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निर्जला एकादशी को क्‍यों कहते हैं भीम एकादशी, जानें तिथ‍ि और पूजा का शुभ समय

                                 निर्जला एकादशी

निर्जला एकादशी(भीम एकादशी ) को सभी एकादश‍ियों में श्रेष्‍ठ माना गया है। इसकी एक कथा पांडवकाल से जुड़ी है जिसमें भीम ने एक व्रत से कई व्रत का पुण्‍य प्राप्‍त किया था।
एक वर्ष में कुल 24 एकादशी आती हैं। यदि किसी वर्ष में पुरुषोत्तम मास आता है तो इसमें एकादशियों की संख्‍या 26 हो जाती है। इन सारी एकादशियों में निर्जला एकादशी सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
ज्‍योतिष के जानकार निधि श्रीमाली  बताते हैं कि यह व्रत निराजल रखा जाता है। इस वजह से ये व्रत बहुत कठिन माना जाता है। वहीं इस महापर्व पर भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। 2018 में निर्जला एकादशी 23  जून को आ रही है। पद्म पुराण में निर्जला एकादशी के महत्‍व को बताया गया है।
वैसे इस एकादशी से मिलने वाले पुण्‍य का उल्‍लेख पांडवकाल में भी किया गया है। भीम से जुड़ी एक कथा में इस बात का वर्णन है क‍ि कैसे उन्‍होंने एक ही व्रत से भगवान व‍िष्‍णु को प्रसन्‍न क‍िया था।


तिथि और मुहूर्त (Nirjala Ekadashi)



एकादशी तिथि का आरंभ 23 जून 2018 को 03:19 बजे से होगा। वहीं एकादशी तिथि की समाप्ति 24 जून 2018 को 03:52 बजे होगी। व्रत खोलने का शुभ मुहूर्त 24 जून 2018 को दोपहर 1:59 से शाम 04:30 के बीच है।

 

जानें क्‍यों कहते हैं भीम एकादशी

 

सारे पांडव भीम को छोड़कर वर्ष के सारे एकादशी का व्रत रखते थे। भीम बिना भोजन के नहीं रह पाते थे। इस बात की ग्लानि हमेशा भीम को रहती थी मगर करें तो क्या करें भूख को नियंत्रित नहीं कर पाते थे। इस समस्या के समाधान के लिए वो महर्षि व्यास के पास गए और अपनी सारी व्यथा सत्यता पूर्वक सुनाई।
यह सुनकर व्यास जी ने एक बार बिना जल के निर्जला एकादशी व्रत रखने को कहा। इस प्रकार यह एक व्रत सारे एकादशी के बराबर पुण्य देगा इसीलिए इस एकादशी को भीम एकादशी भी कहते हैं।

Nirjala Ekadashi व्रत के नियम

 

इस व्रत को निराजल रखकर विष्णु पूजा करें। सत्यनारायण जी की कथा सुनें। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। अन्न और वस्त्र का गरीबों में दान करें। ध्‍यान रखें क‍ि इस व्रत का पारण अगली तिथि द्वादशी को सूर्योदय के बाद किया जाता है।

इस प्रकार नियम पूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत रहकर इस महान व्रत के पुण्य का लाभ उठाएं और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।

निर्जला एकादशी(Nirjala Ekadashi)  के दिन कोनसी राशि के जाताक को क्या दान करना चाहिए जीससे पलट पलट जाये गई जातको की किसमत

निर्जला एकादशी के महापर्व पर भगवान विष्णु की उपासना के साथ साथ राशि अनुरूप दान भी करें। कलयुग में भगवान के नाम का जप और दान ये ही दोनों पुण्यदायी हैं। अतः इस निर्जला एकादशी को बिना जल ग्रहण किये विष्णु जी की उपासना के साथ साथ दान भी करना चाहिए।

इस वर्ष निर्जला एकादशी 2018 (आम ग्यारस ) का पर्व 23 जून को है। इस एकादशी का व्रत करने से 24 एकादशियों के व्रत के समान फल मिलता है। इसका व्रत करने से कई जन्मों के पापों का नाश होता है। सूर्योदय से ही व्रत का आरम्भ कर देना चाहिए।

ब्रम्हमुहूर्त में श्री विष्णुसहस्त्रनाम से व्रत का आरम्भ कीजिये और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय महामंत्र का जप करते रहिये। वास्तव में निर्जला व्रत यानि बिना जल के व्रत रहा जाये।

निर्मल मन अर्थात मन में काम, क्रोध, मद और लोभ का स्थान न हो और न ही ईर्ष्या और द्वेष हो। व्रत का आरम्भ सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक चलता है। इस दिन अन्न का त्याग आवश्यक है।

निर्जला एकादशी

निर्जला एकादशी(Nirjala Ekadashi)

राशिओ के अनुसार दान की वश्तु
1. मेष- गेहू,गुड़ ,लाल वस्त्,रक्त दान
2. वृष- इत्र, सफेद वस्त्र, शक्कर, अंधे गरीब व्यक्ति को अन्न और वस्त्र का दान
3. मिथुन- वस्त्र,गाय को पालक खिलाइए, चिड़ियों को दाना पानी,अन्न दान
4. कर्क- चांदी का चंद्रमा, धार्मिक पुस्तक, अन्न और वस्त्र
5. सिंह- ताम्र पात्र, बर्तन, गेहूं, गुड़
6. कन्या- वस्त्र,अन्न,चांदी , गाय को हरा चारा
7. तुला- चांदी ,स्टील के बर्तन, अन्न दान,मीठा और जल
8. वृश्चिक- रक्त दान, गेहूं, गुड़, अन्न दान
9. धनु- धार्मिक पुस्तक, कलम, अन्न और वस्त्र
10. मकर- लोहे की बाल्टी, अन्न दान, मीठा और जल
11. कुंभ- लोहे की वस्तु, गरीबों में भोजन का दान, अन्न दान
12. मीन- धार्मिक पुस्तक, अन्न दान, राहगीरों को मीठा और जल का दान, छाता का दान

 

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