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कैसे करें शंख की पूजा

शंख की पूजा | कैसे करें शंख की पूजा | Nidhi Shriamli

कैसे करें शंख की पूजा


इस ब्लॉग में निधि श्रीमालीजी  ने कैसे करें शंख की पूजा और शंख से हम क्या क्या लाभ ले सकते है आदि की जानकारी प्रदान की है | दुर्लभ और मूलयवान होते है शंख मनोवांछित फल देकर सुखी बनाता है शंख:- समुद्र मंथन के समय 14 रत्नो का प्रादुर्भाव हुआ इनमे से शंख को आठवें रत्न का पद प्राप्त हुआ। शंख ने भगवान विष्णु के हाथ में विराजमान होकर विशेष स्थान प्राप्त किया। शंख का उत्पति स्थान समुद्र है। शंख एक समुद्रा जीव का अस्थिपंजर है, परन्तु तांत्रिक और वैज्ञानिक प्रभाव के कारण यह इतना पवित्र और प्रभावशाली है कि शंख देव प्रतिमा की भांति पूजित होता है। और मनोवांछित कार्य सिद्धि देकर जातक को सुखी बनाता है। जहाँ शंख ध्वनि बजती है, वहाँ सभी अनिष्टों का नाश होता है। मंदिरो में शुभ कार्यो में यज्ञादि में शंख ध्वनि शुभ सन्देश देती है। स्वयं महालक्ष्मीजी के मुखारविंद से उच्चारित हुआ है- “वसामिपदमोत्पल शंख मध्येक वसामि चंद्रे च महेश्वरे।” शंख कई प्रकार के देखने को मिलते है। विभिन्न आकृतिया भिन्न-भिन्न प्रभाव देती है। शंख प्रमुखता दो भागो में विभक्त करते है- वामवर्ती और दक्षिणावर्ती। वामवर्ती शंख के पेट का घुमाव बाईं ओर होता है तथा ये बाईं ओर से खुलते है और दाहिने हाथ से पकड़ कर शंख ध्वनि करने के काम आते है और दाहिने हाथ से पकड़कर शंख ध्वनि करने के कार्य आते है। दक्षिणमुखी एक विशेष जाति के शंख दाहिने तरफ खुलने की वजह से दक्षिणावर्ती शंख कहलाते है, इस तरह के शंख सहज सुलभ नहीं होते। आकाश के नक्षत्र मंडल में जब विशेष शुभ नक्षत्रो का प्रभाव होता है। वही शुभ शंख दक्षिणावर्ती कहलाते है। इनकी अति चाहत की वजह से और दुर्लभ हो जाते है व मूलयवान भी होते है। ऐसे ही शुद्ध असली पवित्र शंख को शुभ मुहूर्त जैसे गुरु और रवि पुष्यामृतयोग का कोई शुभ मुहूर्त दीपावली, अक्षय तृतीया, विजय दशमी, बसंत पंचमी, धन त्रयोदशी आदि अन्य शुभ से घर में जल छिड़कने से दुःख, दरिद्र, दुर्भाग्य दूर होते है और भाग्य चमकता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। कहा जाता है कि शंख बाजे भूते भागे, शंख इस बात को कृतार्थ करता है, इसके अलावा भी इससे कई लाभ होते है जिनमे प्रमुख है:- नक्षत्र कल्पनानुसार शंख को आरोग्य वृद्धि का आयुष्य प्राप्ति की महान औषधि तथा पापो का नाश करने वाला बताया है। शंख में दूध डालकर पीने से बंध्या स्त्री गर्भवती होती है। यह भी मान्यता है कि जो कीटाणु सूक्ष्म भूतो के होते है वे शंख ध्वनि से भाग जाते है और नष्ट हो जाते है। वायु शुद्ध होती है तथा बाधाए दूर होती है। कौशिक सूत्रानुसार बच्चो के शरीर पर छोटे शंख अभिमंत्रित करके बांधने से शरीर बढ़ता है और स्वस्थ रहता है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र वसु का कहना है कि शंख ध्वनि से संक्रामक रोगो के विषाणु नष्ट हो जाते है और वायु शुद्ध होकर मानव शरीर आरोग्यवर्धक बनता है। शंख बजाने से शंख का जल पीने से शंख की भस्म खाने से (आयुर्वेद में शंख भस्म का भी प्रयोग स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है।) और छोटे-छोटे शंखो की माला पहनने से भीषण शक्ति प्राप्त होती है। और शरीर निरोग रहता है। यदि मूक व्यक्ति यथासमय शंख बजाये तो बोलने की शक्ति प्राप्त होती है। संगीत सम्राट तानसेन ने शंख बजाकर गायन की शक्ति प्राप्त की थी। नारियो का हाथ के श्रृंगार सौभाग्य चिन्ह (शंख) इसी शंख से बनते है। हिन्दुओ में विशेषकर आसाम, बंगाल, बिहार, उड़ीसा प्रदेशो में शुभ अवसर पर इसकी चूड़ी धारण कर मंगल उत्सव मानते है। आयुर्वेद में शंख भस्म से पेट की बीमारियो पीलिया व पथरी रोगो में विधि प्रकार ग्रहण करने पर लाभ प्राप्त होता है। पूजा घर में शंख:- प्राचीन काल में शंख और घंटा नामक दैत्य भगवान विष्णु की शरण में आये। दैत्य कुल में जन्म लेकर भी सात्विक बुद्धि के होने के कारण भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि मेरी पूजा में आपका स्थान होगा। इसलिए विष्णु पूजा में शंख और घंटा का अनन्य महत्व है। इस शंख में जल भरकर रखना होता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु इस जल को पीते है। पूजा से पहले शंख की पूजा की जाती है। उसके बाद ही भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

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