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कुंडली के ग्रहो का हमारी सेहत पर प्रभाव

पंडित एन एम श्रीमाली द्वारा बताया गया है की कुंडली में हैं ये ग्रह खराब हो तो हमे डायबिटीज हो सकती हैज्योतिष शास्त्र में रोगों का कारण पूर्व कर्मों का प्रभाव दोषों का प्रकोप, वात-पित्त और कफ का असंतुलन माना जाता है।श्रीमाली जी कहते है की वैदिक ज्योतिष में मेडिकल ज्योतिष का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। इसके द्वारा व्यक्ति की जन्म कुण्डली से उसके स्वास्थ्य का आंकलन बेहतर तरीके से किया जा सकता है। बृहस्पति ग्रह को लीवर का और शुक्र ग्रह को पैन्क्रियाज का कारक माना गया है। डायबिटीज का संबंध पेट में होने वाली क्रियाओं से है। इसके लिए पंचम भाव एवं छठे भाव का भी आंकलन किया जाता है। कुल मिलाकर हम जन्म कुंडली में गुरु, शुक्र, पंचम भाव तथा छठे भाव का अध्ययन करते हैं। यदि यह चारों अथवा एक से अधिक बातें नकारात्मक हो रही हैं तब व्यक्ति को डायबिटीज की बीमारी का सामना करना पड़ सकता है।
आइये जानिए पंडित जी के द्वारा कुंडली के वे योग जो डायबिटीज का संकेत करते हैं।
– जन्म कुंडली में बृहस्पति ग्रह छह, आठ या 12वें भाव में स्थित हो या अपनी नीच राशि में स्थित हो तब व्यक्ति को डायबिटीज होने की संभावना बनती है।
– जन्म कुण्डली में शुक्र छठे भाव में स्थित हो और बृहस्पति 12वें भाव में स्थित हो तब भी मधुमेह रोग हो सकता है।
– पंचम भाव या पंचमेश का संबंध छष्ठ, षष्ठेश, अष्टम या द्वादश भाव से बन रहा हो तब भी यह बीमारी हो सकती है। यहां संबंध से भाव युति, स्थिति एंव दृष्टि से है।
– छठे भाव का स्वामी 12वें भाव में स्थित हो द्वादशेश का संबंध गुरु से बन रहा हो।
– छठे भाव के स्वामी और बारहवें भाव के स्वामी का आपस में राशि परिवर्तन हो रहा हो।
श्रीमाली जी के अनुसार जो उपाय यहां बताये जा रहे हैं उसे वह आजमा सकते हैं
*रुद्राक्ष की माला पहनें
*गुरु यन्त्र पेन्डेन्ट धारण करे
*महामृत्युंजय यन्त्र की पूजा करे
*सर्वकष्ट निवारण यन्त्र को अपने पूजा स्थान में रख कर पूजा अर्चना करे

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