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चैत्र नवरात्री – 2 to 10 April 2022 – Shubh Muhurat in Hindi | Maa Durga – Navratri Special | Nidhi Shrimali

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चैत्र नवरात्री – 2 to 10 April 2022 – Shubh Muhurat in Hindi


 

सर्व प्रथम आप सभी को चैत्र नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं। 2 अप्रैल से लेकर 10 अप्रेल तक चैत्र नवरात्र चलेंगे और हमारे संस्थान में हमारे द्वारा चैत्र नवरात्रों में नव चंडी पूजा की जाएगी तो ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल होकर इस पूजा को सफल बनाएं। मन में बहुत सुकून होता है जब हम मां दुर्गा का नाम लेते हैं। मां दुर्गा के नौ रूप हैं और चैत्र नवरात्रि में हम इन नौ रूपों की पूजा आराधना करते हैं। वैसे तो साल में चार नवरात्र आते हैं। दो गुप्त और दो प्रत्यक्ष नवरात्र। परंतु चैत्र नवरात्रों का अपना विशेष महत्व होता है क्योंकि इस दिन हमारे भारतीय नव वर्ष की शुरुआत का भी दिन है और इस बार विक्रम संवत 2079 की शुरुआत होने वाली है। चैती चंद का पर्व भी बहुत ही धूमधाम से चैत्र नवरात्रों में मनाया जाता है। भगवान श्री राम का जन्म भी चैत्र नवरात्रों में ही हुआ था। इसलिए इसका विशेष महत्व भी रहता है। नौ दिनों में हम नौ दुर्गाओं का आह्वान करते हैं। दुर्गा शक्ति का रूप है। दुर्गा धन का रूप है। दुर्गा काम और मोक्ष को प्रदान करने वाली है। जब सृष्टि का सृजन भी नहीं हुआ था तब एक अदृश्य शक्ति के रूप में ये ब्रह्मांड में विराजमान थी और मां दुर्गा ने इस शक्ति रूप ने ही ब्रह्मा जी को सृष्टि की रचना का आदेश दिया था। कई कहानियां भी चैत्र नवरात्रों से जुड़ी हुई है। इस बार चैत्र नवरात्र की शुरुआत 2 अप्रैल को हो रही है और 10 अप्रैल तक चैत्र नवरात्र चलेंगे। 2 अप्रैल को हम घट स्थापना भी करेंगे और घट स्थापना से हम हमारे इस भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी करेंगे। चैत्र नवरात्रों में घट स्थापना मां दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है | चैत्र नवरात्री – 2 to 10 April 2022 – Shubh Muhurat in Hindi

हम आपको बताएंगे कि घट स्थापना के लिए आपको क्या सामग्री लेनी चाहिए। मां दुर्गा के पूजन की सामग्री को आपको नवरात्र के पहले ही इकट्ठा कर लेना है। आम के पत्ते, चावल, कलवा , गंगाजल, चंदन, नारियल कपूर, जौ गुलाल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, मिट्टी का बर्तन, फूल श्रंगार का सामान, चौकी आसन और कमलगट्टा | ये तो हैं मां दुर्गा के पूजन की सामग्री |

अब कलश स्थापना में जो सामग्री आवश्यक है कलश स्थापना के लिए सप्तधान्य यानी साफ तरीके अनाज मिट्टी का बर्तन पवित्र स्थान से लाई गई मिट्टी, कलश, गंगा जल आम या अशोक के पत्ते, सुपारी, जटा वाला नारियल, लाल सूत्र, मौली, इलाइची, लौंग ,कपूर, मोली , अक्षत, लाल कपड़ा और फूलों की जरूरत रहती है।

अब इस चैत्र नवरात्र की कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त जान लेते हैं। ये सामग्री तो हमने जुटा ली | अब किस मुहूर्त में हमें कलश स्थापना करनी है, वो भी जान लेते हैं। तो सुबह 08:04 बजे से 08:29 बजे तक का विशेष मुहूर्त है। इस विशेष मुहूर्त का आप विशेष रूप से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। दोपहर में अभिजीत मुहूर्त आ रहा है। वो है दोपहर 12:06 बजे से 12:55 बजे तक कोई शुभ का चौघड़िया शुरू होगा सुबह 07:52 बजे से सुबह 09:55 बजे तक दोपहर में लाभ का चौघड़िया वो है दोपहर 03:00 बजे से तीन मिनट बे मिनट से 03:36 बजे। अमृत का चौघड़िया भी आ रहा है। वह है दोपहर 03:36 बजे से शाम 5 :09 मिनट तक तो ये शुभ मुहूर्त है और इन मुहूर्त में आपको इस बार घट स्थापना करनी चाहिए। चैत्र नवरात्री – 2 to 10 April 2022 – Shubh Muhurat in Hindi

