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भोजपत्र निर्मित ग्रहण दोष निवारण यन्त्र

भोजपत्र निर्मित ग्रहण दोष निवारण यन्त्र :- ग्रहण योग का प्रभाव :- जैसे सूर्य को ग्रहण लग जाने पर अंधकार फैल जाता है और चन्द्रमा को ग्रहण लगने पर चांदनी खो जाती है उसी प्रकार जीवन में बनता हुआ हुआ काम अचानक रूक जाता हो तो इसे ग्रहण योग का प्रभाव समझ सकते हैं. हम में से बहुत से लोगों ने महसूस किया होगा कि उनका कोई महत्वपूर्ण काम जब पूरा होने वाला होता है तो बीच में कोई बाधा आ जाती है और काम बनते बनते रह जाता है. इस स्थिति के आने पर अक्सर हम अपनी किस्मत को कोसते हैं अथवा किसी की नज़र लग गयी है ऐसा सोचते हैं. ज्योतिष शास्त्र की नज़र में यह अशुभ ग्रहण योग का प्रभाव है । ग्रहण योग निर्माण :- ग्रहण योग उस स्थिति में बनता है जबकि कुण्डली के द्वादश भावों में से किसी भाव में सूर्य अथवा चन्द्रमा के साथ राहु व केतु में से कोई एक साथ बैठा हो या फिर सूर्य या चन्द्रमा के घर में राहु केतु में से कोई मौजूद हो. अगर इनमें से किसी प्रकार की स्थिति कुण्डली में बन रही है तो इसे ग्रहण योग कहेंगे. ग्रहण योग जिस भाव में लगता है उस भाव से सम्बन्धित विषय में यह अशुभ प्रभाव डालता है. उदाहरण के तौर पर देखें तो द्वितीय भाव धन का स्थान कहलता है. इस भाव में ग्रहण योग लगने से आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. व्यक्ति को धन की हमेंशा कमी महसूस होती है. इनके पास धन आता भी है तो ठहरता नहीं है. इन्हें अगर धन मिलने की संभावना बनती है तो अचानक स्थिति बदल जाती है और धन हाथ आते आते रह जता है ।. इस स्थिति से मुक्ति पाने के उद्देश्य से श्रीमालीजी के द्वारा दुर्लभ भोजपत्र पर निर्मित ग्रहण दोष निवारण यन्त्र का निर्माण किया गया है। भोजपत्र पर ही क्यों :- प्राचीन काल में किसी भी प्रकार की विद्या प्राप्ति एवं यंत्रो के निर्माण के लिए भोजपत्रों का प्रयोग किया जाता था। ऋषि मुनियो द्वारा अनार की कलम सेअष्टगंध की स्याही से मंत्रोच्चारण द्वारा इन भोजपत्र पर यंत्रो का निर्माण किया जाता था । समय के साथ साथ इनभोजपत्र केयंत्रो के स्थान पर मेटल एवं अष्टधातु के यंत्रो का प्रयोग किया जाने लगा। पर भोजपत्र पर बने यंत्रो का महत्त्व आज भी कम नहीं है। वे आज भी सबसे पवित्र मने जाते है। परंतु आज भोजपत्र पर बने यंत्रो का प्रयोग लगभग समाप्त हो गया है। किन्तु श्रीमालीजी के द्वारा हमारी पुरानी एवं सबसे चमत्कारिक पद्यति को पुनः जीवित करने का प्रयास किया गया है। हमारे प्रखाण्ड पंडितो के सानिध्य में मंत्रोच्चारण द्वारा शुद्ध भोजपत्र पर ग्रहण दोष निवारण यन्त्र का निर्माण किया गया है। एवं इसे अभिमंत्रित और सिद्ध करके और अधिक चमत्कारिक करने का प्रयास किया गया है। ताकि प्रत्येक व्यक्ति जो ग्रहण दोष से पीड़ित है उसके लिए यह यन्त्र कारगार सिद्ध हो सके।

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