Numerology

बुध ग्रह विचार

जेसा की आप जानते है पृथ्वी सूर्य की एक परिक्रमा 365 दिन में पूरा करती है तथा सूर्य स्वयं अपने अक्ष पर 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है | सूर्य सब ग्रहों व पृथ्वी का पोषक ग्रह है |सूर्य बिजोत्पद्क ,बीज्रोपक तथा बीज सेवर्धक है |अत: सूर्य को जगतपिता कहना अति श्योती नही होगा | हमारे वेदों में आत्मा को सूर्य की संज्ञा दी गयी  है | सूर्य की किरणों से रोग दूर होते है इसलिए सूर्य अरोग्यदाता है | चंद्रमा मन का कारक ग्रह है और चंद्रमा को सूर्य से प्रकाश मिलता है अत: मन को करके सही मार्ग पर लाने का कार्य विनेक रूपी परमात्मा यानि सूर्य करता है | इसलिए सूर्य को मन: कारक भी कहा गया है |

               स्वयं की आत्मा, अपना प्रभाव , रोगों के प्रतिकार की शक्ति , आत्म कल्याण , पिता, मन की शुद्धता , हृद्य , नाड़ी चक्र , राज कृपा , हड्डिय , सोना , ताम्बा , माणिक , प्लेटिनम ,रेडियम , x-ray , प्लेट , ओषधियाँ , ऊन , रेशम , नेत्र चिकित्सक , बिजली    धंधा करने वाले , रक्त चंदन , बडे सिविल अधिकारी , मेयर , मजिस्ट्रेट इत्यादि विषयों पर सूर्य से सम्बंधित विषय है |

सूर्य कालपुरुष की आत्मा है , रजा है , तथा ताम्बे के समान लाल रंग का है | सूर्य की देवता अग्नि है | यह पूर्वदिशा का स्वामी पाचग्रह है | 4 वर्षो में क्षत्रिय वर्ष का है | सत्वगुण से उक्त पुरुष ग्रह है | इसका तेज तत्व है | सूर्य अपनी उच्च राशी मेष में बलवान होता है | रविवार को , दोपहर में करीब 12 बजे के अस पास , एक राशी से दूसरी राशी में प्रवेश करते समाय , मित्र ग्रहों के अंशो में और दशम भाव में बलवान होता है |

सूर्य के प्रभाव व्यक्ति उदार ह्रदय के, बड़प्पन रखने वाले ,     का समन्ना करने वाले , कम बोलने वाला , शत्रु के साथ भी खुले दिल से मिलने वाला ,निर्भय , निडर , सच्चाई रखने वाला , दुसरो की चिंता करने वाला , तथा दुसरे का प्रेरक होता है |

सूर्य सिंह राशी का स्वामी है | सूर्य कभी अस्त या वक्री नही होता है | सूर्य मेष में उच्च के व तुला राशी में नीच के फल प्रदान करता है | सूर्य की महादशा 6 वर्ष की होती है | अगर सूर्य कुंडली में लग्न ,पंचम , दशम व व्यय इन स्थानों में हो तो सूर्य की महादशा उतम जाती है | सूर्य की महादशा में शनि , चंद्र , मंगल की अर्थदशाएँ अच्छी नही होती है | कुंडली में सूर्य के फल बताते समय अकेले सूर्य से फल नही बताना चाहिए क्योंकि सूर्य के साथ बुध और शुक्र साथ – साथ या अस – पास के भाव में ही रहते है | इसलिए उनके फल भी उसमे मिले हुए होते  है तथा कई बार दुसरे ग्रह भी सूर्य के साथ युति किये हुए होते है इसलिए सिर्फ सूर्य को देखकर रिजल्ट नही बता सकते है | सूर्य के चंद्र ,मंगल , गुरु मित्र है तथा शुक्र , शनि सत्रुता का भाव रखते है |
ग्रह गोचर :- चंद्र से सूर्य    तीसरे , छठे , दशवे व ग्यार्वे भाव में भ्रमण  करता है | तो शुभ फल प्रदान करता है |
उपाय :-  1) भगवन सूर्य को अर्घ्य दे |

2) आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करे |

3) सूर्य यंत्र पेंडेंट धारण करे |

4) एक मुखी रुद्राक्ष धारण करे |

5) सूर्य यंत्र पूजा कक्ष में स्थापित करे |

6) लाल वस्तुओ का दान करे |

7) माणिक रत्न धारण करे |

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