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कार्तिक मॉस के अंतिम तीन दिन दिलाये महापुण्यपुंज

कार्तिक मॉस के अंतिम तीन दिन दिलाये महापुण्यपुंज

हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार पूरे वर्ष में 12 चान्द्र मास होते हैं. इन 12 मासों में कार्त्तिक माह आठवें स्थान पर आता है. इस माह का अत्यधिक महत्व प्राचीन ग्रंथों में भी दिया गया है. इस माह में दान, स्नान, तुलसी पूजन तथा नारायन पूजन का अत्यधिक महत्व है. कार्तिक माह की विशेषता का वर्णन स्कन्द पुराण में भी दिया गया है. स्कन्द पुराण में लिखा है कि सभी मासों में कार्तिक मास, देवताओं में विष्णु भगवान, तीर्थों में नारायण तीर्थ(बद्रीनारायण) शुभ हैं. कलियुग में जो इनकी पूजा करेगा वह पुण्यों को प्राप्त करेगा. पदम पुराण के अनुसार कार्तिक मास धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष देने वाला है. कार्तिक माह के आरम्भ होते ही श्रद्धालुजन दान, स्नान तथा विभिन्न तरह से पूजा – पाठ करते हैं. सभी अपनी श्रद्धानुसार पूजा तथा व्रत करते हैं. इस माह की अपनी बहुत सी विशेषताएं हैं. इस माह में तुलसी की पूजा की जाती है. इसके अतिरिक्त इस माह में दीपदान का अत्यंत महत्व है. ऎसा माना जाता है कि इस माह में जो व्यक्ति मंदिर में या नदी के किनारे, तुलसी के पौधे के नीचे तथा अपने शयन कक्ष में दीपक जलाता है, उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है. इस माह में भगवान विष्णु तथा लक्ष्मी जी के सम्मुख दीया जलाने से अनन्त सुखों की प्राप्ति होती है. पुण्य कर्मों में वृद्धि होती है. कार्तिक मास में त्रयोदशी से पूनम तक की तीन तिथियाँ अत्यंत पुण्यदायी तिथियाँ हैं
कार्तिक मास में सभी दिन अगर कोई स्नान ना कर पाए तो त्रयोदशी , चौदस  और पूनम | ये तीन दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान कर लेने से पूरे कार्तिक मास के स्नान के पुण्यो की प्राप्ति होती है l
जो कार्तिक मास के अंतिम 3 दिन ‘गीता’, ‘श्री विष्णु सहस्रनाम’ ,’भागवत’ शास्त्र का पठन व श्रवण करता है वह महा पुण्यवान हो जाता है l 
अतः इन तिथियों में सूर्योदय से पूर्व स्नान ,विष्णु सहस्रनाम और श्रीमद भागवत गीता का पाठ विशेषतः करें और लाभ लें | 

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