कलश स्थापना की विशेष विधि है। उसके बारे में जान लेते हैं जो हमने शुभ मुहूर्त बताये है। उसमें आप स्वच्छ कपड़े पहन कर नहा धोकर पहले दिन यानी 2 अप्रैल को आप आसन पर बैठकर सामने एक बाजोट रखे बाजोट पर लाल कपड़ा आप विराजमान कर लें। चावल की ढेरी से आप नव ग्रह का निर्माण करें। उसमें नौ सुपारीया स्थापित करें। क्योंकि नौ दिनों के साथ साथ नौ ग्रह का भी इसमें नवरात्रों में विशेष महत्व रहता है। नवग्रह की भी पूजा आराधना की जाती है। मां दुर्गा की मूर्ति को उसके सामने स्थापित करें और उसके पास आपको एक कलश की स्थापना करनी है। चावल की ढेरी बनाएं उसके ऊपर ताम्बे का कलश स्थापित करें। उस पर कलवा यानि मौली लपेटें साथ में उसके ऊपर स्वास्तिक चिन्ह भी बनाएं। उसके अंदर सप्त धान थोड़ा सा गंगाजल और चांदी का सिक्का जरूर डालें। उसके ऊपर अशोक के पत्ते रखें। उसके ऊपर नारियल और नारियल के ऊपर लाल चुनरी या लाल कपड़ा लपेट कर उसको ऊपर कलावा बांधे और फिर उस नारियल को आपको उस कलश पर स्थापित कर देना है। ये हुई कलश स्थापना फिर मां दुर्गा की पट चुनरी ओढ़ाई सिंदूर से उनकी पूजा आराधना करें। उन्हें लाल पुष्प जरूर अर्पित करें तो विधि विधान से इस दिन कलश स्थापना के साथ मां के त्रिशूल को स्थापित करें और मां दुर्गा की पूजा आराधना जरूर करें। वैसे तो नवरात्रि साल में चार बार आती है पर चैत्र नवरात्र का अपना विशेष महत्व रहता है। नौ दिन व्रत कर के उपवास फलाहार जो भी आप अपने सामर्थ्य अनुसार कर सकती है, वो करके विधि विधान से मां का पूजन जरूर करना चाहिए। चैत्र नवरात्री – 2 to 10 April 2022 – Shubh Muhurat in Hindi

चैत्र नवरात्रि से जुड़ी कुछ कहानियां भी है। कुछ कथाएं भी है और जो की इस नवरात्र को और अधिक विशेष बनाती है। अब चैत्र नवरात्रों के पीछे कहानी भी है। इस कहानी के बारे में जान लेते है । चैत्र नवरात्र जब आई तब 10 सिर वाले रावण से तो सभी भयभीत थे ही और उन्होंने सीता जी का हरण कर लिया। सभी देवी देवताओं की ताकत के बारे में जानते थे। सीता जी को लंका से वापस लाने के लिए श्री राम ने रावण से युद्ध करने की ठानी और वे युद्ध करने के लिए निकल पड़े तो उन्हें देवी देवताओं ने माँ शक्ति की पूजा आराधना करने के लिए बोला और विजय का आशीर्वाद लेने की सलाह दी। भगवान श्रीराम ने ऐसा ही किया। भगवान श्री राम ने मां को चढ़ाने के लिए 108 नीलकमल की व्यवस्था की और पूजा शुरु कर दी। चूंकि भगवान श्रीराम को मां से विजय का वरदान चाहिए था। इसीलिए उन्होंने अपने नौ दिन चैत्र नवरात्रों में पूजा प्रारंभ की रावण को जब इस बात का पता चला कि भगवान श्रीराम चंडी की पूजा कर रहे हैं तो उन्होंने भी मां चंडी की पूजा शुरू कर दी और भगवान श्री राम अपनी पूजा में सफल न हो। इस के लिए उन्होंने नील कमल में से एक पुष्पक चुरा लिया। 108 में नील कमल जब नहीं हुए। और 1 नील कमल जो नवरात्रि के अंतिम दिन कम पड़ गया तो चूंकि भगवान श्री राम को कमलनयन के नाम से पुकारा जाता है। इसीलिए उन्होंने अपने नेत्रों को मां के सामने अर्पित करने का सोचा और धनुष से अपने नेत्र को निकालकर मां के चरणों में चढ़ाने के लिए संकल्प ले लिया। तब मां उनके इस दृढ़ संकल्प से प्रसन्न हुई। और वे प्रगट हुए। नेत्र को अर्पित करने से पहले ही उन्होंने भगवान श्रीराम को रोक लिया और उन्हें वरदान दिया कि वे विजय की प्राप्ति कर सके। उधर रावण भी चंदे की पूजा कर रहे थे। और मां चंडी की पूजा उनकी सफल न हो इस उदेश्य से हनुमानजी ब्राह्मण का बाल ब्राह्मण का रूप धारण करके रावण के उस नव चंडी पूजा में विघ्न डालने के लिए गए। और लंका में जाकर उन्होंने रावण को गलत मंत्र पढ़ने के लिए प्रेरित किया, जिससे गलत मंत्र रावण के पढ़ने के कारण मां चंडी उनपर कुपित हो गई और श्राप दिया कि वे इस युद्ध में विजय की प्राप्ति नहीं कर पाएंगे और उनका अंत हो जाएगा और इस प्रकार भगवान श्रीराम ने मां चंडी के पूजा आराधना से उनके आशीर्वाद से रावण पर विजय की प्राप्ति करें। परिणाम स्वरूप राम रावण युद्ध हुआ और रावण का अंत हुआ। नवरात्र के आखिरी दिन राम नवमी के रूप में मनाया जाता है और इस दिन भगवान श्री राम के जन्मदिवस के रूप में हम इस रामनवमी के पर्व को भी मनाते हैं। तो ये है नवरात चैत्र नवरात्र की विशेष कथा | चैत्र नवरात्री – 2 to 10 April 2022 – Shubh Muhurat in Hindi

