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रंगो कि होली

बुराई पर जीत के रंगो कि होली रंग रंगीला होली का त्यौहार धूम धाम के साथ मनाया जाता है। और मस्ती के साथ प्रेम -प्य़ार के रंग बिखेर देता है। हर उम्र और वर्ग के लोग सभी बंधनो को तोड़ कर रंगो से सराबोर होकर लोग सबको एक रंग कर देता है। सभी गीले सिक्वे भूल कर एक दुसरो के गले मिलते है। व् तन मन में प्रेम रंग भर देने वाला पर्व होली बुराई पर अच्छाई कि जित का प्रतीक है। होली का त्यौहार उत्तरायण सूर्य के पश्चात रंग और गुलाल से मनाया जाता है। बसंत ऋतु में बसंत पंचमी से हम मदन महोत्सव मनाते है। लेकिन यह काल ज्यादा लम्बा न हो इस के लिए हम बुराइयों व् विकृतियों को दूर करने के लिए होलिका कि अग्नि में समर्पित कर देते है। इन बुराइयों पर विजय प्राप्त करने का आगाज हम दिन रंगो से हर्षोउल्लास से करते है। और फाल्गुन आने पर शीतकाल लगभग समाप्त हो जाता है जाता है। अत: ऋषि मुनियो ने ऋतु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए रंगो से होली खेलने व्यवस्था हमें प्रदान कि , ताकि हमारा शरीर उन रंगो का अवशोषण कर प्रतिरोधक क्षमता का विकास करे। अत; हमें अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखते हुए उन्ही गुलालो व् रंगो का उपयोग करे। जो प्राकृतिक फूलो व् गुलाब के पत्तो से बनाया गया रंग ही हमें वंचित परिणाम दे सकता है। होलिका दहन :- होली का त्योहार भक्त प्रहलाद कि भक्ति और भुआ होलिका के दहन कि कथा से जुड़ा है। यह होलिका कि अग्नि वह अग्नि है जो सबके लिए सुखो व् सौभाग्य का संवाह करती है। और अमंगल व् दुखो का विनाश करती है। वेदो में अग्नि को देवताओ का मुख कहा है। क्योकि यज्ञ में ईश्वर इसी से आहुतियों को स्वीकार करते है। ज्योतिष कि दृष्टि से इस रात को किसी भी गृह कि बाधा को दूर करने के उपाय के लिए श्रेष्ठतम अवसर माना गया है। परंपरागत रूप से आज भी सभी लोग गेहू कि बालिया , चने के होरे आदि सेककर घर ले जाते है। यह मान्यता है कि हमारे समस्त अमंगलो को दूर कर अग्निदेव स्वयं हमारे घर परिवार व्यवसाय में सुख समृद्धि को बरक़रार रखते है। और भारत में मन जाता है कि नयी फसल कि सिकी बलियो के घर आने से सुख समृद्धि का आव्हान होता है। कैसे करे पूजन :- एक थाली में कुमकुम , हल्दी , मेहंदी , साबुत मूंग , अक्षत , अबीर , गुलाल , कपूर , फल , प्रसाद में घर में बने पकवान , नारियल , फल आदि के अलावा नए वस्त्र का टुकड़ा या फिर कच्चा सूत , धुप अगरबत्ती और जल कलश रखे। होलिका को किसी भी प्रकार के पुष्प अर्पित कर सकते है। सर्वप्रथम ” ॐ श्री गणेशाय नमः ” का जाप पांच बार बोलकर होलिका को जल अर्पित करे। इसके बाद उस पर कुमकुम , अबीर , गुलाल , हल्दी , मेहंदी तथा अक्षत चढ़ाये। साबुत मूंग , प्रसाद , फल भी अर्पित करे। फिर वस्त्र या कच्चा सूत होलिका के चारो ओर लपेटे। पुष्प अर्पित करे और होलिका कि परिक्रमा करे। परिक्रमा कि अंत में बचा जल भी वही चढ़ा दे। हाथ जोड़कर पुष्पांजली नमस्कार करे। निम्न मंत्रो को नौ बार उच्चारण करे। “ॐ होलिकाय नम: ” “ॐ प्रह्लादाय नम: ” “ॐ भगवान नरसिंहाय नम: ” इसके बाद अंत में कपूर को थाली में जलाकर होलिका कि आरती करे और उसे प्रणाम करे। फिर अपने घर के ईशान कोण का पूजन कर , वहां भी गुलाल अर्पित करे। इससे निवास के सभी वास्तु दोष दूर हो जायेंगे। राशि के अनुसार शुभ रंग :- मेष :- लाल और पीला वृषभ :- सफ़ेद , चन्दन , अबीर , हरा , नीला मिथुन :- हरा , नीला कर्क :- लाल और पीला सिंह :- नारंगी , पीला , कैसरिया , लाल कन्या :- हरा , नीला , अबीर , सफ़ेद चन्दन तुला :- अबीर , सफ़ेद , चन्दन , नीला , हरा वृश्चिक :- लाल , पीला , अबीर , सफ़ेद चन्दन धनु :- नारंगी , पीला , केसरिया , लाल मकर :- जामुनी , नीला , हरा कुम्भ :- नीला , हरा , सफ़ेद चन्दन , लाल मीन :- नारंगी , अबीर , सफ़ेद चन्दन , लाल

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