का कारण यह होता है कि इस घर में तिन – चार पीढ़ी पहले कोई व्यक्ति सम्पति के झगडे में मारा जाता है , या विष प्रयोग करता है या आत्महत्या करता है या इस सम्पति के लिए gहर छोड़ कर गया हो या उसकी कष्ट दायक मृत्यु हुई हो | ऐसे व्यक्ति के स्वप्न में पूर्वज या किसी अन्य व्यक्र्ती का चहरा दीखता है तथा उसे देखते ही भये से आवाज़ बंद हो जाती है | स्वप्न में भोजन , बड़ी दावतो का आयोजन , किसी शादी समारोह में खुद को देखना | इस प्रकार के द्रश्य दीखते है | अगर यह रहू पुरुष राशी में हे तो पुरुष का श्राप होना माना जाता है और अगर रहू स्त्री राशी में हो तो स्त्री के श्राप के फलस्वरूप माना जाता है |
  2. सप्तम स्थान में श्राप फल – हम हमारे आसपास घर , परिवार , समाज में कई बार देखने में आता है कि किसी व्यक्ति का विवाह नही हो पता या होता भी है तो वह नाम का रिश्ता बनकर रह जाता है या पति पत्नि आपस में बिना मिले ही अलग हो जाते है | कुछ मामलो में एसा भी देखने को आता है कि पति के घर में होने पर भी पत्नि उसका कहना नही मानती तथा अपने पति के प्रति वफादार नही होती ऐसे मामले में पति देखने के अलवा कुछ भी नही कर पाता  है |ऐसे मामलो का विचार करने पर जो कारण मेरे सामने आये उसमे लग्न से सातवे भाव में रहू का बेठना अथवा चंद्रमा से सातवे स्थान में रहू बेठा होता है | ऐसा इसलिए होता क्योकि इन लोगो के घर में पूर्व में किसी पतिवृता स्त्री के श्राप से उस घर में विवाह सुख नही मिलता है | इसमें रहू सप्तम स्थान में बेठने से ही ऐसे फल पूर्णतया नही मान लेना चाहिए कई मामलो में पति पत्नि बहुत संत , नेतिक आचरण वाले , एक दुसरे के लिए समर्पित भी देखने में आते है कई बार ऐसे अशुभ फल शनि मंगल की युति से भी देखने को मिलते है | कुंडली में दुसरे ग्रहों की स्थति  को और दूसरी गणनाओ के आधार पर भी इन स्थतियों पर विचार करना चाहिए |
  3. उपाय :- रहू के उपाय करे | रहू यन्त्र पेंडेंट , रहू यन्त्र , अंगारक यन्त्र रहू के दोष को  बुध दूर करता है अतः बुध यन्त्र पेंडेंट , बुध यन्त्र , मरगज गणेश , पन्ना गणेश , गणेश यन्त्र , गणपति जी की पूजा आराधना करे
    उन व्यक्तियों का श्राद व ब्राम्हण भोजन कराये |
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