जानते हैं कि चैत्र नवरात्र में हमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। कुछ विशेष बातें हैं जिनका ध्यान रखना बेहद आवश्यक है और जो हमें बिल्कुल ध्यान रखनी भी चाहिए। चैत्र नवरात्रों में हमें विशेष रूप से तन और मन दोनों की शुद्धता का ध्यान रखना है। अक्सर लोग मन में बुरे खयाल बुरे विचार लाने लगते हैं। इसीलिए उनके मन में बुरे विचार ना ऐसा प्रयत्न उन्हें चैत्र नवरात्र में करना है | पॉजिटिविटी के साथ में आपको मां दुर्गा की पूजा आराधना करनी चाहिए, ताकि तन के साथ साथ आपका मन भी शुद्ध हो और उसमें किसी भी प्रकार का विकार न हो। पूर्ण रूपेण मां को समर्पित हो जाएं। नवरात्र के दौरान चमड़े की चीजों का त्याग करें। यानि लोगों को लैदर से बनी हुई चीजों का क्रेज रहता है। तो लैदर बैग्स पर बैल्ट जैकेट का उपयोग चैत्र नवरात्र के दौरान आपको नहीं करना चाहिए। मदिरा मांस का त्याग आपको चैत्र नवरात्र में करना चाहिए। मांस मदिरा का सेवन चैत्र नवरात्र में बिल्कुल भी न करें। लहसुन और प्याज का भी चैत्र नवरात्र में आपको त्याग करना चाहिए। यानि बिना लहसुन और प्याज की शुद्ध सात्विक चीजों का भोजन का आपको उपयोग करना है और चैत्र नवरात्र में लहसुन और प्याज नहीं खाना है। नाखून और बाल कटवाना चैत्र नवरात्र यानि पूरे नौ दिन आपको दाढ़ी और बाल नहीं कटवाने चाहिए। घर में अगर कोई व्यक्ति व्रत रख रखा है तो पूरे परिवार को इन नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। चैत्र नवरात्र में घर की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें, जहां भी गंदगी हो, वह माता रानी का वास नहीं होता है। इसलिए घर को पूरी तरह से साफ सुथरा जरूर रखे | घर खाली न छोड़ें। हम घट स्थापना नवरात्रि के दौरान करते हैं। अखंड ज्योत भी कई लोग जलाते हैं। इसीलिए घर को खाली रखकर सभी घरवाले घर के बाहर न निकलें। चैत्र नवरात्र में कम से कम घर का एक सदस्य घर में हर समय मौजूद रहना चाहिए। नारी का सम्मान करें। माता रानी की पूजा के बाद कन्या पूजन का विधान है। मान्यता है कि कन्याएं मां दुर्गा का स्वरूप होती है। इसलिए आपको नौ दुर्गाओं का आह्वान करते समय यानि नौ दिन नहीं बल्कि आजीवन नारी का सम्मान जरूर करना चाहिए और उनकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। बेजुबान जानवरों को बेवजह परेशान न करें। नवरात्र में सिर्फ इन्सान ही नहीं बल्कि बेजुबान जानवरों का भी आपको ख्याल रखना चाहिए। उन्हें बेवजह परेशान करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि पशु पक्षियों के लिए अन्न और जल की व्यवस्था जरूर करें। ये कुछ बातें हैं जो कि नवरात्रि में ध्यान देने योग्य हैं और इनका ध्यान आपको भी रखना चाहिए। अब हम अपनी वाणी को यहीं विराम देते है ।
जय मां।

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