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शिव रुद्राक्ष की उत्पति और उसके फायदे – Origin And Benefits Of Shiva Rudraksha

पत्र की उत्पति किस प्रकार हुई .. 4 | Panditnmshrimali

शिव रुद्राक्ष की उत्पति और उसके फायदे – Origin And Benefits Of Shiva Rudraksha


Origin And Benefits Of Shiva Rudraksha शिव रुद्राक्ष की उत्पति और उसके फायदे  गुरु माँ निधि श्रीमाली जी ने बताया है की रुद्राक्ष (Rudraksha) एक बहुत ही पवित्र फल या बीज है, जिसके जन्मदाता भगवान शिव (Bhagwan Shiv) को माना जाता है. मान्यता के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के जलबिंदुओं या आंसुओं से मानी जाती है. रुद्राक्ष का मतलब ही है- रुद्र (शिव)+अक्ष (रक्त या आंसू). रुद्राक्ष का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है. इसे भगवान शिव का वरदान माना जाता है, जिसे उन्होंने भौतिक दुखों को दूर करने के लिए प्रकट किया है. रुद्राक्ष की माला को सभी मालाओं में श्रेष्ठ माना गया है. पूजा, ध्यान, जप, मंत्र आदि में इस माला का बहुत महत्व है. कहते हैं कि रुद्राक्ष को विधि-विधान से पहनने या इसकी रोज पूजा करने धन-संपत्ति, मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है. धार्मिक ही नहीं, इसका वैज्ञानिक महत्व भी कम नहीं है. कहते हैं कि इसे सही तरीके से पहनने से शरीर और मन को पॉजिटिव एनर्जी मिलती है. प्राचीनकाल से ही सभी ऋषि-मुनि, तपस्वी और देवी-देवता इसे धारण करते हुए आए हैं. भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण आदि भी रुद्राक्ष धारण करते थेऔर भगवान शिव तो इसे पहनते ही हैं.Origin And Benefits Of Shiva Rudraksha शिव रुद्राक्ष की उत्पति और उसके फायदे 


Origin And Benefits Of Shiva Rudraksha शिव रुद्राक्ष की उत्पति और उसके फायदे  कैसे हुआ रुद्राक्ष का जन्म?गुरु माँ निधि श्रीमाली जी ने बताया है की भगवान शिव ने रुद्राक्ष उत्पत्ति की कथा पार्वती जी से कही है। एक समय भगवान शिवजी ने एक हजार वर्ष तक समाधि लगाई। समाधि में से व्युत्थान होने पर जब उनका मन बाह्य जगत में आया, तब जगत के कल्याण की कामना वाले महादेव ने अपनी आंख बंद कीं। तभी उनके नेत्र से जल के बिंदु पृथ्वी पर गिरे। उन्हीं से रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए और वे शिव की इच्छा से भक्तों के हित के लिए समग्र देश में फैल गए। उन वृक्षों पर जो फल लगे वे ही रुद्राक्ष हैं। वे पापनाशक, पुण्यवर्धक, रोगनाशक, सिद्धिदायक तथा भोग मोक्ष देने वाले हैं। रुद्राक्ष जैसे ही भद्राक्ष भी हुए। रुद्राक्ष श्वेत, लाल, पीले तथा काले वर्ण वाले होते हैं। ब्राह्मण क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों को श्वेत आदि के क्रम से ही पहनने चाहिए। रुद्राक्ष फलप्रद हैं। जितने छोटे रुद्राक्ष होंगे उतने ही अधिक फलप्रद हैं। वे संताप को दूर कर शांति देने वाले हैं। रुद्राक्ष की माला धारण करने से पाप और रोग नष्ट होते हैं। साथ ही सिद्धि मिलती है। भिन्न-भिन्न अंगों में भिन्न-भिन्न संख्यावाले रुद्राक्ष धारण करने से लाभ होता है। Origin And Benefits Of Shiva Rudraksha शिव रुद्राक्ष की उत्पति और उसके फायदे  शिव पुराण में इसका विस्तृत विवेचन है।.

Origin And Benefits Of Shiva Rudraksha शिव रुद्राक्ष की उत्पति और उसके फायदे  रुद्राक्ष पहनने के फायदे- गुरु माँ निधि श्रीमाली जी ने बताया है कीरुद्राक्ष को सही तरीके से पहनने का बहुत महत्व बताया गया है. यह भगवान शंकर (Bhagwan Shankar) की सबसे प्रिय चीजों में से एक है. इसे धारण करने से सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है. कहते हैं कि जो व्यक्ति पूरे नियमों का ध्यान रखकर पूरी श्रद्धा से रुद्राक्ष को धारण करता है, वह भाग्यशाली बन सकता है, उसके सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. Origin And Benefits Of Shiva Rudraksha शिव रुद्राक्ष की उत्पति और उसके फायदे  यह परेशानियों को दूर करके सफलता, धन-संपत्ति, मान-सम्मान दिलाने में सहायक होता है. जिन घरों में रोज रुद्राक्ष की पूजा होती है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है. रुद्राक्ष व्यक्ति के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है. यह कठिन बीमारियों से तो रक्षा करता ही है, साथ ही भूत-प्रेत, बुरी शक्तियों या नेगेटिव एनर्जी, जादू-टोना, तंत्र क्रियाओं से बचाने में भी सहायक है.

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